नर्मदापुरम में दिन का पारा 38 डिग्री के करीब:अचानक तापमान बढ़ने से गेहूं की फसल को नुकसान की आशंका; दोपहर में सड़कें सूनी

नर्मदापुरम जिले में 4 मार्च के बाद से गर्मी का असर तेज हो गया है। दिन का तापमान 37 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है, जिसके कारण दोपहर के समय सड़कों पर आवाजाही कम नजर आ रही है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। अचानक बढ़ रही इस गर्मी से गेहूं की फसल के 10 से 12 दिन पहले पकने और किसानों को नुकसान होने की आशंका है। मंगलवार को नर्मदापुरम में तेज धूप खिली रही। दिन के साथ-साथ रात के तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मंगलवार को रात का न्यूनतम तापमान 19.8 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं, प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में भी गर्मी का असर दिखाई दे रहा है। पचमढ़ी में दोपहर का तापमान 31 डिग्री के पार पहुंच गया है, जबकि रात का न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस के ऊपर दर्ज किया जा रहा है। अगले 4 दिन में 2 से 3 डिग्री और बढ़ेगा तापमान मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, जिले के मौसम में अगले चार दिनों तक कोई बड़े बदलाव की संभावना नहीं है, लेकिन अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री तक की वृद्धि हो सकती है। ऐसे में मार्च के पहले पखवाड़े में ही पारा 39 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। गेहूं की फसल को नुकसान का अंदेशा मार्च महीने में अचानक बढ़ रहे तापमान का सीधा असर कृषि पर पड़ने की आशंका है। कृषि उपसंचालक डॉ. रविकांत सिंह ने बताया कि वर्तमान में गेहूं की बालियों में दाना भर चुका है और यह इसके पोषित होने का समय है। यदि गर्मी इसी तरह अधिक रही, तो पौधे की नमी खत्म हो जाएगी और वह सूखने लगेगा। इससे दाना पर्याप्त मात्रा में पोषित नहीं हो पाएगा। जिले में आमतौर पर मार्च के अंत तक गेहूं की कटाई शुरू होती है, लेकिन तापमान ऐसा ही बना रहा तो फसल के 10-12 दिन पहले ही पकने की संभावना है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। पिछले 5 दिनों का अधिकतम तापमान (डिग्री सेल्सियस में) तारीख नर्मदापुरम पचमढ़ी 5 मार्च 39.4 29.8 6 मार्च 38.1 30.2 7 मार्च 37.6 31.8 8 मार्च 38.1 31.4 9 मार्च 37.9 31.2
मोहन बड़ोदिया में ड्यूटी पर तैनात पटवारी की पिटाई:मकानों की नबरिंग कर रहे थे, जान से मारने की धमकी भी दी

शाजापुर जिले के मोहन बड़ोदिया थाना क्षेत्र में जनगणना कार्य के दौरान एक पटवारी के साथ मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा डालने का मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थाना मोहन बड़ोदिया के थाना प्रभारी भीम सिंह पटेल ने बताया कि ग्राम लडावद निवासी 31 वर्षीय प्रकाशचंद सिकरवार, जो तहसील मोहन बड़ोदिया के हल्का क्रमांक 143 ग्राम पचावता में पटवारी हैं, ने इस संबंध में लिखित आवेदन दिया था। उन्हें जनगणना कार्य निदेशालय भोपाल के निर्देशानुसार 27 फरवरी 2026 से अपने हल्का क्षेत्र के गांवों में मकान और भवनों की गणना व नंबरिंग का कार्य सौंपा गया था। इसी क्रम में 9 मार्च की सुबह करीब 10:30 बजे पटवारी प्रकाशचंद सिकरवार गणना दल के सदस्य पंचायत सचिव जफर बेग और ग्राम जामन के कोटवार मांगीलाल मालवीय के साथ ग्राम जामन में मकानों की गणना और नंबरिंग कर रहे थे। दोपहर करीब 12:40 बजे जब वे नारायण मालवीय के मकान पर नंबरिंग कर रहे थे, तभी गांव का दिलीप पिता राधेश्याम गुर्जर वहां पहुंचा। आरोप है कि दिलीप गुर्जर ने पटवारी से पहचान के कागजात मांगते हुए विवाद शुरू कर दिया और सरकारी काम करने से मना करने लगा। समझाने के बावजूद वह नहीं माना और गाली-गलौज करते हुए पटवारी के साथ मारपीट की। आरोप है कि उसने थप्पड़-मुक्कों से मारपीट की और लकड़ी से हमला कर पटवारी को घायल कर दिया। जान से मारने की दी धमकी इसके बाद आरोपी ने दोबारा गांव में आने पर जान से मारने की धमकी भी दी। घटना के बाद पटवारी अपने साथियों के साथ तहसील कार्यालय पहुंचे और मामले की जानकारी दी। पुलिस ने आरोपी दिलीप गुर्जर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 132, 121(1), 296 और 351(3) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल आरोपी फरार है जिसकी तलाश की जा रही है। मोहन बड़ोदिया पुलिस ने मंगलवार को घटनास्थल पर पहुंचकर मौका मुआयना का नक्शा बनाया है। यह घटना सोमवार को हुई थी, परंतु मामला मंगलवार को सामने आया।
