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Cholesterol New Guideline; Lipid Profile Screening

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1 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (ACC) ने कोलेस्ट्रॉल पर नई गाइडलाइन जारी की है। यह अपडेट इसलिए अहम है, क्योंकि इसने कोलेस्ट्रॉल के पुराने पैरामीटर्स को पूरी तरह बदल दिया है।

वर्ल्ड हेल्थ फेडरेशन (WHF) के मुताबिक, दुनियाभर में हर साल सबसे ज्यादा मौतें कार्डियोवस्कुलर डिजीज (CVD) के कारण होती हैं। इससे हर साल 2 करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत होती है।

हाई कोलेस्ट्रॉल कार्डियोवस्कुलर डिजीज की बड़ी वजह है। इसलिए कोलेस्ट्रॉल पर आई नई गाइडलाइन को समझना बेहद जरूरी है।

आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में कोलेस्ट्रॉल की नई गाइडलाइन की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • कोलेस्ट्रॉल के नए पैरामीटर्स क्या हैं?
  • क्या नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल की बेसलाइन बदल गई है?

सवाल- कोलेस्ट्रॉल क्या है और यह शरीर के लिए क्यों जरूरी है?

जवाब- दोनों चीजें पॉइंटर्स से समझिए-

कोलेस्ट्रॉल क्या है?

  • यह एक प्रकार का फैट (लिपिड) है, जो ब्लड में होता है।
  • यह दो तरह का होता है- LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल) और HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल)।

क्यों जरूरी है?

  • यह बॉडी सेल्स की वॉल्स (दीवार) बनाने में मदद करता है।
  • कुछ हॉर्मोन्स बनाने के लिए जरूरी है।
  • बॉडी में विटामिन D बनाने में मदद करता है।
  • पाचन के लिए बाइल जूस बनाने में मदद करता है।
  • गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) हार्ट को हेल्दी रखता है।

सवाल- कोलेस्ट्रॉल पर आई नई गाइडलाइन क्या है, इसमें क्या बताया गया है?

जवाब- नई गाइडलाइन में स्क्रीनिंग, रिस्क एसेसमेंट और लाइफस्टाइल पर जोर दिया गया है। पूरी गाइडलाइन ग्राफिक से समझिए-

सवाल- नई गाइडलाइन के मुताबिक क्या अब ‘नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल’ की बेसलाइन बदल गई है?

जवाब- बेसलाइन पूरी तरह नहीं बदली गई, बल्कि अब पर्सनलाइज्ड रिस्क पर जोर दिया गया है। पुरानी गाइडलाइन में लोगों को LDL 130 mg/dL से कम रखने की सलाह दी गई थी। अब इसे पर्सनलाइज्ड करके नॉर्मल, मीडियम और हाई तीन कैटेगरी में बांट दिया गया है। पॉइंटर्स से समझिए-

  • ‘नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल’ की कोई एक तय बेसलाइन नहीं रखी गई है।
  • LDL का टारगेट हर व्यक्ति के अपने रिस्क लेवल पर निर्भर होगा।
  • जिन्हें हार्ट डिजीज नहीं है, उन्हें LDL 100 mg/dL से कम रखना है।
  • जिन्हें हार्ट डिजीज का मीडियम रिस्क है, उन्हें LDL 70 mg/dL से कम रखना है।
  • जिन्हें हार्ट डिजीज का हाई रिस्क है, उन्हें 55 mg/dL से कम रखना है।
  • इसका मतलब है कि ‘नॉर्मल’ की परिभाषा अब पर्सनलाइज्ड हो गई है।

सवाल- क्या नई गाइडलाइन में रिस्क कैलकुलेशन को लेकर भी कोई बदलाव किए गए हैं?

