इंदौर में कलेक्टोरेट पर किसानों का कल जमावड़ा:भूमि अधिग्रहण में बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा देने की मांग, 4 मांगों को लेकर प्रदर्शन

इंदौर में 6 अप्रैल को किसान अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर शक्ति प्रदर्शन करेंगे। किसान संगठनों ने अपील जारी करते हुए कहा है कि वर्तमान में कई मुद्दों को लेकर किसान वर्ग परेशान है, जिनका त्वरित निराकरण आवश्यक है। किसानों की मांग है कि गेहूं की पराली जलाने पर किसानों के खिलाफ दर्ज किए जा रहे प्रकरणों पर तत्काल रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि वैकल्पिक व्यवस्था के अभाव में उन्हें दंडित किया जा रहा है। इसके अलावा, समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी जल्द से जल्द शुरू करने और मंडियों में तौल कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग भी की गई है, ताकि किसानों को उपज बेचने में परेशानी न हो। किसानों का कहना है कि 28 मार्च को अंतिम तारीख मानते हुए लगभग 60 प्रतिशत किसानों को डिफॉल्टर घोषित कर दिया गया है। उन्होंने मांग की है कि ऋण जमा करने की अंतिम तिथि 15 मई तक बढ़ाई जाए और लगाए गए दंड व ब्याज को माफ किया जाए। किसानों ने भूमि अधिग्रहण योजनाओं में वास्तविक बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा देने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।
दमोह में अस्पताल के पास जोरदार धमाका:दहशत में आए लोग, ऑक्सीजन सिलेंडर का वाल्व टूटा

दमोह में रविवार दोपहर जिला अस्पताल के पास एक गैस वेल्डिंग की दुकान में ऑक्सीजन सिलेंडर का वाल्व टूटने से जोरदार धमाका हुआ। इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। जानकारी के अनुसार, यह घटना अस्पताल के सामने संचालित ‘बबला गैस वेल्डिंग’ दुकान पर हुई। दोपहर में एक ऑटो की वेल्डिंग का काम चल रहा था, तभी अचानक ऑक्सीजन सिलेंडर का वाल्व टूट गया। वाल्व टूटते ही तेज धमाके के साथ ऑक्सीजन का तेजी से रिसाव शुरू हो गया। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग दहशत में आ गए और तुरंत दुकान पर भीड़ जमा हो गई। लोगों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। दुकान संचालक ने बताया कि वाल्व टूटने के कारण धमाका हुआ और सिलेंडर की पूरी ऑक्सीजन बाहर निकल गई। दुकान के ऊपर टीन शेड लगा हुआ है, और यदि धमाका और तेज होता तो टीन शेड भी उड़ सकते थे। समय रहते ऑक्सीजन का रिसाव होने से एक बड़ा हादसा टल गया।
श्योपुर में ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलें:भाजपा जिलाध्यक्ष ने किया दौरा, किसानों ने की मुआवजे के लिए सर्वे की मांग

श्योपुर में जिले में शनिवार को हुई तेज ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। मानपुर क्षेत्र सहित कई गांवों में गेहूं की तैयार फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई गांवों में 100% तक नुकसान मानपुर क्षेत्र के बगडुआ, चिमल्का, भोगीका, जावदेश्वर, सोंठवा, रामबड़ोदा, इच्छाखेड़ी और जैनी गांवों में ओलों की मार से गेहूं की फसल जमीन पर गिर गई। किसानों का कहना है कि फसल कटाई के लिए पूरी तरह तैयार थी, लेकिन ओलावृष्टि ने सब कुछ नष्ट कर दिया। कई किसानों ने 100 प्रतिशत तक नुकसान होने की बात कही है। जल्द सर्वे कराकर मुआवजे का दिया आश्वासन घटना के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष शशांक भूषण ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ प्रभावित गांवों का दौरा किया। उन्होंने किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और हालात का जायजा लिया। शशांक भूषण ने किसानों को भरोसा दिलाया कि नुकसान का जल्द सर्वे कराया जाएगा और उन्हें उचित मुआवजा दिलाने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसान पहले ही कई समस्याओं से जूझ रहे हैं, ऐसे में यह आपदा उनके लिए और कठिनाई लेकर आई है। पूर्व जिलाध्यक्ष ने खेतों में जाकर देखी फसल नायब तहसीलदार टी.