सागर में घर की बाथरूम में घुसा मगरमच्छ:7 फीट लंबा था, टाइगर रिजर्व की टीम ने रेस्क्यू कर पकड़ा

सागर के महाराजपुर में एक मकान की बाथरूम में मगरमच्छ घुस गया। परिवार के लोगों ने मगरमच्छ देखा तो हड़कंप मच गया। चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के लोग जमा हो गए। सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू कर मगरमच्छ को पकड़ा गया। जानकारी के अनुसार, महाराजपुर निवासी अजय रैकवार के घर के पीछे बनी बाथरूम में 7 फीट लंबा मगरमच्छ घुस गया। सोमवार देर रात परिवार के सदस्य बाथरूम करने पहुंचे तो मगरमच्छ देखा। उसे देखते ही वह घबराकर भागे। चिल्लाने की आवाज सुनकर आस-पड़ोस के लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। तत्काल मामले की सूचना वन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम महाराजपुर पहुंची। टीम ने मगरमच्छ का रेस्क्यू शुरू किया। रेस्क्यू के दौरान गुस्साया मगरमच्छ बार-बार टीम पर हमला कर रहा था। काफी मशक्कत के बाद टीम ने मगरमच्छ का रेस्क्यू किया। उसे रस्सियों से बांधकर पिंजरे में बंद किया गया। डिप्टी रेंजर सुरेश सिंह ने बताया कि महाराजपुर में स्थित एक घर के पीछे से मगरमच्छ का रेस्क्यू किया है। मगरमच्छ करीब 7 फीट लंबा था। महाराजपुर तालाब में मगरमच्छ पाए जाते हैं। संभवत: तालाब से मगरमच्छ रहवासी इलाके में पहुंचा होगा। रेस्क्यू में पकड़ाए मगरमच्छ को टाइगर रिजर्व की नदी में सुरक्षित छोड़ा गया है।
बौद्ध महासभा ने राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन:सावित्रीबाई फुले को भारत रत्न देने की मांग, पदाधिकारी बोले- जल्द फैसला हो

शाजापुर में मंगलवार को दोपहर करीब 1 बजे राष्ट्रीय बौद्ध महासभा के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन शाजापुर एसडीएम मनीषा वास्कले को दिया गया। ज्ञापन में महासभा ने पांच प्रमुख मांगों को सार्वजनिक हित में स्वीकार करने की अपील की है। महासभा की पहली मांग बोधगया स्थित महाबोधि महाविहार के प्रबंधन को पूर्ण रूप से बौद्ध समुदाय को सौंपने की है। पदाधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में लागू 1949 का बीटी एक्ट असंवैधानिक है और इसे समाप्त कर महाविहार का प्रबंधन बौद्धों को दिया जाना चाहिए। इस संबंध में देशभर में आंदोलन भी चल रहा है। दूसरी प्रमुख मांग के तहत महासभा ने विश्व की प्रथम महिला शिक्षिका मानी जाने वाली सावित्रीबाई फुले को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की मांग की है। उनका कहना है कि सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं और वंचित वर्गों की शिक्षा तथा सामाजिक न्याय के लिए महत्वपूर्ण संघर्ष किया। इसके अतिरिक्त, बौद्धों के लिए पृथक पर्सनल लॉ बनाए जाने की मांग भी रखी गई। महासभा का तर्क है कि बौद्ध धर्म की अपनी अलग परंपराएं और धार्मिक संस्कार हैं, इसलिए उनके लिए अलग कानून बनाया जाना चाहिए। ज्ञापन में पाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने तथा सावित्रीबाई फुले, महात्मा ज्योतिबा फुले और फातिमा शेख के जीवन संघर्ष को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग भी की गई। महासभा ने उम्मीद जताई है कि सरकार इन जनहितकारी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेगी।
देवास में शीतला सप्तमी पर मंदिरों में भीड़:महिलाओं ने एक दिन पहले बनाकर रखा भोजन, बासी प्रसाद के रूप में करेंगे ग्रहण