जवाब- नई गाइडलाइन में रिस्क कैलकुलेशन को पहले से ज्यादा कॉम्प्रिहेंसिव (व्यापक) बनाया गया है। ग्राफिक में इसे देखिए-

सवाल- नई गाइडलाइन में मेंशन किया गया है कि कम उम्र में भी हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा बढ़ रहा है। इसके पीछे क्या कारण हैं?

जवाब- जेनेटिक रिस्क और खराब लाइफस्टाइल दोनों कारणों से कम उम्र में ही खतरा बढ़ रहा है। पॉइंटर्स से समझिए-

  • इसकी बड़ी वजह जनेटिक फैक्टर्स (फैमिली हिस्ट्री) होते हैं।
  • फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (जेनेटिक कंडीशन) के कारण बचपन से ही LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल) ज्यादा होता है।
  • खराब लाइफस्टाइल, खाने में जंकफूड और लो कम एक्सरसाइज भी रिस्क बढ़ाते हैं।
  • इन्हीं वजहों से गाइडलाइन में इन बच्चों की 9 साल की उम्र ही स्क्रीनिंग की सलाह दी गई है।

सवाल- हाई कोलेस्ट्रॉल हमारे हार्ट, ब्रेन और किडनी की हेल्थ को कैसे प्रभावित करता है?

जवाब- यह ब्लड वेसल्स को डैमेज करता है। इससे हार्ट, ब्रेन और किडनी तीनों ऑर्गन्स प्रभावित होते हैं।

हार्ट

  • हाई LDL आर्टरीज में जमा होकर प्लाक बना सकता है।
  • इससे आर्टरीज संकरी हो जाती हैं और ब्लड फ्लो कम होता है।
  • हार्ट को ऑक्सीजन कम मिलने से सीने में दर्द (एंजाइना) हो सकता है।
  • प्लाक टूटने पर क्लॉट बनने से हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ता है।

ब्रेन

  • ये ब्लड क्लॉट्स ब्रेन में जाकर वहां ब्लड फ्लो रोकते हैं।
  • इससे ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है।
  • लॉन्ग टर्म में मेमोरी और कॉग्निटिव फंक्शन भी प्रभावित होते हैं।

किडनी

  • हाई कोलेस्ट्रॉल किडनी की छोटी ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाता है।
  • इससे किडनी की ब्लड फिल्टर करने की क्षमता कमजोर होती है।
  • लॉन्ग टर्म में क्रॉनिक किडनी डिजीज का रिस्क बढ़ता है।

सवाल- कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के पीछे मुख्य लाइफस्टाइल फैक्टर्स क्या हैं?

जवाब- ये सभी लाइफस्टाइल फैक्टर्स मिलकर कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं। पॉइंटर्स में देखिए-

  • अनहेल्दी डाइट से सैचुरेटेड और ट्रांस फैट बढ़ता है।
  • अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड खाने से ज्यादा LDL बनता है।
  • सिडेंटरी लाइफस्टाइल से फैट मेटाबॉलिज्म खराब होता है।
  • मोटापा कोलेस्ट्रॉल इंबैलेंस करता है।
  • स्मोकिंग से HDL कम होता है और LDL बढ़ता है।
  • पर्याप्त नींद न लेने से मेटाबॉलिक बदलाव हो सकते हैं।
  • अनियमित दिनचर्या यानी देर रात खाने, देर से सोने से भी असर पड़ता है।
  • स्ट्रेस बढ़ने पर भी बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है।

सवाल- अगर जांच में कोलेस्ट्रॉल ज्यादा आए तो तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए?

