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काटजू अस्पताल में हाईटेक प्रिवेंटिव गायनेकोलॉजी सेंटर:3 करोड़ की लागत से हुआ तैयार; मेनोपॉज से इन्फर्टिलिटी तक का इलाज एक छत के नीचे

काटजू अस्पताल में हाईटेक प्रिवेंटिव गायनेकोलॉजी सेंटर:3 करोड़ की लागत से हुआ तैयार; मेनोपॉज से इन्फर्टिलिटी तक का इलाज एक छत के नीचे

भोपाल के शासकीय कैलाश नाथ काटजू अस्पताल में महिलाओं के लिए एक बड़ी और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधा शुरू होने जा रही है। यहां “स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर फॉर प्रिवेंटिव गायनेकोलॉजी एंड इन्फर्टिलिटी” स्थापित किया जा रहा है, जो मध्यभारत का अपनी तरह का पहला और अनूठा सेंटर होगा। करीब तीन करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक और हाईटेक मशीनें अस्पताल में पहुंच चुकी हैं और उनके इंस्टालेशन का काम लगभग पूरा हो गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस सेंटर को नवरात्र के दौरान शुरू किए जाने की तैयारी है। इस सेंटर के शुरू होने से मेनोपॉज, निसंतानता, पीसीओएस, मोटापा, अनियमित मासिक धर्म और सर्वाइकल कैंसर जैसी महिलाओं से जुड़ी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज एक ही स्थान पर उपलब्ध होगा। अभी तक इन बीमारियों के इलाज के लिए महिलाओं को अलग-अलग अस्पतालों और विशेषज्ञों के पास जाना पड़ता था, लेकिन अब जांच से लेकर उपचार तक की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिल सकेंगी। किशोरियों से महिलाओं तक 100 से अधिक रोगों का इलाज इस नए सेंटर में किशोरियों से लेकर वयस्क महिलाओं तक की स्वास्थ्य समस्याओं के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। यहां महिलाओं से जुड़े 100 से अधिक रोगों की जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, सेंटर के लिए ग्राउंड फ्लोर और ऊपरी मंजिलों में स्थान तय कर दिया गया है। यहां प्रजनन स्वास्थ्य से लेकर गर्भाशय कैंसर तक की बीमारियों के इलाज की व्यवस्था होगी। मेनोपॉज और हार्मोनल समस्याओं के लिए विशेष सुविधा काटजू अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ और सेंटर की स्टेट नोडल अधिकारी डॉ. रचना दुबे के अनुसार महिलाओं में आमतौर पर 45 से 50 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज की स्थिति शुरू होती है। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजेन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है, जिससे हड्डियों से जुड़ी समस्याएं, हार्मोनल असंतुलन और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं सामने आती हैं। नए सेंटर में इन सभी समस्याओं के लिए विशेष परामर्श, जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इन्फर्टिलिटी और गर्भधारण से जुड़ी समस्याओं का इलाज इस सेंटर में बांझपन यानी इन्फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं के इलाज पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। यहां पीसीओएस, फाइब्रॉइड, हार्मोनल असंतुलन और अन्य स्त्री रोगों की जांच आधुनिक तकनीकों के माध्यम से की जाएगी। गर्भधारण में आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए आईयूआई जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा। सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की समय पर पहचान बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस सेंटर में वीआईए तकनीक के माध्यम से कैंसर की शुरुआती जांच की जाएगी। इस तकनीक की मदद से गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का प्रारंभिक चरण में ही पता लगाया जा सकेगा, जिससे समय रहते इलाज संभव हो सकेगा और महिलाओं की जान बचाई जा सकेगी। आधुनिक मशीनों से होगा इलाज केगेल चेयर- पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों को मजबूत करने वाली मशीन है। जिन महिलाओं को बच्चेदानी या पेल्विक मांसपेशियों के ढीले होने की समस्या होती है, उनमें बिना सर्जरी के उपचार संभव हो सकेगा। कोलपोस्कोप- मशीन के जरिए गर्भाशय ग्रीवा, योनि और संबंधित अंगों की गहन जांच की जाएगी। लेजर मशीन- इसके माध्यम से सिस्ट, मेनोपॉज से जुड़ी समस्याएं और यूरीन लीक जैसी बीमारियों का इलाज आसान हो जाएगा। रोगों की रोकथाम पर रहेगा विशेष फोकस विशेषज्ञों के अनुसार, यह सेंटर केवल इलाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिलाओं में रोगों की रोकथाम और शुरुआती पहचान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। खराब जीवनशैली और बदलती जीवनशैली के कारण महिलाओं में कई स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसकी शुरुआत अक्सर पीसीओएस जैसी बीमारी से होती है। किशोरियों में बढ़ रही पीसीओएस की समस्या विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान समय में हर चार में से एक किशोरी में पीसीओएस के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। वहीं अस्पतालों में आने वाली महिलाओं में भी लगभग आधी महिलाएं इसी समस्या से प्रभावित होती हैं। ऐसे में इस सेंटर के माध्यम से समय पर जांच और उपचार की सुविधा मिलने से महिलाओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। शिक्षा कार्यक्रम भी चलेंगे सेंटर की इंचार्ज डॉ. रचना दुबे के अनुसार इस सेंटर की तैयारी पिछले कई महीनों से की जा रही है और उम्मीद है कि यह क्लीनिक जल्द ही शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि यहां केवल जांच और इलाज ही नहीं होगा, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।