देवास शीतला सप्तमी के अवसर पर मंगलवार को शहर के शीतला माता मंदिरों में महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाओं ने सुबह मंदिर पहुंचकर माता शीतला की पूजा-अर्चना की और ठंडे भोजन का भोग अर्पित किया। शहर के गोया स्थित शीतला माता मंदिर में भी बड़ी संख्या में महिलाएं दर्शन और पूजा के लिए पहुंचीं। महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा की और आरती उतारी। इस पर्व पर एक दिन पहले बनाया गया भोजन माता को अर्पित करने की परंपरा होती है। एक रात पहले बनाकर रखती हैं खाना, अगले दिन खाती हैं पूजा करने पहुंची श्वेता चौधरी ने बताया कि शीतला सप्तमी के दिन महिलाएं एक रात पहले ही भोजन बनाकर रखती हैं और अगले दिन ठंडा होने पर माता शीतला को भोग लगाती हैं। इसके बाद परिवार के लोग वही प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। मान्यता है कि शीतला सप्तमी का व्रत रखने और पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है। महिलाएं अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं।
नहर में डूबे नाबालिग का 45 घंटे बाद शव मिला:दूसरे बच्चे की तलाश जारी, बहते हुए 10 किमी दूर पहुंचा

सतना जिले के रामपुर बाघेलान थाना क्षेत्र अंतर्गत चोरमारी गांव से निकली बाणसागर परियोजना की पुरवा नहर में रविवार दोपहर डूबे दो नाबालिग बच्चों में से एक का शव लगभग 45 घंटे बाद मंगलवार सुबह बरामद कर लिया गया। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने यह शव रामपुर बाघेलान के नेमुआ गांव के पास नहर में तलाशी अभियान के दौरान पाया, जो घटना स्थल से करीब 10 किलोमीटर दूर है। जानकारी के अनुसार, चोरमारी गांव निवासी दो नाबालिग बच्चे रविवार को पुरवा नहर में नहाने के लिए गए थे। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वे तेज बहाव में बह गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचित किया। एक बच्चे का शव मिला दूसरे की तलाश जारी इसके बाद प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और गोताखोरों की मदद से खोजबीन शुरू की गई। लगातार करीब दो दिनों तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद मंगलवार को एक बच्चे का शव बरामद किया गया। मृतक की पहचान 13 वर्षीय आयुष विश्वकर्मा के रूप में हुई है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं, दूसरे बच्चे 15 वर्षीय आर्यन मिश्रा की तलाश अभी भी जारी है। पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की टीम नहर के विभिन्न हिस्सों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है। प्रशासन ने आसपास के ग्रामीणों से भी अपील की है कि यदि नहर में किसी प्रकार की जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस को सूचित करें। इस मामले से जुड़ी यह खबर पढ़ें… सतना की पुरवा नहर में दो नाबालिग डूबे सतना जिले के रामपुर बाघेलान थाना क्षेत्र के ग्राम चोरमारी स्थित पुरवा नहर में रविवार दोपहर करीब 2 बजे नहाते समय दो नाबालिग डूब गए। 15 वर्षीय आर्यन और 13 वर्षीय आयुष क्रिकेट खेलने के बाद नहाने उतरे थे और गहरे पानी में चले गए। पूरी खबर पढ़ें…
नवजातों के लिए ‘पहला टीका’ बनेगा मां का दूध:सेंट्रल इंडिया में भोपाल अकेला शहर जहां 3 सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक; हमीदिया अस्पताल में इसी महीने शुरू

नवजात शिशु के लिए मां का दूध किसी अमृत से कम नहीं माना जाता। इसमें मौजूद पोषक तत्व और एंटीबॉडी बच्चे को शुरुआती संक्रमणों से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन कई बार बीमारी या अन्य कारणों से मां अपने नवजात को स्तनपान नहीं करा पाती। ऐसे में बच्चों को वैकल्पिक दूध देना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए राजधानी भोपाल में ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा को विस्तार दिया जा रहा है। एम्स और जेपी अस्पताल के बाद अब हमीदिया अस्पताल में भी ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू होने जा रहा है। हमीदिया अस्पताल में यह नई सुविधा शुरू करने की टेंटेटिव डेट 17 मार्च तय की गई है। इसके अनुसार ही तैयारियां चल रहीं हैं। इसके शुरू होते ही भोपाल देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल होगा जहां तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही सेंट्रल इंडिया का अकेला शहर होगा, जहां तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक होंगे। हमीदिया अस्पताल में जल्द शुरू होगी नई सुविधा राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यहां सिविल वर्क तेजी से चल रहा है और अगले लगभग 10 दिनों में इसके पूरा होने की संभावना है। इसके बाद आवश्यक मशीनें और उपकरण स्थापित कर मिल्क बैंक को शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक मार्च माह के भीतर इस सुविधा को शुरू करने की योजना है, जिससे नवजात शिशुओं को समय पर मां के दूध का लाभ मिल सकेगा। कब नवजात को दिया जाता है मिल्क बैंक का दूध भोपाल में होंगे तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत 2018 में भोपाल और इंदौर में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि शुरुआत केवल भोपाल के जेपी अस्पताल में ही हो सकी। इसके बाद एम्स भोपाल में भी यह सुविधा शुरू की गई। अब हमीदिया अस्पताल में मिल्क बैंक शुरू होने के साथ राजधानी भोपाल देश का ऐसा शहर बन जाएगा जहां तीन सरकारी अस्पतालों में ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे नवजातों की देखभाल और पोषण व्यवस्था और मजबूत होगी। सुलतानियां अस्पताल के शिफ्ट होने के बाद बनी योजना दरअसल, सुलतानियां अस्पताल को हमीदिया परिसर में स्थानांतरित किए जाने के बाद यहां नवजात और मातृत्व सेवाओं का विस्तार किया गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमीदिया अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। यह प्रस्ताव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेजा गया था, जिसे स्वीकृति मिलने के बाद अब इसे जमीन पर उतारा जा रहा है। इसके साथ ही हमीदिया अस्पताल में आईवीएफ यानी टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर शुरू करने की भी योजना है। ऐसे काम करता है ह्यूमन मिल्क बैंक ह्यूमन मिल्क बैंक में माताओं द्वारा दान किए गए दूध को सुरक्षित तरीके से संग्रहित किया जाता है। इसके लिए विशेष डीप फ्रीजर का उपयोग किया जाता है, जिसमें दूध को लगभग -30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है। एक मिल्क बैंक में करीब 50 से 60 लीटर तक दूध संरक्षित किया जा सकता है। यहां मेकेनाइज्ड ब्रेस्ट पम्प, मिल्क स्टोरेज यूनिट और आधुनिक स्टरलाइजेशन सिस्टम जैसी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। इस बैंक में महिलाएं स्वेच्छा से अपना दूध दान कर सकती हैं, जिससे जरूरतमंद नवजात शिशुओं को पोषण मिल सके। किन बच्चों को दिया जाता है यह दूध ह्यूमन मिल्क बैंक में संग्रहित दूध उन नवजात शिशुओं को दिया जाता है, जिन्हें किसी कारण से अपनी मां का दूध नहीं मिल पाता। यह दूध विशेष रूप से उन बच्चों के लिए उपयोगी होता है जो समय से पहले यानी प्री-मेच्योर पैदा होते हैं। इसके अलावा एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में भर्ती बच्चों को भी यह दूध दिया जाता है। यदि किसी मां को गंभीर बीमारी के कारण आईसीयू में रखना पड़े और वह अपने बच्चे को स्तनपान नहीं करा सके, तब भी मिल्क बैंक का दूध नवजात के लिए जीवनदायी साबित होता है। मां का दूध नवजात के लिए सबसे जरूरी विशेषज्ञों के अनुसार मां के दूध में प्राकृतिक एंटीबॉडी और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। यही कारण है कि इसे नवजात शिशु का पहला टीका भी कहा जाता है। मां का दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और उसे कई संक्रमणों से बचाता है। इसके अलावा यह बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी बेहद जरूरी माना जाता है। हर अस्पताल में नहीं खुल सकता मिल्क बैंक हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन के अनुसार किसी भी अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक तभी खोला जा सकता है, जब उस अस्पताल में हर साल कम से कम 10 हजार से अधिक डिलीवरी होती हों। इसके लिए केंद्र स्तर से अनुमति मिलती है और अस्पताल के डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है। उन्होंने बताया कि हमीदिया अस्पताल में इन सभी प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया गया है, इसलिए जल्द ही यहां मिल्क बैंक की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। नवजातों के लिए बनेगा जीवनदायी सहारा ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा शुरू होने से उन नवजात शिशुओं को बड़ा लाभ मिलेगा, जिन्हें किसी कारण से अपनी मां का दूध नहीं मिल पाता। