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45 की उम्र के बाद महिलाओं में क्यों बढ़ता है लिवर फैट? डॉक्टर ने बताई असली वजह और बचाव के तरीके

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Menopause and Fatty Liver: महिलाओं में 45 की उम्र के बाद हार्मोनल बदलाव होने लगता है, जिसके कारण लिवर में फैट तेजी से बढ़ने लगता है. एस्ट्रोजन का स्तर घटने से फैट पेट और आंतरिक अंगों के आसपास जमा होता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है और फैटी लिवर का खतरा बढ़ जाता है. समय पर जागरुकता से इस समस्या से बचा जा सकता है.

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मेनोपॉज के बाद महिलाओं में फैटी लिवर का खतरा बढ़ जाता है.

Fatty Liver Risk in Women: हमारे शरीर में उम्र के अनुसार बदलाव होते रहते हैं. 45 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में बेहद तेजी से बदलाव होने लगते हैं, जिनका असर सिर्फ हार्मोन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है. खासकर मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है, जिससे शरीर में फैट के जमाव का पैटर्न बदल जाता है. यही कारण है कि इस उम्र के बाद कई महिलाओं में लिवर फैट तेजी से बढ़ने लगता है, जो गंभीर समस्या पैदा कर सकता है.

चेन्नई की सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. कनगा लक्ष्मी ने HT को बताया कि मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन का स्तर घटने से शरीर में फैट का वितरण प्रभावित होता है. पहले जो फैट शरीर के बाहरी हिस्सों जैसे हिप्स और जांघों में जमा होता था, वह अब पेट और आंतरिक अंगों के आसपास जमा होने लगता है. यह विसरल फैट ज्यादा खतरनाक होता है और लिवर पर सीधा असर डालता है. इसी बदलाव के कारण महिलाओं में फैटी लिवर का खतरा बढ़ जाता है. हार्मोनल बदलाव के साथ शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस भी बढ़ने लगता है. जब शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, तो ब्लड शुगर का स्तर असंतुलित हो जाता है. इससे मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है और एक्स्ट्रा फैट लिवर में जमा होने लगता है, जिससे फैटी लिवर डिजीज का खतरा बढ़ जाता है.
सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉक्टर के अनुसार फैटी लिवर की समस्या शुरुआती स्टेज में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती है. कई महिलाओं का वजन सामान्य रहता है, इसलिए वे इसे गंभीरता से नहीं लेतीं. हालांकि अंदरूनी फैट धीरे-धीरे लिवर में जमा होता रहता है, जिससे समय पर इसका पता नहीं चल पाता और बाद में यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है. दरअसल मेनोपॉज से पहले एस्ट्रोजन महिलाओं को एक तरह का सुरक्षा कवच देता है, जिससे वे मेटाबॉलिक बीमारियों से कुछ हद तक सुरक्षित रहती हैं. मेनोपॉज के बाद यह सुरक्षा खत्म हो जाती है. इसके बाद महिलाओं में न केवल फैटी लिवर बल्कि दिल की बीमारी और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है. कुछ मामलों में यह जोखिम पुरुषों से भी ज्यादा हो सकता है.

फैटी लिवर के लक्षण साफ नहीं होते, लेकिन कुछ संकेत इस ओर इशारा कर सकते हैं. जैसे बिना ज्यादा वजन बढ़े पेट का घेरा बढ़ना, लगातार थकान रहना, लिवर एंजाइम्स का बढ़ना या पहले से PCOS, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या होना. ये सभी संकेत बताते हैं कि शरीर में मेटाबॉलिक असंतुलन बढ़ रहा है. इस समस्या से बचने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार बेहद जरूरी है. संतुलित और प्रोटीन युक्त आहार लेना, नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और एरोबिक एक्सरसाइज करना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखना काफी मददगार साबित होता है. इसके साथ ही समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना भी जरूरी है, ताकि समस्या को शुरुआती स्टेज में ही पकड़ा जा सके.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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मेनोपॉज के बाद महिलाओं में फैटी लिवर का खतरा बढ़ जाता है.

Fatty Liver Risk in Women: हमारे शरीर में उम्र के अनुसार बदलाव होते रहते हैं. 45 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में बेहद तेजी से बदलाव होने लगते हैं, जिनका असर सिर्फ हार्मोन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है. खासकर मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है, जिससे शरीर में फैट के जमाव का पैटर्न बदल जाता है. यही कारण है कि इस उम्र के बाद कई महिलाओं में लिवर फैट तेजी से बढ़ने लगता है, जो गंभीर समस्या पैदा कर सकता है.

चेन्नई की सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. कनगा लक्ष्मी ने HT को बताया कि मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन का स्तर घटने से शरीर में फैट का वितरण प्रभावित होता है. पहले जो फैट शरीर के बाहरी हिस्सों जैसे हिप्स और जांघों में जमा होता था, वह अब पेट और आंतरिक अंगों के आसपास जमा होने लगता है. यह विसरल फैट ज्यादा खतरनाक होता है और लिवर पर सीधा असर डालता है. इसी बदलाव के कारण महिलाओं में फैटी लिवर का खतरा बढ़ जाता है. हार्मोनल बदलाव के साथ शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस भी बढ़ने लगता है. जब शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, तो ब्लड शुगर का स्तर असंतुलित हो जाता है. इससे मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है और एक्स्ट्रा फैट लिवर में जमा होने लगता है, जिससे फैटी लिवर डिजीज का खतरा बढ़ जाता है.
सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉक्टर के अनुसार फैटी लिवर की समस्या शुरुआती स्टेज में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती है. कई महिलाओं का वजन सामान्य रहता है, इसलिए वे इसे गंभीरता से नहीं लेतीं. हालांकि अंदरूनी फैट धीरे-धीरे लिवर में जमा होता रहता है, जिससे समय पर इसका पता नहीं चल पाता और बाद में यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है. दरअसल मेनोपॉज से पहले एस्ट्रोजन महिलाओं को एक तरह का सुरक्षा कवच देता है, जिससे वे मेटाबॉलिक बीमारियों से कुछ हद तक सुरक्षित रहती हैं. मेनोपॉज के बाद यह सुरक्षा खत्म हो जाती है. इसके बाद महिलाओं में न केवल फैटी लिवर बल्कि दिल की बीमारी और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है. कुछ मामलों में यह जोखिम पुरुषों से भी ज्यादा हो सकता है.

फैटी लिवर के लक्षण साफ नहीं होते, लेकिन कुछ संकेत इस ओर इशारा कर सकते हैं. जैसे बिना ज्यादा वजन बढ़े पेट का घेरा बढ़ना, लगातार थकान रहना, लिवर एंजाइम्स का बढ़ना या पहले से PCOS, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या होना. ये सभी संकेत बताते हैं कि शरीर में मेटाबॉलिक असंतुलन बढ़ रहा है. इस समस्या से बचने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार बेहद जरूरी है. संतुलित और प्रोटीन युक्त आहार लेना, नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और एरोबिक एक्सरसाइज करना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखना काफी मददगार साबित होता है. इसके साथ ही समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना भी जरूरी है, ताकि समस्या को शुरुआती स्टेज में ही पकड़ा जा सके.

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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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