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Neymar Returns, Modric Captains for World Cup 2026

Neymar Returns, Modric Captains for World Cup 2026

Hindi News Sports Brazil & Croatia Squads: Neymar Returns, Modric Captains For World Cup 2026 स्पोर्ट्स डेस्क35 मिनट पहले कॉपी लिंक फुटबॉल वर्ल्ड कप के लिए ब्राजील और क्रोएशिया की टीमों का ऐलान हो गया है। 5 बार की वर्ल्ड चैंपियन ब्राजील में 3 साल बाद जूनियर नेमार की वापसी हुई है। जबकि, क्रोएशिया ने 40 साल के लुका मोड्रिच को कप्तान बनाया है। वे अपना 5वां वर्ल्ड कप खेलेंगे। वहीं, स्पेन के युवा मिडफील्डर फर्मिन लोपेज दाएं पैर में फ्रैक्चर के कारण वर्ल्ड कप से बाहर हो गए हैं। 48 टीमें के इस टूर्नामेंट की शुरुआत 11 जून से होगी। जोकि अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की मेजबानी में 16 शहरों में खेला जाएगा। हाल ही में फ्रांस और बेल्जियम ने भी अपनी-अपनी टीमों का ऐलान किया था। चौथा वर्ल्ड कप खेलेंगे नेमार ब्राजील के मुख्य कोच कार्लो एंसेलोटी ने सोमवार को रियो डी जेनेरियो में टीम का ऐलान किया। उन्होंने कहा- ‘हमने पूरे साल नेमार का बारीकी से विश्लेषण किया। पिछले कुछ समय में उन्होंने लगातार फुटबॉल खेला है। उनकी फिटनेस इस बड़े मंच के लिए बिल्कुल दुरुस्त है।’ 34 साल के नेमार चोट के कारण 2023 के बाद से ब्राजील के लिए एक भी मैच नहीं खेल पाए। वे करियर का चौथा वर्ल्ड कप (2014, 2018, 2022, 2026) खेलेंगे। ब्राजील को ग्रुप-C में रखा गया है। उसका पहला मैच 13 जून को मोरक्को से होगा। फिर हैती और स्कॉटलैंड से मुकाबले होंगे। गोलकीपर एलिसन बेकर चोट से ठीक होकर लौटे हैं। रियल मैड्रिड के विनीसियस जूनियर, बार्सिलोना के राफिन्हा और 19 साल के एंड्रिक फॉरवर्ड लाइन में होंगे। इस सीजन प्रीमियर लीग में चेल्सी के लिए 15 गोल और 5 असिस्ट करने वाले टॉप स्कोरर जोआओ पेड्रो को टीम में जगह नहीं मिली है। ब्राजील का पूरा वर्ल्ड कप स्क्वाॅड: गोलकीपर्स: एलिसन बेकर (लिवरपूल), एडरसन (फेनरबाश), वेवरटन (ग्रेमियो)। डिफेंडर्स: एलेक्स सैंड्रो, डैनिलो, लियो परेरा (फ्लेमेंगो), ब्रेमर (जुवेंटस), इबानेज़ (अल-अहली), वेस्ले (रोमा), मार्किन्होस (पेरिस सेंट-जर्मेन), गेब्रियल (आर्सेनल), डगलस सैंटोस (जेनिट सेंट पीटर्सबर्ग)। मिडफील्डर्स: ब्रूनो गुइमारेस (न्यूकैसल), कैसिमिरो (मैनचेस्टर यूनाइटेड), डैनिलो सैंटोस (बोटाफोगो), फैबिन्हो (अल-इत्तिहाद), लुकास पाकेटा (फ्लेमेंगो)। फॉरवर्ड्स: एंड्रिक (लायन), गेब्रियल मार्टिनेली (आर्सेनल), इगोर थियागो (ब्रेंटफोर्ड), मैथ्यूज कुन्हा (मैनचेस्टर यूनाइटेड), राफिन्या (बार्सिलोना), विनिसियस जूनियर (रियल मैड्रिड), लुइज़ हेनरिक (जेनिट सेंट पीटर्सबर्ग), नेमार (सांतोस), रेयान (बॉर्नमाउथ)। मोड्रिच 200 इंटरनेशनल मैच पूरे कर सकते हैं क्रोएशिया के मुख्य कोच ज्लाटको डालिच ने 26 सदस्यीय टीम का ऐलान किया। इसमें 40 साल के दिग्गज लुका मोड्रिच को चुना गया। वे करियर का 5वां वर्ल्ड कप खेलेंगे। वे पिछले महीने गाल की हड्डी टूटने की चोट का शिकार हो गए थे। डालिच ने उम्मीद जताई है कि वे 17 जून को इंग्लैंड के खिलाफ पहले वर्ल्ड कप मैच तक फिट हो जाएंगे। मोड्रिच 200 इंटरनेशनल मैच पूरे कर सकते हैं। टीम में स्टार फॉरवर्ड इवान पेरिसिच भी शामिल हैं, जिन्होंने पिछले तीनों वर्ल्ड कप में क्रोएशिया के लिए गोल दागे हैं। क्रोएशिया की टीम 2018 वर्ल्ड कप की उपविजेता रही थी, जबकि 2022 वर्ल्ड कप में उसने तीसरा स्थान हासिल किया था। क्रोएशिया को ग्रुप-एल में रखा गया है। टीम 17 जून को इंग्लैंड के खिलाफ पहला मैच खेलेगी। इसके बाद पनामा और घना से मुकाबले होंगे। क्रोएशिया का पूरा वर्ल्ड कप स्क्वाॅड: गोलकीपर्स: डोमिनिक लिवाकोविच, डोमिनिक कोटार्स्की, इवोर पांडुर। डिफेंडर्स: जोस्को ग्वारदियोल, दुये सालेटा-सार, जोसिप सुतालो, जोसिप स्टैनिसिच, मारिन पोंग्रासिच, मार्टिन एर्लिक, लुका वुस्कोविच। मिडफील्डर्स: लुका मोड्रिच, मातेयो कोवाचिच, मारियो पासालिच, निकोला व्लासिच, लुका सुसिच, मार्टिन बटुरिना, क्रिस्टियन जाकिच, पेटार सुसिच, निकोला मोरो, टोनी फ्रुक। फॉरवर्ड्स: इवान पेरिसिच, आंद्रेज क्रामारिच, एंटे बुदिमिर, मार्को पासालिच, पेटार मूसा, इगोर माटानोविच। स्टैंड-बाय खिलाड़ी (Stand-by Players): लोवरो मायेर, फ्रैंजो इवानोविच, डियोन ड्रेना बेलजो, इवान स्मोलसिच, कार्लो लेटिका, एड्रियन सेगेसिच, लुका स्टोज्कोविच। ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट लोपेज बाहर स्पेन के 23 साल के मिडफील्डर फर्मिन लोपेज का वर्ल्ड कप खेलने का सपना टूट गया है। बार्सिलोना क्लब के अनुसार, रविवार को रियल बेटिस के खिलाफ स्पैनिश लीग मैच में लोपेज के दाएं पैर की 5वीं मेटाटार्सल हड्डी में फ्रैक्चर हो गया। क्लब ने बताया कि उन्हें सर्जरी से गुजरना होगा और वे अगले महीने शुरू हो रहे वर्ल्ड कप तक फिट नहीं हो पाएंगे। बार्सिलोना के मिडफील्डर 17 मई को रियल बेटिस के खिलाफ चोटिल हो गए। लोपेज स्पेन की उस टीम का हिस्सा थे, जिसने 2024 यूरो कप जीता था। उन्होंने पेरिस ओलिंपिक 2024 में स्पेन को गोल्ड जिताने में 6 गोल दागे थे, जिसमें फ्रांस के खिलाफ फाइनल में किए गए 2 गोल भी शामिल थे। स्पेन वर्ल्ड कप अभियान की शुरुआत 15 जून को अटलांटा में केप वर्डे के खिलाफ करेगा। ——————————— फुटबॉल वर्ल्ड कप से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… फीफा वर्ल्ड कप के लिए बेल्जियम टीम का ऐलान, डि ब्रुइन और कोर्टुआ संभालेंगे कमान, ओपेंडा बाहर फीफा वर्ल्ड कप 2026 के लिए बेल्जियम ने 26 सदस्यीय टीम का ऐलान किया है। रियाल मैड्रिड के गोलकीपर थिबो कोर्टुआ और मिडफील्डर केविन डि ब्रुइन टीम की कमान संभालेंगे। वर्ल्ड कप 12 जून से अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में खेला जाएगा। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Asian Games 2026 Archery Team: Dhiraj-Jyoti Top; Deepika-Atanu Out

