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भोपाल के बैरसिया में जनसुनवाई करेंगे कलेक्टर:तहसील में सुबह 10 बजे से शुरू होगी; सभी अधिकारी मौजूद रहेंगे

भोपाल के बैरसिया में जनसुनवाई करेंगे कलेक्टर:तहसील में सुबह 10 बजे से शुरू होगी; सभी अधिकारी मौजूद रहेंगे

भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा 5 मई को होने वाली जनसुनवाई बैरसिया में करेंगे। पिछली 2 जनसुनवाई में बैरसिया क्षेत्र से ज्यादा शिकायतें मिलीं। ऐसे में लोगों को 40 से 45 किलोमीटर का सफर करके भोपाल न आना पड़े, इसलिए कलेक्टर ने बैरसिया में जनसुनवाई करने का निर्णय लिया है। जनसुनवाई सुबह 10 बजे से शुरू होगी। कलेक्टर मिश्रा समेत सभी जिला अधिकारी वहां मौजूद रहेंगे। जारी आदेश में सभी जिला अधिकारियों को जनसुनवाई में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उन्हें बैरसिया क्षेत्र से संबंधित लंबित जन शिकायतों के निराकरण से जुड़ी जानकारी भी साथ लाना अनिवार्य किया गया है। ताकि, मौके पर ही उनका निराकरण हो सके। भोपाल में भी होगी जनसुनवाई बैरसिया में जिला स्तरीय जनसुनवाई होगी। इसमें जिले के सभी जिला अधिकारी शामिल होंगे। कलेक्टोरेट में होने वाली नियमित जनसुनवाई पूर्ववत जारी रहेगी। संबंधित विभाग- नगर निगम भोपाल, खाद्य विभाग, बिजली कंपनी, डीईओ अपने अधीनस्थ अधिकारी-कर्मचारियों को उपस्थित रहने के लिए पाबंद करेंगे।

हमीदिया अस्पताल ने लॉन्च किया ऑर्थो रिहैब एप:ऑपरेशन के बाद मरीजों को कराएगा एक्सरसाइज; डिजिटल दौर में गलत हेल्थ टिप्स से बचाना लक्ष्य

हमीदिया अस्पताल ने लॉन्च किया ऑर्थो रिहैब एप:ऑपरेशन के बाद मरीजों को कराएगा एक्सरसाइज; डिजिटल दौर में गलत हेल्थ टिप्स से बचाना लक्ष्य

डिजिटल दौर में इंटरनेट और सोशल मीडिया पर हेल्थ से जुड़ी ढेरों जानकारी उपलब्ध है, लेकिन इनमें से बड़ी संख्या में कंटेंट भ्रामक या अधूरा होता है। कई मरीज ऑपरेशन या इलाज के बाद इन्हीं गलत टिप्स के आधार पर एक्सरसाइज और उपचार शुरू कर देते हैं, जिससे उनकी स्थिति बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों का फोकस अब मरीजों को गलत इलाज से बचाने पर फोकस कर रहे हैं। इसी दिशा में राजधानी के हमीदिया अस्पताल ने आर्थो रिहैब एप तैयार किया है। ऑर्थोपेडिक विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष गोहिया ने कहा कि इस एप का उद्देश्य ऑपरेशन के बाद मरीजों को सामान्य और सही जानकारी देना है, ताकि वे घर पर भी एक्सरसाइज और चिकित्सीय सलाहों का सही तरीके से पालन कर सकें। सोशल मीडिया के भरोसे इलाज बन रहा खतरा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध जानकारी हर किसी के लिए एक जैसी होती है, जबकि हर मरीज की स्थिति अलग होती है। ऐसे में एक ही तरह की एक्सरसाइज सभी पर लागू नहीं होती। कई मामलों में देखा गया है कि मरीज गलत तरीके से एक्सरसाइज करने के कारण और ज्यादा चोटिल हो गए या उनकी रिकवरी में देरी हुई। यही वजह है कि विशेषज्ञ लंबे समय से प्रमाणिक और पर्सनलाइज्ड गाइडेंस की जरूरत महसूस कर रहे थे। डॉक्टरों ने तैयार किया वैज्ञानिक समाधान इस जरूरत को समझते हुए गांधी मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग विभाग के सीनियर रेजीडेंट डॉ. सुदीप त्रिपाठी ने ‘आर्थो रिहैब एप’ विकसित किया है। यह एप खासतौर पर उन मरीजों के लिए तैयार किया गया है, जिनका हड्डी से जुड़ा ऑपरेशन हुआ है। इसमें 200 से अधिक सर्जरी से संबंधित जानकारी, एक्सरसाइज और देखभाल के तरीके वीडियो, ऑडियो और टेक्स्ट फॉर्मेट में शामिल किए गए हैं। मरीजों को मिलेंगे यह फायदे – बार-बार अस्पताल आने की जरूरत कम होगी। – रिकवरी प्रक्रिया तेज और सुरक्षित होगी। – वीडियो में जानकारी होने से कम पढ़े-लिखे मरीज भी आसानी से समझ सकेंगे। – डॉक्टर और मरीज के बीच बेहतर समन्वय बनेगा। हर मरीज को मिलेगी जरूरत के अनुसार जानकारी इस एप की सबसे खास बात यह है कि इसमें मरीज खुद से लॉगिन नहीं कर सकता। ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ही मरीज का रजिस्ट्रेशन करते हैं और उसकी सर्जरी के अनुसार जरूरी जानकारी अपलोड करते हैं। इससे मरीज को केवल वही जानकारी मिलती है, जो उसके लिए जरूरी और सुरक्षित है। इससे भ्रम की स्थिति खत्म होती है और इलाज अधिक प्रभावी बनता है। डॉ. त्रिपाठी के अनुसार, सड़क दुर्घटना या अन्य गंभीर मामलों में ऑपरेशन के बाद मरीजों को लंबे समय तक एक्सरसाइज करनी होती है। अस्पताल में दी गई सलाह मरीज घर जाकर भूल जाते हैं और कई बार गलत तरीके अपनाते हैं। इस एप के जरिए उन्हें हर समय सही मार्गदर्शन मिलता रहेगा, जिससे गलत एक्सरसाइज से होने वाले नुकसान को रोका जा सकेगा।