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भोपाल के शासकीय कैलाश नाथ काटजू अस्पताल में महिलाओं के लिए एक बड़ी और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधा शुरू होने जा रही है। यहां “स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर फॉर प्रिवेंटिव गायनेकोलॉजी एंड इन्फर्टिलिटी” स्थापित किया जा रहा है, जो मध्यभारत का अपनी तरह का पहला और अनूठा सेंटर होगा। करीब तीन करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक और हाईटेक मशीनें अस्पताल में पहुंच चुकी हैं और उनके इंस्टालेशन का काम लगभग पूरा हो गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस सेंटर को नवरात्र के दौरान शुरू किए जाने की तैयारी है। इस सेंटर के शुरू होने से मेनोपॉज, निसंतानता, पीसीओएस, मोटापा, अनियमित मासिक धर्म और सर्वाइकल कैंसर जैसी महिलाओं से जुड़ी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज एक ही स्थान पर उपलब्ध होगा। अभी तक इन बीमारियों के इलाज के लिए महिलाओं को अलग-अलग अस्पतालों और विशेषज्ञों के पास जाना पड़ता था, लेकिन अब जांच से लेकर उपचार तक की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिल सकेंगी। किशोरियों से महिलाओं तक 100 से अधिक रोगों का इलाज इस नए सेंटर में किशोरियों से लेकर वयस्क महिलाओं तक की स्वास्थ्य समस्याओं के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। यहां महिलाओं से जुड़े 100 से अधिक रोगों की जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, सेंटर के लिए ग्राउंड फ्लोर और ऊपरी मंजिलों में स्थान तय कर दिया गया है। यहां प्रजनन स्वास्थ्य से लेकर गर्भाशय कैंसर तक की बीमारियों के इलाज की व्यवस्था होगी। मेनोपॉज और हार्मोनल समस्याओं के लिए विशेष सुविधा काटजू अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ और सेंटर की स्टेट नोडल अधिकारी डॉ. रचना दुबे के अनुसार महिलाओं में आमतौर पर 45 से 50 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज की स्थिति शुरू होती है। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजेन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है, जिससे हड्डियों से जुड़ी समस्याएं, हार्मोनल असंतुलन और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं सामने आती हैं। नए सेंटर में इन सभी समस्याओं के लिए विशेष परामर्श, जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इन्फर्टिलिटी और गर्भधारण से जुड़ी समस्याओं का इलाज इस सेंटर में बांझपन यानी इन्फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं के इलाज पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। यहां पीसीओएस, फाइब्रॉइड, हार्मोनल असंतुलन और अन्य स्त्री रोगों की जांच आधुनिक तकनीकों के माध्यम से की जाएगी। गर्भधारण में आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए आईयूआई जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा। सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की समय पर पहचान बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस सेंटर में वीआईए तकनीक के माध्यम से कैंसर की शुरुआती जांच की जाएगी। इस तकनीक की मदद से गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का प्रारंभिक चरण में ही पता लगाया जा सकेगा, जिससे समय रहते इलाज संभव हो सकेगा और महिलाओं की जान बचाई जा सकेगी। आधुनिक मशीनों से होगा इलाज केगेल चेयर- पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों को मजबूत करने वाली मशीन है। जिन महिलाओं को बच्चेदानी या पेल्विक मांसपेशियों के ढीले होने की समस्या होती है, उनमें बिना सर्जरी के उपचार संभव हो सकेगा। कोलपोस्कोप- मशीन के जरिए गर्भाशय ग्रीवा, योनि और संबंधित अंगों की गहन जांच की जाएगी। लेजर मशीन- इसके माध्यम से सिस्ट, मेनोपॉज से जुड़ी समस्याएं और यूरीन लीक जैसी बीमारियों का इलाज आसान हो जाएगा। रोगों की रोकथाम पर रहेगा विशेष फोकस विशेषज्ञों के अनुसार, यह सेंटर केवल इलाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिलाओं में रोगों की रोकथाम और शुरुआती पहचान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। खराब जीवनशैली और बदलती जीवनशैली के कारण महिलाओं में कई स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसकी शुरुआत अक्सर पीसीओएस जैसी बीमारी से होती है। किशोरियों में बढ़ रही पीसीओएस की समस्या विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान समय में हर चार में से एक किशोरी में पीसीओएस के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। वहीं अस्पतालों में आने वाली महिलाओं में भी लगभग आधी महिलाएं इसी समस्या से प्रभावित होती हैं। ऐसे में इस सेंटर के माध्यम से समय पर जांच और उपचार की सुविधा मिलने से महिलाओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। शिक्षा कार्यक्रम भी चलेंगे सेंटर की इंचार्ज डॉ. रचना दुबे के अनुसार इस सेंटर की तैयारी पिछले कई महीनों से की जा रही है और उम्मीद है कि यह क्लीनिक जल्द ही शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि यहां केवल जांच और इलाज ही नहीं होगा, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।

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