एस. लकड़ा ने बताया कि फसल के पूरी तरह सूखने का इंतजार किया जा रहा है। इसके बाद विधिवत सर्वे शुरू किया जाएगा और रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, ताकि किसानों को राहत मिल सके। इस दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेंद्र जाट और पूर्व विधायक ब्रजराज सिंह चौहान भी मौजूद रहे। उन्होंने खेतों में जाकर फसल की स्थिति देखी और किसानों को हर संभव मदद का भरोसा दिया। ओलावृष्टि से हुए भारी नुकसान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर प्रशासन पर है कि सर्वे और मुआवजे की प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होती है।
इंदौर में युवक ने लगाई फांसी:दुकान से घर पहुंचा, फिर फंदे पर झूल गया, छोटे भाई ने परिवार को बताया

इंदौर के निरंजनपुर में रहने वाले एक युवक ने फांसी लगा ली। वह रात में किराना दुकान से अपने घर आया और यह कदम उठा लिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। लसूड़िया पुलिस के मुताबिक, 20 वर्षीय नयन पिता राम सिंह राय ने अपने घर में फांसी लगा ली। रिश्तेदारों ने बताया कि नयन रात में अपनी दुकान से घर पहुंचा था। करीब रात साढ़े नौ बजे उसके भाई मयंक ने उसे फंदे पर लटका हुआ देखा। नयन को फंदे से उतारने पर उसकी सांसें चल रही थीं, लेकिन अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार के लोगों ने बताया कि कमरे से किसी तरह का सुसाइड नोट नहीं मिला। पत्नी नहीं थी घर पर परिवार के अनुसार, नयन ने करीब एक साल पहले ही इलाके में रहने वाली युवती से प्रेम विवाह किया था। जब वह घर पहुंचा, तब उसकी पत्नी मायके में थी। वहीं, माता-पिता एक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। पुलिस के मुताबिक, संभवतः पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई थी, जिसके बाद नयन ने यह कदम उठाया। फिलहाल, परिवार के बयान के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
विदिशा के हैदरगढ़ में ओलावृष्टि-आंधी:खड़ी फसलें बिछीं, खलिहानों में रखी उपज को भी नुकसान

विदिशा जिले की ग्यारसपुर तहसील के हैदरगढ़ और आसपास के ग्रामीण इलाकों में शनिवार रात मौसम अचानक बदल गया। रात करीब 11 बजे तेज आंधी-तूफान के साथ बेर के आकार के ओले गिरे, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ। खेतों में तैयार खड़ी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज हवा और ओलावृष्टि से गेहूं और चने की खड़ी फसलें जमीन पर बिछ गईं। जिन किसानों की फसलें कटकर खलिहानों में रखी थीं, उन्हें भी भारी नुकसान की आशंका है। बारिश और ओलों के कारण कटी हुई फसलें भीग गईं, जिससे उनकी गुणवत्ता खराब होने का खतरा बढ़ गया है। इस प्राकृतिक आपदा का असर केवल खेतों तक ही सीमित नहीं रहा। गांवों में तेज हवाओं ने रिहायशी इलाकों को भी नुकसान पहुंचाया। कई कच्चे मकानों के कबेलू उड़ गए, जबकि टीन और फाइबर की चादरें हवा में उखड़कर दूर जा गिरीं। आंधी के कारण घरों की छतों पर रखा सामान भी बिखर गया। ग्रामीणों के अनुसार, हैदरगढ़ क्षेत्र के लगभग 4 से 5 गांव इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द नुकसान का सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
श्मशान की राशि से सरपंचों लगवाई स्ट्रीट लाइट:19 पंचायतों के कामों की होगी जांच, इंजीनियर उतरेंगे मैदान में