जवाब- सबसे पहले डॉक्टर से सलाह लें और रिस्क एसेसमेंट करवाएं।

  • LDL लेवल को समझें और अपनी रिस्क कैटेगरी के मुताबिक इसे कंट्रोल करने का लक्ष्य तय करें।
  • हार्ट-हेल्दी डाइट (कम फैट, ज्यादा फाइबर) अपनाएं।
  • नियमित कार्डियो एक्सरसाइज (जैसे ब्रिस्क वॉकिंग) शुरू करें।
  • वेट कंट्रोल में रखें।
  • सिगरेट, शराब न पिएं।
  • पर्याप्त नींद लें और स्ट्रेस मैनेज रखें।
  • ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर भी कंट्रोल करें।
  • जरूरत पड़ने पर डॉक्टर स्टेटिन या अन्य दवाएं शुरू कर सकते हैं।
  • समय-समय पर फॉलो-अप टेस्ट करवाएं।

सवाल- कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव जरूरी हैं?

जवाब- बैलेंस्ड डाइट, एक्टिव लाइफ और अच्छी आदतें कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के लिए सबसे जरूरी हैं। ग्राफिक में इसके लिए 14 जरूरी रूल देखिए-

सवाल- क्या सिर्फ डाइट और एक्सरसाइज से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल हो सकता है या दवा भी जरूरी होती है?

जवाब- यह पूरी तरह रिस्क लेवल पर निर्भर करता है। अगर रिस्क कम है तो सिर्फ लाइफस्टाइल में बदलाव से सुधार हो सकता है। रिस्क ज्यादा होने पर दवा के साथ लाइफस्टाइल में बदलाव करने चाहिए। गाइडलाइन के अनुसार-

  • लाइफस्टाइल में बदलाव पहला और जरूरी कदम है।
  • हेल्दी डाइट, नियमित एक्सरसाइज और वेट कंट्रोल से LDL कम हो सकता है।

सवाल- जिन लोगों को पहले से हार्ट डिजीज है, उन्हें कोलेस्ट्रॉल को लेकर क्या खास सावधानियां रखनी चाहिए?

जवाब- ऐसे लोगों को LDL लेवल बहुत कम यानी 55 mg/dL तक रखना चाहिए।

  • नियमित कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं और डॉक्टर से फॉलो-अप करें।
  • स्टेटिन्स और अन्य लिपिड-लोअरिंग मेडिसिन समय पर लें।
  • डॉक्टर की सलाह से जरूरत पर कॉम्बिनेशन थेरेपी (एक से ज्यादा दवाएं) अपनाएं।
  • स्ट्रिक्ट हार्ट-हेल्दी डाइट (कम फैट, ज्यादा फाइबर) लें।
  • नियमित एक्सरसाइज करें।
  • ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल में रखें।
  • तंबाकू न खाएं, स्मोकिंग न करें।
  • पर्याप्त नींद लें और स्ट्रेस मैनेज करें।

कोलेस्ट्रॉल से जुड़े कॉमन सवाल और जवाब

सवाल- LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल) और HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल) में क्या अंतर है?

जवाब- LDL को बैड कोलेस्ट्रॉल कहते हैं। यह आर्टरीज में जमा होकर ब्लॉकेज की वजह बनता है। इससे हार्ट-डिजीज का रिस्क बढ़ता है।

HDL को गुड कोलेस्ट्रॉल कहते हैं। यह एक्स्ट्रा कोलेस्ट्रॉल को आर्टरीज से हटाकर लिवर तक ले जाता है। यह हार्ट हेल्थ के लिए अच्छा होता है।

सवाल- किन लोगों को कोलेस्ट्रॉल का ज्यादा रिस्क है?

जवाब- जो लोग पहले से किसी क्रॉनिक डिजीज का सामना कर रहे हैं, उन्हें इसका ज्यादा रिस्क है। पूरी लिस्ट ग्राफिक में देखिए-

सवाल- कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के लक्षण क्या होते हैं?

जवाब- आमतौर पर हाई कोलेस्ट्रॉल का कोई खास लक्षण नहीं होता। इसलिए इसे ‘साइलेंट प्रॉब्लम’ कहा जाता है। लंबे समय तक कोलेस्ट्रॉल हाई रहने पर यह हार्ट से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकता है। इसे पता करने के लिए स्क्रीनिंग जरूरी है।

सवाल- क्या कम उम्र में भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है?

