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गर्मी के दिनों में शरीर को ठंडा और तरोताजा रखना जरूरी होता है. भरतपुर के गांवों में सौंफ से बनी देसी ठंडाई पारंपरिक रूप से सबसे ज्यादा पसंद की जाती है. यह न सिर्फ शरीर को ठंडक देती है, बल्कि ऊर्जा और पाचन में भी मदद करती है, और पूरी तरह प्राकृतिक होने के कारण स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है.
भरतपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में गर्मियों के दिनों में एक पारंपरिक पेय लोगों की पहली पसंद बन जाता है. यह पेय है सौंफ से तैयार की जाने वाली देसी ठंडाई, जो न सिर्फ शरीर को ठंडक देती है बल्कि ऊर्जा भी प्रदान करती है. गांवों में लोग इसे पीकर खुद को तरोताजा महसूस करते हैं और गर्मी के असर से बचने के लिए इसे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना चुके हैं.

ग्रामीण लोगों के अनुसार सौंफ की तासीर ठंडी होती है, जिससे शरीर का तापमान संतुलित रहता है. यही कारण है कि गर्मी के मौसम में सौंफ वाली ठंडाई का सेवन बेहद फायदेमंद माना जाता है. यह पेय पाचन क्रिया को भी बेहतर बनाता है और शरीर में पानी की कमी को दूर करने में मदद करता है. ग्रामीण इलाकों में खेतों पर काम करने वाले लोग इसे खास तौर पर पसंद करते हैं.

क्योंकि यह उन्हें लंबे समय तक ऊर्जा देता है. इस देसी ठंडाई को बनाना भी बेहद आसान है और इसके लिए किसी महंगे सामान की जरूरत नहीं होती. सबसे पहले ठंडा पानी लिया जाता है, फिर सौंफ को अच्छी तरह साफ करके बारीक पीस लिया जाता है. इसके बाद पिसी हुई सौंफ को पानी में डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है. स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें चीनी डाली जाती है, जिससे इसका स्वाद मीठा और लाजवाब हो जाता है.
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इसके बाद इसमें थोड़ी सी काली मिर्च मिलाई जाती है, जो इसे हल्का तीखापन और अलग स्वाद देती है. कुछ लोग इसमें बर्फ भी डालते हैं, जिससे यह और ज्यादा ठंडी और ताजगी भरी बन जाती है. ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि यह ठंडाई पूरी तरह प्राकृतिक होती है और इसमें किसी तरह का केमिकल नहीं होता, इसलिए यह स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है.

बाजार में मिलने वाले ठंडे पेय पदार्थों के मुकाबले यह सस्ती और ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है. सौंफ वाली यह देसी ठंडाई न केवल गर्मी से राहत देती है, बल्कि परंपरा और स्वाद का भी बेहतरीन उदाहरण है. यही कारण है कि भरतपुर के गांवों में इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है और ग्रामीण क्षेत्र के लोग इसे खूब पसंद करते हैं.













































