एमपी में विधायकों को सजा के 5 चर्चित मामले:सिर्फ एक महिला विधायक की सदस्यता हुई थी समाप्त, दतिया MLA का केस भी कोर्ट पर निर्भर

दतिया सीट से कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती को फर्जीवाडे़ के मामले में दिल्ली की राउज अवेन्यू कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने दतिया सीट रिक्त घोषित करने की सूचना चुनाव आयोग को भेजते हुए गजट नोटिफिकेशन भी कर दिया। अब राजेन्द्र भारती इस सजा और सदस्यता खत्म करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की तैयारी में हैं। सोमवार को उनकी याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हो सकती है। मध्य प्रदेश में विधायकों को आपराधिक मामलों में सजा के ऐसे पांच प्रमुख मामले हैं जिनमें न्यायालय से विधायकों को सजा हुई, विधानसभा सचिवालय ने सीट रिक्त घोषित की लेकिन, उच्च अदालतों से कुछ विधायकों को राहत मिल गई तो उनकी विधायकी बच गई। लेकिन, एक विधायक की सदस्यता चली गई थी। 1. आशा रानी सिंह (विधायक,बिजावर) छतरपुर जिले के बिजावर सीट से भाजपा विधायक आशा रानी सिंह को 2011 में एक नौकरानी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई थी। उनके पति पर नौकरानी उनकी सजा के बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त की और सीट रिक्त घोषित की थी। भाजपा की पूर्व विधायक आशारानी सिंह को उनकी घरेलू सहायिका (तिजिया बाई) को प्रताड़ित करने और उसे आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी पाया गया था। 10 साल की सजा के बाद गई थी विधायकी 31 जनवरी 2011 को छतरपुर की एक अदालत ने उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने के जुर्म में 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। सजा के तुरंत बाद उनकी सदस्यता खतरे में आ गई थी, लेकिन उस समय ‘लिली थॉमस’ फैसला लागू नहीं था। हालांकि, जेल जाने के कारण और सजा की अवधि लंबी होने के कारण 31 अक्टूबर 2013 को उनकी सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया था। आशारानी सिंह ने हाई कोर्ट में अपील की थी, लेकिन उन्हें सजा पर स्टे नहीं मिला, जिसके कारण उनकी सदस्यता नहीं बच सकी और 31 अक्टूबर 2013 को उनकी सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया था। 2. प्रहलाद लोधी (विधायक, पवई) भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी का मामला मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय और न्यायपालिका के बीच खींचतान का एक बड़ा उदाहरण बना। 31 अक्टूबर 2019 को भोपाल की विशेष अदालत (एमपी-एमएलए कोर्ट) ने लोधी को साल 2014 के एक मामले में 2 साल की जेल और सजा सुनाई थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने अवैध रेत उत्खनन पर कार्रवाई करने गए पवई के तत्कालीन तहसीलदार के साथ मारपीट की थी। कोर्ट से मिला स्टे तो बच गई सदस्यता विधानसभा सचिवालय ने इस सजा के आधार पर 2 नवंबर 2019 को उनकी सदस्यता रद्द करने की अधिसूचना जारी कर दी थी। इसके बाद प्रहलाद लोधी हाई कोर्ट पहुंचे और 7 नवंबर 2019 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी सजा पर स्टे दे दिया। इस स्टे के आधार पर काफी कानूनी विवाद हुआ, लेकिन अंततः सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और हाई कोर्ट के आदेश के बाद उनकी सदस्यता बहाल हुई और वे विधायक बने रहे। कोर्ट से राहत मिलने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने तत्कालीन स्पीकर के फैसले पर सवाल उठाए थे सत्यमेव जयते! साथी विधायक प्रहलाद लोधी को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत मिली है। स्पीकर ने विधायक को असंवैधानिक तरीके से