उमरिया जिले की 19 ग्राम पंचायतों में कुल 543 एलईडी स्ट्रीट लाइटों के नियम विरुद्ध लगाए जाने की शिकायतों के बाद अब उनके कार्यों की जांच शुरू कर दी गई है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभय सिंह ने मानपुर जनपद पंचायत की 6 ग्राम पंचायतों और करकेली जनपद पंचायत की 13 ग्राम पंचायतों में भौतिक सत्यापन के लिए उपयंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी है। निर्देश में कहा गया है कि 5वें वित्त आयोग की राशि खर्च करने से पहले ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार कर उसे पंचायत दर्पण पोर्टल पर दर्ज करना आवश्यक है। प्राथमिकता अनुसार श्मशान घाट विकास कार्यों पर राशि खर्च की जानी थी, लेकिन कई पंचायतों में इसके विपरीत स्ट्रीट लाइट का कार्य कराया गया। काम का तरीका देखा जाएगा जांच के दौरान उपयंत्री यह देखेंगे कि नए खंभे लगाए गए हैं या नहीं, वायरिंग जमीन के अंदर की गई है या नहीं, तकनीकी स्वीकृति और प्राक्कलन के अनुसार कार्य हुआ है या नहीं, तथा लाइटें चालू हालत में हैं या नहीं। उपयोगिता के आधार पर विस्तृत प्रतिवेदन जिला पंचायत को सौंपा जाएगा। कहां कितनी लगाई गईं करकेली जनपद पंचायत की 13 पंचायतों में 355 स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं। इनमें पठारीकला में 15, बिरुहलिया 22, कॉलोनी 34, महरोई 60, महिमार 30, बिलासपुर 31, अतरिया 22, अखड़ार 22, पथरहटा 45, बरहटा 21, करकेली 10, पिनौरा 18 और नरवार-25 में 25 लाइट शामिल हैं। वहीं मानपुर जनपद पंचायत की 6 पंचायतों में 188 स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं। इनमें दमोय 26, जनकपुरी 26, चितरांव 26, मझोखर 30, सकरिया 14 और गोरइया में 26 लाइट लगाई गई हैं।
10 दिन में तीन बार ऑपरेशन, महिला की मौत:छतरपुर के अस्पताल में महिलाओं का हंगामा; अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप

छतरपुर शहर के सागर रोड स्थित हॉस्पिटल में एक महिला की इलाज के दौरान मौत के बाद हंगामा हो गया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा। मृतका की पहचान सिया (40) पत्नी मुन्ना लाल अहिरवार, निवासी गौतम नगर सोरा रोड थाना कोतवाली के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक सिया को बच्चेदानी (यूट्रस) में गांठ की समस्या थी, जिसके इलाज के लिए उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 10 दिन में तीन बार ऑपरेशन, हालत बिगड़ती गई परिजनों का आरोप है कि 25 मार्च को सिया का पहला ऑपरेशन दूरबीन (लेप्रोस्कोपी) से किया गया था। इसके बाद उसी दौरान दूसरा ऑपरेशन हाथ से किया गया। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद भी उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ, बल्कि वह लगातार बिगड़ती चली गई। डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि पहले ऑपरेशन के दौरान आंत फंस गई है, जिसके चलते दोबारा सर्जरी करनी पड़ेगी। इसके बाद शनिवार को तीसरा ऑपरेशन किया गया। परिजनों के अनुसार सिया खुद चलकर ऑपरेशन थिएटर तक गई थी, लेकिन कुछ ही समय बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप, कार्रवाई की मांग मृतका के परिजनों ने डॉ. शोभित अहिरवार और अन्य डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार ऑपरेशन करने के कारण ही सिया की जान गई है। उनका कहना है कि सही इलाज नहीं मिलने से यह घटना हुई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। अस्पताल में हंगामा, स्टाफ मौके से गायब महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजन और रिश्तेदार आक्रोशित हो गए और अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। स्थिति बिगड़ते देख अस्पताल का स्टाफ मौके से गायब हो गया। परिजन अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए और न्याय की मांग करने लगे। पुलिस ने संभाला मोर्चा, जांच शुरू सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया। पुलिस ने परिजनों को समझाइश दी और मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पूरे मामले में जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है। घटना के बाद मृतका के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।