भोपाल में तीसरी मंजिल से गिरी लिफ्ट, 7 लोग घायल:सागर प्लाजा में हुई घटना, दो के पांव में गंभीर चोटें

भोपाल में तीसरी मंजिल से गिरी लिफ्ट, 7 लोग घायल:सागर प्लाजा में हुई घटना, दो के पांव में गंभीर चोटें

भोपाल के एमपी नगर जोन-2 के सागर प्लाजा के लिफ्ट बुधवार की शाम को तीसरी मंजिल से गिर गई। इस हादसे में लिफ्ट में सवार सात लोगों को चोट आई हैं। सभी पत्रकार थे और अपने एक पत्रकार साथी से मिलकर लौट रहे थे। घायलों को नर्मदा और सेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे की सूचना एपमी नगर पुलिस को दे दी गई है। जानकारी के मुताबिक, पत्रकार रिजवान अहमद सिद्दीकी, सुशील त्रिपाठी, दिलीप भदोरिया, अनीता चौबे, प्रगति श्रीवास्तव, सादिया खान एक पत्रकार साथी से मिलने सागर प्लाजा स्थित ऑफिस में गए थे। वहां से लौटते समय तीसरी फ्लोर से लिफ्ट नीचे जा गिरी। हादसे में रिजवान अहमद सिद्दीकी और सुशील त्रिपाठी के पांव में गंभीर चोट है। सिद्दीकी का नर्मदा जबकि सुशील का सेज अस्पताल में इलाज चल रहा है।

राजा रघुवंशी मर्डर: मां बोली सोनम को जमानत कैसे मिली?:भाई विपिन बोला- हाईकोर्ट में अपील करेंगे, शिलांग गया तो सोनम मुझ पर भी करा सकती है हमला

राजा रघुवंशी मर्डर: मां बोली सोनम को जमानत कैसे मिली?:भाई विपिन बोला- हाईकोर्ट में अपील करेंगे, शिलांग गया तो सोनम मुझ पर भी करा सकती है हमला

राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत मिलने की खबर ने परिवार को झकझोर दिया। परिजनों को इस फैसले की जानकारी उनके वकील से नहीं, बल्कि शिलांग पुलिस के एक फोन से मिली। अचानक आई इस खबर के बाद घर का माहौल बदल गया। दैनिक भास्कर से बातचीत में राजा की मां उमा रघुवंशी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें इस फैसले पर यकीन ही नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनम इस पूरे मामले की मास्टरमाइंड है। उमा ने कहा, अभी तक तो सुना था कि कानून अंधा होता है आज देखने को भी मिल गया। उन्होंने मामले में सीबीआई जांच की मांग करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हस्तक्षेप की अपील की है। उमा रघुवंशी ने कहा कि एक मां को अपने बेटे के लिए न्याय की उम्मीद थी, लेकिन इस फैसले ने उन्हें बड़ा झटका दिया है। उन्होंने आशंका जताई कि अगर मुख्य आरोपी को जमानत मिल सकती है, तो अन्य आरोपियों को भी राहत मिल सकती है। वह जब भी इंदौर आएगी तो मैं उससे पूछूंगी कि मेरे बेटे का क्या कसूर था? क्यों मारा उसे? सोनम या उसका भाई मुझ पर करा सकता है हमला वहीं, राजा के भाई विपिन रघुवंशी ने भी कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि सोनम को सोमवार को ही जमानत मिल गई थी, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी मंगलवार को शिलांग पुलिस से मिली। चार दिन पहले तक उनके वकील ने भी जमानत मिलने की संभावना से इनकार किया था। विपिन ने आरोप लगाया कि सोनम के परिवार, खासकर उसके भाई गोविंद का उसे पूरा समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि पैसों की ताकत के आगे हम अपने भाई को न्याय नहीं दिला पा रहे हैं। वे सोनम की जमानत रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का रुख करेंगे और जरूरत पड़ी तो शिलांग भी जाएंगे। ऐसे में यदि सोनम वापस जेल जाती है तो भाई गोविंद इसका बदला ले सकता है। विपिन ने आशंका भी जताई कि अगर अपील करने के लिए अगर वह शिलांग जाते है तो सोनम उन पर हमला करा सकती है। यदि मेरे साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो उसके लिए गोविंद जिम्मेदार होगा। जमानत के आधार पर भी सवाल उठाते हुए विपिन ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि कोर्ट ने यह मानते हुए जमानत दी कि गिरफ्तारी के वक्त सोनम को कारण नहीं बताया गया था। हमें अब तक चार्जशीट की कॉपी नहीं दी गई, जबकि दूसरी ओर आरोपी पक्ष को यह उपलब्ध करा दी गई है। सूत्रों के अनुसार, इस मामले में एक अन्य आरोपी राज कुशवाह की जमानत पर भी जल्द सुनवाई हो सकती है।