अयोग्य घोषित किया था। प्रदेश सरकार ने घटिया हरकत की और एक महीने तक क्षेत्र की जनता को अपने जनप्रतिनिधि से वंचित रखने का महापाप किया। #MP_मांगे_जवाब— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) December 6, 2019 3. खरगापुर विधायक का निर्वाचन हो गया था शून्य टीकमगढ़ जिले की खरगापुर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक राहुल सिंह लोधी ने 2018 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। उनके खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी चंदा सिंह गौर ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी। याचिका में दो मुख्य आरोप लगाए गए थे। जिनमें, राहुल सिंह लोधी ने अपने नामांकन पत्र (एफिडेविट) में यह जानकारी छिपाई थी कि उनकी फर्म ‘आरआर कंस्ट्रक्शन’ का सरकार के साथ अनुबंध था, जो कि लाभ के पद के अंतर्गत आता है। उन्होनें चुनाव प्रचार के दौरान निर्धारित सीमाओं और नियमों का उल्लंघन किया गया था। हाई कोर्ट का फैसला और तारीख मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच के जस्टिस नमिन्द्रा सिंह ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए राहुल सिंह लोधी के 2018 के निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया। कोर्ट ने माना कि नामांकन पत्र में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना ‘जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951’ की धारा 100 के तहत चुनाव रद्द करने का ठोस आधार है। विधानसभा सचिवालय की कार्रवाई हाई कोर्ट के आदेश की प्रति मिलने के बाद, नवंबर 2022 में मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी की। इसके तहत राहुल सिंह लोधी की सदस्यता समाप्त कर दी गई और खरगापुर विधानसभा सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया। इसकी सूचना तत्काल चुनाव आयोग को भेजी गई थी। सुप्रीम कोर्ट से ‘स्टे’ और सदस्यता की बहाली विधानसभा से सदस्यता रद्द होने के तुरंत बाद राहुल सिंह लोधी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद उनकी सदस्यता बहाल तो हो गई, लेकिन कोर्ट ने उन पर कुछ शर्तें लगाई थीं। वे सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले सकते थे, लेकिन अंतिम फैसला आने तक उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं था और वे विधायक के रूप में मिलने वाले कुछ भत्तों के लिए भी पात्र नहीं थे। 4. मुकेश मल्होत्रा (विधायक, विजयपुर) विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा को मार्च 2026 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एक मामले में दोषी मानते हुए चुनाव को शून्य घोषित कर दिया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने नामांकन पत्र में अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई थी। कोर्ट ने माना कि मतदाता को उम्मीदवार के आपराधिक इतिहास को जानने का अधिकार है और इसे छिपाना ‘भ्रष्ट आचरण’ की श्रेणी में आता है। राज्यसभा चुनाव में नहीं दे पाएंगे वोट, विधायकी बची रहेगी मुकेश मल्होत्रा ने एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बैंच के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। जिसपर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए उन्हें विधायक
हाईकोर्ट ने छुट्टी के दिन सुनवाई कर पुलिस को फटकारा:नाबालिग के अपहरण मामले में हाईकोर्ट ने कहा- 'बच्ची को हर हाल में पेश करो'

