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बरसात के मौसम में खाने से बचें: बारिश के मौसम में नुकसानदेह ये 4 टिप्स, सेहत को हो सकते हैं बड़े नुकसान

बरसात के मौसम में खाने से बचें: बारिश के मौसम में नुकसानदेह ये 4 टिप्स, सेहत को हो सकते हैं बड़े नुकसान

24 जुलाई 2026 को 22:18 IST पर अद्यतन किया गया बरसात के मौसम में खाने से बचें: बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन इसके साथ कई तरह के विकार और संक्रमण भी आते हैं। इस मौसम में वृद्धि के कारण बैक्टीरिया, कीट और फंगस तेजी से बढ़ते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार, मसूदा में अपने अंतर्विरोधों का विशेष ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है, अन्य में पेट दर्द, खाद्य पदार्थ की खुराक और पाचन संबंधी संबद्धता शामिल हो सकती है। आइए जानते हैं कि किन खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए? (टैग्सटूट्रांसलेट)मानसून में कौन सी सब्जी नहीं खाना चाहिए(टी)मानसून आहार युक्तियाँ(टी)बरसात के मौसम में परहेज करने वाली सब्जियां(टी)बरसात के मौसम में स्वास्थ्य सावधानियां(टी)मानसून में पत्तेदार सब्जियां(टी)बरसात के मौसम में पाचन समस्याएं(टी)मानसून में खाद्य विषाक्तता(टी)मानसून स्वास्थ्य दिशानिर्देश(टी)बरसात के मौसम में जीवाणु संक्रमण(टी)स्वस्थ मानसून आहार

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दांतों में सूजन और त्वचा पर खुजली हो सकती है किडनी रोग होने के लक्षण, भूलकर भी न करें

दांतों में सूजन और त्वचा पर खुजली हो सकती है किडनी रोग होने के लक्षण, भूलकर भी न करें

गुर्दा रोग: शरीर को स्वस्थ और डिटॉक्स रखने में हमारी किडनी की बेहद अहम भूमिका है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने का काम करता है। हालाँकि, जब किडनी के कार्य करने की क्षमता प्रभावित होती है, तो शरीर कई तरह के प्रारंभिक संकेत देना शुरू कर देता है। बार-बार लोग इन योग्यताओं को सामान्य समझकर अंतिम कर देते हैं, जो आगे चलकर किडनी फेलियर या गंभीर किडनी रोग का कारण बन सकते हैं। अगर आपके दांतों या पंजों में किसी बाहरी चोट के कारण सूजन आ रही है, तो यह किडनी की बीमारी का बड़ा संकेत हो सकता है। किडनी जब ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर से पसीना और अतिरिक्त पानी बाहर नहीं निकलता है। यह तरल पदार्थ स्टाइरीन और ऑर्थोडॉक्स ऑर्गेनाइजेशन में जमा होने लगता है, जिससे सूजन दिखाई देती है। त्वचा पर अधिक खुजली और रूखापन होना त्वचा में लगातार खुजली होना सिर्फ एलर्जी या त्वचा संक्रमण ही नहीं है, बल्कि किडनी की मांसपेशियों की ओर भी संकेत होता है। खून में टॉक्सिन्स का होना, पदार्थ का स्तर बढ़ना, त्वचा पर गंभीर खुजली, रूखापन और रैशेज शामिल हैं। बार-बार पेशाब आना या पेशाब में खून आना। खून में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी और विषाक्त पदार्थों के जमाव के कारण होते हैं। सुबह-सुबह नज़र के नीचे सूजन दिखाई देती है। यदि आपके शरीर में यह लक्षण 4-5 दिन से अधिक समय तक लगातार दिखाई देता है, तो बिना किसी देरी के डॉक्टर से संपर्क करें। आप तुरंत केएफटी (किडनी फंक्शन टेस्ट), यूरिन टेस्ट और ब्लड डॉक्युमेंट की जांच करें। पर्याप्त पानी पिएं, नमक का सेवन नियंत्रित करें, और डॉक्टर की सलाह के बिना पेनकिलर खाने से सलाह लें।

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वर्ब्स और पार्टनर्स लिवर में राहत दिलाएगी ये रोटियां, जानिए किस स्वास्थ्य कंडीशन में स्थिर कौन-सा आटा

