बालाघाट में गर्रा चौक पर शासकीय भूमि पर निर्माणाधीन मंदिर से दुर्गा प्रतिमा हटाने और ढांचा गिराने के मामले में पुलिस ने सरपंच संघ अध्यक्ष वैभवसिंह बिसेन, उनके बड़े भाई युवा नेता विशाल बिसेन सहित अन्य लोगों पर शासकीय कार्य में बाधा डालने का प्रकरण दर्ज किया है। यह कार्रवाई चैत्र नवरात्र के दौरान हुई थी। पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने शनिवार को प्रेस को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैभव बिसेन और विशाल बिसेन समेत अन्य लोगों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस प्रतिमा स्थापित करने के मामले की भी जांच कर रही है। चैत्र नवरात्र के दिन गर्रा चौक पर मंदिर के निर्माणाधीन ढांचे में देवी-देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। इसके बाद गर्रा में तनाव का माहौल बन गया था। प्रशासन और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद देर रात प्रतिमाओं को प्रतिष्ठित स्थल से हटाकर प्रशासन अपने साथ ले गया था। पुलिस के अनुसार, मंदिर के नाम पर सड़क मद की भूमि पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का ढांचा खड़ा किया गया था। एसपी ने बताया कि यह भूमि सड़क विस्तार के लिए आरक्षित थी। इस पर ढांचा खड़ा कर उसे मंदिर का रूप देने का प्रयास किया जा रहा था। पुलिस ने इसे धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ और लोगों को उकसाने का प्रयास बताया, जिसके बाद प्रतिमाओं को हटाने और शासकीय जमीन पर बने कथित मंदिर के ढांचे को गिराने की कार्रवाई की गई। इस मामले में सरपंच संघ अध्यक्ष वैभवसिंह बिसेन ने आरोपों को झूठा बताया है। उन्होंने कहा कि दशकों से उसी स्थान पर मां दुर्गा की पूजा की जाती रही है और ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर का निर्माण कर दुर्गा प्रतिमा स्थापित की गई थी। बिसेन ने दावा किया कि उन्होंने धर्म को बचाने का काम किया है। युवा विशाल बिसेन ने बताया कि यह हमारे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। हमने प्रशासन के साथ मिलकर उनकी कार्यवाही में ग्रामीणों से चर्चा में सहयोग किया है, यदि प्रशासन का सहयोग अपराध है तो फिर कोई, ऐसा सहयोग नहीं करेगा। सहयोग को लेकर कलेक्टर से बात हुई थी। फिर यह मामला दर्ज किया जाना, कानून का गलत इस्तेमाल है। यह हमें परेशान करने का काम है।













