Asian Games 2026 Archery Team: Dhiraj-Jyoti Top; Deepika-Atanu Out

Hindi News Sports Asian Games 2026 Archery Team: Dhiraj Jyoti Top; Deepika Atanu Out 15 मिनट पहले कॉपी लिंक तीरंदाजी के रिकर्व राउंड के ट्रायल में अंकिता भकत तीसरे और धीरज बोम्मादेवर टॉप पर रहे। भारतीय तीरंदाजी संघ ने जापान में होने वाले एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम की घोषणा कर दी है। सोनीपत के साई (SAI) सेंटर में 3 दिनों तक चले सिलेक्शन ट्रायल्स के बाद टीम चुनी गई। देश के स्टार तीरंदाज धीरज बोम्मादेवर और ज्योति सुरेखा वेन्नम ने अपने-अपने वर्ग में पहला स्थान हासिल कर आसानी से टीम में जगह बना ली। ट्रायल महिलाओं के रिकर्व और पुरुषों के कंपाउंड वर्ग में देखने को मिला। चार बार की ओलिंपियन दीपिका कुमारी, पूर्व इंडिया नंबर-1 अतानु दास और एशियन गेम्स के मल्टीपल मेडलिस्ट अभिषेक वर्मा इस बार एशियन गेम्स का टिकट हासिल करने में नाकाम रहे। 3 दिनों के कड़े मुकाबले में दीपिका और अतानु ट्रायल्स में चौथे स्थान पर रहे, जिसके कारण एशियन गेम्स टीम से बाहर होना पड़ा। 19 साल की कीर्ति शर्मा टॉप पर रहीं, कुमकुम दूसरे नंबर पर रहीं महिलाओं के रिकर्व सेक्शन में युवाओं ने सीनियर खिलाड़ियों को पछाड़ दिया। 19 साल की तीरंदाज कीर्ति शर्मा ने ट्रायल्स में 13.5 पॉइंट्स के साथ पहला स्थान हासिल किया। वहीं महाराष्ट्र की तीरंदाज कुमकुम मोहोद दूसरे स्थान पर रहीं। दोनों खिलाड़ियों ने सीधे एशियन गेम्स टीम में जगह पक्की की। कीर्ति शर्मा ट्रायल में टॉप पर रहीं। शूट-ऑफ में दीपिका हारीं, अंकिता भकत ने हासिल किया तीसरा टिकट तीसरे और आखिरी स्थान के लिए ओलिंपियन अंकिता भकत और अनुभवी दीपिका कुमारी के बीच कांटे की टक्कर हुई। तीन दिन के तीन राउंड्स के बाद अंकिता और दीपिका 10.75 पॉइंट्स पर बराबरी (टाई) पर थीं। इसके बाद दोनों के बीच निर्णायक ‘शूट-ऑफ’ मुकाबला हुआ। इसमें अंकिता ने दीपिका को हराकर एशियन गेम्स टीम का तीसरा और आखिरी बर्थ (टिकट) हासिल किया। लगातार दूसरे एशियन गेम्स से बाहर हुईं दीपिका, वर्ल्ड कप टीम में मिली जगह दिग्गज तीरंदाज दीपिका कुमारी लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स में नहीं खेल पाएंगी। इससे पहले 2022 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में वे बेटी के जन्म के कारण हिस्सा नहीं ले सकी थीं। कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन और कई वर्ल्ड कप मेडल जीतने वाली दीपिका ने 2010 से अब तक तीन एशियन गेम्स खेले हैं, लेकिन वे कभी इंडिविजुअल मेडल नहीं जीत सकी हैं। उनका बेस्ट प्रदर्शन 2010 ग्वांगझू गेम्स का टीम ब्रॉन्ज मेडल था। चौथे स्थान पर रहने के कारण दीपिका वर्ल्ड कप सर्किट के तीसरे और चौथे स्टेज के लिए भारतीय टीम में बनी रहेंगी। दरअसल, वर्ल्ड कप के लिए 4 तीरंदाज चुने जाते हैं, जबकि एशियन गेम्स में केवल टॉप-3 को मौका मिलता है। दीपिका कुमारी पिछले एशियन गेम्स में भी भाग नहीं ले सकी थी। जींद की कीर्ति ने 2 साल में नेशनल टीम तक का सफर तय किया ट्रायल्स में टॉप करने वाली 19 साल की कीर्ति शर्मा की कहानी प्रेरणादायक है। हरियाणा के जींद जिले की रहने वाली कीर्ति के पिता लोहे के गेट बनाने का काम करते हैं। 2022 में कोच उधम सिंह की देखरेख में हुए टैलेंट स्काउटिंग ट्रायल के बाद कीर्ति को झारखंड के साई (SAI) हजारीबाग सेंटर में चुना गया था। उन्होंने इसी साल फरवरी में बैंकॉक एशिया कप स्टेज-1 से इंटरनेशनल डेब्यू किया था। वे अब तक तीन एशिया कप खेल चुकी हैं और रिद्धि फोर व रूमा बिस्वास के साथ टीम ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं। कंपाउंड टीम में बड़ा बदलाव अभिषेक वर्मा और वर्ल्ड नंबर-7 ऋषभ यादव बाहर पिछले एशियन गेम्स में भारत ने कंपाउंड तीरंदाजी के सभी 5 गोल्ड मेडल जीते थे, लेकिन इस बार टीम बदली नजर आएगी। अनुभवी ज्योति सुरेखा वेन्नम ही एकमात्र सीनियर खिलाड़ी रहीं, जिन्होंने अपनी जगह बचाई। पुरुषों के वर्ग में बड़ा उलटफेर हुआ। अनुभवी अभिषेक वर्मा का प्रदर्शन खराब रहा और वे टॉप-8 तीरंदाजों में आखिरी स्थान पर रहे। वहीं, दुनिया के सातवें नंबर के कंपाउंड तीरंदाज ऋषभ यादव चौथे स्थान पर रहकर चूक गए। आंध्र प्रदेश के थिरुमुरु गणेश मणि रत्नम ने उन्हें पछाड़कर टीम में जगह बनाई। एशियन गेम्स इस साल सितंबर-अक्टूबर में जापान के आईची-नागोया में होंगे। ————————————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़िए… फुटबॉल वर्ल्डकप के लिए ब्राजील और क्रोएशिया की टीमें घोषित फुटबॉल वर्ल्ड कप के लिए ब्राजील और क्रोएशिया की टीमों का ऐलान हो गया है। 5 बार की वर्ल्ड चैंपियन ब्राजील में 3 साल बाद जूनियर नेमार की वापसी हुई है। जबकि, क्रोएशिया ने 40 साल के लुका मोड्रिच को कप्तान बनाया है। वे अपना 5वां वर्ल्ड कप खेलेंगे। वहीं, स्पेन के युवा मिडफील्डर फर्मिन लोपेज दाएं पैर में फ्रैक्चर के कारण वर्ल्ड कप से बाहर हो गए हैं। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