22 से 28 साल के लड़के बन रहे लड़की:भोपाल एम्स में एक साल में 5 सर्जरी; डॉक्टर बोले-भविष्य में ‘मां’ भी बन सकते हैं

22 से 28 साल के लड़के बन रहे लड़की:भोपाल एम्स में एक साल में 5 सर्जरी; डॉक्टर बोले-भविष्य में ‘मां’ भी बन सकते हैं

एमपी के राजगढ़ का रहने वाला सोमेश जैसे ही 10 साल का हुआ, वह लड़कियों की तरह व्यवहार करता और उनके तरह कपड़े पहनना पसंद करने लगा। परिवार को भी अहसास हो गया कि वह अंदर से एक लड़की है। 24 साल के होने पर उसने अपना जेंडर चेंज करवाया और सर्जरी करवाकर लड़की बन गया। यह एक अकेले सोमेश का केस नहीं है। मध्य प्रदेश में ऐसे और भी केस सामने आए हैं, जिनमें लड़के जेंडर चेंज करवाकर लड़की बन रहे हैं। एम्स में आए सभी मरीज 22 से 28 वर्ष के एम्स भोपाल में सामने आए मामलों ने यह साफ कर दिया है कि जेंडर आइडेंटिटी का सवाल छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंच चुका है। बीते एक साल में एम्स भोपाल में 5 जेंडर कंवर्जन सर्जरी हुई हैं। इनमें शामिल सभी मरीज 22 से 28 वर्ष की आयु के बीच के युवक हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह सिर्फ सर्जरी नहीं, बल्कि लंबी मानसिक, शारीरिक और सामाजिक प्रक्रिया है। भविष्य में ऐसी तकनीक विकसित हो सकती है, जिससे ये मरीज मां बनने का अनुभव भी कर सकें। डॉक्टर से समझें बॉटम सर्जरी की जटिलताएं एम्स भोपाल के स्त्री रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार डोरा ने बताया कि अब तक 5 सर्जरी की गई हैं, जिनमें मरीज को पुरुष से महिला बनाया गया है। यह बेहद जटिल सर्जरी होती है। हमारी पढ़ाई के समय इस तरह की सर्जरी का एक्सपोजर नहीं था। हमने बाद में कॉन्फ्रेंस और स्किल डेवलपमेंट कोर्स से इनकी ट्रेनिंग ली है। डॉ. डोरा ने बताया कि बॉटम सर्जरी में सबसे पहला चैलेंज होता है कि पुरुष के प्राइवेट पार्ट को हटाना होता है। एम्स में यह सर्जरी अभी नि:शुल्क की जा रही है। प्राइवेट अस्पतालों में इसका 8 से 10 लाख रुपए का खर्च आता है। सर्जरी से पहले काउंसलिंग जरूरी डॉक्टरों का कहना है कि जेंडर कंवर्जन सिर्फ सर्जरी नहीं है। इसके पहले लंबी काउंसलिंग, मानसिक मूल्यांकन और हार्मोन थेरेपी की प्रक्रिया होती है। कई बार मरीजों को यह समझाया भी जाता है कि वे भावनात्मक दबाव में कोई निर्णय न लें। केस 1- दोस्तों ने किया शोषण तो लड़की बनने की जागी इच्छा मध्य प्रदेश के रीवा जिले के एक छोटे से गांव के अनुराग का जन्म साल 2000 में हुआ। जब वह 9 साल का हुआ, तब उसे उसके व्यवहार के कारण पहला सदमा मिला। वह अक्सर अपनी बड़ी बहन की कुर्ती पहनकर घर से बाहर निकल जाता था। लोग उसका मजाक बनाते थे, जिसे वह हंसकर भुला देता था। एक दिन उसके साथ के लड़कों ने उसे अकेला देखकर ना केवल मौखिक बल्कि शारीरिक रूप से शोषण किया। इसके बाद उसका परिवार रीवा शिफ्ट हो गया। तब से ही उसके मन में यह इच्छा जागी कि काश वह लड़की के रूप में जन्म लेता तो उसके साथ ऐसा व्यवहार नहीं होता। नौकरी के बाद जब वह आर्थिक रूप से मजबूत हुआ, तो उसने अपना जेंडर बदलवाने का फैसला लिया। परिवार की सहमति के बाद वह अक्टूबर 2025 में एम्स भोपाल आया, जहां उसका सफल इलाज हुआ। केस 2 – परिवार के तानों ने लड़की बनने को किया मोटिवेट भोपाल के पास के गांव के 24 वर्षीय आनंद (बदला हुआ नाम) बीते 4 माह से औरत की जिंदगी जी रहे हैं। जब वे एम्स भोपाल स्थित ट्रांसजेंडर क्लीनिक पहली बार पहुंचे थे, तो उन्होंने डॉक्टरों को बताया था कि वे अंदर से एक महिला ही हैं। उनके इस व्यवहार के कारण परिवार उन्हें खुद से दूर रखता है। बचपन से लेकर आज तक जब भी वे मिलते हैं, तो उन्हें ताने पड़ते हैं। इसी व्यवहार ने उन्हें पूरी तरह औरत बन जाने के लिए मोटिवेट किया। केस 3 – महिला बनने की चाह बनी मुसीबत, चल रहा इलाज इंदौर निवासी 28 वर्षीय युवक के लिए महिला बनने की चाह मुसीबत बन गई। बीते तीन साल से वह इलाज ही करा रहे हैं। वह एम्स भोपाल में भर्ती हैं। उन्होंने जेंडर कन्वर्जन सर्जरी के बारे में ऑनलाइन पढ़ा था। उत्तर प्रदेश के कानपुर में वे सर्जरी के लिए गए थे। वहां उनकी पहले टॉप सर्जरी यानी छाती को महिलाओं की तरह बनाया गया। उनकी बॉटम सर्जरी यानी मेल प्राइवेट पार्ट को हटाकर फीमेल प्राइवेट पार्ट बनाया गया। यह सर्जरी फेल हो गई। बेहतर इलाज की तलाश में वह अहमदाबाद गए, वहां भी उन्हें निराशा ही मिली। वे एम्स भोपाल के ट्रांसजेंडर क्लीनिक पहुंचे। उनकी स्थिति को देखते हुए एम्स भोपाल की टीम ने 24 अप्रैल को उनकी 8 घंटे चली बॉटम सर्जरी की। डॉक्टर बोले- जरा सी गलती बड़ी समस्या बन सकती है डॉ. अरुण कमार डोरा के अनुसार, इन प्रक्रियाओं में जरा सी गलती मरीज के लिए एक बड़ी समस्या बन सकती है। कुछ ऐसे मरीज हमारे पास आए, जिन्होंने बाहर से सर्जरी कराई और वह फेल हो गई। ऐसे ही एक मरीज का इलाज चल रहा है, जिसमें उसके पुरुष अंग को पूरी तरह से हटा दिया गया था। ऐसे में उसे अब भविष्य में सेंसेशन का अनुभव नहीं होगा। यही नहीं, सर्जरी के दौरान अंदरूनी अंगों में भी इंजरी हुई। इन सभी समस्याओं का इलाज करने के बाद उस मरीज में नए सिरे से महिलाओं वाले अंग बनाए गए हैं। महिलाओं की तरह अंग के अंदर रास्ता बनाने के लिए करीब एक सप्ताह तक एक फॉरेन ऑब्जेक्ट लगाना पड़ा, जिससे उसके शरीर के अंदरूनी अंग नई जगह पर फिक्स हो जाएं और जो रास्ता बनाया गया है, वह हमेशा के लिए उसी पोजिशन पर रहे। एम्स में दो दिन चलती है विशेष क्लीनिक एम्स भोपाल में ट्रांसजेंडर हेल्थ क्लीनिक की शुरुआत दो साल पहले की गई थी। यहां मनोचिकित्सा, एंडोक्रिनोलॉजी, यूरोलॉजी और प्लास्टिक सर्जरी विभाग मिलकर मरीजों का इलाज करते हैं। हर महीने पहले और तीसरे गुरुवार को ओपीडी लगती है, जहां मरीज बिना झिझक अपनी समस्या साझा कर सकते हैं। सामाजिक कलंक अब भी सबसे बड़ी चुनौती डॉक्टरों का मानना है कि मेडिकल सुविधाएं बढ़ने के बावजूद समाज की सोच अभी पूरी तरह नहीं बदली है। ट्रांसजेंडर लोगों को आज भी भेदभाव और अस्वीकार का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मरीजों को सिर्फ इलाज ही नहीं, बल्कि सामाजिक समर्थन

भोपाल में हिंदू संगठनों ने ट्रकों को रोककर लगाया जाम:स्लॉटर वेस्ट से बना मुर्गी-मछली दाना ले जाने के आरोप; डीएनए जांच की मांग

भोपाल में हिंदू संगठनों ने ट्रकों को रोककर लगाया जाम:स्लॉटर वेस्ट से बना मुर्गी-मछली दाना ले जाने के आरोप; डीएनए जांच की मांग

