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Supreme Court Directs Centre to Make Paternity Leave Law

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नई दिल्ली2 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि अब किसी भी उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिला को 12 हफ्ते का मातृत्व अवकाश मिलेगा। सिर्फ 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने पर ही छुट्टी देना गलत है।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 की धारा 60(4) को असंवैधानिक करार दिया।

कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह पेटरनिटी लीव (पितृत्व अवकाश) को सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट(सामाजिक सुरक्षा लाभ) के रूप में मान्यता देने के लिए कानून बनाए। पेटरनिटी लीव की अवधि माता-पिता और बच्चे की जरूरतों के अनुसार तय होनी चाहिए।

हम्सानन्दिनी नंदूरी ने इसे लेकर जनहित याचिका दाखिल की थी जिसमें कहा गया था कि उम्र आधारित प्रतिबंध मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

पेटरनिटी लीव क्या है

पेटरनिटी लीव वह समय होता है जो बच्चे के जन्म या गोद लेने के बाद पिता को दिया जाता है, ताकि वह बच्चे की देखभाल कर सके और मां का सहयोग कर सके।

यह विचार इस समझ पर आधारित है कि बच्चे की परवरिश माता-पिता दोनों की जिम्मेदारी होती है।

इससे महिलाओं को भी काम जारी रखने में मदद मिलती है और घर के कामों का संतुलित बंटवारा होता है।

भारत में अभी पेटरनिटी लीव को कानूनन मान्यता नहीं

भारत में अभी तक पेटरनिटी लीव को कानूनन मान्यता नहीं मिली है। हालांकि महिलाओं को मेटरनिटी लीव मिलती है।

  • पहले दो बच्चों तक: 26 हफ्ते का वेतन सहित अवकाश
  • दो से अधिक बच्चों पर: 12 हफ्ते का अवकाश
  • इसमें से 8 हफ्ते डिलीवरी से पहले लिए जा सकते हैं

———————————- ये खबर भी पढ़ें:

सुप्रीम कोर्ट बोला-मैटरनिटी लीव जन्म देने के अधिकारों का हिस्सा:मद्रास हाईकोर्ट का फैसला खारिज; तीसरे बच्चे के लिए छुट्‌टी देने से इनकार किया था

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के एक आदेश को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने एक सरकारी स्कूल की टीचर को उसके तीसरे बच्चे के जन्म के लिए मैटरनिटी लीव देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि स्टेट पॉलिसी के मुताबिक मैटरनिटी लीव का फायदा केवल दो बच्चों तक ही सीमित है। पढ़ें पूरी खबर…

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कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह पेटरनिटी लीव (पितृत्व अवकाश) को सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट(सामाजिक सुरक्षा लाभ) के रूप में मान्यता देने के लिए कानून बनाए। पेटरनिटी लीव की अवधि माता-पिता और बच्चे की जरूरतों के अनुसार तय होनी चाहिए।

हम्सानन्दिनी नंदूरी ने इसे लेकर जनहित याचिका दाखिल की थी जिसमें कहा गया था कि उम्र आधारित प्रतिबंध मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

पेटरनिटी लीव क्या है

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इससे महिलाओं को भी काम जारी रखने में मदद मिलती है और घर के कामों का संतुलित बंटवारा होता है।

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  • पहले दो बच्चों तक: 26 हफ्ते का वेतन सहित अवकाश
  • दो से अधिक बच्चों पर: 12 हफ्ते का अवकाश
  • इसमें से 8 हफ्ते डिलीवरी से पहले लिए जा सकते हैं

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