सतीसन की असली चाल: केरलम में कांग्रेस को प्रबंधित करना, आईयूएमएल को सीमित रखना | भारत समाचार

Iranian President Masoud Pezeshkian and US President Donald Trump. (AFP)

आखरी अपडेट:19 मई, 2026, 08:12 IST नए मुख्यमंत्री की चुनौती यह सुनिश्चित करने की होगी कि कांग्रेस धीरे-धीरे अपने ही गठबंधन में भारी पड़ती न दिखे सतीसन के लिए बड़ा मुद्दा सरकार के अंदर बिजली प्रबंधन को लेकर अधिक लगता है। केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में वीडी सतीसन के उत्थान के आसपास के सभी जश्न के लिए, उनके सामने असली चुनौती एलडीएफ या विपक्षी बेंच से नहीं आ सकती है, बल्कि उनके अपने गठबंधन के भीतर से उभर सकती है। कांग्रेस नेता गहन आंतरिक पैरवी और गुटीय दबाव के बाद शीर्ष पद हासिल करके पहली राजनीतिक बाधा पार करने में कामयाब रहे हैं। लेकिन अब इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) को सीमा के भीतर रखने का कहीं अधिक नाजुक काम आता है, जबकि यह सुनिश्चित करना कि कांग्रेस राजनीतिक रूप से उस पर निर्भर न दिखे। केरलम के राजनीतिक और सत्ता गलियारों में अब इस बात की चर्चा जोरों पर है कि सतीसन मुस्लिम लीग के मजबूत समर्थन के कारण नेतृत्व की पसंद बन गए, जिसने राज्य में यूडीएफ गठबंधन को आधार दिया। भले ही मुख्यमंत्री ने सोमवार को शपथ ली, आईयूएमएल नेताओं ने पहले ही घोषणा कर दी है कि पार्टी पिछली बार की तरह ही महत्वपूर्ण विभाग बरकरार रखेगी। पोर्टफोलियो में उद्योग और आईटी, शिक्षा, अल्पसंख्यक मामले और स्थानीय निकाय विकास शामिल हैं। यह भी पढ़ें | सतीसन के लिए राहुल गांधी की बधाई पोस्ट में, वेणुगोपाल का उल्लेख: ‘नेतृत्व अभियान…’ अब, मुद्दा केवल गठबंधन अंकगणित का नहीं है। यह मुख्य रूप से धारणा, शक्ति संतुलन और राज्य के बदलते राजनीतिक मूड के बारे में है। आईयूएमएल ने एक बार फिर नई यूडीएफ सरकार में पांच कैबिनेट स्थान हासिल किए हैं, ठीक उतनी ही संख्या जितनी उसे 2011 में ओमन चांडी सरकार के दौरान मिली थी। यह घोषणा ही गठबंधन के भीतर लीग की निरंतर सौदेबाजी की ताकत को रेखांकित करती है। सहयोगी होने के बावजूद, पार्टी उल्लेखनीय आत्मविश्वास की स्थिति से बातचीत करती है क्योंकि वह जानती है कि कांग्रेस उसे चुनावी रूप से अलग करने का जोखिम नहीं उठा सकती। “यहां तक कि 2011 में भी, उनके पास पांच मंत्रालय थे। संख्या कभी भी मुद्दा नहीं थी। वास्तविक चिंता उन विषयों और विभागों को लेकर है जिन पर वे नियंत्रण रखते हैं: उद्योग, स्थानीय स्वशासन, अल्पसंख्यक मामले और शिक्षा, ये वही विभाग हैं जिनके माध्यम से राज्य के राजस्व का लगभग 55-60 प्रतिशत प्रवाह होता है। एससी/एसटी समुदायों की संख्या 10 प्रतिशत, मुस्लिमों की संख्या 28 प्रतिशत और आरक्षण की राजनीति तेजी से एकल प्रमुख जातियों के इर्द-गिर्द सिमट गई है, बहस केवल प्रतिनिधित्व के बारे में नहीं है, बल्कि इस बारे में है कि सत्ता के मूल लीवर को कौन नियंत्रित करता है और कौन है संसाधन, “बीजेपी की केरलम इकाई के उपाध्यक्ष शॉन जॉर्ज ने कहा। संतुलन अधिनियम सतीसन इस वास्तविकता को शायद कांग्रेस में किसी और से बेहतर समझते हैं। और यह उनके भाषण में प्रतिबिंबित हुआ जब उन्होंने कहा कि मुस्लिम लीग राज्य में प्रमुख धर्मनिरपेक्ष ताकतों में से एक है। मुस्लिम लीग के नेताओं के साथ उन्होंने कहा, “मैं उन लोगों को आमंत्रित करता हूं जो आईयूएमएल को धर्मनिरपेक्ष विरोधी के रूप में चित्रित करना चाहते हैं, ताकि वे उन कट्टरपंथी ताकतों पर विचार कर सकें जो लीग नेतृत्व के बिना सामने आतीं।” भले ही मुख्यमंत्री सत्ता समीकरण को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनके सामने समस्या अब पहले से कहीं अधिक बड़ी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि केरलम का राजनीतिक विमर्श अब वह नहीं रहा जो एक दशक पहले था। प्रतिनिधित्व, पहचान की राजनीति और वैचारिक स्थिरता से जुड़े प्रश्न अतीत की तुलना में अधिक तीव्र हैं। हर गठबंधन की अब अधिक आक्रामक तरीके से जांच की जा रही है, जबकि हर राजनीतिक समझौते की सार्वजनिक रूप से जांच की जाती है। यह भी पढ़ें | कैडर का आदमी, अभियान का चेहरा: 5 कारक जिन्होंने केरल में कांग्रेस के फैसले को सतीसन के पक्ष में झुका दिया और यहीं पर कांग्रेस शायद खुद को एक असहज विरोधाभास का सामना करती हुई पाती है। धर्मनिरपेक्षता पर बहस कांग्रेस पारिस्थितिकी तंत्र बार-बार IUML को एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी के रूप में पेश करता है और सांप्रदायिक लक्ष्यीकरण के रूप में किसी भी आलोचना को खारिज कर देता है। यह इस तथ्य के बावजूद है कि इसके एक विधायक और वरिष्ठ नेता केएम शाजी ने अपने भाषणों में खुलेआम धर्म का जिक्र किया, जिससे राज्य की राजनीति की दिशा के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा हुईं। जॉर्ज ने आगे कहा, “जब प्रमुख मंत्री जमात-ए-इस्लामी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसे समूहों के वैचारिक दबाव में काम करते दिखाई देते हैं, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं कि वास्तव में शासन को कौन प्रभावित कर रहा है। आज चिंता केवल चुनावी अंकगणित नहीं है, बल्कि राज्य में मुख्यधारा के राजनीतिक नेतृत्व पर कट्टरपंथी तत्वों और पहचान-आधारित सत्ता संरचनाओं के बढ़ते प्रभाव को लेकर है। मुख्यमंत्री कांग्रेस का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे हैं, वह जमात का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। और वह पूरी तरह से जमात और मुस्लिम लीग द्वारा नियंत्रित हैं।” हालाँकि, सतीसन ने अतीत में लीग का दृढ़ता से बचाव किया है और इसे यूडीएफ गठबंधन के एक अविभाज्य स्तंभ के रूप में स्थापित किया है। लेकिन, एक राजनीतिक तथ्य लगातार सामने आ रहा है। “गठबंधन सरकारों में दशकों की भागीदारी के बावजूद और बार-बार शक्तिशाली मंत्री पद प्राप्त करने के बावजूद, IUML ने केरल में अपने कोटे से किसी गैर-मुस्लिम प्रतिनिधि को कभी भी मंत्री पद नहीं दिया है। वास्तव में, शाजी जैसे नेताओं ने खुले तौर पर कहा है कि धर्म मुख्य समस्या है,” सीपीएम के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, जो नाम नहीं बताना चाहते। उन्होंने कहा, “नेताओं ने सार्वजनिक रूप से यह भी कहा है कि मुसलमानों की खातिर कांग्रेस को सत्ता में आना चाहिए। पिनाराई विजयन सहित हमारे नेताओं ने कहा कि मुस्लिम लीग को यह तय करना होगा कि वे एक राजनीतिक पार्टी हैं या धार्मिक संगठन हैं।” कांग्रेस के लिए सार्वजनिक रूप से बचाव करना राजनीतिक रूप से कठिन होता जा रहा है। भाजपा और एलडीएफ नेताओं का तर्क है कि धर्मनिरपेक्ष साख का दावा करने वाली पार्टी वैचारिक आलोचना

