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Delhi Petrol Rs 98.64, Diesel Rs 91.58; Fuel Prices Surge Again

Delhi Petrol Rs 98.64, Diesel Rs 91.58; Fuel Prices Surge Again

नई दिल्ली2 मिनट पहले

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देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मंगलवार को 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। एक हफ्ते से भी कम समय में ईंधन के दामों में यह दूसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले पिछले शुक्रवार को ही कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।

बड़े शहरों में पेट्रोल के दाम

शहर नए दाम (रुपए/लीटर) पुराने दाम (रुपए/लीटर) अंतर (बढ़ोतरी)
दिल्ली 98.64 97.77 87 पैसे
मुंबई 107.59 106.68 91 पैसे
कोलकाता 109.70 108.74 96 पैसे
चेन्नई 104.49 103.67 82 पैसे

बड़े शहरों में डीजल के दाम

शहर नए दाम (रुपए/लीटर) पुराने दाम (रुपए/लीटर) अंतर (बढ़ोतरी)
दिल्ली 91.58 90.67 91 पैसे
मुंबई 94.08 93.14 94 पैसे
कोलकाता 96.07 95.13 94 पैसे
चेन्नई 96.11 95.25 86 पैसे

अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं…

  • डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की जेब और किचन पर पड़ता है। इसे ऐसे समझिए:
  • मालभाड़ा बढ़ेगा: ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ जाएगा, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो जाएंगे।
  • खेती की लागत: ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए किसानों को ज्यादा खर्च करना होगा, जिससे अनाज की लागत बढ़ेगी।
  • बस-ऑटो का किराया: सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के किराए में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी?

इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं।

क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं।

पड़ोसी देशों में बढ़े दाम, भारत में अब हुआ इजाफा

सरकार अब तक यह तर्क देती रही थी कि पश्चिम एशिया युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल आया है। इसके चलते पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 15% से 20% तक बढ़ गईं, लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं पर इसका बोझ नहीं डाला गया।

2024 से दाम नहीं बदले थे, चुनाव से पहले कटौती हुई थी

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मार्च 2024 से स्थिर बनी हुई थीं। लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले सरकार ने कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती कर जनता को राहत दी थी। हालांकि, तकनीकी रूप से भारत में ईंधन की कीमतें विनियमित हैं और कंपनियां अंतरराष्ट्रीय क्रूड की 15 दिनों की औसत कीमत के आधार पर हर दिन रेट बदल सकती हैं, लेकिन राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण इन्हें लंबे समय तक नहीं बदला गया।

तेल कंपनियों को हर महीने 30 हजार करोड़ का घाटा हो रहा था

सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घाटे में चल रही थीं ।

पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है ।

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपए घटाई थी

इससे पहले सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखने के लिए स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपए की कटौती की थी। पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर ₹3 रुपए, जबकि डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई थी। केंद्र सरकार की ओर से एक लीटर पेट्रोल पर कुल 21.90 रुपए एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती थी।

स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्टूटी घटने के बाद यह 11.90 रुपए रह गई थी। इसी तरह, एक लीटर डीजल पर कुल सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी 17.8 रुपए से घटकर 7.8 रुपए पर आ गई थी।

सरकार का ये फैसला पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए था। इस निर्णय की वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े थे। पूरी खबर पढ़ें…

पीएम मोदी ने कहा था- ईंधन का इस्तेमाल कम करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के सावधानीपूर्वक उपयोग का सुझाव दिया था।

पीएम ने कहा था कि आज समय की मांग है कि पेट्रोल, गैस और डीजल का उपयोग बहुत संयम से किया जाए। हमें आयातित पेट्रो उत्पादों का उपयोग केवल जरूरत के अनुसार ही करना चाहिए। इससे न केवल विदेशी मुद्रा बचेगी, बल्कि युद्ध के प्रतिकूल प्रभाव भी कम होंगे।

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देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मंगलवार को 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। एक हफ्ते से भी कम समय में ईंधन के दामों में यह दूसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले पिछले शुक्रवार को ही कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।

बड़े शहरों में पेट्रोल के दाम

शहर नए दाम (रुपए/लीटर) पुराने दाम (रुपए/लीटर) अंतर (बढ़ोतरी)
दिल्ली 98.64 97.77 87 पैसे
मुंबई 107.59 106.68 91 पैसे
कोलकाता 109.70 108.74 96 पैसे
चेन्नई 104.49 103.67 82 पैसे

बड़े शहरों में डीजल के दाम

शहर नए दाम (रुपए/लीटर) पुराने दाम (रुपए/लीटर) अंतर (बढ़ोतरी)
दिल्ली 91.58 90.67 91 पैसे
मुंबई 94.08 93.14 94 पैसे
कोलकाता 96.07 95.13 94 पैसे
चेन्नई 96.11 95.25 86 पैसे

अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं…

  • डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की जेब और किचन पर पड़ता है। इसे ऐसे समझिए:
  • मालभाड़ा बढ़ेगा: ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ जाएगा, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो जाएंगे।
  • खेती की लागत: ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए किसानों को ज्यादा खर्च करना होगा, जिससे अनाज की लागत बढ़ेगी।
  • बस-ऑटो का किराया: सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के किराए में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी?

इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं।

क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं।

पड़ोसी देशों में बढ़े दाम, भारत में अब हुआ इजाफा

सरकार अब तक यह तर्क देती रही थी कि पश्चिम एशिया युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल आया है। इसके चलते पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 15% से 20% तक बढ़ गईं, लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं पर इसका बोझ नहीं डाला गया।

2024 से दाम नहीं बदले थे, चुनाव से पहले कटौती हुई थी

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मार्च 2024 से स्थिर बनी हुई थीं। लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले सरकार ने कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती कर जनता को राहत दी थी। हालांकि, तकनीकी रूप से भारत में ईंधन की कीमतें विनियमित हैं और कंपनियां अंतरराष्ट्रीय क्रूड की 15 दिनों की औसत कीमत के आधार पर हर दिन रेट बदल सकती हैं, लेकिन राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण इन्हें लंबे समय तक नहीं बदला गया।

तेल कंपनियों को हर महीने 30 हजार करोड़ का घाटा हो रहा था

सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घाटे में चल रही थीं ।

पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है ।

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपए घटाई थी

इससे पहले सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखने के लिए स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपए की कटौती की थी। पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर ₹3 रुपए, जबकि डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई थी। केंद्र सरकार की ओर से एक लीटर पेट्रोल पर कुल 21.90 रुपए एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती थी।

स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्टूटी घटने के बाद यह 11.90 रुपए रह गई थी। इसी तरह, एक लीटर डीजल पर कुल सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी 17.8 रुपए से घटकर 7.8 रुपए पर आ गई थी।

सरकार का ये फैसला पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए था। इस निर्णय की वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े थे। पूरी खबर पढ़ें…

पीएम मोदी ने कहा था- ईंधन का इस्तेमाल कम करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के सावधानीपूर्वक उपयोग का सुझाव दिया था।

पीएम ने कहा था कि आज समय की मांग है कि पेट्रोल, गैस और डीजल का उपयोग बहुत संयम से किया जाए। हमें आयातित पेट्रो उत्पादों का उपयोग केवल जरूरत के अनुसार ही करना चाहिए। इससे न केवल विदेशी मुद्रा बचेगी, बल्कि युद्ध के प्रतिकूल प्रभाव भी कम होंगे।

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