जवाब- हां, फैमिली हिस्ट्री के कारण कम उम्र में ही कोलेस्ट्रॉल ज्यादा हो सकता है। इसके अलावा बचपन से ही अनहेल्दी लाइफस्टाइल, जंक फूड और कम फिजिकल एक्टिविटी के कारण कम उम्र में भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है।

………………………

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अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (ACC) ने कोलेस्ट्रॉल पर नई गाइडलाइन जारी की है। यह अपडेट इसलिए अहम है, क्योंकि इसने कोलेस्ट्रॉल के पुराने पैरामीटर्स को पूरी तरह बदल दिया है।

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  • कोलेस्ट्रॉल के नए पैरामीटर्स क्या हैं?
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सवाल- कोलेस्ट्रॉल क्या है और यह शरीर के लिए क्यों जरूरी है?

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कोलेस्ट्रॉल क्या है?

  • यह एक प्रकार का फैट (लिपिड) है, जो ब्लड में होता है।
  • यह दो तरह का होता है- LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल) और HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल)।

क्यों जरूरी है?

  • यह बॉडी सेल्स की वॉल्स (दीवार) बनाने में मदद करता है।
  • कुछ हॉर्मोन्स बनाने के लिए जरूरी है।
  • बॉडी में विटामिन D बनाने में मदद करता है।
  • पाचन के लिए बाइल जूस बनाने में मदद करता है।
  • गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) हार्ट को हेल्दी रखता है।

सवाल- कोलेस्ट्रॉल पर आई नई गाइडलाइन क्या है, इसमें क्या बताया गया है?

जवाब- नई गाइडलाइन में स्क्रीनिंग, रिस्क एसेसमेंट और लाइफस्टाइल पर जोर दिया गया है। पूरी गाइडलाइन ग्राफिक से समझिए-

सवाल- नई गाइडलाइन के मुताबिक क्या अब ‘नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल’ की बेसलाइन बदल गई है?

जवाब- बेसलाइन पूरी तरह नहीं बदली गई, बल्कि अब पर्सनलाइज्ड रिस्क पर जोर दिया गया है। पुरानी गाइडलाइन में लोगों को LDL 130 mg/dL से कम रखने की सलाह दी गई थी। अब इसे पर्सनलाइज्ड करके नॉर्मल, मीडियम और हाई तीन कैटेगरी में बांट दिया गया है। पॉइंटर्स से समझिए-

  • ‘नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल’ की कोई एक तय बेसलाइन नहीं रखी गई है।
  • LDL का टारगेट हर व्यक्ति के अपने रिस्क लेवल पर निर्भर होगा।
  • जिन्हें हार्ट डिजीज नहीं है, उन्हें LDL 100 mg/dL से कम रखना है।
  • जिन्हें हार्ट डिजीज का मीडियम रिस्क है, उन्हें LDL 70 mg/dL से कम रखना है।
  • जिन्हें हार्ट डिजीज का हाई रिस्क है, उन्हें 55 mg/dL से कम रखना है।
  • इसका मतलब है कि ‘नॉर्मल’ की परिभाषा अब पर्सनलाइज्ड हो गई है।

सवाल- क्या नई गाइडलाइन में रिस्क कैलकुलेशन को लेकर भी कोई बदलाव किए गए हैं?

जवाब- नई गाइडलाइन में रिस्क कैलकुलेशन को पहले से ज्यादा कॉम्प्रिहेंसिव (व्यापक) बनाया गया है। ग्राफिक में इसे देखिए-

सवाल- नई गाइडलाइन में मेंशन किया गया है कि कम उम्र में भी हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा बढ़ रहा है। इसके पीछे क्या कारण हैं?