क्रिकेट खेलते-खेलते 3 दोस्तों ने साफ कर दी नदी:पॉकेट मनी से ग्लव्स-जूते खरीदे, लोग मजाक उड़ाते तो भी जुटे रहते, अब देश–दुनिया में चर्चा

भोपाल से 119 किलोमीटर दूर ब्यावरा के 3 दोस्तों की इन दिनों देश-दुनिया में चर्चा है। 20 और 18-18 साल के तीनों दोस्त एक ही मोहल्ले में रहते हैं। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर, जब लोग ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान कर रहे थे, तब इन्होंने अजनार नदी की सफाई का संकल्प लिया। तीनों को तैरना नहीं आता, फिर भी नदी में उतर गए। रोजमर्रा के काम की रील बनाकर अपलोड करने लगे। लोग ट्रोल करते और मजाक बनाते रहे, लेकिन ये हर दिन क्रिकेट खेलने का कहकर निकलते और नदी से गंदगी निकालते रहे। फरवरी-मार्च में परीक्षा के दौरान भी ये रोज सफाई करते रहे। नदी के एक घाट पर, जहां पहले कचरे का पहाड़ था, वहां अब इन्होंने पुताई कर दी है। वहां लोग घूमने आने लगे हैं। बीते दिनों मशहूर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने इनके काम को सराहा, तो देश-दुनिया की नजर इन पर पड़ी। कुछ लोगों ने कहा कि ये सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए ऐसा कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ब्यावरा पहुंचा और असली तस्वीर समझी। बिट्टू ने दिया नदी सफाई का आइडिया भास्कर की टीम जब ब्यावरा पहुंची तो तीनों दोस्त एक स्कूटी पर सवार होकर नदी के घाट जाने की तैयारी कर रहे थे। अब ये शहर में फेमस चेहरे हो गए हैं। सबसे मुख्य किरदार है बिट्टू तबाही उर्फ सुरेंद्र चौधरी। दो अन्य किरदार हैं कृष्णा वर्मा और कृष्णा अग्रवाल। बातचीत की शुरूआत करते हुए कृष्णा ने बताया कि ये आयडिया बिट्टू का था। 26 जनवरी को बिट्टू ने कहा कि क्यों न हम कुछ ऐसा करें कि लोगों को लगे कि हमने कुछ बदलाव लाया है। हम यहां क्रिकेट खेलने आते थे। कई बार घाट पर बैठने का मन करता था लेकिन इतनी गंदगी होती थी कि बैठ नहीं पाते थे। उसके बाद से हम लोग अबतक 3 घाटों की सफाई कर चुके हैं। लोग मजाक उड़ाते थे लेकिन हम जुटे रहे कृष्णा की बात को आगे बढ़ाते हुए बिट्टू ने कहा कि हमने नदी सफाई की बात सोच तो ली, लेकिन दिक्कत ये थी हम तीनों को तैरना नहीं आता था। फिर भी हम पीछे नहीं हटे। हमने ग्लव्स, जूते और एक जाल का इंतजाम किया। फिर कचरा खींचने के लिए एक टूल बनवाया। 26 जनवरी के बाद एक दिन ऐसा नहीं गुजरा कि हम घाट पर न आएं हों। एक बार नदी में काम करते हुए मेरे पैरों पर सांप आ गया था। मेरे दोस्त कृष्णा ने मुझे बताया। वो तो अच्छा हुआ कि मैं बड़े जूते पहना हुआ था। पैसों का इंतजाम कैसे करते हो? इस सवाल पर बिट्टू ने कहा कि पॉकेट मनी को बचाकर अपने लिए हाथ में पहनने वाले दस्ताने, जूते और जाल खरीदते हैं। कई बार सोशल मीडिया पर भी हमें थोड़ी मदद मिली है। अब तक हम सफाई में अपने करीब 30 हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। हमें जब कोई काम करना है तो हम 15 दिन से उसके लिए पैसे जोड़ते हैं। ड्रम, पेंट और बाकी टूल पर अब तक 30 हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। स्किन इंफेक्शन हुआ, कई बार बुखार भी आया गंदगी के कारण तीनों लड़कों को हाथ-पैरों में स्किन इंफेक्शन भी हो गया है। वे कहते हैं कि कई बार बुखार भी आ जाता है। हमें भी पता है कि ये सब गंदे पानी में ज्यादा समय तक रहने के कारण ही हो रहा है। लेकिन एक बार यदि हम इसे साफ करने में आगे बढ़ गए तो शहर के लिए ये बहुत बड़ा काम हो जाएगा। बिट्टू कहता है नदी से जो कचरा निकला है, वो हमने फेंका नहीं है। घाट के पास ही इसे दबाकर रखा है। हम चाहते हैं कि इस कचरे को रीसाइकिल करके कहीं इस्तेमाल किया जा सके। आजकल तो सड़क बनाने में भी प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल हो रहा है। परीक्षाओं के दौरान भी काम करते रहे बिट्टू के