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भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका:16 बिजनेस पार्टनर्स के खिलाफ जांच शुरू, अनुचित व्यापार के सबूत मिले तो भारी टैक्स लगेगा

भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका:16 बिजनेस पार्टनर्स के खिलाफ जांच शुरू, अनुचित व्यापार के सबूत मिले तो भारी टैक्स लगेगा

अमेरिका के डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने भारत और चीन समेत अपने 16 प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ ‘सेक्शन 301’ के तहत नई जांच शुरू कर दी है। ‘सेक्शन 301’ अमेरिका को उन देशों पर एकतरफा टैक्स बढ़ाने की शक्ति देता है, जो उसकी कंपनियों को नुकसान पहुंच रहे हो। पिछले महीने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति ट्रम्प के टैरिफ को अवैध बताने के बाद, प्रशासन अब नए कानूनी रास्तों से टैरिफ का दबाव वापस बनाने की तैयारी में है। यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) जेमिसन ग्रीर के मुताबिक, इस जांच के कारण इस साल गर्मियों तक भारत, चीन, यूरोपीय संघ और मैक्सिको जैसे देशों पर नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं। सवाल जवाब में पूरा मामला समझें… सवाल 1: अमेरिका ने किन देशों के खिलाफ जांच शुरू की है? जवाब: ट्रम्प प्रशासन ने कुल 16 ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ जांच शुरू की है। इनमें भारत, चीन, यूरोपीय संघ (EU), जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे शामिल हैं। सवाल 2: यह जांच अचानक क्यों शुरू की गई है? जवाब: 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार दिया था। इसके बाद ट्रम्प ने 150 दिनों के लिए 10% का अस्थाई टैरिफ लगाया था। अब प्रशासन ‘सेक्शन 301’ का इस्तेमाल कर रहा है ताकि ट्रेडिंग पार्टनर्स पर टैरिफ का खतरा बरकरार रहे और उन्हें बातचीत की मेज पर लाया जा सके। सवाल 3: ‘सेक्शन 301’ क्या है और यह कितना पावरफुल है? जवाब: यह ‘ट्रेड एक्ट ऑफ 1974’ का एक हिस्सा है। यह अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव को यह ताकत देता है कि अगर कोई देश ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ (Unfair Trade Practices) करता है, तो अमेरिका उस पर जवाबी टैरिफ या अन्य प्रतिबंध लगा सकता है। सवाल 4: जांच का मुख्य फोकस किन बातों पर है? जवाब: अमेरिका उन देशों की जांच कर रहा है जो अपनी जरूरत से कहीं ज्यादा सामान बना रहे हैं और खपत न होने पर उस माल को सस्ते दामों पर अमेरिकी बाजारों में डंप कर रहे हैं। अमेरिका यह देखना चाहता है कि क्या ये देश जानबूझकर अपनी एक्सेस कैपेसिटी का इस्तेमाल करके अमेरिकी कंपनियों और वहां के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को चोट तो नहीं पहुंचा रहे। इसे एक फैक्ट्री के उदाहरण से समझें… मान लीजिए किसी देश में जूतों की एक ऐसी फैक्ट्री है जो साल में 100 जूते बना सकती है, लेकिन उस देश के लोगों को सिर्फ 20 जूतों की जरूरत है। अब वह फैक्ट्री बंद न हो, इसलिए वहां की सरकार उसे सब्सिडी या मदद देकर पूरे 100 जूते बनवाती है। अब जो 80 जूते बचे हैं, उन्हें वह देश बहुत कम कीमत पर दूसरे देशों के बाजारों में उतार देता है। इससे वहां की अपनी कंपनियों को नुकसान होता है, क्योंकि वे इतनी सस्ती कीमत का मुकाबला नहीं कर पातीं। अमेरिका इसी ‘जरूरत से ज्यादा उत्पादन’ की जांच कर रहा है। सवाल 5: क्या भारत के लिए ये चिंता की बात है? जवाब: 2024 में अमेरिका के साथ भारत का गुड्स ट्रेड सरप्लस 58,216 मिलियन डॉलर (₹5.37 लाख करोड़) था। ये 2025 में 45,801 मिलियन डॉलर (₹4.23 लाख करोड़) रह गया। इसमें कमी आई है। फिर भी भारत उन 16 देशों की सूची में है, जिनकी जांच होगी। अगर जांच में भारत की नीतियां ‘अनुचित’ पाई गईं तो भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ लग सकता है। सवाल 6: चीन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा कितना बड़ा है? जवाब: चीन इस लिस्ट में सबसे ऊपर है। 