वर्ब्स और पार्टनर्स लिवर में राहत दिलाएगी ये रोटियां, जानिए किस स्वास्थ्य कंडीशन में स्थिर कौन-सा आटा

भारतीय खाने में रोटी के बिना थाली अधूरी है। लेकिन अगर आप सामूहिक या सामूहिक लिवर जैसे लाइफस्टाइल तकनीशियन से जुड़ रहे हैं, तो आपकी सेहत के लिए केवल रोटी खाना ही अच्छा नहीं हो सकता है। विटामिन के आंकड़ों में रिफ्रेश्ड कार्ब्स और हाई ग्लाइसेमिक पदार्थ (जीआई) होता है, जो ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकता है। सही योग्यता का चुनाव करके आप अपनी सेहत में बहुत बड़ा सुधार ला सकते हैं। आइए जानते हैं कि वॅशर्स और वॅलीवर में कौन-से आटे की रोटी खाना सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। श्रमिकों के लिए सबसे बेहतरीन उपकरण सहकर्मियों के समूह को कम ग्लाइसेमिक व्यापारी और बड़े पैमाने पर रेस्तरां रेस्तरां चाहिए, ताकि ब्लड शुगर स्पाइक न हो: जौ का आटा – इसमें प्रचुरता प्रचुर मात्रा में होती है। यह पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे ग्लूकोज धीरे-धीरे रक्त प्रवाह में जारी होता है।चने का आटा या बेसन –यह प्रोटीन और लैपटॉप का बेहतरीन कॉम्बिनेशन है। चने के आटे से बनी रोटियां खाने से पेट देर तक भरा रहता है और एक्सलेंस सेंस की अनियमितता में सुधार होता है।रागी और बाज़ारा- ये मोटे अनाज कार्बोहाइड्रेट से अधिक मात्रा में होते हैं। तथ्यों के आंकड़ों में छोटी रागी या बाजार के खाने से शुगर नियंत्रण में रहता है। लिवर की समस्या में लिवर पर जमा वसा को कम करने के लिए एंटी-ऑक्सीडेंट और अनाज से अनाज जरूरी हैं। ओट्स का आटा – ओट्स में मौजूद बैड ग्रेट लिवर में फ़िट जाम से होने वाली आय और ओले (एलडीएल) को कम करने में मदद करता है।ज्वार का आटा – जर्सजेन मुक्त होता है और इसमें भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। यह लिवर के इंफ्लेमेशन (सुजन) को कम करने और डिटॉक्स के सेवन में मदद करता है।अलसी और रिकॉर्ड्स का मिश्रण आटा- आटे के विवरण में अलसी के बीज का पाउडर की रोटियाँ। अलसी में मौजूद ओमेगा-3 एसिडिटी लिवर की सेहत में सुधार करता है। किसी भी एक रेटिंग पर अनुमोदित आवास के बजाय आप घर पर ही मल्टीग्रेन आटा तैयार कर सकते हैं। इसके लिए 50% आटा, 20% चना, 15% जौ और 15% जौ या ओट्स कुल मिलाकर दिया जाता है। यह कॉम्बिनेशन कृमि और युग्मक लिवर दोनों एक साथ मिलकर काम करने में बेहद प्रभावशाली है।

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चाय के साथ कुछ एक्स्ट्रा चाहिए? इस ट्रिक से नारियल के गरमा-गरम क्रिस्पी पकौड़े; हर कोई बोलेगा वाह!

चाय के साथ कुछ एक्स्ट्रा चाहिए? इस ट्रिक से नारियल के गरमा-गरम क्रिस्पी पकौड़े; हर कोई बोलेगा वाह!

