प्रदेश में रसोई गैस की कमी नहीं होने के सरकारी दावों के बीच राजधानी में ‘डर’ ने ही संकट जैसी स्थिति बना दी है। भोपाल में इन दिनों रोजाना 13 से 14 हजार गैस बुकिंग हो रही हैं, जबकि सामान्य दिनों में यह आंकड़ा 8 से 9 हजार रहता था। यानी, हर दिन करीब 5 हजार अतिरिक्त बुकिंग हो रही है। इसके मुकाबले डिलीवरी 11 से 12 हजार ही हो पा रही है, जिससे करीब 50 हजार सिलेंडर की सप्लाई पेंडिंग हो गई है। हालात यह हैं कि जिले की 46 गैस एजेंसियों पर दबाव बना हुआ है। प्रशासन और तेल कंपनियां लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं, लेकिन डिमांड और सप्लाई के बीच अंतर कम नहीं हो पा रहा है। वेटिंग बढ़ी: नए शहर में 5 से 7 दिन, पुराने में 10 दिन तक इंतजार-पैनिक बुकिंग का सीधा असर डिलीवरी टाइम पर पड़ा है। नए भोपाल में सिलेंडर के लिए 5 से 7 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि पुराने शहर में यह अवधि 8 से 10 दिन तक पहुंच गई है। कंपनियों का दावा है कि अगले 10 दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी। चूल्हे की चिंता… गैस के लिए एजेंसियों पर लाइन तीन दिन से दोगुनी बुकिंग शहर में 6 दिन का स्टॉक खाद्य नियंत्रक चंद्रभान सिंह जादौन के अनुसार, पिछले 2 से 3 दिनों में बुकिंग लगभग दोगुनी हुई है। सप्लाई 11 से 12 हजार सिलेंडर रोज की है, जबकि बुकिंग ज्यादा होने से रोज करीब 3 हजार बुकिंग पेंडिंग रह रही हैं। भोपाल में एजेंसियों के पास 5 से 6 दिन का स्टॉक मौजूद है। भौंरी डिपो से सप्लाई लगातार जारी है। अफवाह का असर पेट्रोल पर भी: खपत 25% बढ़ी
मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह के मुताबिक, अफवाहों के कारण लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन भरवा रहे हैं। सामान्य 9 लाख लीटर रोज की खपत बढ़कर 15 से 20 लाख लीटर तक पहुंच गई है। हालांकि शहर के 192 पेट्रोल पंपों पर फिलहाल पर्याप्त ईंधन उपलब्ध है। नए कनेक्शन भी बंद किए अचानक बढ़ी मांग के चलते कंपनियों ने नए गैस कनेक्शन देना बंद कर दिया है। एजेंसियों पर उपभोक्ताओं को मना किया जा रहा है। जिन उपभोक्ताओं के पास दो सिलेंडर हैं, उनकी बुकिंग 25 से 35 दिन के बीच में ली जा रही है। हालांकि, सिंगल सिलेंडर के लिए यह 25 दिन ही है। उज्ज्वला योजना में 45 दिन बाद सिलेंडर मिल रहा है। आरजीपीवी : गैस खत्म होने का हवाला देकर छुट्टी का फर्जी नोटिस आरजीपीवी के यूआईटी हॉस्टल में एलपीजी को लेकर अव्यवस्था के बीच छुट्टी का फर्जी नोटिस वायरल हो गया। इसमें लिखा गया कि गैस खत्म होने के कारण 6 अप्रैल से संस्थान बंद किया जा रहा है। अफवाह फैलते ही छात्र घर जाने की तैयारी में जुट गए, लेकिन प्रशासन ने तुरंत खंडन जारी कर स्थिति स्पष्ट की। बता दें कि गैस किल्लत के बीच हॉस्टल के मेस में रोटियां गैस पर बन रही हैं, जबकि दाल-सब्जी लकड़ी की भट्टी पर पक रही है। इसी स्थिति के बीच किसी छात्र ने संस्थान बंद होने का मनगढ़ंत नोटिस तैयार किया और इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। मैसे वायरल होते ही प्रबंधन तक जानकारी पहुंची। इसके बाद डीन अकादमिक ने साफ किया कि न गैस की कमी है और न छुट्टी का कोई निर्णय लिया गया है। प्रशासन ने नोटिस बनाने और फैलाने वालों पर अनुशासनात्मक व कानूनी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। छात्रों को आधिकारिक सूचना पर भरोसा करने को कहा गया है।














































