Saturday, 08 Aug 2026 | 09:10 PM

Trending :

ट्रेलर रिव्यू: टॉक्सिक:यश का स्वैग और खतरनाक एक्शन खूब, लेकिन कहानी अब भी उलझी; स्टारडम के भरोसे कितनी चलेगी फिल्म सोनाक्षी सिन्हा पर बीजेपी-सनातन विरोधी एजेंडा चलाने का दावा:पोस्ट में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा को अनफॉलो करने का जिक्र; जानें वायरल दावे की सच्चाई सोनाक्षी सिन्हा पर बीजेपी-सनातन विरोधी एजेंडा चलाने का दावा:पोस्ट में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा को अनफॉलो करने का जिक्र; जानें वायरल दावे की सच्चाई मूड खराब तो छुट्टी; मानसिक सेहत का इलाज या कामचोरी?:चीन की 'अनहैप्पी लीव' से छिड़ी बहस, उद्योगपति गोयनका बोले- भारत में भी बहस जरूरी अफेयर रूमर्स के बीच एक्ट्रेस कोमल संग दिखे गोविंदा:कभी पत्नी सुनीता ने अफेयर का हिंट देकर कहा था- मुझे कोमल नाम से नफरत है अफेयर रूमर्स के बीच एक्ट्रेस कोमल संग दिखे गोविंदा:कभी पत्नी सुनीता ने अफेयर का हिंट देकर कहा था- मुझे कोमल नाम से नफरत है
EXCLUSIVE

22 से 28 साल के लड़के बन रहे लड़की:भोपाल एम्स में एक साल में 5 सर्जरी; डॉक्टर बोले-भविष्य में ‘मां’ भी बन सकते हैं

22 से 28 साल के लड़के बन रहे लड़की:भोपाल एम्स में एक साल में 5 सर्जरी; डॉक्टर बोले-भविष्य में ‘मां’ भी बन सकते हैं