पकोड़ा रेसिपी: बारिश का मौसम आते ही अक्सर कुछ न कुछ चटपटा खाने के लिए मन मचल जाता है। ऐसे में अगर चाय के साथ थाली में गरम-गरम गोभी के पकौड़े मिलें तो बात ही कुछ और है। अगर आप भी घर बैठे हलवाई बनाना पसंद करते हैं और खाने के शौकीन हैं तो ये शानदार रेसिपी तुरंत नोट कर लें। बकरी के पकौड़े झटपट तैयार हो जाते हैं और यही इसकी मूल प्रकृति है। स्वाद से भरपूर ये नाश्ता ना सिर्फ बेहद टेस्टी होता है, बल्कि घर पर अचानक आ गई ग्लास या शाम की चाय के लिए एक बेहद ही स्वादिष्ट और लाजवाब विकल्प भी है। सबसे पहले पानी में थोड़ा सा नमक और हल्दी का सहारा लें। ऐसा करने से बकरी का रॉपन पूरी तरह निकल जाता है। इसके अलावा, सब्जियों के मौसम में गोभी में छोटे-छोटे दुकानदार भी रहते हैं; पानी में नमक-हल्दी स्टॉइकलाईन से वे कीड़े आसानी से मार्कर बाहर निकल जाते हैं और पानी में पूरी तरह से साफ हो जाता है। बेसन में आटा का चावल मिश्रण करें इसके बाद बेसन और थोड़ा सा चावल का आटा एक साथ मिलाएं। अब इसमें छोटे-छोटे टुकड़ों में अच्छी तरह से कोटिंग कर लें। चावल का आटा मिलाने से पकौड़े बहुत ही क्रिस्पी बनते हैं और ठंडे हो जाने पर भी इनका कुरकुरापन बरकरार रहता है। इन मूर्तिकला कोस्टामिक स्वाद गोभी के पकौड़े का स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें सभी मौलिक उद्धरण शामिल हैं। कुल मिलाकर 1 में जीरा, आधा धनिया पाउडर, 1 धनिया पाउडर, कुटी हुई अदरक और हरी मिर्च शामिल हैं। इन सभी कलाकृतियों को बेसन में रखा गया। साथ ही इन अजमोद, हल्दी और स्वाद मसाला दाल लें। अगर आप कदम रखते हैं तो इसमें इलेक्ट्रिक कटा हुआ हरा धनिया भी डाल सकते हैं। क्रिस्पी पकौड़े हो जायेंगे तैयार अंतिम में सकली हुई बागान के मिश्रण को बेसन के मिश्रण में अच्छी तरह से कोट करें। फिर वैसे ही दूसरे पॉश्चर में प्लांट और ऊपर से सीधे पानी का मिश्रण करें। इसके बाद कंपनी की वेबसाइट पर बेसबॉल की कोटिंग करें। इस डबल कोटिंग की मदद से पकौड़े बेहद कुरकुरा और स्वादिष्ट। अगर आप भी घर पर गोभी के कुरकुरे पकौड़े का आनंद लेना चाहते हैं तो इस रेसिपी को फॉलो कर सकते हैं।

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चांदीपुरा वायरस के लक्षण: गुजरात में 3 मासूमों की जान लेने वाला ‘रेसापुरा वायरस’ क्या है? जानिए इसके खतरे और बचाव