2024 में चीन का ट्रेड सरप्लस 202,071 मिलियन डॉलर था, जो 2025 में बढ़कर 295,515 मिलियन डॉलर हो गया। यानी एक साल में ही करीब 93,444 मिलियन डॉलर का बड़ा उछाल आया है। सवाल 7: फोर्स्ड लेबर को लेकर कौन सी अलग जांच हो रही है? जवाब: ग्रीर ने बताया कि वे ‘सेक्शन 301’ के तहत एक और जांच शुरू कर रहे हैं, जिसका मकसद फोर्स्ड लेबर से बने सामानों के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना है। अमेरिका पहले ही उइगर फोर्स्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले सोलर पैनल और दूसरे सामानों पर एक्शन ले चुका है। अब इस तरह की कार्रवाई दूसरे देशों पर भी की जा सकती है। अमेरिका चाहता है कि दूसरे देश भी बंधुआ मजदूरी या जबरन श्रम से बने सामानों पर बैन लगाएं। सवाल 8: इस पूरी प्रक्रिया की टाइमलाइन क्या है? जवाब: 15 अप्रैल तक आम लोगों और कंपनियों से सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद 5 मई के आसपास सार्वजनिक सुनवाई होगी। लक्ष्य यह है कि जुलाई में अस्थाई टैरिफ खत्म होने से पहले ही इस जांच के नतीजे और नए टैरिफ के प्रस्ताव तैयार कर लिए जाएं। सवाल 9: क्या ट्रम्प प्रशासन टैरिफ लगाने पर अड़ा हुआ है? जवाब: हां, जेमिसन ग्रीर ने साफ कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प टैरिफ लगाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वे व्यापार घाटे को कम करने और अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बचाने के लिए हर संभव रास्ता और टूल अपनाएंगे। उन्होंने ट्रेडिंग पार्टनर्स को मौजूदा समझौतों का पालन करने की चेतावनी दी। सवाल 10: व्यापार घाटे के मामले में अन्य देशों की क्या स्थिति है? जवाब: यूरोपीय संघ के साथ अमेरिका का घाटा 2025 में बढ़कर 235,874 मिलियन डॉलर हो गया है। मैक्सिको के साथ भी घाटा 171,491 मिलियन डॉलर के स्तर पर है। ताइवान और वियतनाम जैसे देशों के घाटे में हालांकि कमी आई है, फिर भी वे जांच के घेरे में हैं। रीडर के लिए टिप्स अगर आप एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बिजनेस में हैं, तो अमेरिकी पॉलिसी पर नजर रखें। जुलाई के बाद टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग गुड्स की कीमतों में बड़े बदलाव आ सकते हैं। ————————— ये खबर भी पढ़ें…
ट्रम्प के टैरिफ पर इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट का फैसला: कंपनियों को टैरिफ के 14.5 लाख करोड़ रुपए लौटाने होंगे, सुप्रीम कोर्ट भी लगा चुका फटकार अमेरिका की इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को आदेश दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए टैरिफ का पैसा कंपनियों को लौटाया जाए। टैरिफ से दिसंबर तक 10.79 लाख करोड़ रुपए वसूले गए थे और कुल रिफंड 14.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। जज रिचर्ड ईटन ने लंबित मामलों में टैरिफ हटाकर दोबारा कैलकुलेशन करने को कहा। ट्रम्प ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट-1977 के तहत कई देशों पर टैरिफ लगाए थे। अमेरिकी कंपनियों ने कोर्ट में चुनौती दी। 20 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ रद्द करते हुए कहा कि टैरिफ तय करने का अधिकार कांग्रेस के पास है राष्ट्रपति के पास नहीं। तब रिफंड पर स्पष्टता नहीं थी। टेनेसी की एटमस फिल्ट्रेशन की याचिका पर जज ने रिफंड का आदेश दिया है। पूरी खबर पढ़ें…