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुविधा से नवजात मृत्यु दर को कम करने में भी मदद मिल सकती है। राजधानी में तीन सरकारी मिल्क बैंक शुरू होने से भोपाल नवजात स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभर सकता है। नवजात के जरूरी मां का दूध
Bhopal Child Rape-Murder Convict Atul Nihales Execution Stayed by SC

भोपाल के शाहजहांनाबाद इलाके में 5 साल की मासूम से रेप और हत्या के मामले में दोषी अतुल निहाले की फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। . शीर्ष अदालत ने अतुल की याचिका पर सुनवाई करते हुए डेथ सेंटेंस को अमल करने पर स्टे दे दिया है। कोर्ट अब मामले में सजा और दोष सिद्धि से जुड़े पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई करेगा। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने दिया, जिसमें न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया शामिल हैं। बेंच ने फिलहाल फांसी की सजा के अमल पर रोक लगाते हुए मामले की आगे सुनवाई तय की है। अदालत अब रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर यह तय करेगी कि निचली अदालतों के फैसले में किसी तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता है या नहीं। स्पेशल कोर्ट ने सुनाई थी तिहरी फांसी इस जघन्य मामले में भोपाल के विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 18 मार्च 2025 को ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। अदालत ने आरोपी अतुल निहाले को तीन अलग-अलग धाराओं में फांसी की सजा सुनाई थी। बीएनएस लागू होने के बाद मध्यप्रदेश में यह पहला मामला था, जिसमें किसी दोषी को अलग-अलग धाराओं में तीन बार मृत्युदंड दिया गया था। इसके अलावा अदालत ने आरोपी को दो धाराओं में उम्रकैद और दो अन्य धाराओं में सात-सात साल की सजा भी सुनाई थी। हाईकोर्ट ने कहा था- इसकी कल्पना ही रूह कंपा देने वाली स्पेशल कोर्ट के फैसले को आरोपी ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर सुनवाई करते हुए जबलपुर स्थित हाईकोर्ट की डबल बेंच ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए फांसी की सजा बरकरार रखी थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि आरोपी ने अत्यंत अमानवीय और नृशंस अपराध किया है। हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि पांच साल की बच्ची ने जिस पीड़ा को झेला, उसे शब्दों में समझ पाना मुश्किल है और इसकी कल्पना ही रूह कंपा देने वाली है। दुर्लभतम श्रेणी का अपराध माना गया भोपाल की विशेष अदालत ने अपने फैसले में इस अपराध को दुर्लभतम श्रेणी का मामला बताया था। कोर्ट ने कहा था कि यदि मृत्युदंड से भी बड़ी कोई सजा होती तो आरोपी उसका भी पात्र होता। अदालत ने अपने आदेश में लिखा था कि यदि समाज बच्चों को सुरक्षित माहौल नहीं दे सकता, जहां वे अपने घर और आसपास सुरक्षित खेल सकें, तो सभ्य समाज की कल्पना भी कठिन हो जाती है। 