भोपाल के रायसेन रोड पर मंगलवार रात 9 बजे उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब हिंदू संगठनों ने कथित तौर पर असलम चमड़े से जुड़े ट्रकों को रोककर जाम लगा दिया। मामला बिलखिरया थाना क्षेत्र का है। संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मुर्गी-मछली के दाने से भरे एक ट्रक को पकड़ लिया, जबकि दो अन्य ट्रकों के पहले ही रवाना होने का दावा किया गया है। संगठन के पदाधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा विवाद असलम चमड़े की जमानत के बाद शुरू हुआ है। आरोप है कि स्लॉटर हाउस से निकले वेस्ट मटेरियल से तैयार दाना ट्रकों के जरिए बाहर भेजा जा रहा था। कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस वेस्ट में गाय से जुड़ा मटेरियल होने की आशंका है, जिसकी जांच नहीं कराई गई। रात 9 बजे के बाद हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी भी मौके पर पहुंचे। जांच की मांग पहले भी की थी सर्वदलीय गोरक्षा अभियान समिति के प्रदेश अध्यक्ष गौरव मिश्रा ने बताया कि इस संबंध में पहले डीसीपी जोन को ज्ञापन देकर जांच और सैंपलिंग की मांग की गई थी। उनका आरोप है कि प्रशासन ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा, स्लॉटर से निकले वेस्ट से दाना बनाया गया और अब उसे ट्रकों से बाहर भेजा जा रहा था। हमने मौके पर पहुंचकर लोडिंग रुकवाई। संबंधित लोग मौके से भाग गए। एक ट्रक पकड़ा, हाईवे पर लगाया जाम संगठन के कार्यकर्ताओं ने मौके पर एक ट्रक को पकड़ लिया, जिसमें कथित तौर पर दाना और वेस्ट मटेरियल भरा हुआ था। इसके बाद आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने रायसेन हाईवे पर जाम लगा दिया, जिससे यातायात कुछ समय के लिए बाधित रहा। डीएनए जांच की मांग संगठन की मांग है कि जब्त किए गए मटेरियल के सैंपल लेकर डीएनए जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उसमें गोवंश से जुड़ा कोई अंश है या नहीं। उनका कहना है कि अगर जांच में पुष्टि होती है, तो पहले दर्ज मामलों को और मजबूती मिलेगी।

उमा-कल्याण सिंह को भारत रत्न दिया जाए:प्रीतम लोधी ने कहा: हेमा मालिनी के धर्मेन्द्र को मिल सकता है तो हमारे नेताओं को क्यों नहीं

उमा-कल्याण सिंह को भारत रत्न दिया जाए:प्रीतम लोधी ने कहा: हेमा मालिनी के धर्मेन्द्र को मिल सकता है तो हमारे नेताओं को क्यों नहीं

अपने बयानों के कारण विवादों में रहने वाले पिछोर से बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी फिर चर्चा में हैं। प्रीतम लोधी ने एमपी की पूर्व सीएम उमा भारती और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को भारत रत्न देने की मांग की है। भोपाल के जंबूरी मैदान पर राजा हिरदेशाह शौर्य यात्रा के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रीतम लोधी ने कहा- जब हेमा मालिनी के धर्मेन्द्र को भारत रत्न मिल सकता है। तो क्या हमारे कल्याण सिंह बाबू जी को नहीं मिल सकता। प्रीतम बोले: हमारी जवानी ताश के पत्तों और शराब में उलझी प्रीतम लोधी ने कहा कि मैं गाड़ी लेकर निकला, कई मोड़ आए और मैं कई मोड़ छोड़ आया। मैं क्यों निकला? मैं केवल लोधी समाज की जवानी ढूंढने निकला हूं दोस्तों कि लोधी समाज की जवानी कहां है। बहुत लोग मंचों से कहते हैं कि जिस ओर जवानी चलती है, उसी ओर जमाना चलता है। मैंने देखा कि लोधी समाज की जवानी कहां चली गई है, किस बिल में घुस गई है, किस क्षेत्र में खो गई है? जब मैं जवानी ढूंढने निकला तो दोस्तों, मुझे थोड़ी सी जवानी ताश के पत्तों में उलझी मिली, थोड़ी जवानी धूम्रपान में लगी हुई मिली और जो पूरी जवानी थी, वह मुझे शराब की दुकानों पर मिली। प्रीतम ने कहा- मैं नशे का ज्ञाता हूं प्रीतम लोधी ने कहा- मैं अपने नौजवान साथियों से कहना चाहता हूं, क्योंकि मैं इसका ज्ञाता हूं। मैं भी पहले बहुत नशा करता था। एक दिन एक बहन ने मुझे नशा करते हुए देखा, तो उसने काली का रूप धारण कर लिया और मुझे इतना डांटा कि मैं कांप गया। उस महिला ने कहा कि लोधी समाज तुमसे आस लगाए बैठा है और तुम इस दलदल में फंसे हो। उस दिन के बाद मैंने मन बना लिया कि कि अब कभी नशा नहीं करूंगा। हमारी जवानी में दो-दो लोधी सीएम थे अब जीरो हैं जब हम जवान हुआ करते थे, तब दो-दो मुख्यमंत्री हुआ करते थे। मैं हर मंच से कहता हूं कि आज 0 हैं। पूरी जनता आपकी ओर देख रही है कि आप लोग मैदान में आएंगे। हमें देश में एक मुख्यमंत्री जरूर चाहिए दोस्तों। जब एक संविधान, एक विधान, एक निशान, एक मतदान और एक हिंदुस्तान हो सकता है, तो क्या लोधी समाज का एक मुख्यमंत्री नहीं होना चाहिए? उमा-कल्याण को दिया जाए भारत रत्न प्रीतम लोधी ने कहा- तिरंगे के संघर्ष के लिए उमा भारती ने कुर्सी छोड़ दी। ये केवल लोधी कर सकता है दूसरा कोई नहीं। दूसरे नेता कल्याण सिंह जिन्होंने राम मंदिर के लिए कुर्सी त्यागी थी ऐसे नेता समाज में हुए हैं तो आवाज में आवाज मिलाकर देश की आवाज बना दो। हमारी उमा भारती और कल्याण सिंह को भारत रत्न दिला दो। जब हेमा मालिनी के धर्मेन्द्र को भारत रत्न मिल सकता है। तो हमारे कल्याण सिंह बाबू जी को नहीं मिल सकता। तब मिलेगा भाई-बहनों जब आप लोग एक रहोगे। एक रहोगे- नेक रहोगे तो सेफ रहोगे।