एमपी के राजगढ़ का रहने वाला सोमेश जैसे ही 10 साल का हुआ, वह लड़कियों की तरह व्यवहार करता और उनके तरह कपड़े पहनना पसंद करने लगा। परिवार को भी अहसास हो गया कि वह अंदर से एक लड़की है। 24 साल के होने पर उसने अपना जेंडर चेंज करवाया और सर्जरी करवाकर लड़की बन गया। यह एक अकेले सोमेश का केस नहीं है। मध्य प्रदेश में ऐसे और भी केस सामने आए हैं, जिनमें लड़के जेंडर चेंज करवाकर लड़की बन रहे हैं। एम्स में आए सभी मरीज 22 से 28 वर्ष के एम्स भोपाल में सामने आए मामलों ने यह साफ कर दिया है कि जेंडर आइडेंटिटी का सवाल छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंच चुका है। बीते एक साल में एम्स भोपाल में 5 जेंडर कंवर्जन सर्जरी हुई हैं। इनमें शामिल सभी मरीज 22 से 28 वर्ष की आयु के बीच के युवक हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह सिर्फ सर्जरी नहीं, बल्कि लंबी मानसिक, शारीरिक और सामाजिक प्रक्रिया है। भविष्य में ऐसी तकनीक विकसित हो सकती है, जिससे ये मरीज मां बनने का अनुभव भी कर सकें। डॉक्टर से समझें बॉटम सर्जरी की जटिलताएं एम्स भोपाल के स्त्री रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार डोरा ने बताया कि अब तक 5 सर्जरी की गई हैं, जिनमें मरीज को पुरुष से महिला बनाया गया है। यह बेहद जटिल सर्जरी होती है। हमारी पढ़ाई के समय इस तरह की सर्जरी का एक्सपोजर नहीं था। हमने बाद में कॉन्फ्रेंस और स्किल डेवलपमेंट कोर्स से इनकी ट्रेनिंग ली है। डॉ. डोरा ने बताया कि बॉटम सर्जरी में सबसे पहला चैलेंज होता है कि पुरुष के प्राइवेट पार्ट को हटाना होता है। एम्स में यह सर्जरी अभी नि:शुल्क की जा रही है। प्राइवेट अस्पतालों में इसका 8 से 10 लाख रुपए का खर्च आता है। सर्जरी से पहले काउंसलिंग जरूरी डॉक्टरों का कहना है कि जेंडर कंवर्जन सिर्फ सर्जरी नहीं है। इसके पहले लंबी काउंसलिंग, मानसिक मूल्यांकन और हार्मोन थेरेपी की प्रक्रिया होती है। कई बार मरीजों को यह समझाया भी जाता है कि वे भावनात्मक दबाव में कोई निर्णय न लें। केस 1- दोस्तों ने किया शोषण तो लड़की बनने की जागी इच्छा मध्य प्रदेश के रीवा जिले के एक छोटे से गांव के अनुराग का जन्म साल 2000 में हुआ। जब वह 9 साल का हुआ, तब उसे उसके व्यवहार के कारण पहला सदमा मिला। वह अक्सर अपनी बड़ी बहन की कुर्ती पहनकर घर से बाहर निकल जाता था। लोग उसका मजाक बनाते थे, जिसे वह हंसकर भुला देता था। एक दिन उसके साथ के लड़कों ने उसे अकेला देखकर ना केवल मौखिक बल्कि शारीरिक रूप से शोषण किया। इसके बाद उसका परिवार रीवा शिफ्ट हो गया। तब से ही उसके मन में यह इच्छा जागी कि काश वह लड़की के रूप में जन्म लेता तो उसके साथ ऐसा व्यवहार नहीं होता। नौकरी के बाद जब वह आर्थिक रूप से मजबूत हुआ, तो उसने अपना जेंडर बदलवाने का फैसला लिया। परिवार की सहमति के बाद वह अक्टूबर 2025 में एम्स भोपाल आया, जहां उसका सफल इलाज हुआ। केस 2 – परिवार के तानों ने लड़की बनने को किया मोटिवेट भोपाल के पास के गांव के 24 वर्षीय आनंद (बदला हुआ नाम) बीते 4 माह से औरत की जिंदगी जी रहे हैं। जब वे एम्स भोपाल स्थित ट्रांसजेंडर क्लीनिक पहली बार पहुंचे थे, तो उन्होंने डॉक्टरों को बताया था कि वे अंदर से एक महिला ही हैं। उनके इस व्यवहार के कारण परिवार उन्हें खुद से दूर रखता है। बचपन से लेकर आज तक जब भी वे मिलते हैं, तो उन्हें ताने पड़ते हैं। इसी व्यवहार ने उन्हें पूरी तरह औरत बन जाने के लिए मोटिवेट किया। केस 3 – महिला बनने की चाह बनी मुसीबत, चल रहा इलाज इंदौर निवासी 28 वर्षीय युवक के लिए महिला बनने की चाह मुसीबत बन गई। बीते तीन साल से वह इलाज ही करा रहे हैं। वह एम्स भोपाल में भर्ती हैं। उन्होंने जेंडर कन्वर्जन सर्जरी के बारे में ऑनलाइन पढ़ा था। उत्तर प्रदेश के कानपुर में वे सर्जरी के लिए गए थे। वहां उनकी पहले टॉप सर्जरी यानी छाती को महिलाओं की तरह बनाया गया। उनकी बॉटम सर्जरी यानी मेल प्राइवेट पार्ट को हटाकर फीमेल प्राइवेट पार्ट बनाया गया। यह सर्जरी फेल हो गई। बेहतर इलाज की तलाश में वह अहमदाबाद गए, वहां भी उन्हें निराशा ही मिली। वे एम्स भोपाल के ट्रांसजेंडर क्लीनिक पहुंचे। उनकी स्थिति को देखते हुए एम्स भोपाल की टीम ने 24 अप्रैल को उनकी 8 घंटे चली बॉटम सर्जरी की। डॉक्टर बोले- जरा सी गलती बड़ी समस्या बन सकती है डॉ. अरुण कमार डोरा के अनुसार, इन प्रक्रियाओं में जरा सी गलती मरीज के लिए एक बड़ी समस्या बन सकती है। कुछ ऐसे मरीज हमारे पास आए, जिन्होंने बाहर से सर्जरी कराई और वह फेल हो गई। ऐसे ही एक मरीज का इलाज चल रहा है, जिसमें उसके पुरुष अंग को पूरी तरह से हटा दिया गया था। ऐसे में उसे अब भविष्य में सेंसेशन का अनुभव नहीं होगा। यही नहीं, सर्जरी के दौरान अंदरूनी अंगों में भी इंजरी हुई। इन सभी समस्याओं का इलाज करने के बाद उस मरीज में नए सिरे से महिलाओं वाले अंग बनाए गए हैं। महिलाओं की तरह अंग के अंदर रास्ता बनाने के लिए करीब एक सप्ताह तक एक फॉरेन ऑब्जेक्ट लगाना पड़ा, जिससे उसके शरीर के अंदरूनी अंग नई जगह पर फिक्स हो जाएं और जो रास्ता बनाया गया है, वह हमेशा के लिए उसी पोजिशन पर रहे। एम्स में दो दिन चलती है विशेष क्लीनिक एम्स भोपाल में ट्रांसजेंडर हेल्थ क्लीनिक की शुरुआत दो साल पहले की गई थी। यहां मनोचिकित्सा, एंडोक्रिनोलॉजी, यूरोलॉजी और प्लास्टिक सर्जरी विभाग मिलकर मरीजों का इलाज करते हैं। हर महीने पहले और तीसरे गुरुवार को ओपीडी लगती है, जहां मरीज बिना झिझक अपनी समस्या साझा कर सकते हैं। सामाजिक कलंक अब भी सबसे बड़ी चुनौती डॉक्टरों का मानना है कि मेडिकल सुविधाएं बढ़ने के बावजूद समाज की सोच अभी पूरी तरह नहीं बदली है। ट्रांसजेंडर लोगों को आज भी भेदभाव और अस्वीकार का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मरीजों को सिर्फ इलाज ही नहीं, बल्कि सामाजिक समर्थन और सम्मान की भी जरूरत है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Indian Army Recruitment 190 Posts