24 सितंबर 2024 को हुई थी वारदात यह घटना 24 सितंबर 2024 को शाहजहांनाबाद इलाके में हुई थी। दोपहर के समय पांच साल की बच्ची अपनी दादी के साथ मल्टी में स्थित बड़े पापा के फ्लैट पर थी। दादी ने उसे स्कूल की किताबें लाने के लिए नीचे भेजा था, लेकिन वह काफी देर तक वापस नहीं लौटी। इसके बाद परिवार और मल्टी में रहने वाले लोगों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। बाद में बच्ची के पिता ने शाहजहांनाबाद थाने में उसके अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई। घर की टंकी में छिपाया गया था शव पुलिस जांच के दौरान आरोपी के घर से बदबू आने की शिकायत मिली। तलाशी लेने पर बाथरूम के ऊपर रखी प्लास्टिक की पानी की टंकी से दुर्गंध आ रही थी। जब टंकी को नीचे उतारा गया तो उसमें बच्ची का शव मिला। शव को कपड़ों और अन्य सामान से ढंक कर छिपाया गया था। जांच में सामने आया कि आरोपी ने वारदात के बाद शव को तीन दिन तक टंकी में छिपाकर रखा था। डीएनए और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बने अहम सबूत सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में कुल 22 गवाह पेश किए थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और डीएनए जांच इस केस के सबसे अहम सबूत साबित हुए। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद चाकू से कई वार किए थे, जिससे उसकी मौत हो गई। आरोपी के घर से खून से सने कपड़े और वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद किया गया था। मां और बहन को भी मिली सजा इस मामले में आरोपी की मां बसंती निहाले और बहन चंचल भालसे को भी अदालत ने दोषी माना था। जांच में सामने आया था कि दोनों ने आरोपी की मदद करते हुए वारदात को छिपाने की कोशिश की थी। अदालत ने इस आधार पर दोनों को दो-दो साल की सजा सुनाई थी। अब मामले में अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद ही होगा। फिलहाल शीर्ष अदालत ने फांसी की सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगाकर आगे की सुनवाई तय की है। इस केस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह हाल के वर्षों में सामने आए सबसे जघन्य अपराधों में से एक माना गया है। मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… 1. मासूम के अपहरण ,दुष्कर्म और हत्या के आरोपी दोषी करार भोपाल के शाहजहानाबाद इलाके में 5 वर्षीय एक अबोध बालिका के अपहरण, दुष्कर्म और जघन्य हत्या के सनसनीखेज मामले में सोमवार को विशेष न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया। आरोपियों में मुख्य आरोपी अतुल निहाले, उसकी मां बसंती बाई और बहन चंचल भालसे शामिल हैं। विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल ने इस मामले में तीनों को दोषी ठहराया है। पढ़ें पूरी खबर… 2. आरोपी ने रेप के बाद गला घोंटा; फिर शव को पानी की टंकी में छिपाया था भोपाल के ईदगाह हिल्स इलाके के मल्टी में 5 साल की मासूम बच्ची से रेप के बाद हत्या करने के मामले में शाहजहांनाबाद थाना पुलिस ने अतुल भालसे, उसकी बहन चंचल भालसे और मां बसंती भालसे के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया है। चालान के साथ पुलिस ने डीएनए टेस्ट रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट, दस्तावेज और पीड़ित के परिजन, चिकित्सक और पुलिसकर्मियों सहित गवाहों की लिस्ट भी कोर्ट में पेश की है। पुलिस ने आरोपी की मां और बहन को पुलिस के काम में बाधा डालने और सबूत छिपाने का आरोपी बनाया है। पढ़ें पूरी खबर…
झाबुआ में तीन माह से स्ट्रीट लाइट बंद:सीएमओ का पद रिक्त होने से अटकीं वित्तीय स्वीकृतियां; अंधेरे में डूबा बाजार

झाबुआ नगर के मुख्य मार्ग पर पिछले तीन महीनों से स्ट्रीट लाइटें बंद हैं। मार्ग के पांच प्रमुख खंभों की लाइटें बंद होने से न केवल व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, बल्कि त्योहारों के समय भी पूरा इलाका अंधेरे में डूबा हुआ है। जनप्रतिनिधियों से गुहार बेअसर, रहवासियों में आक्रोश स्थानीय निवासी एलसी काग और दुकानदार ऋतिक राठौड़ ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए पार्षद से लेकर अध्यक्ष प्रतिनिधि तक को कई बार अवगत कराया गया है। निवासियों का आरोप है कि परिषद के जिम्मेदार अधिकारी फंड और सामग्री की कमी का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। अंधेरे के कारण क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर भी भय व्याप्त है। पूर्णकालिक सीएमओ न होने से बिगड़े हालात परिषद की इस लाचारी का मुख्य