हवाई जहाज में सफर करते वक्त कान में दर्द क्यों होने लगता है? इस समस्या से कैसे करें बचाव

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Last Updated:May 19, 2026, 07:58 IST Causes of Ear Pain While Flying: अक्सर आपने महसूस किया होगा कि हवाई जहाज में ट्रैवल करते वक्त कान बंद हो जाते हैं और कई बार कान में दर्द भी होने लगता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार फ्लाइट के दौरान एयर प्रेशर बदलने की वजह से कान में दर्द और भारीपन महसूस होता है. इस समस्या से बचने के लिए च्युइंग गम चबाना फायदेमंद हो सकता है. फ्लाइट के टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान एयर प्रेशर में अचानक बदलाव की वजह से कान में दर्द होने लगता है. Why Ears Hurt During Flights: आज के जमाने में हवाई यात्रा का चलन काफी बढ़ गया है. लोग घूमने-फिरने से लेकर काम के सिलसिले में एयर ट्रैवल करने लगे हैं. देश में लाखों लोग रोज फ्लाइट से सफर कर रहे हैं. आमतौर पर फ्लाइट में सफर करना आरामदायक एक्सपीरिएंस लगता है, लेकिन कई लोगों को टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान कान में तेज दर्द, भारीपन या बंद होने जैसा एहसास होने लगता है. कुछ लोगों को ऐसा महसूस होता है जैसे कान के अंदर दबाव बन रहा हो, जबकि कई बार सुनाई देना भी थोड़ी देर के लिए कम हो सकता है. ज्यादातर मामलों में यह परेशानी कुछ देर बाद अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन सावधानी न बरती जाए तो दर्द और बेचैनी ज्यादा बढ़ सकती है. कुछ मामलों में कान का पर्दा भी फट सकता है. मायो क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक फ्लाइट में ट्रैवल करते वक्त कान बंद होने और कान में दर्द की वजह एयर प्रेशर में बदलाव होता है. हमारे कान के अंदर एक छोटी नली होती है, जिसे यूस्टेशियन ट्यूब कहा जाता है. इसका काम कान के अंदर और बाहर के एयर प्रेशर को संतुलित रखना होता है. सामान्य परिस्थितियों में यह ट्यूब आसानी से काम करती रहती है, लेकिन जब हवाई जहाज तेजी से ऊपर उठता है या नीचे आता है, तो केबिन के अंदर हवा का दबाव तेजी से बदलने लगता है. अगर यूस्टेशियन ट्यूब इस बदलाव के साथ तुरंत तालमेल नहीं बैठा पाती, तो कान के पर्दे पर दबाव पड़ने लगता है. यही वजह है कि कान बंद होने, दर्द, भारीपन या चुभन जैसी समस्या महसूस हो सकती है. मेडिकल भाषा में इस स्थिति को एयरप्लेन इयर कहा जाता है. किन लोगों को ज्यादा खतरा? फ्लाइट में कान दर्द की समस्या किसी को भी हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा माना जाता है. जिन लोगों को सर्दी-जुकाम, एलर्जी, साइनस इंफेक्शन या पहले से कान से जुड़ी कोई बीमारी हो, उनकी यूस्टेशियन ट्यूब सही तरीके से काम नहीं कर पाती. ऐसे में दबाव संतुलित करने में ज्यादा दिक्कत होती है. छोटे बच्चों में भी यह समस्या काफी कॉमन है, क्योंकि उनकी यूस्टेशियन ट्यूब पूरी तरह विकसित नहीं होती. यही कारण है कि फ्लाइट के दौरान कई बच्चे रोने लगते हैं या बेचैन हो जाते हैं. इसके अलावा बार-बार फ्लाइट में सफर करने वाले लोगों को भी यह समस्या महसूस हो सकती है. ये लक्षण भी नजर आना कॉमन फ्लाइट के दौरान कान में दर्द के साथ कई दूसरे लक्षण भी महसूस हो सकते हैं. कुछ लोगों को ऐसा लगता है जैसे कान पूरी तरह बंद हो गए हों या अंदर कुछ दबाव जमा हो गया हो. कई बार सुनने की क्षमता थोड़ी देर के लिए कम हो सकती है और आवाजें हल्की सुनाई देती हैं. कुछ यात्रियों को चक्कर जैसा महसूस हो सकता है, जबकि कुछ मामलों में कान के अंदर घंटी बजने जैसी आवाज भी सुनाई दे सकती है. ज्यादातर मामलों में ये लक्षण कुछ घंटों के भीतर अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन अगर दर्द लंबे समय तक बना रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है. फ्लाइट में कान की समस्या से कैसे बचें? हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो फ्लाइट के टेकऑफ और लैंडिंग के समय च्युइंग गम चबाना या कैंडी खाना काफी फायदेमंद माना जाता है. ऐसा करने से व्यक्ति बार-बार निगलता है, जिससे यूस्टेशियन ट्यूब खुलने लगती है और कान के अंदर का दबाव संतुलित होने में मदद मिलती है. यही वजह है कि कई एयरलाइंस बच्चों और यात्रियों को टेकऑफ के समय कैंडी देती हैं. यह एक आसान और असरदार तरीका माना जाता है, जिससे कान में दर्द की संभावना कम हो सकती है. अगर फ्लाइट के दौरान कान बंद महसूस हों, तो बार-बार जम्हाई लेने या पानी पीने की कोशिश करनी चाहिए. इससे गले और कान के आसपास की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं, जो यूस्टेशियन ट्यूब को खोलने में मदद कर सकती हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

