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स्कूल बसों का लंदन जैसा हाईटेक नेटवर्क तेलंगाना में:एक रूट के कई स्कूलों के लिए साझा बस, खास एप से जुड़ेंगे पेरेंट्स, स्कूल-ऑपरेटर

स्कूल बसों का लंदन जैसा हाईटेक नेटवर्क तेलंगाना में:एक रूट के कई स्कूलों के लिए साझा बस, खास एप से जुड़ेंगे पेरेंट्स, स्कूल-ऑपरेटर

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद का हाईटेक इलाका ‘साइबराबाद’ अब बड़े बदलाव की दहलीज पर है। अक्सर ट्रैफिक जाम व स्कूल छोड़ते वक्त होने वाली अफरा-तफरी से जूझने वाले इस क्षेत्र के लिए साइबराबाद पुलिस और ‘सोसाइटी फॉर साइबराबाद सिक्योरिटी काउंसिल’ (एससीएससी) ने ‘लंदन ट्रांसपोर्ट मॉडल’ से प्रेरित मास्टरप्लान तैयार किया है। नए ‘स्टूडेंट मोबिलिटी सिस्टम’ का मकसद जाम खत्म करना, बच्चों की सुरक्षा को अभेद्य बनाना, माता-पिता का तनाव घटाने के साथ स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार के मौके भी पैदा करना भी है। साइबराबाद पुलिस कमिश्नर डॉ. एम. रमेश बताते हैं, ‘हाईटेक सिटी और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा स्कूल जाने वाले बच्चों और उन्हें छोड़ने जाने वाले निजी वाहनों का होता है। क्षेत्र के अधिकांश स्कूल अपनी बस सेवा नहीं देते। इस वजह से पेरेंट्स निजी वाहनों से बच्चों को छोड़ते हैं, ट्रैफिक का दबाव बढ़ता है।’ डॉ. रमेश ने कहा, पुलिस खास एप विकसित कर रही है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म अभिभावकों, स्कूलों और बस ऑपरेटरों को एक सूत्र में पिरोएगा। हालांकि इस ‘गेम-चेंजर’ एप का नाम अभी तय होना बाकी है, क्योंकि अधिकारी सभी हितधारकों की राय लेकर प्रभावी नाम रखना चाहते हैं।’ योजना का सबसे महत्वाकांक्षी हिस्सा बसों की संख्या में बढ़ोतरी है। वर्तमान में चलने वाली 3 हजार स्कूल बसों के बेड़े को बढ़ाकर 15 हजार करने का लक्ष्य रखा गया है। पुलिस का मानना है कि जब छात्र असुरक्षित निजी वाहनों या माता-पिता की गाड़ियों के बजाय इस साझा बस सेवा इस्तेमाल करेंगे, तो निजी वाहनों का बोझ कम होगा। अनुमान है कि इससे ट्रैफिक जाम में 30% तक की कमी आएगी। डॉ. रमेश बताते हैं, ‘प्रोजेक्ट में सामाजिक भागीदारी पर भी फोकस है। इसमें स्थानीय स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को जोड़ा जाएगा। बसों में स्थायी अटेंडेंट के साथ-साथ ‘होम पिक-अप’ की सुविधा भी होगी, जिससे स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर पैदा होंगे। बच्चों की सुरक्षा के लिए ड्राइवरों और अटेंडेंट का सख्त पुलिस वेरिफिकेशन और खास ट्रेनिंग जरूरी होगी। एआई से रूटिंग, पुलिस कंट्रोल रूम से कनेक्टिविटी रहेगी सिस्टम को हाईटेक बनाने के लिए एआई और जीआईएस (जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम) की मदद ली जा रही है। एआई से विश्लेषण होगा कि किस क्षेत्र के छात्र किस स्कूल में जा रहे हैं। उसी आधार पर स्मार्ट रूटिंग की जाएगी। इससे एक ही क्षेत्र के कई स्कूलों के लिए साझा बस रूट तैयार किए जा सकेंगे। इससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। सिस्टम की सुरक्षा लंदन के ‘ट्रांसपोर्ट फॉर लंदन’ मॉडल पर आधारित होगी। सीसीटीवी और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से बसों लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी। इसकी सीधी कनेक्टिविटी पुलिस कंट्रोल रूम से रहेगी ताकि आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

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