इंदौर के प्रतिष्ठित डेली कॉलेज में 22 अप्रैल से आयोजित होने जा रहे भारतीय जनता पार्टी के सात राज्यों के वरिष्ठ नेताओं के प्रशिक्षण वर्ग ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। इस आयोजन की तैयारियों के बीच प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और संस्थान के संरक्षक दिग्विजय सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। सिंह ने डेली कॉलेज बोर्ड के प्रेसिडेंट को एक पत्र लिखकर परिसर के राजनीतिक इस्तेमाल पर अत्यंत क्षोभ, निराशा और पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने संस्थान की निष्पक्षता और संस्थागत स्वतंत्रता को गंभीर क्षति पहुंचने का दावा करते हुए इस आयोजन की स्पष्ट निंदा की है। दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में तीखे सवाल उठाते हुए कहा है कि डेली कॉलेज कोई साधारण संपत्ति नहीं है जिसे किसी दल की पक्षपातपूर्ण सुविधा के लिए सौंप दिया जाए। उन्होंने इसे एक खतरनाक ‘पैटर्न’ करार देते हुए कुछ पिछली घटनाओं का भी जिक्र किया है। सिंह के अनुसार, सितंबर 2025 में भी कॉलेज के गेट और परिसर में भगवा झंडे व बैनर लगाए गए थे। इसके अलावा, उन्होंने 4 अक्टूबर 2025 को आरएसएस के 100 वर्ष पूर्ण होने पर हुए कार्यक्रम और फरवरी 2026 में आयोजित ओडीए रॉयल कुकिंग फेस्टिवल के दौरान भी परिसर के राजनीतिकरण का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि बार-बार हो रहे ऐसे आयोजनों से आम जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि यह स्वतंत्र शिक्षण संस्थान अब एक खास विचारधारा के प्रचार का केंद्र बनता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी बात को मजबूती देने के लिए अपने कार्यकाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में उनके दो दशकों के कार्यकाल के दौरान कभी भी कांग्रेस का कोई कार्यक्रम डेली कॉलेज परिसर में आयोजित नहीं हुआ। उन्होंने तर्क दिया कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन 140 साल पुराने इस गौरवशाली संस्थान की प्रतिष्ठा और साख हर हाल में सुरक्षित रहनी चाहिए। उन्होंने पत्र के माध्यम से बोर्ड से पूछा है कि आखिर किसके अधिकार और अनुमति से परिसर को राजनीतिक गतिविधियों के लिए उपलब्ध कराया गया और क्या बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को इसकी जानकारी दी गई थी। इस पूरे विवाद के बीच भाजपा के नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा की भूमिका पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं। शहर के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि डेली कॉलेज बोर्ड के आगामी चुनावों और वहां के आंतरिक समीकरणों को जानते हुए भी बार-बार ऐसे आयोजन क्यों कराए जा रहे हैं। दिग्विजय सिंह के दखल और विरोध के बाद अब यह मामला न केवल कॉलेज के भीतर बल्कि शहर की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल, 22 अप्रैल के कार्यक्रम की तैयारियों और उस पर उठे इस विरोध ने संस्थान के प्रबंधन को कटघरे में खड़ा कर दिया है।











































