Sunday, 09 Aug 2026 | 12:46 AM

Trending :

पीएम मोदी ने अमेरिकी उप-राष्ट्रपति से फोन पर बात की:भारत-अमेरिका साझेदारी मजबूत करने पर चर्चा, प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी ट्रेलर रिव्यू: टॉक्सिक:यश का स्वैग और खतरनाक एक्शन खूब, लेकिन कहानी अब भी उलझी; स्टारडम के भरोसे कितनी चलेगी फिल्म सोनाक्षी सिन्हा पर बीजेपी-सनातन विरोधी एजेंडा चलाने का दावा:पोस्ट में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा को अनफॉलो करने का जिक्र; जानें वायरल दावे की सच्चाई सोनाक्षी सिन्हा पर बीजेपी-सनातन विरोधी एजेंडा चलाने का दावा:पोस्ट में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा को अनफॉलो करने का जिक्र; जानें वायरल दावे की सच्चाई मूड खराब तो छुट्टी; मानसिक सेहत का इलाज या कामचोरी?:चीन की 'अनहैप्पी लीव' से छिड़ी बहस, उद्योगपति गोयनका बोले- भारत में भी बहस जरूरी अफेयर रूमर्स के बीच एक्ट्रेस कोमल संग दिखे गोविंदा:कभी पत्नी सुनीता ने अफेयर का हिंट देकर कहा था- मुझे कोमल नाम से नफरत है
EXCLUSIVE

जरा से काम में सांस फूलना, नाक से सीटी की आवाज आना…ये हो सकते हैं अस्थमा के लक्षण, न करें नजरअंदाज

authorimg

जमशेदपुर. आज के समय में तेजी से बढ़ता वायु प्रदूषण, बदलता मौसम और जीवनशैली में हो रहे बदलाव लोगों की सेहत पर गहरा असर डाल रहे हैं. खासकर सांस से जुड़ी बीमारियां अब आम होती जा रही हैं, जिनमें अस्थमा एक गंभीर और तेजी से फैलने वाली समस्या बन चुकी है. शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक इसके मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो चिंता का विषय है. यह बीमारी न केवल व्यक्ति की दैनिक दिनचर्या को प्रभावित करती है, बल्कि समय रहते ध्यान न देने पर गंभीर रूप भी ले सकती है.

आज क्यों बढ़ गई है यह समस्या
इसी विषय पर झारखंड के सीनियर चेस्ट फिजिशियन डॉ. टी.के. मोहंती बताते हैं कि अस्थमा एक क्रॉनिक (लंबे समय तक रहने वाली) श्वसन संबंधी बीमारी है, जिसमें फेफड़ों की श्वासनलियां संकुचित और सूज जाती हैं. इससे मरीज को सांस लेने में कठिनाई होती है और कई बार अचानक अस्थमा अटैक भी आ सकता है. उन्होंने कहा कि आज के दौर में इसके मामलों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण पर्यावरणीय बदलाव और एलर्जी कारकों का बढ़ना है.

एलर्जी है मुख्य कारण
अस्थमा के प्रमुख कारणों में एलर्जी सबसे अहम भूमिका निभाती है. धूल, धुआं, परागकण (पोलन), पालतू जानवरों के बाल, फफूंदी और विभिन्न प्रकार के केमिकल्स शरीर में एलर्जिक रिएक्शन पैदा करते हैं, जिससे श्वासनलियां प्रभावित होती हैं. इसके अलावा बढ़ता वायु प्रदूषण, खासकर औद्योगिक क्षेत्रों और ट्रैफिक वाले इलाकों में, अस्थमा के खतरे को और बढ़ा देता है. मौसम में अचानक बदलाव, ठंडी हवा, वायरल संक्रमण और कई बार आनुवंशिक कारण भी इस बीमारी के पीछे जिम्मेदार होते हैं.

समय रहते पहचानें लक्षण
अस्थमा के लक्षणों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है. लगातार खांसी आना, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज (व्हीजिंग), सीने में जकड़न और थोड़ी सी मेहनत में ही सांस फूलना इसके मुख्य संकेत हैं. कई मरीजों में ये लक्षण रात या सुबह के समय ज्यादा बढ़ जाते हैं. अगर ये लक्षण बार-बार दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है, इसलिए इन पर ध्यान दें.