May 4, 2026/
8:00 pm

8 मिनट पहले कॉपी लिंक आज की सरकारी नौकरी में जानकारी गुजरात में हेल्थ वर्कर के 1948 पदों पर भर्ती...

केरल में मोदी-पोप कनेक्ट: पूर्वोत्तर से भाजपा के ईसाई विधायक घर-घर जाकर अभियान चलाएंगे | चुनाव समाचार

February 13, 2026/
7:30 am

आखरी अपडेट:13 फरवरी, 2026, 07:30 IST गोवा, नागालैंड और मणिपुर सहित तीन भाजपा शासित या भाजपा-सहयोगी राज्यों के कम से...

रायपुर की पिच पर बेंगलुरु को मिल सकता है फायदा:उमेश यादव ने कहा- गेंदबाजी में संघर्ष कर रही मुंबई,10 मई को होगा मुकाबला

May 8, 2026/
5:40 pm

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और मुंबई इंडियंस (MI) के बीच रिवेंज वीक में 10 मई को रायपुर में हाई-वोल्टेज मुकाबला...

IPL में आज चेन्नई vs मुंबई:प्लेऑफ की रेस में बने रहने के लिए दोनों के लिए जीत जरुरी; धोनी के खेलने पर सस्पेंस

May 2, 2026/
5:10 am

IPL 2026 में संघर्ष कर रहीं चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस शनिवार को चेपॉक में आमने-सामने होंगी। मुकाबला शाम...

ऑफ कटर से गच्चा खा रहे मॉडर्न बैटर:वर्ल्ड कप के 357 विकेट पेसर्स को, इसमें 68 ऑफ कटर पर गिरे, बुमराह इसके उस्ताद

March 12, 2026/
8:44 am

टी-20 क्रिकेट को हमेशा से बल्लेबाजों का गेम माना जाता है, लेकिन टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में तेज गेंदबाजों ने...

बमोरी में दो सट्टे के कारोबारी पकड़ाए:11 लोगों पर कैंट पुलिस ने की कार्रवाई; सात बैंक अकाउंट, कई आईडी मिलीं

April 5, 2026/
7:52 am

बमोरी में दो सट्टे के कारोबारी पकड़ाए:11 लोगों पर कैंट पुलिस ने की कार्रवाई; सात बैंक अकाउंट, कई आईडी मिलीं...

स्मिता पाटिल और राज बब्बर के रिश्ते पर बोले आर्य:कहा- किसे अच्छा लगेगा उसके पापा का अफेयर हो; सौतेले भाई प्रतीक बब्बर से जारी अनबन

May 22, 2026/
11:42 am

राज बब्बर के बेटे आर्य बब्बर ने हाल ही में पिता और स्मिता पाटिल के अफेयर पर बात की है।...

धुरंधर सिंगर जैस्मीन सैंडलास के कॉन्सर्ट में अफरा-तफरी:दर्शकों के पास लगा बैरिकेड अचानक टूटा, लोग गिरे; सिंगर ने बीच में रोका परफॉर्मेंस

May 21, 2026/
7:33 pm

पंजाबी सिंगर जैस्मीन सैंडलस के देहरादून लाइव कॉन्सर्ट में अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया। 20 मई को हुए इस...