टीटी नगर में शेड पर कब्जे को लेकर विवाद:शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप; पुलिस आयुक्त से लगाई गुहार

टीटी नगर में शेड पर कब्जे को लेकर विवाद:शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप; पुलिस आयुक्त से लगाई गुहार

भोपाल के टीटी नगर इलाके में एक शेड को लेकर विवाद सामने आया है। सुदामा नगर निवासी ओम प्रकाश कटियार ने आरोप लगाया है कि 18 मार्च 2026 को शेड का ताला तोड़कर उसमें रखा कीमती सामान और दस्तावेज निकाल लिए गए। उन्होंने कृष्णकांत राय और सपना राय पर यह आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत की है। आवेदक ओम प्रकाश कटियार के मुताबिक, संबंधित शेड उनके द्वारा सालों पहले संघ कार्यालय के इस्तेमाल के लिए बनाया गया था, जहां घरेलू और कार्यालय से जुड़ा सामान रखा जाता था। उनका कहना है कि शेड की देखरेख उनके छोटे भाई करते थे। कटियार ने आरोप लगाया कि हाल ही में आवंटित आवास के पास स्थित इस शेड पर सपना राय और उनके बेटे कृष्णकांत राय ने दावा जताया और शेड खाली करने का दबाव बनाया। इसके बाद 18 मार्च 2026 को कथित रूप से शेड का ताला तोड़कर अंदर रखा सामान और दस्तावेज निकाल लिए गए। थाने में शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं पुलिस को दिए आवेदन में यह भी कहा गया है कि आरोपियों ने शेड को अपने मकान में मिलाते हुए दीवार और गेट में बदलाव कर लिया। ओम प्रकाश का दावा है कि इस संबंध में उन्होंने पहले भी थाने में शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस आयुक्त को आवेदन देकर जांच की मांग की कटियार ने पुलिस आयुक्त को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने उचित कार्रवाई नहीं की। उन्होंने मामले में जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

उमा बोलीं-आरक्षण कोई माई का लाल नहीं छीन सकता:राष्ट्रपति-पीएम के परिवार के लोग सरकारी स्कूल नहीं जाएंगे, तब तक रहेगा; यही शिवराज भी कह चुके

उमा बोलीं-आरक्षण कोई माई का लाल नहीं छीन सकता:राष्ट्रपति-पीएम के परिवार के लोग सरकारी स्कूल नहीं जाएंगे, तब तक रहेगा; यही शिवराज भी कह चुके