चांदीपुरा वायरस के लक्षण और रोकथाम: हाल ही में गुजरात में ‘अरेपुरा वायरस’ के कारण कई मासूम बच्चों की जान चली गई, जिन्होंने माता-पिता और स्वास्थ्य और प्रशासन की चिंता को बहुत बढ़ा दिया है। शुरुआत में 3 बच्चों की मौत की खबर ने मासूम को झकझोर दिया। तो जानें कि यह अंतिम वायरस क्या है, इसका क्या खतरा है और आप अपने बच्चों को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं। वायरस से साबरकांठा जिले में 6 साल की बच्ची की मौत के बाद शनिवार को सांकेतिक जिले में दो और बच्चों में भी वायरस के लक्षण यहां दिखाई दे रहे हैं। बेहतर इलाज के लिए उन्हें गांधीनगर सिविल अस्पताल भेजा गया है। दोनों की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। इसके बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि वायरस को यूरोप में प्रतिबंधित करने के लिए कई संगठनात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। कॉन्स्टेंट सुपरवाइज़र, कैथेड्रल के आस-पास के रेस्टॉरेंट्स, साफ़-सफ़ाई, मिट्टी की दीवारें और दराजों को मंजूरी देने के उपाय जैसे कि कीट वहाँ रेस्टॉरेंट नहीं हैं। सिल्वरपुरा वायरस क्या है? यह एक बेहद खतरनाक वायरस है जो मुख्य रूप से 9 महीने से लेकर 15 साल तक के बच्चों को अपना शिकार बनाता है। यह वायरस सीधे तौर पर इंसान के दिमाग पर हमला करता है, जिससे मस्तिष्क में सूजन यानी एन्सेफलाइटिस हो जाता है। इसका नाम महाराष्ट्र के ‘बेशरियापुरा’ गांव से पड़ा है, जहां साल 1965 में पहली बार इस वायरस की पहचान की गई थी। यह कैसे है? ये कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो एक इंसान से दूसरे इंसान में भर्ती हो जाए। यह मुख्य रूप से सैंडफ्लाई यानी रेत में पाई जाने वाले मक्खी, मच्छरों और टिक्स के टुकड़े से बनी है। जब ये कीड़े मकोड़े या मक्खी किसी बच्चे को मारते हैं तो ये जन्तु विषाणु सीधे उसके खून में प्रवेश कर जाता है। सिल्वरपुरा वायरस के मुख्य लक्षण इस वायरस की सबसे डरावनी बात यह है कि इसका असर बहुत तेजी से होता है। माता-पिता को इन विशेषाधिकारी को लेकर बहुत ही संयमित जीवन की आवश्यकता है। अचानक चमकना:शारीरिक रूप से बहुत अधिक तपने लगता है। गंभीर सिरदर्द: बच्चे को सिर में असहनीय दर्द होता है। उल्टी और पेट दर्द: तेज बुखार के साथ लगातार उल्टी या मतली महसूस होना। पड़ना: कुछ ही घंटों में बच्चे का शव अकड़ने लगता है और देखने आते हैं। असंबद्धता और लाचारी: बच्चा बहुत ही खतरनाक हो जाता है, उसकी निजी पहचान हो जाती है और वह बीमार हो सकता है। यह वायरस इतना खतरनाक क्यों है? इस वायरस के खतरे का मुख्य कारण इसकी गति है। लक्षण दिखने में 24 से 48 घंटे के अंदर ही यह बीमारी गंभीर रूप ले लेती है और वायरस ब्रेन को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। अगर समय पर इलाज न मिले तो बच्चा कोमा में जा सकता है और उसकी जान भी जा सकती है। वर्तमान में इस वायरस को ख़त्म करने के लिए कोई वैक्सीन, टीका या दवा मौजूद नहीं है। डॉक्टर आयुर्वेदिक दवाओं के आधार पर ही इलाज करते हैं जैसे बुखार कम करना और दौरों को फायदा होता है, इसलिए अस्पताल में सही समय पर रहना ही जान आराम का एकमात्र उपाय होता है। कैसे बनायें? इस वायरस की कोई पक्की दवा नहीं है, इसलिए मक्खियों और मच्छरों से बचना ही है इस बीमारी का सबसे असरदार इलाज। पूरी तरह से कपड़े के कपड़े: बच्चों को हमेशा ऐसे कपड़े पहनाएं जिससे उनके हाथ और पैर पूरी तरह आकर्षक बने रहें, खासकर शाम और रात के समय। मच्छरदानी का अर्थ: घर में मच्छरदानी का प्रयोग विशेष रूप से बच्चों के लिए हमेशा किया जाता है। कीट निषेध का प्रयोग: त्वचा के खुले उपकरणों या फूलों पर कीडों और मच्छरों को दूर रखने वाली क्रीम या स्पेक्ट्रम। घर के आसपास सफाई व्यवस्था: सैंडफ्लाई फ़्लोरिडा प्लास्टर मिट्टी, चट्टानों, चट्टानों और चट्टानों से बनी हुई पानी के आस-पास की चट्टानें। अपने घर और आस-पास के इलाके में साफ-सफाई के बर्तन और पानी जमा न करें। लक्षणसंकेत ही डॉक्टर के पास: अगर बच्चे को अचानक तेज बुखार आ जाए और साथ में उल्टी या दौरे की शिकायत हो, तो घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद न करें। तत्काल असंतुलित बड़े अस्पताल। थोड़ी सी जागरूकता और सावधानी अपनाकर हम इस जन्मजात वायरस से अपने बच्चों को सुरक्षित रख सकते हैं। इसे जरूर पढ़ें: iPhone के लिए WhatsApp: अब ‘ग्रीन डॉट’ का खुलासा, कौन है एक्टिव, जल्द आ रहा है नया अपडेट; जानिए पूरा विवरण अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें। (टैग्सटूट्रांसलेट) चांदीपुरा वायरस(टी) चांदीपुरा वायरस लक्षण(टी)चांदीपुरा वायरस(टी)चांदीपुरा वायरस के लक्षण(टी)चांदीपुरा वायरस क्या है(टी)चांदीपुरा वायरस से बचाव(टी)चांदीपुरा वायरस क्या है