पेट्रोल-डीजल 90 पैसे महंगा, 5 दिन में दूसरी बार बढ़ोतरी:छिंदवाड़ा में बिक्री की लिमिट तय; उज्जैन में कथावाचक ने दिलाई ईंधन बचाने की शपथ

पेट्रोल-डीजल 90 पैसे महंगा, 5 दिन में दूसरी बार बढ़ोतरी:छिंदवाड़ा में बिक्री की लिमिट तय; उज्जैन में कथावाचक ने दिलाई ईंधन बचाने की शपथ

देश में पेट्रोल और डीजल आज मंगलवार से 90 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है। एक हफ्ते से भी कम समय में ईंधन के दामों में यह दूसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3-3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। अब भोपाल में एक लीटर पेट्रोल 110.75 रुपए और डीजल 95.91 रुपए का हो गया है। इंदौर-जबलपुर में प्रति लीटर पेट्रोल के नए रेट 110.79 रुपए, ग्वालियर में 110.69 रुपए और उज्जैन में 111.27 रुपए हो गए हैं। वहीं, उज्जैन में डीजल 96.40 रुपए में मिलेगा। यह भोपाल में 95.91 रुपए, इंदौर में 95.97 रुपए, जबलपुर में 95.98 रुपए और ग्वालियर में 95.86 रुपए प्रति लीटर में मिलेगा। छिंदवाड़ा में किल्लत को देखते हुए पेट्रोल-डीजल बेचने की लिमिट तय कर दी गई है। वहीं, उज्जैन में ईंधन बचाने और सोना न खरीदने की शपथ दिलाई गई। छिंदवाड़ा में पेट्रोल-डीजल बिक्री पर लिमिट तय छिंदवाड़ा में पेट्रोल-डीजल बेचने की लिमिट तय कर दी गई है। यहां पंपों से दोपहिया को 200 रुपए और छोटी कारों को 500 रुपए से ज्यादा का पेट्रोल नहीं दिया जा रहा है। वहीं, बड़ी गाड़ियों में अधिकतम 50 लीटर पेट्रोल और अधिकतम 200 लीटर डीजल ही दिया जा रहा है। तेल कंपनियों ने डीलर्स को मौखिक निर्देश जारी कर तय सीमा से अधिक ईंधन बेचने पर रोक लगा दी है। पेट्रोल पंप के स्टॉक और बिक्री की कंपनियों द्वारा सीधे ऑनलाइन निगरानी की जा रही है। चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित लिमिट से ज्यादा पेट्रोल या डीजल बेचा गया, तो संबंधित रिफ्यूलिंग मशीन को तुरंत लॉक कर दिया जाएगा। कंपनियों की ओर से नया टैंकर तभी भेजा जा रहा है, जब पंप का पुराना स्टॉक पूरी तरह से खत्म होने की कगार पर हो। कई पंपों पर गाड़ियों की टैंक क्षमता का केवल 25 प्रतिशत ईंधन ही उपलब्ध कराया जा रहा है। उज्जैन में कथा के दौरान पेट्रोल-डीजल बचाने की शपथ उज्जैन में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथावाचक ने श्रद्धालुओं को पेट्रोल-डीजल का कम उपयोग करने और एक साल तक सोना नहीं खरीदने की शपथ दिलाई। संत लीलाशाह कॉन्वेंट हायर सेकेंडरी स्कूल में महाराष्ट्र के अमरावती से पहुंचे राष्ट्रीय संत डॉ. संतोष महाराज ने कहा- सप्ताह या महीने में कम से कम एक दिन पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों का उपयोग न करें। इसके बजाय ई-स्कूटर, ई-रिक्शा और साइकिल का ज्यादा इस्तेमाल करें, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। अब अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे। ये अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। उन्होंने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। बेस प्राइस से चार गुना तक बढ़ जाती है कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर देश में ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां ‘डेली प्राइस रिवीजन’ यानी डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट अपडेट करती हैं। उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले तेल की कीमतों में कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं, जिसे हम आसान भाषा में इस तरह समझ सकते हैं- 1. कच्चे तेल की कीमत (बेस प्राइस): भारत अपनी जरूरत का करीब 90% क्रूड विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए बैरल के हिसाब से प्रति लीटर तेल की कीमत तय होती है। 2. रिफाइनिंग और कंपनियों का चार्ज: कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है। इसमें रिफाइनिंग लागत और कंपनियों का मार्जिन शामिल होता है। 3. केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी: रिफाइनरी से निकलने के बाद केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) और रोड सेस लगाती है। यह देश भर में सभी राज्यों के लिए समान होती है। 4. डीलर कमीशन: तेल कंपनियां जिस रेट पर पेट्रोल पंप मालिकों (डीलर्स) को ईंधन बेचती हैं, उसमें डीलर्स का अपना निश्चित कमीशन जोड़ा जाता है, जो पेट्रोल और डीजल के लिए अलग-अलग होता है। 5. राज्य सरकार का वैट (VAT): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट या लोकल सेल्स टैक्स लगाती हैं। चूंकि हर राज्य की वैट दरें अलग होती हैं इसीलिए भोपाल, इंदौर, जबलपुर और सागर जैसे अलग-अलग शहरों में ईंधन की कीमतें भी अलग-अलग हो जाती हैं। तेल कंपनियों को 30 हजार करोड़ का घाटा हो रहा था सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घाटे में चल रही थीं। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने कहा कि कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था- ईंधन का इस्तेमाल कम करें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के सावधानीपूर्वक उपयोग का सुझाव दिया था। पीएम ने कहा था- आज समय की मांग है कि पेट्रोल, गैस और डीजल का उपयोग बहुत संयम से किया जाए। हमें आयातित पेट्रो उत्पादों का उपयोग केवल जरूरत के अनुसार ही करना चाहिए। इससे न केवल विदेशी मुद्रा बचेगी, बल्कि युद्ध के प्रतिकूल प्रभाव भी कम होंगे। ये खबर भी पढ़ें… MP में सांची दूध 2 रुपए प्रति लीटर महंगा अमूल और मदर डेयरी के बाद मध्य प्रदेश में अब सांची दुग्ध संघ ने भी दूध की कीमत 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दी है। नए रेट 15 मई से लागू हो गए हैं। इससे पहले सांची ने पिछले साल 7 मई को रेट बढ़ाए थे। भोपाल में पैक्ड दूध में सांची की सबसे ज्यादा खपत होती है। रोज करीब