भोपाल के जम्बूरी मैदान में पूर्व सीएम उमा भारती ने आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने मंगलवार को राजा हिरदे शाह लोधी की शौर्य यात्रा में कहा- देश में सामाजिक बराबरी के लिए आरक्षण जरूरी है। उमा भारती ने कहा- जब तक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और चीफ जस्टिस के परिवार के लोग एक साथ सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ेंगे, तब तक आरक्षण कोई माई का लाल नहीं छीन सकता। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज लंबे समय तक जातिगत आधार पर बंटा रहा और आर्थिक असमानताएं गहरी रहीं। ऐसे में आरक्षण उस विषमता को कम करने का एक बड़ा प्रयास है। बराबरी सिर्फ कानून से नहीं, बल्कि व्यवहार में बदलाव से आएगी। शिवराज ने भी यही बयान दिया था, फिर भाजपा को हार मिली थी आरक्षण के मसले पर 12 जून 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी बयान दिया था। शिवराज अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी-कर्मचारी संघ द्वारा भोपाल में आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा था- हमारे रहते हुए कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता। नया कानून आने तक यह जारी रहेगा। बयान के बाद सवर्ण समाज नाराज, सपाक्स संघ का गठन हुआ शिवराज के इस बयान के बाद सवर्ण समाज नाराज हो गया। सपाक्स संघ का गठन हुआ, जिसने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। उसका साथ करणी सेना ने दिया। उज्जैन, भोपाल सहित प्रदेश के बड़े शहरों में बड़े आंदोलन हुए और रैलियां निकाली गईं। 2018 के विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल पर भाजपा के पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने मंदसौर में कहा था– यदि माई के लाल जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया होता तो एमपी में भाजपा की 10 से 15 सीटें स्वत: बढ़ जाती। कांग्रेस से कड़े मुकाबले जैसी स्थिति नहीं बनती। यदि भाजपा की हार होती है तो इसकी जिम्मेदारी शिवराज सिंह चौहान की होगी। बता दें कि इस चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। एक ने राम मंदिर के लिए, दूसरे ने तिरंगे के लिए कुर्सी छोड़ी उमा ने कहा- अब मैं आजादी की दूसरी लड़ाई के बारे में बताती हूं। मोदी जी ने 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, तो एक अमेरिकी अखबार के एडिटर ने लिखा ‘अंग्रेज तो चले गए, लेकिन कुछ ‘काले अंग्रेज’ छोड़ गए।’ हम मॉर्डनाइज हो रहे हैं, लेकिन वेस्टर्नाइज नहीं हो रहे। जनसंघ के बाद जब भाजपा बनी, तो इसे पिछड़ी और विरोधी पार्टी कहा जाता था। पहली बार ऐसा हुआ, जब एक व्यक्ति ने राम मंदिर के लिए अपनी कुर्सी छोड़ दी। दूसरे ने तिरंगे के लिए अपनी कुर्सी छोड़ दी। इसके बाद एक समुदाय ने इस भ्रम को तोड़ दिया कि भाजपा पिछड़ा विरोधी पार्टी है। आजादी की तीसरी लड़ाई समानता के लिए होनी चाहिए उमा भारती ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पेड़, पहाड़ और जीव-जंतुओं तक की पूजा की जाती है। इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है। देश ने आजादी के लिए लंबा संघर्ष किया है, लेकिन अब आजादी की तीसरी लड़ाई समानता के अधिकार के लिए लड़ी जानी चाहिए। उमा ने कहा- लोधी समाज की संख्या काफी अधिक है और उनकी भागीदारी से सरकारें बनती हैं। यह समाज सरकार बनाने की ताकत रखता है। सीएम बोले- पाठ्यक्रम में शामिल होगा शाह का जीवन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- राजा हिरदे शाह ने बुंदेला-गोंड समाज को एकजुट कर अपनी अलग पहचान बनाई और अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी। उनके जीवन पर शोध कराया जाएगा। उनके संघर्षमय जीवन को शिक्षा विभाग के माध्यम से पाठ्यक्रम में शामिल करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। प्रीतम बोले- भारत में कम से कम एक लोधी सीएम बने पिछोर विधायक प्रीतम लोधी ने कहा- जब हेमा मालिनी के धर्मेंद्र को भारत रत्न मिल सकता है तो हमारे कल्याण सिंह को क्यों नहीं मिल सकता? प्रीतम ने कहा- जिस ओर जवानी चलती है, उस ओर जमाना चलता है। मैं जब जवानी देखने निकलता हूं तो आज की जवानी ताश के पत्तों में मिलती है। शराब की दुकान में मिलती है। हम जब जवान हुआ करते थे, तब हमारे समाज के दो-दो मुख्यमंत्री हुआ करते थे। आज जीरो हैं। भारत में कम से कम एक लोधी तो मुख्यमंत्री होना चाहिए। सीएम के भाषण के दौरान गिरा PSO, गर्मी से बिगड़ी तबीयत मुख्यमंत्री जब मंच से भाषण दे रहे थे, उसी दौरान उनके पीछे खड़ा PSO गर्मी के कारण मंच पर ही गिर गया। आसपास खड़े लोगों ने उसे संभाला। खबर के मिनट-टु-मिनट अपडेट के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…