23 फरवरी को एक नाबालिग किशोरी का अपहरण हुआ था। पुलिस एफआईआर करने में नानुकुर करती रही। थाने पहुंचे पीड़िता के चाचा को पीट भी दिया। बाद में एफआईआर दर्ज हुई तो अपहरण के मामले में भी अज्ञात आरोपित बता दिए गए, जबकि किशोरी के परिवार वाले आरोपितों का नाम पुलिस को बताते रहे। बालिका के पिता ने हाई कोर्ट की शरण ली। मजदूर पिता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर शनिवार को छुट्टी के बाद भी सुनवाई की गई। हाई कोर्ट की डबल बेंच ने मामले की न केवल अवकाश के दिन सुनवाई की, बल्कि पुलिस को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने आदेश जारी किया कि पुलिस बालिका के साथ तमाम आरोपितों को भी कोर्ट में 6 अप्रैल को पेश करे। महू के बडगोंदा थाना क्षेत्र में अनुसूचित जाति की नाबालिग का दबंगों द्वारा अपहरण करने की शिकायत मजदूर पिता ने की है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज की, लेकिन पहले दबंगों का नाम गायब किया। महीनेभर में भी बालिका को तलाशने की कोई कोशिश नहीं की। पीड़िता के पिता के अनुसार पवन सिंह उसे उठाकर ले गया है। बालिका की उम्र 17 साल 3 माह है और वह पवन सिंह के कब्जे में है। एफआईआर में नाम न होने पर नाराजगी पीड़िता के पिता ने अभिभाषक शुभम मांडिल और गौरव गुप्ता के जरिए हाई कोर्ट के समक्ष बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। कोर्ट में इस दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी सरकार की ओर से उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नामजद एफआईआर नहीं करने को लेकर फटकार भी लगाई। साथ ही सरकार को निर्देश जारी किए कि सोमवार को पुलिस नाबालिग, जो कि पवन सिंह की अवैध हिरासत में है, उसे किसी भी हालत में कोर्ट के समक्ष पेश करे। कोर्ट के आदेश के बाद बदला पुलिस का रवैया डेढ़ माह पहले अपनी बेटी के अपहरण की एफआईआर कराने वाले पिता से पुलिस ने कोई जानकारी नहीं ली थी। वहीं शनिवार को हाई कोर्ट में सुनवाई होने और हाई कोर्ट से आदेश के तुरंत बाद पुलिस का रवैया बदल गया। 6 अप्रैल को बालिका को कोर्ट के समक्ष पेश करने के आदेश होने की बात सामने आते ही बडगोंदा पुलिस तुरंत पीड़िता के घर पहुंच गई और उसके परिवारजनों से घटना की जानकारी लेने की कोशिश करती रही।
High Court Orders Produce Child Immediately

इंदौर3 घंटे पहले कॉपी लिंक 23 फरवरी को एक नाबालिग किशोरी का अपहरण हुआ था। पुलिस एफआईआर करने में नानुकुर करती रही। थाने पहुंचे पीड़िता के चाचा को पीट भी दिया। बाद में एफआईआर दर्ज हुई तो अपहरण के मामले में भी अज्ञात आरोपित बता दिए गए, जबकि किशोरी के परिवार वाले आरोपितों का नाम पुलिस को बताते रहे। बालिका के पिता ने हाई कोर्ट की शरण ली। मजदूर पिता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर शनिवार को छुट्टी के बाद भी सुनवाई की गई। हाई कोर्ट की डबल बेंच ने मामले की न केवल अवकाश के दिन सुनवाई की, बल्कि पुलिस को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने आदेश जारी किया कि पुलिस बालिका के साथ तमाम आरोपितों को भी कोर्ट में 6 अप्रैल को पेश करे। महू के बडगोंदा थाना क्षेत्र में अनुसूचित जाति की नाबालिग का दबंगों द्वारा अपहरण करने की शिकायत मजदूर पिता ने की है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज की, लेकिन पहले दबंगों का नाम गायब किया। महीनेभर में भी बालिका को तलाशने की कोई कोशिश नहीं की। पीड़िता के पिता के अनुसार पवन सिंह उसे उठाकर ले गया है। बालिका की उम्र 17 साल 3 माह है और वह पवन सिंह के कब्जे में है। एफआईआर में नाम न होने पर नाराजगी पीड़िता के पिता ने अभिभाषक शुभम मांडिल और गौरव गुप्ता के जरिए हाई कोर्ट के समक्ष बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। कोर्ट में इस दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी सरकार की ओर से उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नामजद एफआईआर नहीं करने को लेकर फटकार भी लगाई। साथ ही सरकार को निर्देश जारी किए कि सोमवार को पुलिस नाबालिग, जो कि पवन सिंह की अवैध हिरासत में है, उसे किसी भी हालत में कोर्ट के समक्ष पेश करे। कोर्ट के आदेश के बाद बदला पुलिस का रवैया डेढ़ माह पहले अपनी बेटी के अपहरण की एफआईआर कराने वाले पिता से पुलिस ने कोई जानकारी नहीं ली थी। वहीं शनिवार को हाई कोर्ट में सुनवाई होने और हाई कोर्ट से आदेश के तुरंत बाद पुलिस का रवैया बदल गया। 