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ब्लड शुगर से लेकर वजन तक...सेहत के लिए रामबाण है अमरूद के औषधि की चाय, जानिए कैसे और कैसे पीएं

मॉनसून चाय: ठंड से बचने और सामुदायिकता बढ़ाने के लिए कौन सी चाय सबसे अच्छी है?

बारिश की फुहारें अपने साथ चिलचिलाती गर्मी से राहत तो लाती हैं, लेकिन साथ ही लेकर आती हैं ठंड, खांसी और फ्लू जैसी मौसमी बीमारियां। इस मौसम में खुद को अंदर से मजबूत और मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है। ऐसे में राहत और सेहत का सबसे बेहतरीन संयोजन है, एक हर्बल हर्बल चाय। आइए जानते हैं इस मॉनसून में आपके लिए कौन सी चाय सबसे अच्छी है? अदरक, तुलसी काली और काली मिर्च की कड़क चाय भारतीय कारखाने में ज़ूम-खांसी की यह सबसे पुरानी और प्रभावशाली दुकान है। अदरक में पाए जाने वाले एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण गले की खराश को दूर करते हैं। तुलसी एक बेहतरीन एंटी-बायोटिक है, जो संक्रमण से लड़ती है। काली मिर्च बंद नाक को कोने और जांघ की पट्टियों को कम करने में मदद मिलती है। आप इसमें छोटी चायपत्ती और गुड़ पूरे पी सकते हैं। हीलिंग हल्दी-दालचीनी वाली चाय हल्दी सिर्फ पाउडर का हिस्सा नहीं है, बल्कि एक शक्तिशाली औषधि है। हल्दी में ‘करक्यूमिन’ नामक तत्व होता है, जो इम्युनिटी को बढ़ावा देने में सबसे आगे है। दालचीनी में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स शरीर को वायरल संक्रमण से बचाते हैं। एक कप पानी में आधा हल्दी पाउडर (या कोल हल्दी), एक छोटा टुकड़ा दालचीनी और थोड़ा सा आधा हल्दी पाउडर। यह चाय शरीर के दर्द को भी कम करती है। अगर आपको बिना दूध की ताजगी वाली चाय पसंद है, तो यह आपके लिए सबसे अच्छी है। लेमन ग्रास में एंटी-फंगल और एंटी-स्क्वाएंटी गुण होते हैं जो पेट के संक्रमण से बचाते हैं। पुदीना गले को ठंडक देता है और पाचन तंत्र को नष्ट कर देता है।

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मानसून आयुर्वेदिक आहार: बारिश के मौसम में भूलकर भी न खाएं ये चीजें, बीमारी बढ़ने का हो सकता है खतरा; जानें सही आयुर्वेदिक औषधि

मानसून आयुर्वेदिक आहार: बारिश के मौसम में भूलकर भी न खाएं ये चीजें, बीमारी बढ़ने का हो सकता है खतरा; जानें सही आयुर्वेदिक औषधि