दूसरे साथी कृष्णा वर्मा और कृष्णा अग्रवाल दोनों बारहवीं क्लास में पढ़ रहे थे। फरवरी-मार्च में उनकी परीक्षाएं भी थीं। हमने पूछा परीक्षाओं के दौरान कैसे काम किया? तो जवाब मिला कि इस दौरान भी रोजाना शाम को घाट पर आते थे। एक भी दिन हम इस काम से गैरहाजिर नहीं रहे। घर वालों को भी कभी नहीं बताया। घर वाले जब भी पूछते तो यही कहते कि थोड़ा रिलेक्स होने के लिए खेलने जा रहे हैं। मां-पिता से कहकर निकलते-क्रिकेट खेलने जा रहे हैं बिट्टू और कृष्णा कहते हैं कि वो बीते दो ढाई महीने से नदी की सफाई के रील सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अपलोड कर रहे हैं। लेकिन उनके माता–पिता सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करते। उन्हें कभी ये पता नहीं लगा कि वे क्या करते हैं? हम तो घर से यही कहकर निकलते हैं कि हम क्रिकेट खेलने जा रहे हैं। हां, बीते कुछ दिनों से जब से महिंद्रा जी ने हमारे काम की सोशल मीडिया पर तारीफ की है, तब से कई लोग हमसे अच्छे से बात करते हैं। कलेक्टर ने भी हमें बुलाकर सम्मान किया। स्थानीय विधायक ने भी हमें बुलाया है। प्रशासन भी अब इन घाटों पर जेसीबी से कचरा हटवाने में जुट गया है। 15 नाले, पूरे शहर का सीवरेज और कचरा भी इसी नदी में ब्यावरा शहर के बीचों बीच से बहने वाली ये नदी प्लास्टिक कचरे से अटी पड़ी है। जहां नजर डालो वहीं से सीवरेज मिलता दिख रहा है। इन लड़कों ने बीते दो महीने में नदी के 3 घाटों पर तस्वीर बदलने की कोशिश की है। इन्होंने घाट की सीढ़ियों की सफाई करके यहां पुताई की। घाटों पर कचरा न फेंके के पोस्टर लगाए वहीं घाट पर कचरा फेंकने के लिए दो ड्रम रखे। तीनों दोस्त रोज ड्रम का कचरा खाली करते हैं, लोगों से कहते हैं कचरा बाहर न फेंके। इनकी कोशिश के बाद अब सरकारी अमला भी एक्टिव होता दिख रहा है। नगर पालिका ब्यावरा के सीएमओ इकरार अहमद अपनी टीम के साथ ऐसे ही एक घाट पर पहुंचे थे। अहमद कहते हैं कि अजनार नदी का उद्गम स्थल यहां से 15 किलोमीटर दूर है। पूरे शहर का सीवरेज और छोटे-बड़े नालों की गंदगी नदी में मिलती है। सीवरेज को इसमें मिलने से रोकने
एमपी में विधायकों को सजा के 5 चर्चित मामले:सिर्फ एक महिला विधायक की सदस्यता हुई थी समाप्त, दतिया MLA का केस भी कोर्ट पर निर्भर

दतिया सीट से कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती को फर्जीवाडे़ के मामले में दिल्ली की राउज अवेन्यू कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने दतिया सीट रिक्त घोषित करने की सूचना चुनाव आयोग को भेजते हुए गजट नोटिफिकेशन भी कर दिया। अब राजेन्द्र भारती इस सजा और सदस्यता खत्म करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की तैयारी में हैं। सोमवार को उनकी याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हो सकती है। मध्य प्रदेश में विधायकों को आपराधिक मामलों में सजा के ऐसे पांच प्रमुख मामले हैं जिनमें न्यायालय से विधायकों को सजा हुई, विधानसभा सचिवालय ने सीट रिक्त घोषित की लेकिन, उच्च अदालतों से कुछ विधायकों को राहत मिल गई तो उनकी विधायकी बच गई। लेकिन, एक विधायक की सदस्यता चली गई थी। 1. आशा रानी सिंह (विधायक,बिजावर) छतरपुर जिले के बिजावर सीट से भाजपा विधायक आशा रानी सिंह को 2011 में एक नौकरानी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई थी। उनके पति पर नौकरानी उनकी सजा के बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त की और सीट रिक्त घोषित की थी। भाजपा की पूर्व विधायक आशारानी सिंह को उनकी घरेलू सहायिका (तिजिया बाई) को प्रताड़ित करने और उसे आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी पाया गया था। 