6 अप्रैल को बालिका को कोर्ट के समक्ष पेश करने के आदेश होने की बात सामने आते ही बडगोंदा पुलिस तुरंत पीड़िता के घर पहुंच गई और उसके परिवारजनों से घटना की जानकारी लेने की कोशिश करती रही। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
ग्वालियर हाईकोर्ट का OBC क्रीमीलेयर को लेकर फैसला:कोर्ट ने कहा-पति की सैलरी से नहीं बल्कि मां-पिता की सामाजिक-आर्थिक दशा से तय होगाी ओबीसी क्रीमीलेयर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने ओबीसी क्रीमीलेयर से जुड़ी एक याचिका पर शनिवार को बड़ा व अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने इस फैसले के जरिए स्पष्ट किया है कि किसी महिला अभ्यर्थी की क्रीमीलेयर तय करने में उसकी पति की आय को आधार नहीं माना जा सकता है। बल्कि क्रीमी लेयर तय करने में महिला अभ्यर्थी के मां-पिता की सामाजिक व आर्थिक स्थिति को आधार मानकर देखा जाएगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि महिला अभ्यर्थी की खुद की इनकम और पति की इनकम को उस समय तक नहीं जोड़ा जा सकता है तब तक कि पति क्लास-1 अधिकारी न हो। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया है कि महिला अभ्यर्थी के पिता क्लास थर्ड अधिकारी थे और माता गृहिणी इसलिए उसे किसी भी हालत में ओबीसी क्रीमीलेयर आरक्षक का फायदा नहीं मिल सकता है। इसके साथ ही याचिका को खारिज कर दिया गया है। यह है पूरा मामला शनिवार को कोर्ट ने ओबीसी क्रीमीलेयर को लेकर जो फैसला दिया है। दरअसल यह मामला सहायक प्राध्यापक (लॉ) पद पर नियुक्ति से पूरी तरह जुड़ा है। कोर्ट में दायर की गई याचिका में याचिकाकर्ता सुनीता यादव ने दावा किया था कि इस पद के लिए चयनित महिला अभ्यर्थी गरिमा राठौर क्रीमीलेयर में आती हैं, क्योंकि उनके पति सिविल जज हैं। साथ ही उनके परिवार की इनकम तय मानक मतलब निर्धारित सीमा से कहीं अधिक है। याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि उसे 2021 से वरिष्ठता का लाभ दिया जाए। पर कोर्ट ने क्रीमी लेयर को अच्छी तरह परिभाषित कर पूरे मामले को स्पष्ट करते हुए याचिका को खारिज कर दिया है। साल 2021 से वरिष्ठता का लाभ भी मांगा याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की थी कि चयनित अभ्यर्थी गरिमा राठौर के पति सिविल जज हैं और उसकी खुद की भी आय है। इस आधार पर परिवार की कुल आय क्रीमी लेयर की सीमा से अधिक हो जाती है। इसलिए वह OBC (महिला) आरक्षित पद की पात्र नहीं थी। साथ ही अपनी प्रमोशन को लेकर तर्क दिया कि यदि उस अभ्यर्थी को नियुक्ति नहीं दी जाती, तो उन्हें ही 2021 में नियुक्ति मिलती, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। हालांकि बाद में सुनीता यादव को 2023 में नियुक्ति मिल गई, लेकिन उन्होंने कोर्ट से मांग की कि उन्हें 2021 से नियुक्ति मानी जाए। और उसी आधार पर वरिष्ठता व अन्य लाभ दिए जाएं। पर कोर्ट ने यह नहीं माना है।
इंदौर में 10 करोड़ के कार्यों का भूमिपूजन:विधानसभा 1 के वार्ड 7 को मिली सौगात, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बोले- इंदौर ने विकास के नए आयाम छुए