खत्म नहीं कर सकते, नियंत्रित कर सकते हैं
बचाव के उपायों पर जोर देते हुए बताया गया कि अस्थमा को पूरी तरह खत्म तो नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे नियंत्रित जरूर किया जा सकता है. इसके लिए सबसे जरूरी है एलर्जी पैदा करने वाले कारकों से दूरी बनाना. घर को साफ रखना, धूल से बचाव करना, मास्क का इस्तेमाल करना और धूम्रपान से दूर रहना बेहद आवश्यक है. साथ ही डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित दवाइयों और इनहेलर का उपयोग करना चाहिए. बदलते मौसम में विशेष सावधानी बरतना भी जरूरी है.

प्रभाव कम किया जा सकता है
अंत में यही कहा जा सकता है कि अस्थमा जैसी बीमारी के प्रति जागरूकता और समय पर उपचार ही सबसे बड़ा बचाव है. अगर सही समय पर इसके लक्षणों को पहचान लिया जाए और जरूरी सावधानियां अपनाई जाएं, तो इस बीमारी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
तस्वीर का विवरण

May 8, 2026/
8:33 am

अटलांटिक महासागर में ‘एमवी होंडियस’ नाम के क्रूज़ जहाज पर हंता वायरस के हमले में तीन लोगों की जान चली...

अगले हफ्ते धोनी IPL में वापसी कर सकते हैं:वानखेड़े या चेपॉक में खेल सकते हैं;अभी काफ इंजरी से रिकवरी कर रहे हैं

April 17, 2026/
7:44 am

चेन्नई सुपर किंग्स के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अगले हफ्ते IPL में वापसी कर सकते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया...

गेहूं खरीद का कोटा बढ़ाने केंद्र से मांगी मदद:सीएम बोले- वैश्विक परिस्थितियों के कारण गेहूं एक्सपोर्ट नहीं हो पाया, जूट इम्पोर्ट में भी दिक्कत

April 23, 2026/
12:23 am

मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण गेहूं के...

भूत बंगला में कॉमेडी-हॉरर का नया अनुभव देंगे अक्षय:प्रियदर्शन बोले- कहानी कई बार लिखी गई; वामिका ने कहा- फिल्म ने शांत रहना और काम एंजॉय करना सिखाया

March 29, 2026/
10:34 am

फिल्म ‘भूत बंगला’ को लेकर स्टारकास्ट और डायरेक्टर ने खुलकर बातचीत की, जिसमें इसके आइडिया, शूटिंग अनुभव और कॉमेडी-हॉरर के...

Google Preferred Source CTA

July 16, 2026/
4:37 pm

आकाशादित्य लामा की फिल्म ‘दुल्हनिया ले आएगी’ का ट्रेलर रिलीज हो गया। कॉमेडी, रोमांस, पारिवारिक रिश्तों और शादी की अफरा-तफरी...

कंगना ने नई जनरेशन की महिलाओं को कहा- गटर छाप:कहा- नशा, शराब, कई आदमियों से यौन संबंध बनाना इनके लिए आजादी, हाउसवाइफ तक नहीं बन सकतीं

July 28, 2026/
9:31 am

सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट ने नई पीढ़ी की भारतीय महिलाओं को गटर कहा है। कंगना का कहना है कि...

अनऑफिशियल टेस्ट, भारत-ए की बढ़त 170 रन हुई:सुदर्शन दूसरी पारी में चोटिल होकर लौटे; श्रीलंका-ए ने 330 रन बनाए, नबी को 4 विकेट

June 27, 2026/
7:12 pm

भारत-ए ने श्रीलंका-ए के खिलाफ पहले अनऑफिशियल टेस्ट पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। गॉल में तीसरे दिन...

सतना फ्लाईओवर पर बाइक को टक्कर मारी, मौत:रीवा रोड पर लगा जाम; जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया

April 28, 2026/
9:04 pm

सतना के कोलगवां थाना क्षेत्र अंतर्गत फ्लाईओवर पर मंगलवार शाम एक सड़क हादसे में बाइक सवार युवक की मौत हो...