राजनीति

22 से 28 साल के लड़के बन रहे लड़की:भोपाल एम्स में एक साल में 5 सर्जरी; डॉक्टर बोले-भविष्य में ‘मां’ भी बन सकते हैं

22 से 28 साल के लड़के बन रहे लड़की:भोपाल एम्स में एक साल में 5 सर्जरी; डॉक्टर बोले-भविष्य में ‘मां’ भी बन सकते हैं

एमपी के राजगढ़ का रहने वाला सोमेश जैसे ही 10 साल का हुआ, वह लड़कियों की तरह व्यवहार करता और उनके तरह कपड़े पहनना पसंद करने लगा। परिवार को भी अहसास हो गया कि वह अंदर से एक लड़की है। 24 साल के होने पर उसने अपना जेंडर चेंज करवाया और सर्जरी करवाकर लड़की बन गया। यह एक अकेले सोमेश का केस नहीं है। मध्य प्रदेश में ऐसे और भी केस सामने आए हैं, जिनमें लड़के जेंडर चेंज करवाकर लड़की बन रहे हैं। एम्स में आए सभी मरीज 22 से 28 वर्ष के एम्स भोपाल में सामने आए मामलों ने यह साफ कर दिया है कि जेंडर आइडेंटिटी का सवाल छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंच चुका है। बीते एक साल में एम्स भोपाल में 5 जेंडर कंवर्जन सर्जरी हुई हैं। इनमें शामिल सभी मरीज 22 से 28 वर्ष की आयु के बीच के युवक हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह सिर्फ सर्जरी नहीं, बल्कि लंबी मानसिक, शारीरिक और सामाजिक प्रक्रिया है। भविष्य में ऐसी तकनीक विकसित हो सकती है, जिससे ये मरीज मां बनने का अनुभव भी कर सकें। डॉक्टर से समझें बॉटम सर्जरी की जटिलताएं एम्स भोपाल के स्त्री रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार डोरा ने बताया कि अब तक 5 सर्जरी की गई हैं, जिनमें मरीज को पुरुष से महिला बनाया गया है। यह बेहद जटिल सर्जरी होती है। हमारी पढ़ाई के समय इस तरह की सर्जरी का एक्सपोजर नहीं था। हमने बाद में कॉन्फ्रेंस और स्किल डेवलपमेंट कोर्स से इनकी ट्रेनिंग ली है। डॉ. डोरा ने बताया कि बॉटम सर्जरी में सबसे पहला चैलेंज होता है कि पुरुष के प्राइवेट पार्ट को हटाना होता है। एम्स में यह सर्जरी अभी नि:शुल्क की जा रही है। प्राइवेट अस्पतालों में इसका 8 से 10 लाख रुपए का खर्च आता है। सर्जरी से पहले काउंसलिंग जरूरी डॉक्टरों का कहना है कि जेंडर कंवर्जन सिर्फ सर्जरी नहीं है। इसके पहले लंबी काउंसलिंग, मानसिक मूल्यांकन और हार्मोन थेरेपी की प्रक्रिया होती है। कई बार मरीजों को यह समझाया भी जाता है कि वे भावनात्मक दबाव में कोई निर्णय न लें। केस 1- दोस्तों ने किया शोषण तो लड़की बनने की जागी इच्छा मध्य प्रदेश के रीवा जिले के एक छोटे से गांव के अनुराग का जन्म साल 2000 में हुआ। जब वह 9 साल का हुआ, तब उसे उसके व्यवहार के कारण पहला सदमा मिला। वह अक्सर अपनी बड़ी बहन की कुर्ती पहनकर घर से बाहर निकल जाता था। लोग उसका मजाक बनाते थे, जिसे वह हंसकर भुला देता था। एक दिन उसके साथ के लड़कों ने उसे अकेला देखकर ना केवल मौखिक बल्कि शारीरिक रूप से शोषण किया। इसके बाद उसका परिवार रीवा शिफ्ट हो गया। तब से ही उसके मन में यह इच्छा जागी कि काश वह लड़की के रूप में जन्म लेता तो उसके साथ ऐसा व्यवहार नहीं होता। नौकरी के बाद जब वह आर्थिक रूप से मजबूत हुआ, तो उसने अपना जेंडर बदलवाने का फैसला