CMs Amit Shah CG, MP, UP, UK Join

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26वीं मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में शामिल होने यूपी के सीएम जगदलपुर पहुंचे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दो दिवसीय बस्तर दौरे का आज दूसरा दिन है। शाह थोड़ी देर में जगदलपुर के एक निजी होटल में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बस्तर के इतिहास में पहली बार इस स्तर की हाई-प्रोफाइल बैठक आयोजित की जा रही . इस महत्वपूर्ण बैठक में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री शामिल हो रहे हैं। उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री सोमवार रात को ही जगदलपुर पहुंच चुके थे, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज सुबह पहुंचे हैं। जगदलपुर एयरपोर्ट पर छत्तीसगढ़ भाजपा अध्यक्ष किरणदेव सिंह ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का स्वागत किया। राज्य की बदली तस्वीर दिखाने की कोशिश बस्तर लंबे समय तक नक्सल हिंसा के कारण देशभर में चर्चा का केंद्र रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार की यहां क्षेत्रीय परिषद की बैठक करवाना केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक और रणनीतिक संदेश भी है। इससे यह बताने की कोशिश है कि बस्तर अब सिर्फ नक्सल प्रभावित इलाका नहीं, बल्कि विकास और प्रशासनिक गतिविधियों का नया केंद्र बन रहा है। जिस इलाके में कभी बड़े नेताओं के दौरे सुरक्षा कारणों से सीमित रहते थे, वहां अब चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि सुरक्षाबलों की कार्रवाई और सरकार की रणनीति से हालात में बदलाव आया है। बस्तर दौरे के दूसरे दिन अमित शाह गुंडाधुर के गांव नेतानार पहुंचे थे। नक्सलवाद पर सख्त संदेश देने की तैयारी गृहमंत्री शाह लगातार यह कह चुके हैं कि केंद्र सरकार नक्सलवाद को खत्म करने के लिए निर्णायक रणनीति पर काम कर रही है। पिछले कुछ महीनों में बस्तर संभाग में सुरक्षाबलों की कार्रवाई तेज हुई है और कई बड़े नक्सली कमांडर मारे गए या गिरफ्तार किए गए हैं। 31 मार्च 2026 को बस्तर को नक्सलवाद मुक्त घोषित कर दिया गया है। सोमवार को अमित शाह जगदलपुर के आसना में स्थित बादल अकादमी पहुंचे थे। विकास, समन्वय और सीमावर्ती मुद्दों पर होगी चर्चा मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में राज्यों के बीच आपसी समन्वय, कानून व्यवस्था, सीमा विवाद, परिवहन, बिजली, जल संसाधन और आंतरिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। खासकर नक्सल प्रभावित रहे इलाकों में संयुक्त रणनीति और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर भी फोकस रह सकता है। अमित शाह ने पुलिस अधिकारियों का सम्मान किया। बस्तर को नई पहचान देने की कोशिश गृह मंत्री के दौरे और परिषद की बैठक को बस्तर की नई छवि से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि अब बस्तर केवल संघर्ष की पहचान नहीं रहेगा, बल्कि पर्यटन, निवेश, विकास और प्रशासनिक गतिविधियों के नए केंद्र के रूप में उभरेगा। यही वजह है कि बैठक के बाद गृह मंत्री का प्रेस कॉन्फ्रेंस भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे केंद्र सरकार बस्तर को लेकर अपना विजन सामने रख सकती है। गुंडाधुर की धरती बनेगी तीर्थस्थल बता दें कि बस्तर दौरे के पहले दिन यानी सोमवार को अमित शाह ने कहा था कि बस्तर के लोगों का 50 सालों में जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई हम 4-5 सालों में करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि जब तक बस्तर विकसित नहीं होगा, तब तक हमारा संकल्प अधूरा रहेगा। आज (18 मई) का दिन ऐतिहासिक है, क्योंकि पिछले 6 महीनों के काम के बाद अब यह पूरा क्षेत्र आदिवासियों से भरा दिखाई दे रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि इसी धरा से अंग्रेजों के खिलाफ जंग लड़ने का काम अमर शहीद गुंडाधुर ने किया था। शाह ने कहा कि एक दौर वह भी था जब यहां एक साथ 6 पुलिसवालों की हत्या कर दी जाती थी, स्कूल उजाड़ दिए जाते थे और गरीबों का राशन तक छीन लिया जाता था। नक्सलियों का खौफ ऐसा था कि वे मासूम बच्चों को उनके बचपन में ही जबरन उठा ले जाते थे। गृह मंत्री ने आगे कहा कि अब सरकार ने कड़े कदम उठाकर बस्तर से इस गनतंत्र को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इसके साथ ही अब इस ऐतिहासिक धरती को एक तीर्थस्थल के रूप में विकसित करने का काम शुरू किया जा रहा है। वर्चुअल हो सकती थी बैठक, लाखों रुपए क्यों फूंके जा रहे- बैज बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक को लेकर PCC चीफ दीपक बैज ने तंज कसा है। बैज के मुताबिक प्रधानमंत्री पूरे देश से आह्वान कर रहे हैं कि वर्कफ्रॉम होम करें, पेट्रोल-डीजल बचाएं। अब उनके ही गृहमंत्री, मुख्यमंत्री उनकी बात नहीं मान रहे। मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक वर्चुअल क्यों नहीं की गई, जबकि सभी मुख्यमंत्री सचिवालय और गृह मंत्रालय के पास वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध है। मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, चार राज्यों के मुख्यमंत्री या उनके प्रतिनिधि बस्तर आएंगे। सब अलग-अलग विशेष विमान से आएंगे, लाखों रुपए खर्च होगा, डीजल-पेट्रोल तथा विमान का ईंधन खर्च होगा। यह बैठक तो वर्चुअल हो सकती थी। ……………………. इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… शाह बोले- गुंडाधुर की धरती बनेगी तीर्थस्थल: बस्तर में कहा- 50 सालों में जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई 4-5 साल में करेंगे नेतानार में गुंडाधुर के परिजनों से मिले अमित शाह। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नक्सलवाद खात्मे के बाद पहली बार बस्तर पहुंचे। उन्होंने कहा कि बस्तर के लोगों का 50 सालों में जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई हम 4-5 सालों में करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि जब तक बस्तर विकसित नहीं होगा, तब तक हमारा संकल्प अधूरा रहेगा। पढ़ें पूरी खबर…

रायबरेली में राहुल गांधी बोले- आर्थिक तूफान आने वाला है:बहुत कठिन समय आ रहा है, एक्शन लेने के बजाए मोदीजी विदेश चले गए

रायबरेली में राहुल गांधी बोले- आर्थिक तूफान आने वाला है:बहुत कठिन समय आ रहा है, एक्शन लेने के बजाए मोदीजी विदेश चले गए

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल आज से दो दिन के यूपी दौरे पर हैं। मंगलवार दोपहर 12.15 बजे राहुल रायबरेली पहुंचे। बड़े मंगल पर चुरुवा मंदिर में बजरंगबली के दर्शन किए। पुजारी ने उन्हें माला पहनाई। प्रसाद दिया। यहां राहुल ने दर्शन करने आए लोगों से बात भी की। मंदिर से राहुल सीधे बछरावां पहुंचे। सांसद निधि से बने मैरिज हॉल का उद्घाटन किया। गांव के लोगों से बात की। यहां से राहुल खीरों जाएंगे और जनसभा करेंगे। फिर लालगंज में महिला संवाद कार्यक्रम में शामिल होंगे। कल यानी 20 मई को जनता दर्शन कार्यक्रम में लोगों से मिलेंगे। स्वतंत्रता सेनानी वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण करेंगे। जनसभा के बाद अमेठी रवाना हो जाएंगे। इससे पहले, राहुल सुबह 11.30 बजे दिल्ली से लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने उनका स्वागत किया। बैनर-पोस्टर लेकर पहुंचे सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता और समर्थक भी एयरपोर्ट पहुंचे। ‘राहुल गांधी जिंदाबाद’ के नारे लगाए। राहुल एयरपोर्ट से निकलकर सीधे अपनी कार में बैठे और रायबरेली के लिए रवाना हो गए। इस दौरान राहुल के हाथ में चॉकलेट नजर आई। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद राहुल गांधी 6 बार रायबरेली आ चुके हैं। यह उनका 7वां दौरा होगा। इससे पहले, राहुल 19 जनवरी 2026 को रायबरेली दौरे पर आए थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल के दौरे का फोकस संगठन की समीक्षा के साथ-साथ 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की रणनीतिक तैयारियों पर होगा। राहुल बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा कर सकते हैं। 2 तस्वीरें- राहुल गांधी के रायबरेली-अमेठी दौरे की पल-पल के अपडेट के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…