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भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका:16 बिजनेस पार्टनर्स के खिलाफ जांच शुरू, अनुचित व्यापार के सबूत मिले तो भारी टैक्स लगेगा

भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका:16 बिजनेस पार्टनर्स के खिलाफ जांच शुरू, अनुचित व्यापार के सबूत मिले तो भारी टैक्स लगेगा

अमेरिका के डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने भारत और चीन समेत अपने 16 प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ ‘सेक्शन 301’ के तहत नई जांच शुरू कर दी है। ‘सेक्शन 301’ अमेरिका को उन देशों पर एकतरफा टैक्स बढ़ाने की शक्ति देता है, जो उसकी कंपनियों को नुकसान पहुंच रहे हो। पिछले महीने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति ट्रम्प के टैरिफ को अवैध बताने के बाद, प्रशासन अब नए कानूनी रास्तों से टैरिफ का दबाव वापस बनाने की तैयारी में है। यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) जेमिसन ग्रीर के मुताबिक, इस जांच के कारण इस साल गर्मियों तक भारत, चीन, यूरोपीय संघ और मैक्सिको जैसे देशों पर नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं। सवाल जवाब में पूरा मामला समझें… सवाल 1: अमेरिका ने किन देशों के खिलाफ जांच शुरू की है? जवाब: ट्रम्प प्रशासन ने कुल 16 ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ जांच शुरू की है। इनमें भारत, चीन, यूरोपीय संघ (EU), जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे शामिल हैं। सवाल 2: यह जांच अचानक क्यों शुरू की गई है? जवाब: 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार दिया था। इसके बाद ट्रम्प ने 150 दिनों के लिए 10% का अस्थाई टैरिफ लगाया था। अब प्रशासन ‘सेक्शन 301’ का इस्तेमाल कर रहा है ताकि ट्रेडिंग पार्टनर्स पर टैरिफ का खतरा बरकरार रहे और उन्हें बातचीत की मेज पर लाया जा सके। सवाल 3: ‘सेक्शन 301’ क्या है और यह कितना पावरफुल है? जवाब: यह ‘ट्रेड एक्ट ऑफ 1974’ का एक हिस्सा है। यह अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव को यह ताकत देता है कि अगर कोई देश ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ (Unfair Trade Practices) करता है, तो अमेरिका उस पर जवाबी टैरिफ या अन्य प्रतिबंध लगा सकता है। सवाल 4: जांच का मुख्य फोकस किन बातों पर है? जवाब: अमेरिका उन देशों की जांच कर रहा है जो अपनी जरूरत से कहीं ज्यादा सामान बना रहे हैं और खपत न होने पर उस माल को सस्ते दामों पर अमेरिकी बाजारों में डंप कर रहे हैं। अमेरिका यह देखना चाहता है कि क्या ये देश जानबूझकर अपनी एक्सेस कैपेसिटी का इस्तेमाल करके अमेरिकी कंपनियों और वहां के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को चोट तो नहीं पहुंचा रहे। इसे एक फैक्ट्री के उदाहरण से समझें… मान लीजिए किसी देश में जूतों की एक ऐसी फैक्ट्री है जो साल में 100 जूते बना सकती है, लेकिन उस देश के लोगों को सिर्फ 20 जूतों की जरूरत है। अब वह फैक्ट्री बंद न हो, इसलिए वहां की सरकार उसे सब्सिडी या मदद देकर पूरे 100 जूते बनवाती है। अब जो 80 जूते बचे हैं, उन्हें वह देश बहुत कम कीमत पर दूसरे देशों के बाजारों में उतार देता है। इससे वहां की अपनी कंपनियों को नुकसान होता है, क्योंकि वे इतनी सस्ती कीमत का मुकाबला नहीं कर पातीं। अमेरिका इसी ‘जरूरत से ज्यादा उत्पादन’ की जांच कर रहा है। सवाल 5: क्या भारत के लिए ये चिंता की बात है? जवाब: 2024 में अमेरिका के साथ भारत का गुड्स ट्रेड सरप्लस 58,216 मिलियन डॉलर (₹5.37 लाख करोड़) था। ये 2025 में 45,801 मिलियन डॉलर (₹4.23 लाख करोड़) रह गया। इसमें कमी आई है। फिर भी भारत उन 16 देशों की सूची में है, जिनकी जांच होगी। अगर जांच में भारत की नीतियां ‘अनुचित’ पाई गईं तो भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ लग सकता है। सवाल 6: चीन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा कितना बड़ा है? जवाब: चीन इस लिस्ट में सबसे ऊपर है। 