गर्मी के लंबे इंतजार के बाद डुबेकी की पहली बारिश हर किसी को सर्वमान्य होती है। लेकिन यह मौसम आपके साथ सिर्फ राहत ही नहीं, बल्कि कई तरह के विकार और ख़राब पाचन क्रिया भी लेकर आता है। आयुर्वेद के अनुसार, सिद्धांत वर्षा ऋतु में शरीर की ‘जठराग्नि’ बहुत कमजोर होती है। ऐसे में गलत खान-पान से वात, पित्त और कफ का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे हम जल्दी बीमार हो जाते हैं। आइए जानते हैं कि इस मौसम में किन-किन चीजों से दूरी बनानी चाहिए और क्या खाना सेहत के लिए फायदेमंद है। बकवास में भूलकर भी ना आकर्षक ये चीजें डिफॉल्ट में पालक, मेथी, बंदगोभी जैसी पत्तेदार सब्जियाँ खाने से। इस मौसम में बाइबल के कारण इन पर किंडर, स्कैनर और फंगस तेजी से बढ़ते हैं, जो पेट के संक्रमण का कारण बन सकते हैं।आयुर्वेद में दवा के दौरान दही और छाछ का सेवन कम करना चाहिए। तासीर अवांछनीय और भारी होता है, जो शरीर में सूजन, कफ और वात दोष को बढ़ा सकता है।इस सीज़न में कच्चा खाना और पकाना मुश्किल होता है। कच्चे खाने से शरीर में जा सकते हैं, इसलिए हमेशा पका हुआ खाना ही स्थिर।होती बारिश ही समोसे, पकौड़े और चाट खाने का मन हर किसी का होता है। लेकिन अधिकतर तेल और मौलिक वाला खाना आपके पहले से ख़राब पाचन क्रिया को और धीमा कर देता है, जिससे गैस और एसिडिटी की समस्या बढ़ जाती है। आयुर्वेद के अनुसार बारिश में क्या खाना चाहिए? इस मौसम में पुराने, पुराने चावल और आटे से बनी टिकाऊ वस्तुएं। ये आसानी से मिलते हैं से पच।खाना पकाने में अदरक, लहसुन, हींग, जीरा, काली मिर्च, हल्दी और धनिया का इस्तेमाल जरूर करें। ये आपके भूख और पाचन शक्ति को दर्शाती हैं।सिद्धांत में डोकलाम ठंडा हुआ या गुनगुना पानी ही पिएं। आप तुलसी, अदरक और पुदीने की चाय या काढ़ा भी पी सकते हैं। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।लौकी, तोरई, कद्दू, परवल और करेला जैसी क्लासी प्लांट इस मौसम के लिए सबसे अच्छे हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)आयुर्वेद में मानसून आहार(टी)आयुर्वेद के अनुसार मानसून में सबसे अच्छा आहार क्या है(टी)मानसून में क्या खाना चाहिए(टी)मानसून में क्या नहीं खाना चाहिए(टी)मानसून में कैसा खाना चाहिए

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ब्लड शुगर से लेकर वजन तक...सेहत के लिए रामबाण है अमरूद के औषधि की चाय, जानिए कैसे और कैसे पीएं

ब्लड शुगर से लेकर वजन तक…सेहत के लिए रामबाण है अमरूद के औषधि की चाय, जानिए कैसे और कैसे पीएं

आज हर दूसरा व्यक्ति किसी न किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहा है। रक्तचाप, उच्च वजन और पाचन तंत्र आज के समय की सबसे आम बीमारियाँ बन गई हैं। क्या आप जानते हैं कि आपके घर में आसानी से मिलने वाले अमरूद के पेड़ में ही इन सभी समस्याओं का समाधान छिपा है? अमरूद का फल तो सेहत के लिए जादुई होता है, लेकिन इसके पत्ते औषधीय गुणों का खजाना हैं। आयुर्वेद में अमरूद की चाय को एक बेहतरीन ‘हेल्थ टॉनिक’ माना जाता है। आइए जानते हैं इसके फायदे और इसे पीने के सही तरीके के बारे में। अमरूद के व्यापारी की चाय के फायदे क्या-क्या हैं? अमरूद के दुकानदारों के चाय भोजन के बाद रक्त में ग्लूकोज के स्तर को बढ़ने से रोका जाता है। यह बॉडी में रिव्यू के लेवल को स्टोरी करता है, जिससे टाइप-2 के मरीजों को बहुत फायदा होता है।अगर आपका पेट खराब और बढ़ते वजन से संबंधित है, तो यह आपकी मदद कर सकता है। यह कार्बोहाइड्रेट कॉम्प्लेक्स को शुगर में बदलने से रोकता है, जिससे शरीर में फैट जमा नहीं होता है और मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है।अमरूद के दुकानदारों में विरोधी-साम्राज्य गुण होते हैं। इसके चाय पीने से पेट के निरपेक्ष बाज़ार ख़त्म हो जाते हैं। इससे गैस, अपच, कंजेशन और दस्त जैसे मुद्दों में तत्काल राहत मिलती है।यह चाय खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को कम करती है, जिससे रक्त शर्करा का स्तर बेहतर होता है और दिल की हालत खतरे में पड़ जाती है। अमरूद के आर्किटेक्ट की चाय कैसे खरीदें? 4-5 अमरूद के समुद्री डाकू और साफा पत्ते, एक गिलास पानी, और स्वाद वाला छोटा सा शहद या नींबू का रस। सबसे पहले शिक्षक को पानी से अच्छी तरह धो लें। अब एक पैन में पानी के शौकीन और मसाले इन दुकानदारों को डाल दिए जाते हैं। पानी को 8-10 मिनट तक धीमा झटका तब तक जब तक पानी का रंग हरा या पीला न हो जाए। इसके बाद गैस बंद करें, चाय को अच्छा लें। स्वाद के लिए आप शहद या लेस्बियन में मिल सकते हैं। मुख्य लाभ पाने के लिए इस चाय को सुबह खाली पेट की खुराक सबसे सही माना जाता है। वजन और शुगर को नियंत्रित करने के लिए आप इसे दोपहर या रात के भोजन के बाद एक घंटे बाद भी ले सकते हैं। 1 से 2 कप चाय का सेवन गोदाम में है। (टैग्सटूट्रांसलेट)स्वास्थ्य(टी)स्वास्थ्य युक्तियाँ(टी)जीवनशैली(टी)अमरूद की पत्ती की चाय(टी)रक्त शर्करा(टी)वजन कम करना