10 साल की सजा के बाद गई थी विधायकी 31 जनवरी 2011 को छतरपुर की एक अदालत ने उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने के जुर्म में 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। सजा के तुरंत बाद उनकी सदस्यता खतरे में आ गई थी, लेकिन उस समय ‘लिली थॉमस’ फैसला लागू नहीं था। हालांकि, जेल जाने के कारण और सजा की अवधि लंबी होने के कारण 31 अक्टूबर 2013 को उनकी सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया था। आशारानी सिंह ने हाई कोर्ट में अपील की थी, लेकिन उन्हें सजा पर स्टे नहीं मिला, जिसके कारण उनकी सदस्यता नहीं बच सकी और 31 अक्टूबर 2013 को उनकी सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया था। 2. प्रहलाद लोधी (विधायक, पवई) भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी का मामला मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय और न्यायपालिका के बीच खींचतान का एक बड़ा उदाहरण बना। 31 अक्टूबर 2019 को भोपाल की विशेष अदालत (एमपी-एमएलए कोर्ट) ने लोधी को साल 2014 के एक मामले में 2 साल की जेल और सजा सुनाई थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने अवैध रेत उत्खनन पर कार्रवाई करने गए पवई के तत्कालीन तहसीलदार के साथ मारपीट की थी। कोर्ट से मिला स्टे तो बच गई सदस्यता विधानसभा सचिवालय ने इस सजा के आधार पर 2 नवंबर 2019 को उनकी सदस्यता रद्द करने की अधिसूचना जारी कर दी थी। इसके बाद प्रहलाद लोधी हाई कोर्ट पहुंचे और 7 नवंबर 2019 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी सजा पर स्टे दे दिया। इस स्टे के आधार पर काफी कानूनी विवाद हुआ, लेकिन अंततः सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और हाई कोर्ट के आदेश के बाद उनकी सदस्यता बहाल हुई और वे विधायक बने रहे। कोर्ट से राहत मिलने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने तत्कालीन स्पीकर के फैसले पर सवाल उठाए थे सत्यमेव जयते! साथी विधायक प्रहलाद लोधी को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत मिली है। स्पीकर ने विधायक को असंवैधानिक तरीके से अयोग्य घोषित किया था। प्रदेश सरकार ने घटिया हरकत की और एक महीने तक क्षेत्र की जनता को अपने जनप्रतिनिधि से वंचित रखने का महापाप किया। #MP_मांगे_जवाब— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) December 6, 2019 3. खरगापुर विधायक का निर्वाचन हो गया था शून्य टीकमगढ़ जिले की खरगापुर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक राहुल सिंह लोधी ने 2018 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। उनके खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी चंदा सिंह गौर ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी। याचिका में दो मुख्य आरोप लगाए गए थे। जिनमें, राहुल सिंह लोधी ने अपने नामांकन पत्र (एफिडेविट) में यह जानकारी छिपाई थी कि उनकी फर्म ‘आरआर कंस्ट्रक्शन’ का सरकार के साथ अनुबंध था, जो कि लाभ के पद के अंतर्गत आता है। उन्होनें चुनाव प्रचार के दौरान निर्धारित सीमाओं और नियमों का उल्लंघन किया गया था। हाई कोर्ट का फैसला और तारीख मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच के जस्टिस नमिन्द्रा सिंह ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए राहुल सिंह लोधी के 2018 के निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया। कोर्ट ने माना कि नामांकन पत्र में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना ‘जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951’ की धारा 100 के तहत चुनाव रद्द करने का ठोस आधार है। विधानसभा सचिवालय की कार्रवाई हाई कोर्ट के आदेश की प्रति मिलने के बाद, नवंबर 2022 में मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी की। इसके तहत राहुल सिंह लोधी की सदस्यता समाप्त कर दी गई और खरगापुर विधानसभा सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया। इसकी सूचना तत्काल चुनाव आयोग को भेजी गई थी। सुप्रीम कोर्ट से ‘स्टे’ और सदस्यता की बहाली विधानसभा से सदस्यता रद्द होने के तुरंत बाद राहुल सिंह लोधी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद उनकी सदस्यता बहाल तो हो गई, लेकिन कोर्ट ने उन पर कुछ शर्तें लगाई थीं। वे सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले सकते थे, लेकिन अंतिम फैसला आने तक उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं था और वे विधायक के रूप में मिलने वाले कुछ भत्तों के लिए भी पात्र नहीं थे। 