Bhopal Police Court Info Hidden

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भोपाल17 मिनट पहले कॉपी लिंक पुलिस को चेतावनी देते प्रियंक कानूनगो। राजधानी के चर्चित मछली परिवार केस में अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की एंट्री हो गई है। इससे मामला और गरमा गया है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने भोपाल पुलिस की अब तक की कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए सख्त टिप्पणी की है। कानूनगो ने स्पष्ट कहा कि यासीन अहमद उर्फ यासीन मछली और उसके परिवार से जुड़े मामलों में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई उन्हें संतोषजनक नहीं लगती। उन्होंने भोपाल पुलिस को संदेश देते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण से जुड़ी जो जानकारी पुलिस के पास है और जो अदालत में पेश की गई है, उससे वे पूरी तरह अवगत हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब वे इस मामले में औपचारिक कार्रवाई शुरू करवाएंगे, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाएगी जो एक मिसाल बनेगी। अब NHRC की सख्ती के बाद यह मामला नए मोड़ पर पहुंच गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पुलिस जांच और कार्रवाई दोनों पर आयोग की नजर और कड़ी हो सकती है। दरअसल, जुलाई 2025 में भोपाल पुलिस ने लिंक रोड नंबर-2 से यासीन मछली और उसके चाचा शाहवर मछली को गिरफ्तार किया था। उनके पास से एमडी ड्रग्स, पिस्टल और मोबाइल में आपत्तिजनक वीडियो बरामद हुए थे। जांच के दौरान ड्रग तस्करी, यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग और सरकारी जमीन कब्जाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए थे। पुलिस ने एक सप्ताह के भीतर परिवार के सदस्यों पर 13 एफआईआर दर्ज की थीं, जबकि प्रशासन ने करीब 100 करोड़ रुपए की सरकारी जमीन भी मुक्त कराई थी। वहीं, हाल ही में शारिक मछली समेत अन्य परिजनों से क्राइम ब्रांच ने हाईप्रोफाइल मामलों में पूछताछ भी की है। ‘प्रोजेक्ट संकल्प’ से जागरूकता की कोशिश इसके अलावा लव जिहाद को लेकर प्रियंक कानूनगो ने कहा कि भोपाल में बढ़ते सांप्रदायिक और लैंगिक अपराधों को देखते हुए एक विशेष पहल के रूप में ‘प्रोजेक्ट संकल्प’ शुरू किया गया। उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट सामाजिक संगठनों के सहयोग से पिछले आठ महीनों से संचालित हो रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। कानूनगो के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 7000 कॉलेज जाने वाली छात्राओं और 1000 फैकल्टी मेंबर्स को कम्युनल जेंडर क्राइम, ग्रूमिंग और रैगिंग के जरिए होने वाले यौन अपराधों के तौर-तरीकों के बारे में जागरूक किया गया है। जुलाई 2025 में भोपाल पुलिस ने लिंक रोड नंबर-2 से यासीन मछली को जब पुलिस ने पकड़ा था। पीड़िता ने दर्ज कराई FIR, आरोपी का किया सार्वजनिक विरोध उन्होंने एक उदाहरण साझा करते हुए बताया कि प्रोजेक्ट से जुड़ी एक छात्रा के साथ जब इस तरह की घटना हुई, तो उसने न केवल थाने में एफआईआर दर्ज कराई बल्कि आरोपी का सार्वजनिक रूप से विरोध भी किया। कानूनगो ने कहा कि ऐसी हिम्मत समाज में बदलाव का संकेत है। 3-4 साल में दिखेगा बड़ा बदलाव उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के सुधारात्मक कदमों का असर आने वाले 3 से 4 वर्षों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। कानूनगो ने कहा कि एक पूरी पीढ़ी को जागरूक करने की जरूरत है और लगातार प्रयासों से इस तरह के अपराधों में कमी लाई जा सकती है। इकबाल मैदान के नाम पर सख्त आपत्ति प्रियंक कानूनगो ने एक बार भोपाल के इकबाल मैदान के नाम को लेकर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि जिस शख्स ने देश के विभाजन की सोच को बढ़ावा दिया, उसके नाम पर भोपाल में किसी मैदान का होना गलत है। कानूनगो ने कहा कि ऐसे नामों की यहां कोई जगह नहीं होनी चाहिए और इसे बदलना जरूरी है। इकबाल सम्मान’ पर भी उठाए सवाल उन्होंने ‘इकबाल सम्मान’ जैसे पुरस्कारों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे नाम पर सम्मान देना उचित नहीं है। कानूनगो के मुताबिक, जिस व्यक्ति की विचारधारा देश के विभाजन से जुड़ी रही हो, उसके नाम पर किसी को सम्मानित करना असल में अपमान के समान है। उन्होंने संकेत दिए कि आगे कदम उठाए जाएंगे। चार बार भोपाल आए थे इकबाल इतिहास की रिपोर्ट के अनुसार शायर अल्लामा इकबाल चार बार भोपाल आए थे और यहां लगभग छह महीने बिताए थे, इस दौरान उन्होंने अपनी प्रसिद्ध शायरी की रचना की थी। उनकी याद में भोपाल में इकबाल मैदान है, जहां की दीवारों पर उनकी शायरी अंकित है। यह मैदान नवाबों के दौर की याद दिलाता है और एक समय यह सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था। ये खबर भी पढ़ें… NHRC मेंबर के घर पहुंचा ‘मछली’ का गुर्गा हिन्दू युवतियों के धर्मांतरण और दुष्कर्म के आरोपी शारिक मछली ने अपने खिलाफ चल रही को जांच रोकने के राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो को साधने की कोशिश की है। इसके लिए शारिक ने अपने साथ काम करने वाले प्रॉपर्टी कारोबारी का इस्तेमाल किया जिसके द्वारा कानूनगो से मुलाकात कर शारिक को माफ करने की गुजारिश की गई। इस पर प्रियंक कानूनगो ने उसे घर से भगा दिया। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