गर्दन दर्द से हैं परेशान! बस आजमाएं ये 5 जादुई अप-डाउन एक्सरसाइज, ऑफिस चेयर पर ही मिल जाएगी राहत

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Last Updated:May 19, 2026, 07:11 IST Cervical Pain Exercises: रांची के फिजियोथेरेपिस्ट डॉ श्याम कुमार त्रिपाठी ने चेयर पर बैठे बैठे करने लायक गर्दन की 5 आसान एक्सरसाइज बताईं. उन्होंने कहा कि इससे सर्वाइकल पेन से राहत मिलती है. साथ ही कभी ये बीमारी भी नहीं होती है. ख़बरें फटाफट रांची: आजकल लोग लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम कर रहे हैं, जिससे बॉडी पोस्चर खराब हो रहा है. ऐसे में रांची के फिजियोथेरेपिस्ट ने कुछ टिप्स दिए हैं. जहां आपको एक चेयर में बैठे हुए ही उठने की जरूरत नहीं है और आप गले की 5 एक्सरसाइज कर सकते हैं, जिससे धीरे-धीरे अगर आपको सर्वाइकल पेन है तो इससे काफी राहत मिलेगी और जिनको नहीं है, अगर वह करते हैं तो इसकी होने की संभावना न के बराबर हो जाएगी. रांची के जाने माने फिजियोथेरेपिस्ट डॉक्टर श्याम कुमार त्रिपाठी मोराबादी में स्टेप वन फिजियोथैरेपी क्लिनिक चलाते हैं. उनके पसा 16 साल का एक्सपीरियंस है. उन्होंने लोकल 18 को बताया कि अगर आप अपने चेयर में बैठे-बैठे बस यह 3-4 एक्सरसाइज कर लें तो सर्वाइकल पेन का टेंशन आपको लेने की जरूरत ही नहीं है..यह एक्सरसाइज जादू की तरह काम करता है. जादू की तरह काम करती है ये एक्सरसाइज • डॉ श्याम कुमार त्रिपाठी बताते हैं कि सबसे पहले टिकटोक एक्सरसाइज है. दरअसल, अपने बॉडी को एकदम सीधा रखें और अपने गले को सिर्फ आगे की तरफ ले जाइए और गले को पीछे की तरफ ले जाइए. आगे टिक, पीछे टॉक. इस तरीके का टिकटोक आगे पीछे करते रहिए, ऐसा 10 बार रिपीट करिए. • दूसरे एक्सरसाइज में अपको अपने सर को एकदम नीचे करना है और फिर एकदम ऊपर पीछे की तरफ कर लीजिए. मतलब अप एंड डाउन ऐसा भी 10 बार रिपीट करिए. जब भी आपको समय मिले एक घंटा में एक बार ऐसा कर लीजिए 10 बार. • तीसरा, अपने दोनों हाथों को अपने चेस्ट पास लाइए और पीछे की तरफ प्रेशर करके पीछे घुमाइए और फिर आगे दोनों हाथों को कीजिए और फिर दोनों हाथों को पीछे की तरफ कीजिए. इस तरीके को बार-बार रिपीट करिए. • चौथा, आप अपने सर को एकदम गोल-गोल राउंड शेप में घुमाइए, एक बार क्लाकवाइज घुमाइए और एक बार एंटी क्लाकवाइज. ऐसा भी 10 से 15 बार आपको करना है. अगर आप इतना ही कर ले, 1 घंटे में एक बार ऐसा कर ले तो आपको सर्वाइकल पेन से काफी राहत मिलेगी. • ऐसे में आपको एक बात का ध्यान रखना है. अगर आप मोबाइल फोन देखते हैं या फिर लैपटॉप चलाते हैं तो उसे अपने आंखों के बराबर रखना है. ऐसे में लैपटॉप स्टैंड होता है. आप वह ले लीजिए व मोबाइल फोन को भी थोड़ा ऊपर करके देखिए. गर्दन झुका कर फोन नहीं चलाना है और ना ही लैपटॉप. यह सर्वाइकल होने का बहुत बड़ा कारण होता है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

ऋषिकेश में उज्जैनी एक्सप्रेस के 3 डिब्बे पटरी से उतरे:शंटिंग के दौरान हुआ हादसा; देर रात तक चला मरम्मत कार्य

ऋषिकेश में उज्जैनी एक्सप्रेस के 3 डिब्बे पटरी से उतरे:शंटिंग के दौरान हुआ हादसा; देर रात तक चला मरम्मत कार्य