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लिवर में भी हो सकता है पथरी? इन प्रारंभिक प्रथम चरण को अंतिम रूप देने के लिए भी न भूलें

लिवर में भी हो सकता है पथरी? इन प्रारंभिक प्रथम चरण को अंतिम रूप देने के लिए भी न भूलें

आमतौर पर जब भी ‘पथरी’ का नाम आता है तो हमारा ध्यान सबसे पहले किडनी या गॉलब्लैडर की तरफ जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके लीवर में भी पथरी हो सकती है? इसे मेडिकल भाषा में हेपेटोलिथियासिस या इंट्राहेपेटिक स्टोन्स कहा जाता है। लिवर हमारे शरीर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है, और इसमें पथरी की भी गंभीर स्थिति हो सकती है। आइए जानते हैं कि ये क्यों होता है और इसके प्रमुख लक्षण क्या हैं। लिवर कॉन्स्टेंट ‘बायल एसोसिएट’ की स्थापना करता है, जो खाना पचाने में मदद करता है। जब लिवर के अंदर मौजूद पित्त की नाल में कैल्शियम, कैल्शियम या बिलीरुबिन जमा होने लगता है, तो यह धीरे-धीरे-धीरे-धीरे मजबूत होकर पथरी का रूप ले लेता है। सही समय पर इलाज न करने से लिवर को गंभीर नुकसान हो सकता है। इन प्रारंभिक प्रविष्टियों को न करें लिवर की पथरी की सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआत में इसके लक्षण बहुत सामान्य होते हैं, जिनमें लोग अक्सर गैस या बदहज़मी समझकर छोड़ देते हैं। लिवर पेट के दाहिनी तरफ होता है। यदि आपको इस हिस्से में लगातार या अचानक तेज दर्द होता है, जो पिंच तक जाता है, तो यह पथरी का संकेत हो सकता है।पेट में भारीपन महसूस होना, कुछ भी खाने पर तुरंत उल्टी होना जैसा कि मन होना लिवर में अस्वस्थता का संकेत है।जब पथरी के कारण पित्त का निकलना बंद हो जाता है, तो त्वचा और आंखों का रंग पीला होने लगता है। साथ ही पेशाब का रंग गहरा पीला हो जाता है।लिवर में पथरी के कारण यदि संक्रमण बढ़ता है, तो रोगी को ठंड लगकर तेज़ बुखार आ सकता है।बिना ज्यादा काम किए भी शरीर में हर वक्त उदासी और बन गई गरीबी। अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करें लिवर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है कि आप अपनी जीवनशैली में सुधार करें।अधिकांश तेल-मसालेदार और वैगन-ट्रेनरों की दूरी।रिज़ॉर्ट में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि टॉक्सिन्स के बाहर निकल की सुविधा हो।नियमित रूप से व्यायाम या सैर करें। (टैग्सटूट्रांसलेट)पित्ताशय की थैली हटाने से लीवर पर प्रभाव(टी)क्या कोलेसिस्टेक्टॉमी से लीवर प्रभावित होता है(टी)पित्ताशय की पथरी के इलाज के टिप्स(टी)डॉ. सरीन पित्ताशय सलाह (टी) पित्ताशय की सर्जरी के बाद जिगर का दबाव (टी) पित्ताशय की थैली के बिना पित्त प्रवाह (टी) पित्ताशय की पथरी का घरेलू उपचार (टी) पित्ताशय की सर्जरी के प्रभाव (टी) पित्ताशय की थैली के बाद जिगर का स्वास्थ्य (टी) पित्ताशय की पथरी डॉक्टर युक्तियाँ

