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रिपोर्ट:अमेरिका की ईरान में घुसकर यूरेनियम जब्त करने की तैयारी:ट्रम्प 10 हजार एक्स्ट्रा सैनिक भेज रहे, अप्रैल तक जंग खत्म करना चाहते हैं

रिपोर्ट:अमेरिका की ईरान में घुसकर यूरेनियम जब्त करने की तैयारी:ट्रम्प 10 हजार एक्स्ट्रा सैनिक भेज रहे, अप्रैल तक जंग खत्म करना चाहते हैं

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान के खिलाफ जमीनी कार्रवाई करने का आदेश दे सकते हैं। अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ईरान के पास मौजूद यूरेनियम को अपने कब्जे में लेना चाहते हैं।

ईरान के पास करीब 400 किलो समृद्ध (एनरिच्ड) यूरेनियम है, जिसका इस्तेमाल परमाणु बम बनाने में किया जा सकता है। ट्रम्प ने अपने सहयोगियों से कहा है कि ईरान को यह यूरेनियम छोड़ना ही होगा। अगर बातचीत से बात नहीं बनी, तो इसे जबरदस्ती भी लिया जा सकता है।

इस बीच, अमेरिका मिडिल ईस्ट में करीब 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने की योजना बना रहा है। इनमें से 3,500 से ज्यादा सैनिक पहले ही वहां पहुंच चुके हैं। परमाणु हथियार बनाने के बहुत करीब ईरान यूरेनियम एक ऐसा पदार्थ है, जिससे परमाणु ऊर्जा भी बनाई जा सकती है और परमाणु बम भी। फर्क सिर्फ इस बात से पड़ता है कि उसे कितना एनरिच यानि कि शुद्ध किया गया है। प्राकृतिक यूरेनियम में काम का हिस्सा बहुत कम होता है, इसलिए उसे मशीनों (सेंट्रीफ्यूज) के जरिए धीरे-धीरे शुद्ध किया जाता है। इसी प्रक्रिया को ‘यूरेनियम एनरिचमेंट’ कहते हैं। हमलों के बाद भी यूरेनियम पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ माना जा रहा है कि ईरान का बड़ा परमाणु भंडार उन पहाड़ी ठिकानों के मलबे के नीचे दबा है, जिन्हें अमेरिका ने बमबारी में निशाना बनाया था। IAEA प्रमुख राफेल ग्रोसी के मुताबिक, यह यूरेनियम इस्फहान की अंडरग्राउंड टनल और नतांज जैसे ठिकानों पर हो सकता है। ट्रम्प ने पहले दावा किया था कि हमलों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह तबाह हो गया, लेकिन अब माना जा रहा है कि काफी यूरेनियम नष्ट नहीं हुआ, बल्कि मलबे के नीचे दब गया है।

ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि ज्यादातर यूरेनियम मलबे के नीचे दबा है और अभी उसे निकालने का कोई प्लान नहीं है। साथ ही, ईरान के पास अभी भी ऐसी मशीनें हैं, जिनसे वह यूरेनियम को और शुद्ध बना सकता है और नए गुप्त ठिकाने भी बना सकता है।

