निमाड़ की ऐतिहासिक पहचान कर्मवीर विद्यापीठ को बंद किए जाने की आशंकाओं ने जनआक्रोश और जनजागरण को जन्म दे दिया है। पत्रकार संगठनों, सामाजिक संस्थाओं ने इस संस्थान को बचाने की मांग उठाई है। लोगों ने कहा, यह केवल एक शैक्षणिक केंद्र नहीं, बल्कि खंडवा की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। विधायक ने सीएम के सामने रखी मांग
पंधाना विधायक छाया मोरे ने इस मुद्दे को उठाते हुए आंदोलन को नई दिशा दी है। उन्होंने बिना किसी राजनीतिक दबाव के स्वयं आगे बढ़कर इस विषय को राज्य स्तर तक पहुंचाया। विधायक मोरे ने भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। उन्होंने बताया कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय का खंडवा स्थित परिसर कर्मवीर विद्यापीठ महान स्वतंत्रता सेनानी और पत्रकार पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की कर्मभूमि से जुड़ी अमूल्य धरोहर है। “माखन दादा” की विरासत बचाने की मांग
विधायक ने मुख्यमंत्री के सामने स्पष्ट कहा कि संस्थान को बंद करना निमाड़ के युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय होगा। यह “माखन दादा” की ऐतिहासिक विरासत के प्रति उपेक्षा भी मानी जाएगी। उन्होंने मांग की कि परिसर को यथावत संचालित रखा जाए और यहां स्थायी, सर्वसुविधायुक्त भवन निर्माण के लिए जल्द कदम उठाए जाएं। मुख्यमंत्री का सकारात्मक रुख मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए संवेदनशीलता के साथ विचार करने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि संस्थान को बंद करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा। हालांकि फिलहाल मुख्यमंत्री के सकारात्मक संकेतों के बाद समाधान की उम्मीद बरकरार है।















