जवाब- जेनेटिक रिस्क और खराब लाइफस्टाइल दोनों कारणों से कम उम्र में ही खतरा बढ़ रहा है। पॉइंटर्स से समझिए-

  • इसकी बड़ी वजह जनेटिक फैक्टर्स (फैमिली हिस्ट्री) होते हैं।
  • फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (जेनेटिक कंडीशन) के कारण बचपन से ही LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल) ज्यादा होता है।
  • खराब लाइफस्टाइल, खाने में जंकफूड और लो कम एक्सरसाइज भी रिस्क बढ़ाते हैं।
  • इन्हीं वजहों से गाइडलाइन में इन बच्चों की 9 साल की उम्र ही स्क्रीनिंग की सलाह दी गई है।

सवाल- हाई कोलेस्ट्रॉल हमारे हार्ट, ब्रेन और किडनी की हेल्थ को कैसे प्रभावित करता है?

जवाब- यह ब्लड वेसल्स को डैमेज करता है। इससे हार्ट, ब्रेन और किडनी तीनों ऑर्गन्स प्रभावित होते हैं।

हार्ट

  • हाई LDL आर्टरीज में जमा होकर प्लाक बना सकता है।
  • इससे आर्टरीज संकरी हो जाती हैं और ब्लड फ्लो कम होता है।
  • हार्ट को ऑक्सीजन कम मिलने से सीने में दर्द (एंजाइना) हो सकता है।
  • प्लाक टूटने पर क्लॉट बनने से हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ता है।

ब्रेन

  • ये ब्लड क्लॉट्स ब्रेन में जाकर वहां ब्लड फ्लो रोकते हैं।
  • इससे ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है।
  • लॉन्ग टर्म में मेमोरी और कॉग्निटिव फंक्शन भी प्रभावित होते हैं।

किडनी

  • हाई कोलेस्ट्रॉल किडनी की छोटी ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाता है।
  • इससे किडनी की ब्लड फिल्टर करने की क्षमता कमजोर होती है।
  • लॉन्ग टर्म में क्रॉनिक किडनी डिजीज का रिस्क बढ़ता है।

सवाल- कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के पीछे मुख्य लाइफस्टाइल फैक्टर्स क्या हैं?

जवाब- ये सभी लाइफस्टाइल फैक्टर्स मिलकर कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं। पॉइंटर्स में देखिए-

  • अनहेल्दी डाइट से सैचुरेटेड और ट्रांस फैट बढ़ता है।
  • अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड खाने से ज्यादा LDL बनता है।
  • सिडेंटरी लाइफस्टाइल से फैट मेटाबॉलिज्म खराब होता है।
  • मोटापा कोलेस्ट्रॉल इंबैलेंस करता है।
  • स्मोकिंग से HDL कम होता है और LDL बढ़ता है।
  • पर्याप्त नींद न लेने से मेटाबॉलिक बदलाव हो सकते हैं।
  • अनियमित दिनचर्या यानी देर रात खाने, देर से सोने से भी असर पड़ता है।
  • स्ट्रेस बढ़ने पर भी बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है।

सवाल- अगर जांच में कोलेस्ट्रॉल ज्यादा आए तो तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए?

जवाब- सबसे पहले डॉक्टर से सलाह लें और रिस्क एसेसमेंट करवाएं।

  • LDL लेवल को समझें और अपनी रिस्क कैटेगरी के मुताबिक इसे कंट्रोल करने का लक्ष्य तय करें।
  • हार्ट-हेल्दी डाइट (कम फैट, ज्यादा फाइबर) अपनाएं।
  • नियमित कार्डियो एक्सरसाइज (जैसे ब्रिस्क वॉकिंग) शुरू करें।
  • वेट कंट्रोल में रखें।
  • सिगरेट, शराब न पिएं।
  • पर्याप्त नींद लें और स्ट्रेस मैनेज रखें।
  • ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर भी कंट्रोल करें।
  • जरूरत पड़ने पर डॉक्टर स्टेटिन या अन्य दवाएं शुरू कर सकते हैं।
  • समय-समय पर फॉलो-अप टेस्ट करवाएं।

सवाल- कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव जरूरी हैं?