कारण तत्कालीन सीएमओ आशा भंडारी के स्थानांतरण के बाद पद का रिक्त होना है। वर्तमान में अपर कलेक्टर आशीष सिंह के पास इसका प्रभार है, लेकिन पूर्णकालिक अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण तकनीकी और वित्तीय स्वीकृतियां अटकी हुई हैं। इसके चलते नई सामग्री की खरीदी और मरम्मत कार्य ठप पड़े हैं। स्टॉक खत्म, नई खरीदी के नहीं मिल रहे ऑर्डर नगर परिषद के बिजली प्रभारी राजू चंदेल ने बताया कि कार्यालय में खराब लैंपों का ढेर लगा है, लेकिन नई सामग्री की कमी के कारण सुधार कार्य संभव नहीं है। बिना रिपेयरिंग किट और नए सामान के तकनीकी अमला लाचार है। परिषद में सामग्री की भारी कमी बनी हुई है। जल्द सुधार का आश्वासन दिया अध्यक्ष प्रतिनिधि योगेश गामड़ ने स्वीकार किया कि सीएमओ के तबादले के बाद तकनीकी अड़चनें आई हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराकर मुख्य मार्ग की लाइटों को दुरुस्त कर दिया जाएगा।
विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव निरस्त:नामांकन में क्रिमिनल रिकॉर्ड छिपाया था; ग्वालियर हाईकोर्ट ने रामनिवास को MLA घोषित किया

ग्वालियर हाईकोर्ट ने विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव रद्द कर दिया है। ग्वालियर बेंच के जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया ने यह फैसला BJP नेता और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत की याचिका पर सुनाया। रावत अब विजयपुर विधानसभा सीट से नए MLA होंगे। रामनिवास रावत ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि मुकेश मल्होत्रा ने 2024 के उपचुनाव नॉमिनेशन में अपने खिलाफ दर्ज क्रिमिनल केस की पूरी जानकारी नहीं दी थी। मुकेश ने 4 क्रिमिनल रिकॉर्ड बताए थे, जबकि 2 केस छिपाए थे। याचिका में रावत ने मल्होत्रा के खिलाफ दर्ज सभी 6 क्रिमिनल केस की जानकारी दी थी। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि रामनिवास रावत उपचुनाव में दूसरे नंबर पर आए थे, इसलिए मुकेश मल्होत्रा का चुनाव रद्द किया जाता है। साथ ही रावत को विजयपुर का MLA घोषित किया जाता है। मल्होत्रा के वकील बोले- हम सुप्रीम कोर्ट जा रहे मुकेश मल्होत्रा के वकील प्रतीप बिसोरिया ने बताया कि BJP उम्मीदवार राम निवास रावत की फाइल की गई पिटीशन में दो मामलों में जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया है। एक जिसमें निपटारा हो चुका था। दूसरा जिसमें आरोपों के बारे में जानकारी छिपाने की बात थी। कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि जानकारी छिपाने वाले दो मामलों में चुनाव रद्द कर दिया गया है। हमने एक एप्लीकेशन फाइल की है, जिसमें कहा है कि हम अपील करने के हकदार हैं। जब तक हम अपील करते हैं, इस ऑर्डर पर 15 दिन के लिए रोक लगनी चाहिए। हम सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं। रावत बोले- नॉमिनेशन में जानकारी देना कैंडिडेट की जिम्मेदारी रामनिवास रावत ने कहा- मैं हाई कोर्ट के ऑर्डर को इस तरह देखता हूं कि कोर्ट के बनाए गए इलेक्शन रिफॉर्म्स के हिसाब से नॉमिनेशन में जानकारी देना कैंडिडेट की जिम्मेदारी है। उन्होंने अपने एफिडेविट में क्रिमिनल जानकारी छिपाई थी। इसलिए, उनके खिलाफ एक पिटीशन फाइल की गई थी, जिसे आज फैसला आया है। उन्होंने बताया कि मुकेश मल्होत्रा ने दो क्राइम केस की जानकारी छिपाई थी। उन्होंने यह भी छिपाया था कि उन पर एक क्राइम में चार्ज लगा था। वह सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। यह उनका ज्यूडिशियल राइट है। उन्हें 15 दिन का टाइम दिया गया है। रामनिवास रावत के समर्थकों ने फोड़े पटाखे कोर्ट के फैसले के बाद विजयपुर में रामनिवास रावत के समर्थकों ने पटाखे फोड़कर जश्न मनाया। वहीं मुकेश मल्होत्रा के घर के बाहर सन्नाटा पसरा हुआ है। BJP के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि बीजेपी हाई कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले का स्वागत करती है। ये 3 तस्वीरें देखिए… जीतू पटवारी बोले- सुप्रीम कोर्ट जाएंगे हमें न्याय