4. मुकेश मल्होत्रा (विधायक, विजयपुर) विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा को मार्च 2026 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एक मामले में दोषी मानते हुए चुनाव को शून्य घोषित कर दिया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने नामांकन पत्र में अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई थी। कोर्ट ने माना कि मतदाता को उम्मीदवार के आपराधिक इतिहास को जानने का अधिकार है और इसे छिपाना ‘भ्रष्ट आचरण’ की श्रेणी में आता है। राज्यसभा चुनाव में नहीं दे पाएंगे वोट, विधायकी बची रहेगी मुकेश मल्होत्रा ने एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बैंच के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। जिसपर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए उन्हें विधायक
हाईकोर्ट ने छुट्टी के दिन सुनवाई कर पुलिस को फटकारा:नाबालिग के अपहरण मामले में हाईकोर्ट ने कहा- 'बच्ची को हर हाल में पेश करो'

23 फरवरी को एक नाबालिग किशोरी का अपहरण हुआ था। पुलिस एफआईआर करने में नानुकुर करती रही। थाने पहुंचे पीड़िता के चाचा को पीट भी दिया। बाद में एफआईआर दर्ज हुई तो अपहरण के मामले में भी अज्ञात आरोपित बता दिए गए, जबकि किशोरी के परिवार वाले आरोपितों का नाम पुलिस को बताते रहे। बालिका के पिता ने हाई कोर्ट की शरण ली। मजदूर पिता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर शनिवार को छुट्टी के बाद भी सुनवाई की गई। हाई कोर्ट की डबल बेंच ने मामले की न केवल अवकाश के दिन सुनवाई की, बल्कि पुलिस को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने आदेश जारी किया कि पुलिस बालिका के साथ तमाम आरोपितों को भी कोर्ट में 6 अप्रैल को पेश करे। महू के बडगोंदा थाना क्षेत्र में अनुसूचित जाति की नाबालिग का दबंगों द्वारा अपहरण करने की शिकायत मजदूर पिता ने की है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज की, लेकिन पहले दबंगों का नाम गायब किया। महीनेभर में भी बालिका को तलाशने की कोई कोशिश नहीं की। पीड़िता के पिता के अनुसार पवन सिंह उसे उठाकर ले गया है। बालिका की उम्र 17 साल 3 माह है और वह पवन सिंह के कब्जे में है। एफआईआर में नाम न होने पर नाराजगी पीड़िता के पिता ने अभिभाषक शुभम मांडिल और गौरव गुप्ता के जरिए हाई कोर्ट के समक्ष बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। कोर्ट में इस दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी सरकार की ओर से उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नामजद एफआईआर नहीं करने को लेकर फटकार भी लगाई। साथ ही सरकार को निर्देश जारी किए कि सोमवार को पुलिस नाबालिग, जो कि पवन सिंह की अवैध हिरासत में है, उसे किसी भी हालत में कोर्ट के समक्ष पेश करे। कोर्ट के आदेश के बाद बदला पुलिस का रवैया डेढ़ माह पहले अपनी बेटी के अपहरण की एफआईआर कराने वाले पिता से पुलिस ने कोई जानकारी नहीं ली थी। वहीं शनिवार को हाई कोर्ट में सुनवाई होने और हाई कोर्ट से आदेश के तुरंत बाद पुलिस का रवैया बदल गया। 6 अप्रैल को बालिका को कोर्ट के समक्ष पेश करने के आदेश होने की बात सामने आते ही बडगोंदा पुलिस तुरंत पीड़िता के घर पहुंच गई और उसके परिवारजनों से घटना की जानकारी लेने की कोशिश करती रही।