2024 में चीन का ट्रेड सरप्लस 202,071 मिलियन डॉलर था, जो 2025 में बढ़कर 295,515 मिलियन डॉलर हो गया। यानी एक साल में ही करीब 93,444 मिलियन डॉलर का बड़ा उछाल आया है। सवाल 7: फोर्स्ड लेबर को लेकर कौन सी अलग जांच हो रही है? जवाब: ग्रीर ने बताया कि वे ‘सेक्शन 301’ के तहत एक और जांच शुरू कर रहे हैं, जिसका मकसद फोर्स्ड लेबर से बने सामानों के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना है। अमेरिका पहले ही उइगर फोर्स्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले सोलर पैनल और दूसरे सामानों पर एक्शन ले चुका है। अब इस तरह की कार्रवाई दूसरे देशों पर भी की जा सकती है। अमेरिका चाहता है कि दूसरे देश भी बंधुआ मजदूरी या जबरन श्रम से बने सामानों पर बैन लगाएं। सवाल 8: इस पूरी प्रक्रिया की टाइमलाइन क्या है? जवाब: 15 अप्रैल तक आम लोगों और कंपनियों से सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद 5 मई के आसपास सार्वजनिक सुनवाई होगी। लक्ष्य यह है कि जुलाई में अस्थाई टैरिफ खत्म होने से पहले ही इस जांच के नतीजे और नए टैरिफ के प्रस्ताव तैयार कर लिए जाएं। सवाल 9: क्या ट्रम्प प्रशासन टैरिफ लगाने पर अड़ा हुआ है? जवाब: हां, जेमिसन ग्रीर ने साफ कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प टैरिफ लगाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वे व्यापार घाटे को कम करने और अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बचाने के लिए हर संभव रास्ता और टूल अपनाएंगे। उन्होंने ट्रेडिंग पार्टनर्स को मौजूदा समझौतों का पालन करने की चेतावनी दी। सवाल 10: व्यापार घाटे के मामले में अन्य देशों की क्या स्थिति है? जवाब: यूरोपीय संघ के साथ अमेरिका का घाटा 2025 में बढ़कर 235,874 मिलियन डॉलर हो गया है। मैक्सिको के साथ भी घाटा 171,491 मिलियन डॉलर के स्तर पर है। ताइवान और वियतनाम जैसे देशों के घाटे में हालांकि कमी आई है, फिर भी वे जांच के घेरे में हैं। रीडर के लिए टिप्स अगर आप एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बिजनेस में हैं, तो अमेरिकी पॉलिसी पर नजर रखें। जुलाई के बाद टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग गुड्स की कीमतों में बड़े बदलाव आ सकते हैं। ————————— ये खबर भी पढ़ें…
ट्रम्प के टैरिफ पर इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट का फैसला: कंपनियों को टैरिफ के 14.5 लाख करोड़ रुपए लौटाने होंगे, सुप्रीम कोर्ट भी लगा चुका फटकार अमेरिका की इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को आदेश दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए टैरिफ का पैसा कंपनियों को लौटाया जाए। टैरिफ से दिसंबर तक 10.79 लाख करोड़ रुपए वसूले गए थे और कुल रिफंड 14.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। जज रिचर्ड ईटन ने लंबित मामलों में टैरिफ हटाकर दोबारा कैलकुलेशन करने को कहा। ट्रम्प ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट-1977 के तहत कई देशों पर टैरिफ लगाए थे। अमेरिकी कंपनियों ने कोर्ट में चुनौती दी। 20 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ रद्द करते हुए कहा कि टैरिफ तय करने का अधिकार कांग्रेस के पास है राष्ट्रपति के पास नहीं। तब रिफंड पर स्पष्टता नहीं थी। टेनेसी की एटमस फिल्ट्रेशन की याचिका पर जज ने रिफंड का आदेश दिया है। पूरी खबर पढ़ें…

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