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खीरा पुदीना ड्रिंक: सुबह की ताजगी ही दिखती है थकावत तो खाली पेट पीएं खीरा और पुदीना का रस, शरीर को मिलती है ताजगी की ऊर्जा

खीरा पुदीना ड्रिंक: सुबह की ताजगी ही दिखती है थकावत तो खाली पेट पीएं खीरा और पुदीना का रस, शरीर को मिलती है ताजगी की ऊर्जा

खीरा पुदीना ड्रिंक: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, खराब लाइफस्टाइल और असंतुलित खानपान के कारण सुबह उठते ही थकान, सुस्ती और भारीपन महसूस होना एक आम समस्या बन गई है। कई बार भरपूर नींद लेने के बाद भी शरीर में वो ऊर्जा नहीं होती, हमें आपके लिए जरूरी होती है। अगर आप भी सुबह-सुबह चाय या फूला के साथ अपनी नींद भटकते हैं, तो आपकी इस आदत को बदलने का समय आ गया है। अपनी सुबह की शुरुआत कैफीन के बजाय आप खीरा और पुदीना के सेवन से करें। इसे खाली पेट पीने से शरीर में सुस्ती नहीं रहेगी। बल्कि आपको ऊर्जावान ऊर्जा भी प्राप्त होगी। खीरा और पुदीना का संयोजन क्यों है खास? खेड़ा और पुदीना, दोनों ही आपके ठंडे तासीर और ताजगी देने वाले गुणों के लिए जाते हैं। जब इन दोनों को एक साथ जोड़ा जाता है, तो यह एक बेहतरीन डिटॉक्स ड्रिंक बन जाता है जो शरीर के अंदर से साफ और एनर्जेटिक काम करता है। पोटेशियम में लगभग 95% पानी होता है, जो शरीर को तुरंत नष्ट कर देता है। इसके अलावा, विटामिन सी, विटामिन के, पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के चयापचय को बढ़ावा देते हैं। वहीं पुदीन की मित्र एंटीऑक्सीडेंट और मेन्थॉल सेपरेटिटी होती हैं। यह केवल आपके पाचन तंत्र को स्थापित नहीं करता है, बल्कि मानसिक थकान को कम करके मूड को तुरंत ताजा करने का काम करता है। खाली पेट खेडा-पुदीना के बेमिसाल फायदे सुबह-सुबह खाली पेट इस खाद्य पदार्थ को पीने से शरीर की कोशिकाओं की तुरंत बिक्री हो जाती है, जिससे गरीबी दूर हो जाती है और आप खुद को ऊर्जावान महसूस करते हैं।रात भर में शरीर में जमा हुआ विकिरण टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में यह पेय बहुत ही लाभकारी है। अगर आपको सुबह पेट साफ नहीं है या गैस-एसिडिटी की समस्या है तो यह आपके लिए जरूरी है। यह पाचन अग्नि को शांत करता है और ब्लोटिंग से राहत देता है।प्रतिदिन पीने से खून साफ ​​होता है। जिससे चेहरे के कील-मुंहसे दूर होते हैं और त्वचा में निखार आता है। सबसे पहले मिठाई को अच्छे से ढोकर छोटे से मिश्रण में काट लें। अब एक जरूरी या ज्यूसर में कटे हुए टुकड़े, पुदीने की सब्जियां और एक कप पानी के ढांचे को अच्छी तरह से ब्लेंड कर लें। यह एक अच्छा लेंस में से एक है। इसमें नींबू का रस, काला नमक और संबंधित जीरा पाउडर मिलाकर अच्छे से मिलाएं। नोट – आप इसे सुबह खाली पेट पीएं और इसे कम से कम 30 से 45 मिनट बाद तक पिएं।

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