लंबी जंग से बचना चाहते हैं ट्रम्प ईरान के विदेश मंत्री ने भी कहा था कि लगभग सारा 60% समृद्ध यूरेनियम मलबे के नीचे दबा हुआ है और अभी उसे निकालने की कोई योजना नहीं है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के पास अभी भी यूरेनियम को और समृद्ध करने के लिए सेंट्रीफ्यूज मशीनें हैं और वह नए अंडरग्राउंड ठिकाने भी बना सकता है। ट्रम्प और उनके कुछ सहयोगियों का मानना है कि एक सीमित और टारगेटेड ऑपरेशन के जरिए इस परमाणु सामग्री को कब्जे में लिया जा सकता है, जिससे युद्ध लंबा नहीं खिंचेगा और अप्रैल के मध्य तक इसे खत्म किया जा सकता है। ट्रम्प खुद भी लंबे युद्ध से बचना चाहते हैं, क्योंकि उनके कुछ सहयोगी चाहते हैं कि वे ध्यान घरेलू मुद्दों और आने वाले चुनावों पर दें, जहां रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान का खतरा बताया जा रहा है। एक्सपर्ट बोले- ईरान में सैनिक भेजना खतरनाक एक्सपर्ट ट्रम्प के यूरेनियम हासिल करने के लिए जमीनी ऑपरेशन शुरू करने की योजना को मुश्किल और खतरनाक मानते हैं। उनका कहना है कि इसके लिए बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों को ईरान के अंदर भेजना पड़ेगा। इससे खून-खराबा बढ़ेगा और कई अमेरिकी सैनिकों की जान जाएगी। सैनिकों को पहले इलाके को सुरक्षित करना होगा, जहां उन्हें ईरान की मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ सकता है। इसके बाद इंजीनियर मलबे को हटाकर बारूदी सुरंगों और जालों को साफ करेंगे। यूरेनियम को खोजने के बाद स्पेशल फोर्स की टीम उसे बाहर निकालेगी। बताया गया है कि यह सामग्री 40 से 50 खास सिलेंडरों में रखी हो सकती है, जो देखने में ऑक्सीजन सिलेंडर जैसे होते हैं। इन सिलेंडरों को सुरक्षित कंटेनरों में डालकर ट्रकों में ले जाया जाएगा। इसके लिए काफी जगह लगेगी और कई ट्रकों की जरूरत पड़ सकती है। इसके बाद इसे बाहर निकालने के लिए एयरफील्ड की जरूरत होगी। अगर वहां एयरफील्ड नहीं हुआ, तो अस्थायी रनवे बनाना पड़ेगा। पूरा ऑपरेशन कई दिन या एक हफ्ते तक चल सकता है। अगर अमेरिका जबरन यूरेनियम कब्जे में लेने की कोशिश करता है, तो ईरान की तरफ से जोरदार जवाबी हमला हो सकता है और युद्ध कई हफ्तों से आगे बढ़कर लंबा खिंच सकता है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान के खिलाफ जमीनी कार्रवाई करने का आदेश दे सकते हैं। अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ईरान के पास मौजूद यूरेनियम को अपने कब्जे में लेना चाहते हैं।

ईरान के पास करीब 400 किलो समृद्ध (एनरिच्ड) यूरेनियम है, जिसका इस्तेमाल परमाणु बम बनाने में किया जा सकता है। ट्रम्प ने अपने सहयोगियों से कहा है कि ईरान को यह यूरेनियम छोड़ना ही होगा। अगर बातचीत से बात नहीं बनी, तो इसे जबरदस्ती भी लिया जा सकता है।

इस बीच, अमेरिका मिडिल ईस्ट में करीब 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने की योजना बना रहा है। इनमें से 3,500 से ज्यादा सैनिक पहले ही वहां पहुंच चुके हैं। परमाणु हथियार बनाने के बहुत करीब ईरान यूरेनियम एक ऐसा पदार्थ है, जिससे परमाणु ऊर्जा भी बनाई जा सकती है और परमाणु बम भी। फर्क सिर्फ इस बात से पड़ता है कि उसे कितना एनरिच यानि कि शुद्ध किया गया है। प्राकृतिक यूरेनियम में काम का हिस्सा बहुत कम होता है, इसलिए उसे मशीनों (सेंट्रीफ्यूज) के जरिए धीरे-धीरे शुद्ध किया जाता है। इसी प्रक्रिया को ‘यूरेनियम एनरिचमेंट’ कहते हैं। हमलों के बाद भी यूरेनियम पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ माना जा रहा है कि ईरान का बड़ा परमाणु भंडार उन पहाड़ी ठिकानों के मलबे के नीचे दबा है, जिन्हें अमेरिका ने बमबारी में निशाना बनाया था। IAEA प्रमुख राफेल ग्रोसी के मुताबिक, यह यूरेनियम इस्फहान की अंडरग्राउंड टनल और नतांज जैसे ठिकानों पर हो सकता है। ट्रम्प ने पहले दावा किया था कि हमलों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह तबाह हो गया, लेकिन अब माना जा रहा है कि काफी यूरेनियम नष्ट नहीं हुआ, बल्कि मलबे के नीचे दब गया है।

ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि ज्यादातर यूरेनियम मलबे के नीचे दबा है और अभी उसे निकालने का कोई प्लान नहीं है। साथ ही, ईरान के पास अभी भी ऐसी मशीनें हैं, जिनसे वह यूरेनियम को और शुद्ध बना सकता है और नए गुप्त ठिकाने भी बना सकता है।

लंबी जंग से बचना चाहते हैं ट्रम्प ईरान के विदेश मंत्री ने भी कहा था कि लगभग सारा 60% समृद्ध यूरेनियम मलबे के नीचे दबा हुआ है और अभी उसे निकालने की कोई योजना नहीं है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के पास अभी भी यूरेनियम को और समृद्ध करने के लिए सेंट्रीफ्यूज मशीनें हैं और वह नए अंडरग्राउंड ठिकाने भी बना सकता है। ट्रम्प और उनके कुछ सहयोगियों का मानना है कि एक सीमित और टारगेटेड ऑपरेशन के जरिए इस परमाणु सामग्री को कब्जे में लिया जा सकता है, जिससे युद्ध लंबा नहीं खिंचेगा और अप्रैल के मध्य तक इसे खत्म किया जा सकता है। ट्रम्प खुद भी लंबे युद्ध से बचना चाहते हैं, क्योंकि उनके कुछ सहयोगी चाहते हैं कि वे ध्यान घरेलू मुद्दों और आने वाले चुनावों पर दें, जहां रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान का खतरा बताया जा रहा है। एक्सपर्ट बोले- ईरान में सैनिक भेजना खतरनाक एक्सपर्ट ट्रम्प के यूरेनियम हासिल करने के लिए जमीनी ऑपरेशन शुरू करने की योजना को मुश्किल और खतरनाक मानते हैं। उनका कहना है कि इसके लिए बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों को ईरान के अंदर भेजना पड़ेगा। इससे खून-खराबा बढ़ेगा और कई अमेरिकी सैनिकों की जान जाएगी। सैनिकों को पहले इलाके को सुरक्षित करना होगा, जहां उन्हें ईरान की मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ सकता है। इसके बाद इंजीनियर मलबे को हटाकर बारूदी सुरंगों और जालों को साफ करेंगे। यूरेनियम को खोजने के बाद स्पेशल फोर्स की टीम उसे बाहर निकालेगी। बताया गया है कि यह सामग्री 40 से 50 खास सिलेंडरों में रखी हो सकती है, जो देखने में ऑक्सीजन सिलेंडर जैसे होते हैं। इन सिलेंडरों को सुरक्षित कंटेनरों में डालकर ट्रकों में ले जाया जाएगा। इसके लिए काफी जगह लगेगी और कई ट्रकों की जरूरत पड़ सकती है। इसके बाद इसे बाहर निकालने के लिए एयरफील्ड की जरूरत होगी। अगर वहां एयरफील्ड नहीं हुआ, तो अस्थायी रनवे बनाना पड़ेगा। पूरा ऑपरेशन कई दिन या एक हफ्ते तक चल सकता है। अगर अमेरिका जबरन यूरेनियम कब्जे में लेने की कोशिश करता है, तो ईरान की तरफ से जोरदार जवाबी हमला हो सकता है और युद्ध कई हफ्तों से आगे बढ़कर लंबा खिंच सकता है।

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