मिलेगा चुनाव कैंसिल होने पर मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि एक साल पहले विजयपुर की जनता ने कांग्रेस को जनादेश दिया। मुकेश मल्होत्रा को भारी वोटों से जिताया। फैसले के खिलाफ हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। पटवारी ने कहा- हमें सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा। अगर चुनाव भी हुआ तो जितने वोटों से रामनिवास रावत को हराया था। उससे दोगुना वोटों से फिर हराएंगे। विजयपुर की जनता रावत को और बीजेपी को हराने के लिए फिर तैयार बैठी है। मुकेश और रामनिवास दोनों ने बदली थी पार्टी मुकेश ने मई 2024 में कांग्रेस जॉइन की थी पूर्व राज्यमंत्री और आदिवासी नेता मुकेश मल्होत्रा ने 2 मई 2024 को कांग्रेस जॉइन की थी। उन्होंने मुरैना जिले में आयोजित प्रियंका गांधी की चुनावी सभा में सदस्यता ली। विधानसभा चुनाव–2023 में मुकेश मल्होत्रा विजयपुर सीट से निर्दलीय मैदान में उतरे थे, तब पूरे क्षेत्र के आदिवासियों ने उनका साथ दिया था। उन्हें 45 हजार वोट मिले थे। मुकेश विजयपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पहले में बीजेपी में थे, तब सरकार ने उन्हें सहारिया प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया था। दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री बनाया था। विधानभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने 2023 के चुनाव से पहले भाजपा का साथ छोड़ दिया था। दरअसल, विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में सहारिया आदिवासी समाज के 70 हजार से ज्यादा वोट हैं। कांग्रेस ने आदिवासी वोटों को ध्यान में रखकर मुकेश को उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया था। रावत ने विधायक रहते कांग्रेस छोड़ी, भाजपा ने मंत्री बनाया, फिर हारे थे कांग्रेस के सीनियर लीडर रामनिवास रावत श्योपुर जिले की विजयपुर सीट से 6 बार विधायक रहे। 2023 के विधानसभा चुनाव में रामनिवास रावत कांग्रेस के टिकट पर विजयपुर सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। रामनिवास मध्यप्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भी रह चुके थे। लोकसभा चुनाव के दौरान 30 अप्रैल 2024 को वे भाजपा में शामिल हो गए थे। भाजपा में जाने के बाद रामनिवास को मंत्री बनाया गया। उनके इस्तीफा देने के कारण ही विजयपुर सीट खाली हुई थी। नवंबर 2024 में हुए उपचुनाव में रामनिवास रावत को हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने भाजपा के सीनियर लीडर्स पर लोगों को बरगलाने के आरोप भी लगाए थे। जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, पूर्व वन मंत्री राम निवास रावत ने ग्वालियर हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें श्योपुर के विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस MLA मुकेश मल्होत्रा के झूठा हलफनामा दाखिल करने को चुनौती दी गई थी। पूर्व मंत्री राम निवास रावत ने ग्वालियर हाई कोर्ट की सिंगल बेंच के सामने एक याचिका दायर की थी, जिसमें कांग्रेस MLA मुकेश मल्होत्रा पर उपचुनाव के लिए अपने हलफनामे में अपने खिलाफ क्रिमिनल केस की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया था। ग्वालियर हाईकोर्ट ने उम्मीदवारों को जारी किया था नोटिस पूर्व मंत्री राम निवास रावत की याचिका पर सुनवाई करते हुए ग्वालियर हाईकोर्ट ने उपचुनाव लड़ रहे 11 उम्मीदवारों को नोटिस जारी किया था, जिसमें विजयपुर से कांग्रेस MLA मुकेश मल्होत्रा भी शामिल थे। सभी उम्मीदवारों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा गया था। इस केस में अब आगे क्या होगा ? 1. सदस्यता तत्काल समाप्त कानूनी मामलों के जानकारों का कहना है कि जैसे ही हाई कोर्ट का आदेश प्रभावी होता है, विधायक की विधानसभा सदस्यता समाप्त हो जाती है। कोर्ट के आदेश की प्रति मिलते ही विधानसभा सचिवालय अधिसूचना (नोटिफिकेशन) जारी कर सदस्यता रद्द कर देता है। 2. दूसरे नंबर के प्रत्याशी को विधायक घोषित अगर कोर्ट दूसरे नंबर के कैंडिडेट