रविवार को नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा-1 के वार्ड क्रमांक 7 में 10 करोड़ रुपए से अधिक लागत के विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार आने के बाद इंदौर शहर ने विकास के नए आयाम छुए हैं। यह सब इंदौरवासियों के सहयोग, इच्छाशक्ति और शहर को आगे बढ़ाने के दृढ़ संकल्प का परिणाम है। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि सन 2000 के पहले और बाद के इंदौर में जमीन-आसमान का अंतर है। पहले नंदा नगर से अन्नपूर्णा या खजराना जाने में एक से डेढ़ घंटा लग जाता था, क्योंकि सड़कें 12 से 15 फीट चौड़ी थीं। आज चौड़ी सड़कों का जाल बिछ चुका है और शहर के किसी भी कोने में कम समय में पहुंचना संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने शहर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है और इंदौर कई मायनों में देश-दुनिया में अव्वल है। उन्होंने कहा कि महापौर ने शहर के लिए भविष्य का विजन तैयार किया है और आने वाले समय में बेहतर सौगातें मिलेंगी। मेरा बेटा आकाश विधानसभा-1 की गलियों में घूमकर लोगों की समस्याओं की जानकारी लेता है और समाधान की रूपरेखा बनाकर मुझे देता है, जिससे समस्याओं को हल करने में मदद मिलती है। हमारी कोशिश है कि भविष्य में विधानसभा समस्या मुक्त बने। मंत्री विजयवर्गीय ने बताया कि इस वार्ड में ऑपरेशन सिंदूर से प्रेरित होकर एक गार्डन बनाया गया है, जिसका शुभारंभ किया गया। यहां योग सेंटर भी बनाया गया है, जिससे शौर्य और पराक्रम के साथ संस्कृति के दर्शन होंगे तथा बेहतर स्वास्थ्य के साथ तन-मन प्रसन्न रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के शहरों में रिक्त स्थानों पर घना वृक्षारोपण किया जा रहा है, जो ऑक्सीजन के बेहतर स्रोत बनेंगे। इंदौर के बच्चे बड़े मेट्रो शहरों के मुकाबले अधिक प्रसन्न रहते हैं, क्योंकि वे गार्डनों में खेलते हैं, जबकि बड़े शहरों के बच्चे मल्टियों में कैद होकर रह जाते हैं। उन्होंने बताया कि नगर निगम को विकास कार्यों के लिए अलग से करीब 30 करोड़ रुपए दिए गए हैं और पार्षदों से मन लगाकर विकास कार्य करने का आह्वान किया। दोगुना जल और मजबूत कल इस अवसर पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि मंत्री विजयवर्गीय ने 25 साल का विजन लेकर काम करने को कहा है। इसी उद्देश्य से शहर का विकास किया जा रहा है। वर्तमान में इंदौर शहर में 4.5 एमएलडी पानी आ रहा है और आने वाले तीन वर्षों में इतना ही अतिरिक्त नर्मदा जल मिलेगा। इससे 2029 तक शहर में आने वाले 25 वर्षों तक पानी की समस्या का समाधान हो जाएगा। उन्होंने बताया कि 1500 करोड़ रुपए लोन के माध्यम से जुटाए जाएंगे और इतनी ही राशि राज्य व केंद्र सरकार से मिलेगी। उन्होंने कहा कि हमारा नारा ‘दोगुना जल और मजबूत कल’ है। शहर की आबोहवा बेहतर बनाने के लिए पिछले चार वर्षों में करीब 100 सिटी फॉरेस्ट बनाए गए हैं। बेहतर सुविधाओं वाले 22 बगीचे विकसित किए जा रहे हैं, जो शहर के लिए फेफड़ों का कार्य करेंगे। 10 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों की सौगात कार्यक्रम में 7 स्थानों पर 3 करोड़ 48 लाख रुपए के विकास कार्यों का भूमिपूजन तथा 6 करोड़ 64 लाख रुपए से अधिक के 24 विकास कार्यों का लोकार्पण किया गया। भूमिपूजन कार्यों में पीलिया खाल में 6 लाख रुपए की लागत से आंगनवाड़ी निर्माण, अर्जुन पल्टन मेन रोड पर 25 लाख रुपए से सीमेंट कंक्रीट सड़क, जनता कॉलोनी गली नंबर 2 एवं 4 में 18 लाख रुपए से ड्रेनेज लाइन, 2 करोड़ रुपए से स्मार्ट सिटी नर्मदा पानी संपवेल, नीलकंठ कॉलोनी में 23 लाख रुपए से सामुदायिक भवन, जनता कॉलोनी व कंडलीपुरा में 60 लाख रुपए से रिटेनिंग वॉल, तथा छत्रपति नगर में 16 लाख रुपए से सीमेंट कंक्रीट सड़क निर्माण शामिल रहे। लोकार्पण कार्यों में जनता कॉलोनी, कंडलीपुरा, नीलकंठ कॉलोनी, छत्रपति नगर, राधा नगर, बालदा, अग्रसेन नगर, महावीर बाग, रामगंज जिंसी सहित विभिन्न क्षेत्रों में सीमेंट कंक्रीट सड़क, ड्रेनेज लाइन, उद्यान, योगशाला, पेवर ब्लॉक, स्कूल निर्माण और संजीवनी क्लिनिक सहित अनेक विकास कार्यों का लोकार्पण किया गया।