जवाब- बैलेंस्ड डाइट, एक्टिव लाइफ और अच्छी आदतें कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के लिए सबसे जरूरी हैं। ग्राफिक में इसके लिए 14 जरूरी रूल देखिए-

सवाल- क्या सिर्फ डाइट और एक्सरसाइज से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल हो सकता है या दवा भी जरूरी होती है?

जवाब- यह पूरी तरह रिस्क लेवल पर निर्भर करता है। अगर रिस्क कम है तो सिर्फ लाइफस्टाइल में बदलाव से सुधार हो सकता है। रिस्क ज्यादा होने पर दवा के साथ लाइफस्टाइल में बदलाव करने चाहिए। गाइडलाइन के अनुसार-

  • लाइफस्टाइल में बदलाव पहला और जरूरी कदम है।
  • हेल्दी डाइट, नियमित एक्सरसाइज और वेट कंट्रोल से LDL कम हो सकता है।

सवाल- जिन लोगों को पहले से हार्ट डिजीज है, उन्हें कोलेस्ट्रॉल को लेकर क्या खास सावधानियां रखनी चाहिए?

जवाब- ऐसे लोगों को LDL लेवल बहुत कम यानी 55 mg/dL तक रखना चाहिए।

  • नियमित कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं और डॉक्टर से फॉलो-अप करें।
  • स्टेटिन्स और अन्य लिपिड-लोअरिंग मेडिसिन समय पर लें।
  • डॉक्टर की सलाह से जरूरत पर कॉम्बिनेशन थेरेपी (एक से ज्यादा दवाएं) अपनाएं।
  • स्ट्रिक्ट हार्ट-हेल्दी डाइट (कम फैट, ज्यादा फाइबर) लें।
  • नियमित एक्सरसाइज करें।
  • ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल में रखें।
  • तंबाकू न खाएं, स्मोकिंग न करें।
  • पर्याप्त नींद लें और स्ट्रेस मैनेज करें।

कोलेस्ट्रॉल से जुड़े कॉमन सवाल और जवाब

सवाल- LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल) और HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल) में क्या अंतर है?

जवाब- LDL को बैड कोलेस्ट्रॉल कहते हैं। यह आर्टरीज में जमा होकर ब्लॉकेज की वजह बनता है। इससे हार्ट-डिजीज का रिस्क बढ़ता है।

HDL को गुड कोलेस्ट्रॉल कहते हैं। यह एक्स्ट्रा कोलेस्ट्रॉल को आर्टरीज से हटाकर लिवर तक ले जाता है। यह हार्ट हेल्थ के लिए अच्छा होता है।

सवाल- किन लोगों को कोलेस्ट्रॉल का ज्यादा रिस्क है?

जवाब- जो लोग पहले से किसी क्रॉनिक डिजीज का सामना कर रहे हैं, उन्हें इसका ज्यादा रिस्क है। पूरी लिस्ट ग्राफिक में देखिए-

सवाल- कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के लक्षण क्या होते हैं?

जवाब- आमतौर पर हाई कोलेस्ट्रॉल का कोई खास लक्षण नहीं होता। इसलिए इसे ‘साइलेंट प्रॉब्लम’ कहा जाता है। लंबे समय तक कोलेस्ट्रॉल हाई रहने पर यह हार्ट से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकता है। इसे पता करने के लिए स्क्रीनिंग जरूरी है।

सवाल- क्या कम उम्र में भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है?

जवाब- हां, फैमिली हिस्ट्री के कारण कम उम्र में ही कोलेस्ट्रॉल ज्यादा हो सकता है। इसके अलावा बचपन से ही अनहेल्दी लाइफस्टाइल, जंक फूड और कम फिजिकल एक्टिविटी के कारण कम उम्र में भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है।

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