झाबुआ नगर के मुख्य मार्ग पर पिछले तीन महीनों से स्ट्रीट लाइटें बंद हैं। मार्ग के पांच प्रमुख खंभों की लाइटें बंद होने से न केवल व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, बल्कि त्योहारों के समय भी पूरा इलाका अंधेरे में डूबा हुआ है। जनप्रतिनिधियों से गुहार बेअसर, रहवासियों में आक्रोश स्थानीय निवासी एलसी काग और दुकानदार ऋतिक राठौड़ ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए पार्षद से लेकर अध्यक्ष प्रतिनिधि तक को कई बार अवगत कराया गया है। निवासियों का आरोप है कि परिषद के जिम्मेदार अधिकारी फंड और सामग्री की कमी का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। अंधेरे के कारण क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर भी भय व्याप्त है। पूर्णकालिक सीएमओ न होने से बिगड़े हालात परिषद की इस लाचारी का मुख्य कारण तत्कालीन सीएमओ आशा भंडारी के स्थानांतरण के बाद पद का रिक्त होना है। वर्तमान में अपर कलेक्टर आशीष सिंह के पास इसका प्रभार है, लेकिन पूर्णकालिक अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण तकनीकी और वित्तीय स्वीकृतियां अटकी हुई हैं। इसके चलते नई सामग्री की खरीदी और मरम्मत कार्य ठप पड़े हैं। स्टॉक खत्म, नई खरीदी के नहीं मिल रहे ऑर्डर नगर परिषद के बिजली प्रभारी राजू चंदेल ने बताया कि कार्यालय में खराब लैंपों का ढेर लगा है, लेकिन नई सामग्री की कमी के कारण सुधार कार्य संभव नहीं है। बिना रिपेयरिंग किट और नए सामान के तकनीकी अमला लाचार है। परिषद में सामग्री की भारी कमी बनी हुई है। जल्द सुधार का आश्वासन दिया अध्यक्ष प्रतिनिधि योगेश गामड़ ने स्वीकार किया कि सीएमओ के तबादले के बाद तकनीकी अड़चनें आई हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराकर मुख्य मार्ग की लाइटों को दुरुस्त कर दिया जाएगा।















