राजगढ़ में ओलावृष्टि से लोहे-सीमेंट की चद्दरों में छेद हुए:खेतों में फसलों को ढकने वाले त्रिपाल भी फटे, 15 मिनट ओला गिरने से भारी नुकसान

राजगढ़ जिले में शनिवार शाम तेज आंधी और बारिश के साथ भारी ओलावृष्टि हुई। बड़े-बड़े ओले गिरने से कई घरों की लोहे और सीमेंट की चद्दरें टूट गईं, जिनमें बड़े छेद हो गए। कुछ ही देर में जमीन पर ओलों की सफेद परत बिछ गई। जिले के माचलपुर के बाढ़गांव, रामगढ़, कोड़क्या और पीपल्या कुल्मी और खिलचीपुर क्षेत्र के ढाबली, सतनखेड़ी, ढाबला, मोखमपुरा, सेदरी, सहित कुरावर, सुठालिया, गिंदौरहाट, सहित कई गांवों में शाम करीब 6 बजे के बाद ओलावृष्टि शुरू हुई। लगभग 15 मिनट तक लगातार ओले गिरे, जिसके साथ तेज बारिश भी हुई। ग्रामीणों ने बताया कि खेतों और खलिहानों में फसलों को बचाने के लिए डाले गए त्रिपाल भी ओलों की तेज मार से फट गए। घरों की छतों पर लगी लोहे और सीमेंट की चद्दरों को भी भारी नुकसान पहुंचा, जिससे वे टूट गईं और उनमें छेद हो गए। मौसम विभाग के अनुसार, इस दौरान हवाएं लगभग 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलीं। विभाग ने आगामी दिनों में भी तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है। शनिवार को राजगढ़ में न्यूनतम तापमान 16.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो मध्यप्रदेश में सबसे कम था। अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
पिता की मौत के बाद बेटे ने लगाई फांसी:छतरपुर में मामूली विवाद के बाद परिवार में दो मौतें

छतरपुर जिले के बड़ा मलहरा क्षेत्र के बमनोरा थाना इलाके के ग्राम मबई में पिता और बेटे ने आत्महत्या कर ली। इस घटना से असाटी परिवार में दो लोगों की जान चली गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार सुबह रामप्रसाद असाटी (50) और उनके बेटे शिवम असाटी (22) के बीच किसी बात पर झगड़ा हो गया था। इसके बाद रामप्रसाद खेत पर गए और जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर परिवार वाले उन्हें शाहगढ़ अस्पताल ले गए, जहां से उन्हें सागर जिला अस्पताल भेजा गया। लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। रामप्रसाद का पोस्टमार्टम बंडा थाना क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में हुआ और शुक्रवार शाम को गांव मबई में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। इसी दौरान उनका बड़ा बेटा शिवम बंडा से गायब हो गया। परिवार और पुलिस ने पूरी रात उसकी तलाश की। पेड़ से लटका मिला बेटे का शव शनिवार सुबह बंडा नगर के पास एक अमरूद के पेड़ पर शिवम का शव लटका मिला। उसने अपना और अपने पिता का मोबाइल नीचे रख दिया था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और फिर परिवार को सौंप दिया। शनिवार को छोटे भाई अनुराग असाटी ने शिवम का अंतिम संस्कार किया। इस घटना के बाद परिवार में मृतक की पत्नी, मां छोटी बाई, बहू ललिता असाटी, एक बहन और छोटा भाई अनुराग ही बचे हैं। अब तक विवाद को लेकर असल वजह की पुष्टि नहीं हो सकी है।
MP के कोतमा में 4 मंजिला लॉज गिरी, 1 मौत:3 लोग गंभीर, कई लोग मलबे में दबे, रातभर चलेगा रेस्क्यू; बिल्डिंग गिरने का VIDEO

मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के कोतमा बस स्टैंड के पास शनिवार शाम करीब 5:30 बजे चार मंजिला अग्रवाल लॉज अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे में एक की मौत हो गई, जबकि 3 लोग घायल हैं।शहडोल मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। कई लोग मलबे में दबे हैं। हादसे का CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें पूरी बिल्डिंग ढहती नजर आ रही है। जानकारी के मुताबिक, मृतक की पहचान हनुमान दीन यादव (55) के रूप में हुई है, जो टाइल्स लगाने का काम करता था। लॉज की चौथी मंजिल में काम कर रहा था। मुंह से खून निकल रहा था। शरीर की कई हड्डियां टूट चुकी थीं। वहीं हादसे की सूचना मिलते ही राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल, कलेक्टर हर्षल पंचोली और एसपी मोती उर रहमान मौके पर पहुंचे। 3 घायलों को शहडोल मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। वहीं शव मॉर्च्यूरी में रखे गए हैं। घटनास्थल पर 10-12 एंबुलेंस मौजूद हैं। वहीं हादसे पर CM मोहन यादव ने दुख जताया। हादसे से जुड़ी 3 तस्वीरें देखिए… 100 लोगों की टीम रेस्क्यू में जुटी SDRF और प्रशासन की करीब 100 लोगों की टीम मलबा हटाने में लगी है। 3 क्रेन और जेसीबी की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका है। लॉज के गिरने से आसपास की कई दुकानें भी चपेट में आ गई हैं। अफरा-तफरी और जान बचाकर भागते लोग बिल्डिंग गिरते ही अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। कुछ लोग मलबे की चपेट में आ गए। लॉज के सामने खड़ा एक ट्रैक्टर भी फुटेज में दिखाई देता है, जिसे चालक ने बिल्डिंग गिरते ही तुरंत स्टार्ट कर भाग गया प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया भयावह मंजर प्रत्यक्षदर्शी अरुण सोनी के मुताबिक, बिल्डिंग एकतरफा गड्ढे की ओर गिरी। हादसे के बाद पूरा इलाका धुआं-धुआं हो गया और चीख-पुकार मच गई। उन्होंने बताया कि कई लोगों को गंभीर चोटें आई हैं, जबकि कुछ की मौत भी हुई है। मलबे के अंदर से लोगों के फंसे होने और चीखने की आवाजें सुनाई दे रही हैं। 12 फीट गहरी खुदाई बनी वजह नगर पालिका उपाध्यक्ष बद्री प्रसाद ताम्रकार ने बताया कि लॉज के ठीक बगल में करीब 20 बाई 50 फीट के प्लॉट पर निर्माण कार्य के लिए लगभग 12 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था। इस गड्ढे में पानी भर गया था, जिससे लॉज की नींव कमजोर हो गई। इसके बाद इमारत का एक हिस्सा उसी दिशा में धंस गया और पूरी बिल्डिंग गिर गई। कलेक्टर बोले- CM मोहन करेंगे मुआवजे का ऐलान कलेक्टर हर्षल पंचोली ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी तत्परता से जारी है। अब तक 4 लोगों को मलबे से निकाला गया है, जिनमें एक की मौत हो गई है। घायलों का इलाज जारी है। मुख्यमंत्री जल्द मुआवजे का ऐलान करेंगे। वहीं, मंत्री दिलीप जायसवाल ने हादसे को दुखद बताते हुए कहा कि प्रशासन, पुलिस और रेस्क्यू टीमें पूरी क्षमता के साथ राहत कार्य में जुटी हैं। मुख्यमंत्री स्वयं पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रहे हैं। फिलहाल प्राथमिकता रेस्क्यू ऑपरेशन है, जांच बाद में की जाएगी। हादसे पर CM मोहन यादव ने जताया दुख वहीं हादसे पर CM मोहन यादव ने दुख जताया। उन्होंने कहा कि हादसे में एक व्यक्ति की मौत होना पीड़ादायक है। जिला प्रशासन, पुलिस एवं SECL द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। अब तक तीन नागरिकों को रेस्क्यू कर सकुशल निकाला गया है, जबकि NDRF की टीम मौके के लिए रवाना हो चुकी है। लॉज हादसे से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
छावनी विलय और ROB निर्माण की रक्षामंत्री से मांग:नरयावली विधायक ने कहा- विलय के बाद भूमि का मालिकाना हक राज्य सरकार या निकाय को हस्तांतरित किया जाए