लिया। परिवार की सहमति के बाद वह अक्टूबर 2025 में एम्स भोपाल आया, जहां उसका सफल इलाज हुआ। केस 2 – परिवार के तानों ने लड़की बनने को किया मोटिवेट भोपाल के पास के गांव के 24 वर्षीय आनंद (बदला हुआ नाम) बीते 4 माह से औरत की जिंदगी जी रहे हैं। जब वे एम्स भोपाल स्थित ट्रांसजेंडर क्लीनिक पहली बार पहुंचे थे, तो उन्होंने डॉक्टरों को बताया था कि वे अंदर से एक महिला ही हैं। उनके इस व्यवहार के कारण परिवार उन्हें खुद से दूर रखता है। बचपन से लेकर आज तक जब भी वे मिलते हैं, तो उन्हें ताने पड़ते हैं। इसी व्यवहार ने उन्हें पूरी तरह औरत बन जाने के लिए मोटिवेट किया। केस 3 – महिला बनने की चाह बनी मुसीबत, चल रहा इलाज इंदौर निवासी 28 वर्षीय युवक के लिए महिला बनने की चाह मुसीबत बन गई। बीते तीन साल से वह इलाज ही करा रहे हैं। वह एम्स भोपाल में भर्ती हैं। उन्होंने जेंडर कन्वर्जन सर्जरी के बारे में ऑनलाइन पढ़ा था। उत्तर प्रदेश के कानपुर में वे सर्जरी के लिए गए थे। वहां उनकी पहले टॉप सर्जरी यानी छाती को महिलाओं की तरह बनाया गया। उनकी बॉटम सर्जरी यानी मेल प्राइवेट पार्ट को हटाकर फीमेल प्राइवेट पार्ट बनाया गया। यह सर्जरी फेल हो गई। बेहतर इलाज की तलाश में वह अहमदाबाद गए, वहां भी उन्हें निराशा ही मिली। वे एम्स भोपाल के ट्रांसजेंडर क्लीनिक पहुंचे। उनकी स्थिति को देखते हुए एम्स भोपाल की टीम ने 24 अप्रैल को उनकी 8 घंटे चली बॉटम सर्जरी की। डॉक्टर बोले- जरा सी गलती बड़ी समस्या बन सकती है डॉ. अरुण कमार डोरा के अनुसार, इन प्रक्रियाओं में जरा सी गलती मरीज के लिए एक बड़ी समस्या बन सकती है। कुछ ऐसे मरीज हमारे पास आए, जिन्होंने बाहर से सर्जरी कराई और वह फेल हो गई। ऐसे ही एक मरीज का इलाज चल रहा है, जिसमें उसके पुरुष अंग को पूरी तरह से हटा दिया गया था। ऐसे में उसे अब भविष्य में सेंसेशन का अनुभव नहीं होगा। यही नहीं, सर्जरी के दौरान अंदरूनी अंगों में भी इंजरी हुई। इन सभी समस्याओं का इलाज करने के बाद उस मरीज में नए सिरे से महिलाओं वाले अंग बनाए गए हैं। महिलाओं की तरह अंग के अंदर रास्ता बनाने के लिए करीब एक सप्ताह तक एक फॉरेन ऑब्जेक्ट लगाना पड़ा, जिससे उसके शरीर के अंदरूनी अंग नई जगह पर फिक्स हो जाएं और जो रास्ता बनाया गया है, वह हमेशा के लिए उसी पोजिशन पर रहे। एम्स में दो दिन चलती है विशेष क्लीनिक एम्स भोपाल में ट्रांसजेंडर हेल्थ क्लीनिक की शुरुआत दो साल पहले की गई थी। यहां मनोचिकित्सा, एंडोक्रिनोलॉजी, यूरोलॉजी और प्लास्टिक सर्जरी विभाग मिलकर मरीजों का इलाज करते हैं। हर महीने पहले और तीसरे गुरुवार को ओपीडी लगती है, जहां मरीज बिना झिझक अपनी समस्या साझा कर सकते हैं। सामाजिक कलंक अब भी सबसे बड़ी चुनौती डॉक्टरों का मानना है कि मेडिकल सुविधाएं बढ़ने के बावजूद समाज की सोच अभी पूरी तरह नहीं बदली है। ट्रांसजेंडर लोगों को आज भी भेदभाव और अस्वीकार का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मरीजों को सिर्फ इलाज ही नहीं, बल्कि सामाजिक समर्थन और सम्मान की भी जरूरत है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.