ऋषिकेश में सोमवार रात शंटिंग के दौरान उज्जैनी एक्सप्रेस के तीन डिब्बे पटरी से उतर गए। रेलवे सूत्रों के मुताबिक शंटिंग लाइन के अंत में लगे बफर (डेड एंड) से इंजन टकरा गया, जिसके बाद डिब्बों पर दबाव बढ़ गया। इससे एक बोगी ट्रैक से बाहर निकल गई, जबकि दूसरी बीच से मुड़ गई। हादसे के दौरान जोरदार आवाज सुनकर आसपास के लोग घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। घटना के बाद रेलवे अधिकारी, इंजीनियरिंग टीम और पुलिस मौके पर पहुंच गई। देर रात तक ट्रैक दुरुस्त करने और क्षतिग्रस्त डिब्बों को हटाने का काम चलता रहा। गनीमत रही कि हादसे के वक्त ट्रेन खाली थी, इसलिए कोई जनहानि नहीं हुई। जानकारी के मुताबिक उज्जैनी एक्सप्रेस सोमवार शाम करीब 6 बजे योगनगरी रेलवे स्टेशन पहुंची थी। ट्रेन को मंगलवार सुबह 6:15 बजे वापस रवाना होना था। इसी वजह से रात करीब 9:42 बजे ट्रेन को प्लेटफॉर्म से खांड गांव स्थित शंटिंग लाइन पर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान हादसा हो गया। रेलवे सूत्रों के मुताबिक शंटिंग लाइन के अंत में लगे बफर (डेड एंड) से इंजन टकरा गया। इसके बाद पूरी ट्रेन झटके के साथ रुकी और डिब्बों पर दबाव बढ़ गया। दबाव ज्यादा होने से एक बोगी ट्रैक से बाहर निकल गई, जबकि दूसरी बीच से मुड़ गई। हादसे में ट्रेन की तीन बोगियां क्षतिग्रस्त हुई हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शंटिंग के दौरान अचानक जोरदार आवाज सुनाई दी। डिब्बों को तेज झटका लगा और वे पास की दीवार से टकरा गए। आवाज सुनकर आसपास के लोग बाहर निकल आए। घटनास्थल के पास मकान होने के कारण मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। इसके बाद रेलवे कर्मचारियों और पुलिस ने ट्रैक के आसपास का इलाका खाली कराया। 5 पॉइंट में सिलसिलेवार जानिए पूरी घटना… 1. रात 9:42 बजे हुआ हादसा उज्जैनी एक्सप्रेस सोमवार शाम योगनगरी रेलवे स्टेशन पहुंची थी। रात करीब 9:42 बजे ट्रेन को प्लेटफॉर्म से खांड गांव स्थित शंटिंग लाइन पर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान हादसा हुआ। 2. शंटिंग लाइन में बफर से टकराया इंजन रेलवे सूत्रों के मुताबिक शंटिंग लाइन के अंत में लगे बफर (डेड एंड) से इंजन टकरा गया। इसके बाद पूरी ट्रेन झटके के साथ रुक गई और डिब्बों पर दबाव बढ़ गया। 3. एक बोगी ट्रैक से बाहर, दूसरी बीच से मुड़ी दबाव ज्यादा होने से ट्रेन की एक बोगी ट्रैक से बाहर निकल गई, जबकि दूसरी बीच से मुड़ गई। हादसे में तीन बोगियां क्षतिग्रस्त हुईं। 4. तेज आवाज से मची अफरातफरी हादसे के दौरान जोरदार आवाज सुनकर आसपास के लोग घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। घटनास्थल के पास मकान होने के कारण मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। रेलवे कर्मचारियों और पुलिस ने इलाके को खाली कराया। 5. तकनीकी गड़बड़ी और लापरवाही की जांच प्रारंभिक तौर पर हादसे की वजह तकनीकी गड़बड़ी, ज्यादा फोर्स या लोको पायलट की लापरवाही मानी जा रही है। रेलवे की तकनीकी टीम मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे की असली वजह स्पष्ट होगी। 40 मिनट बंद रहा रायवाला रेलवे फाटक हादसे और शंटिंग के दौरान रायवाला रेलवे फाटक करीब 40 मिनट तक बंद रहा। शंटिंग कई बार आगे-पीछे होने के कारण रायवाला, खांड गांव, गोहरीमाफी और आर्मी कैंट क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। बताया गया कि फाटक के दूसरी ओर करीब 40 हजार की आबादी प्रभावित हुई। देर रात तक रेस्क्यू उपकरणों का इंतजार घटना की सूचना मिलते ही रेलवे अधिकारी, इंजीनियरिंग टीम, आरपीएफ और पुलिस मौके पर पहुंच गई। देर रात तक रेस्क्यू उपकरणों के आने का इंतजार चलता रहा। ट्रैक से क्षतिग्रस्त बोगियों को हटाने और लाइन बहाल करने का काम जारी रहा। मंगलवार सुबह उज्जैनी एक्सप्रेस किस समय रवाना होगी, इसे लेकर देर रात तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी थी। अधिकारियों ने क्या कहा मुरादाबाद रेल मंडल के सीनियर डीसीएम महेश यादव ने बताया, ट्रेन में कोई सवारी नहीं थी। कुछ कोच यार्ड में शंटिंग के लिए ले जाते समय बेपटरी हुए हैं। दुर्घटना के तकनीकी कारणों का पता लगाया जा रहा है। वहीं, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक कैलाश चंद्र भट्ट ने बताया कि हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है और फिलहाल रेल सेवाएं प्रभावित नहीं हैं। हादसे के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन से निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। इंदौर से ऋषिकेश-देहरादून को जोड़ती है उज्जैनी एक्सप्रेस उज्जैनी एक्सप्रेस मध्य प्रदेश के इंदौर को हरिद्वार, योगनगरी ऋषिकेश और देहरादून से जोड़ने वाली अहम ट्रेन है। यह सप्ताह में दो दिन गुरुवार और रविवार को संचालित होती है। इंदौर से दोपहर करीब 3:25 बजे रवाना होकर अगले दिन शाम करीब 6:45 बजे योगनगरी ऋषिकेश पहुंचती है। वहीं ऋषिकेश से सुबह करीब 6:15 बजे वापसी के लिए रवाना होती है। इसे उत्तराखंड आने-जाने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण रेल सेवाओं में शामिल माना जाता है।

Delhi Petrol Rs 98.64, Diesel Rs 91.58; Fuel Prices Surge Again

Delhi Petrol Rs 98.64, Diesel Rs 91.58; Fuel Prices Surge Again

नई दिल्ली2 मिनट पहले कॉपी लिंक देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मंगलवार को 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। एक हफ्ते से भी कम समय में ईंधन के दामों में यह दूसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले पिछले शुक्रवार को ही कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। बड़े शहरों में पेट्रोल के दाम शहर नए दाम (रुपए/लीटर) पुराने दाम (रुपए/लीटर) अंतर (बढ़ोतरी) दिल्ली 98.64 97.77 87 पैसे मुंबई 107.59 106.68 91 पैसे कोलकाता 109.70 108.74 96 पैसे चेन्नई 104.49 103.67 82 पैसे बड़े शहरों में डीजल के दाम शहर नए दाम (रुपए/लीटर) पुराने दाम (रुपए/लीटर) अंतर (बढ़ोतरी) दिल्ली 91.58 90.67 91 पैसे मुंबई 94.08 93.14 94 पैसे कोलकाता 96.07 95.13 94 पैसे चेन्नई 96.11 95.25 86 पैसे अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं… डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की जेब और किचन पर पड़ता है। इसे ऐसे समझिए: मालभाड़ा बढ़ेगा: ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ जाएगा, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो जाएंगे। खेती की लागत: ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए किसानों को ज्यादा खर्च करना होगा, जिससे अनाज की लागत बढ़ेगी। बस-ऑटो का किराया: सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के किराए में भी इजाफा देखने को मिल सकता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। पड़ोसी देशों में बढ़े दाम, भारत में अब हुआ इजाफा सरकार अब तक यह तर्क देती रही थी कि पश्चिम एशिया युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल आया है। इसके चलते पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 15% से 20% तक बढ़ गईं, लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं पर इसका बोझ नहीं डाला गया। 2024 से दाम नहीं बदले थे, चुनाव से पहले कटौती हुई थी देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मार्च 2024 से स्थिर बनी हुई थीं। लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले सरकार ने कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती कर जनता को राहत दी थी। हालांकि, तकनीकी रूप से भारत में ईंधन की कीमतें विनियमित हैं और कंपनियां अंतरराष्ट्रीय क्रूड की 15 दिनों की औसत कीमत के आधार पर हर दिन रेट बदल सकती हैं, लेकिन राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण इन्हें लंबे समय तक नहीं बदला गया। तेल कंपनियों को हर महीने 30 हजार करोड़ का घाटा हो रहा था सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घाटे में चल रही थीं । पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है । पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपए घटाई थी इससे पहले सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखने के लिए स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपए की कटौती की थी। पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर ₹3 रुपए, जबकि डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई थी। केंद्र सरकार की ओर से एक लीटर पेट्रोल पर कुल 21.90 रुपए एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती थी। स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्टूटी घटने के बाद यह 11.90 रुपए रह गई थी। इसी तरह, एक लीटर डीजल पर कुल सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी 17.8 रुपए से घटकर 7.8 रुपए पर आ गई थी। सरकार का ये फैसला पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए था। इस निर्णय की वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े थे। पूरी खबर पढ़ें… पीएम मोदी ने कहा था- ईंधन का इस्तेमाल कम करें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के सावधानीपूर्वक उपयोग का सुझाव दिया था। पीएम ने कहा था कि आज समय की मांग है कि पेट्रोल, गैस और डीजल का उपयोग बहुत संयम से किया जाए। हमें आयातित पेट्रो उत्पादों का उपयोग केवल जरूरत के अनुसार ही करना चाहिए। इससे न केवल विदेशी मुद्रा बचेगी, बल्कि युद्ध के प्रतिकूल प्रभाव भी कम होंगे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