सागर जिले की नरयावली विधानसभा के विधायक प्रदीप लारिया ने शनिवार को दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सागर के कैंट एरिया से जुड़े दो मुद्दों पर चर्चा करते हुए पत्र सौंपा। विधायक लारिया ने सागर छावनी परिषद के नगरीय निकाय में विलय की प्रक्रिया पर चर्चा की। रक्षा मंत्री को भूमि स्वामित्व की तकनीकी अड़चनों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विलय के बाद भूमि का मालिकाना हक राज्य सरकार या निकाय को हस्तांतरित किया जाए। ताकि क्षेत्र में सरकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे का विकास हो सके। उन्होंने सुरक्षा मानकों को ध्यान रखते हुए कृषि और बंगला क्षेत्रों को भी विलय प्रक्रिया में शामिल करने की बात कही। दरअसल, केंद्र सरकार ने कैंट सागर के सागर नगर निगम में विलय की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिसंबर-2022 में जारी किया था। इसके बाद कैंट ने अलग-अलग जमीनों के हिसाब से प्रस्ताव तैयार किए और उनको मप्र शासन के साथ रक्षा संपदा को भेजे थे। तभी से छावनी परिषद के नगर निगम में विलय की प्रक्रिया चल रहा है। लेकिन अभी तक प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) निर्माण की अनुमति की मांग इसके साथ ही विधायक लारिया ने कैंट क्षेत्र में स्थित डिंपल पेट्रोल पंप के पास बीना-कटनी रेलवे गेट नंबर-25 पर आरओबी का निर्माण कराने अनुमति की मांग को लेकर चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह मार्ग यातायात की दृष्टि से अत्यधिक व्यस्त है और यहां फ्लाईओवर की आवश्यकता है। निर्माण कार्य की अनुमति के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) रक्षा मंत्रालय के पोर्टल पर आवेदन पहले कर चुका है। विधायक ने जनहित में इस परियोजना को जल्द अनुमति देने की मांग की। दोनों ही विषयों पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विधायक लारिया को विभागीय स्तर पर उचित समीक्षा कर सकारात्मक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। छावनी का निगम में विलय होने से ये फायदें छावनी के रिहायशी इलाकों का विलय होने से यहां के रहवासियों को शासकीय आवास योजना जैसे कई फायदें मिलना शुरू होंगे। स्ट्रीट लाइट, जल आपूर्ति, डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन और सड़क कनेक्टिविटी भी मिलेगी। छावनी परिषद क्षेत्र में भवन निर्माण और अन्य नागरिक कार्यों के लिए सेना से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
खरगोन से 1000 महिलाओं का दल अंबाजी धाम पहुंचा:गरबा किया; संकीर्तन के 50 साल पूरे होने पर 5 दिवसीय धार्मिक यात्रा पर

खरगोन के टेमला से 1000 महिला श्रद्धालुओं का एक दल शनिवार सुबह अंबाजी धाम पहुंचा। यहां पहुंचने पर महिलाओं ने देवी दर्शन किए और मंदिर परिसर में गरबा किया। समाजसेवी नितिन पाटीदार ने बताया कि महिला श्रद्धालु वाहनों में भजन-कीर्तन करते हुए और जयकारे लगाते हुए अंबाजी धाम पहुंचे। यह यात्रा टेमला में पूर्व कृषिमंत्री बालकृष्ण पाटीदार के नेतृत्व में मनाए जा रहे ‘हरे रामा हरे कृष्णा संकीर्तन’ के 50 वर्ष पूरे होने के स्वर्ण जयंती वर्ष का हिस्सा है। 10 से अधिक बसों में सवार यह दल पावागढ़, अंबिकाधाम और सांवरिया सेठ के दर्शन के लिए 5 दिवसीय धार्मिक यात्रा पर है। स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में वैशाख माह में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया था। इसके बाद 1000 से अधिक श्रद्धालुओं का एक दल अयोध्या धाम में श्रीरामलला के दर्शन कर चुका है। महिलाओं का यह दल इस आयोजन के तीसरे चरण की धार्मिक यात्रा पर है।