राजनीति

जरा से काम में सांस फूलना, नाक से सीटी की आवाज आना…ये हो सकते हैं अस्थमा के लक्षण, न करें नजरअंदाज

authorimg

जमशेदपुर. आज के समय में तेजी से बढ़ता वायु प्रदूषण, बदलता मौसम और जीवनशैली में हो रहे बदलाव लोगों की सेहत पर गहरा असर डाल रहे हैं. खासकर सांस से जुड़ी बीमारियां अब आम होती जा रही हैं, जिनमें अस्थमा एक गंभीर और तेजी से फैलने वाली समस्या बन चुकी है. शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक इसके मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो चिंता का विषय है. यह बीमारी न केवल व्यक्ति की दैनिक दिनचर्या को प्रभावित करती है, बल्कि समय रहते ध्यान न देने पर गंभीर रूप भी ले सकती है.

आज क्यों बढ़ गई है यह समस्या
इसी विषय पर झारखंड के सीनियर चेस्ट फिजिशियन डॉ. टी.के. मोहंती बताते हैं कि अस्थमा एक क्रॉनिक (लंबे समय तक रहने वाली) श्वसन संबंधी बीमारी है, जिसमें फेफड़ों की श्वासनलियां संकुचित और सूज जाती हैं. इससे मरीज को सांस लेने में कठिनाई होती है और कई बार अचानक अस्थमा अटैक भी आ सकता है. उन्होंने कहा कि आज के दौर में इसके मामलों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण पर्यावरणीय बदलाव और एलर्जी कारकों का बढ़ना है.

एलर्जी है मुख्य कारण
अस्थमा के प्रमुख कारणों में एलर्जी सबसे अहम भूमिका निभाती है. धूल, धुआं, परागकण (पोलन), पालतू जानवरों के बाल, फफूंदी और विभिन्न प्रकार के केमिकल्स शरीर में एलर्जिक रिएक्शन पैदा करते हैं, जिससे श्वासनलियां प्रभावित होती हैं. इसके अलावा बढ़ता वायु प्रदूषण, खासकर औद्योगिक क्षेत्रों और ट्रैफिक वाले इलाकों में, अस्थमा के खतरे को और बढ़ा देता है. मौसम में अचानक बदलाव, ठंडी हवा, वायरल संक्रमण और कई बार आनुवंशिक कारण भी इस बीमारी के पीछे जिम्मेदार होते हैं.

समय रहते पहचानें लक्षण
अस्थमा के लक्षणों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है. लगातार खांसी आना, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज (व्हीजिंग), सीने में जकड़न और थोड़ी सी मेहनत में ही सांस फूलना इसके मुख्य संकेत हैं. कई मरीजों में ये लक्षण रात या सुबह के समय ज्यादा बढ़ जाते हैं. अगर ये लक्षण बार-बार दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है, इसलिए इन पर ध्यान दें.

खत्म नहीं कर सकते, नियंत्रित कर सकते हैं
बचाव के उपायों पर जोर देते हुए बताया गया कि अस्थमा को पूरी तरह खत्म तो नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे नियंत्रित जरूर किया जा सकता है. इसके लिए सबसे जरूरी है एलर्जी पैदा करने वाले कारकों से दूरी बनाना. घर को साफ रखना, धूल से बचाव करना, मास्क का इस्तेमाल करना और धूम्रपान से दूर रहना बेहद आवश्यक है. साथ ही डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित दवाइयों और इनहेलर का उपयोग करना चाहिए. बदलते मौसम में विशेष सावधानी बरतना भी जरूरी है.

प्रभाव कम किया जा सकता है
अंत में यही कहा जा सकता है कि अस्थमा जैसी बीमारी के प्रति जागरूकता और समय पर उपचार ही सबसे बड़ा बचाव है. अगर सही समय पर इसके लक्षणों को पहचान लिया जाए और जरूरी सावधानियां अपनाई जाएं, तो इस बीमारी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.