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कैबिनेट में सीएम ने मंत्रियों से कहा:जिन राज्यों में यूसीसी लागू हो चुका, वहां का अध्ययन करें- कैसे लागू किया, क्या चुनौती आई

कैबिनेट में सीएम ने मंत्रियों से कहा:जिन राज्यों में यूसीसी लागू हो चुका, वहां का अध्ययन करें- कैसे लागू किया, क्या चुनौती आई

मध्यप्रदेश अब समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की तैयारी में है। असम और गुजरात के बाद मप्र भी इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। मंगलवार को कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रियों से कहा कि यूसीसी का अध्ययन करें, इसे राज्य में लागू करना

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सीएम के संकेत के बाद गृह विभाग में प्रक्रिया तेज हो गई है, क्योंकि यूसीसी बिल तैयार करने की जिम्मेदारी इसी विभाग की है। सूत्रों के अनुसार, जल्द राज्य स्तर पर एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित होगी। राज्य सरकार छह माह के भीतर यूसीसी बिल लाने की तैयारी में है। इसके लिए दिल्ली से भी मप्र को संकेत मिल चुके हैं।

उत्तराखंड-गुजरात-असम जैसे बहुविवाह के नियम बदलेंगे, लिव इन का रजिस्ट्रेशन जरूरी

Q. यूसीसी लागू होने पर मूल बदलाव क्या होगा? – सभी धर्मों के लिए शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने के नियम एक समान हो जाएंगे। अलग-अलग पर्सनल लॉ खत्म हो जाएंगे।

Q. शादी और तलाक के नियम कैसे बदलेंगे? – अभी हर धर्म के अपने नियम हैं। यूसीसी के बाद विवाह पंजीकरण अनिवार्य होगा। न्यूनतम आयु समान होगी, तलाक के कानूनी आधार सभी के लिए एक होंगे।

Q. बहुविवाह और विरासत के नियमों पर क्या असर? – कई पर्सनल लॉ में एक से अधिक विवाह की अनुमति या गुंजाइश है। यूसीसी लागू होते ही पूरी तरह प्रतिबंधित। – बेटियों को पिता की संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार मिलेगा। यह नियम सभी धर्मों पर समान लागू होगा।

Q. यूसीसी लागू करने में मप्र में सबसे बड़ी चुनौती क्यों मानी जा रही है? – मप्र में बड़ी संख्या में जनजातीय और विशेष पिछड़ी जनजातियां हैं, जहां पारंपरिक विवाह पद्धतियां प्रचलित हैं। इन परंपराओं को यूसीसी में शामिल करना या अलग प्रावधान चुनौती होगी। दापा प्रथा: वधु मूल्य देना। भगेली/लम्सना विवाह: युवक-युवती भागकर शादी करते हैं, बाद में समाज मान्यता देता है। सेवा विवाह: वधु मूल्य न देने पर लड़का ससुराल में रहकर सेवा करता है। नातरा प्रथा: विधवा पुनर्विवाह या साथी बदलने की अनुमति।

Q. किन राज्यों में यूसीसी लागू या प्रक्रिया में है? उत्तराखंड: फरवरी 2024 में बिल पास, 27 जनवरी 2025 से लागू। गुजरात: मार्च 2026 में बिल पास, लागू करने की तैयारी। गोवा: 1867 के पुर्तगाली सिविल कोड के कारण यहां यूसीसी पहले से लागू। असम: नवंबर 2025 में बहुविवाह निषेध कानून पास, यूसीसी की दिशा में कदम उत्तर प्रदेश: यूसीसी लागू की तैयारी चल रही है।

एसटी 3 राज्यों में कानून से बाहर

Q. उत्तराखंड मॉडल में क्या है? -स्वतंत्र भारत का पहला राज्य जहां यूसीसी लागू हुआ। शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। लिव-इन रिलेशनशिप का 30 दिन में रजिस्ट्रेशन भी अनिवार्य किया। ऐसा न करने पर 3 महीने तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

Q. गुजरात मॉडल की खास बातें क्या हैं? -उत्तराखंड जैसा ढांचा। धोखे, दबाव या पहचान छिपाकर शादी अपराध है। इस पर 7 साल तक की जेल हो सकती है। 60 दिन में लिव-इन रजिस्ट्रेशन कराना होगा। संपत्ति में बेटा-बेटी बराबर होंगे। एसटी को कानून से बाहर रखा गया है।

Q असम का मॉडल क्या है? – यहां यूसीसी पूरी तरह लागू नहीं। बहुविवाह अपराध घोषित किया है। छठी अनुसूची क्षेत्र और एसटी कानून से बाहर।

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कैबिनेट में सीएम ने मंत्रियों से कहा:जिन राज्यों में यूसीसी लागू हो चुका, वहां का अध्ययन करें- कैसे लागू किया, क्या चुनौती आई

मध्यप्रदेश अब समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की तैयारी में है। असम और गुजरात के बाद मप्र भी इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। मंगलवार को कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रियों से कहा कि यूसीसी का अध्ययन करें, इसे राज्य में लागू करना

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उत्तराखंड-गुजरात-असम जैसे बहुविवाह के नियम बदलेंगे, लिव इन का रजिस्ट्रेशन जरूरी

Q. यूसीसी लागू होने पर मूल बदलाव क्या होगा? – सभी धर्मों के लिए शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने के नियम एक समान हो जाएंगे। अलग-अलग पर्सनल लॉ खत्म हो जाएंगे।

Q. शादी और तलाक के नियम कैसे बदलेंगे? – अभी हर धर्म के अपने नियम हैं। यूसीसी के बाद विवाह पंजीकरण अनिवार्य होगा। न्यूनतम आयु समान होगी, तलाक के कानूनी आधार सभी के लिए एक होंगे।

Q. बहुविवाह और विरासत के नियमों पर क्या असर? – कई पर्सनल लॉ में एक से अधिक विवाह की अनुमति या गुंजाइश है। यूसीसी लागू होते ही पूरी तरह प्रतिबंधित। – बेटियों को पिता की संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार मिलेगा। यह नियम सभी धर्मों पर समान लागू होगा।

Q. यूसीसी लागू करने में मप्र में सबसे बड़ी चुनौती क्यों मानी जा रही है? – मप्र में बड़ी संख्या में जनजातीय और विशेष पिछड़ी जनजातियां हैं, जहां पारंपरिक विवाह पद्धतियां प्रचलित हैं। इन परंपराओं को यूसीसी में शामिल करना या अलग प्रावधान चुनौती होगी। दापा प्रथा: वधु मूल्य देना। भगेली/लम्सना विवाह: युवक-युवती भागकर शादी करते हैं, बाद में समाज मान्यता देता है। सेवा विवाह: वधु मूल्य न देने पर लड़का ससुराल में रहकर सेवा करता है। नातरा प्रथा: विधवा पुनर्विवाह या साथी बदलने की अनुमति।

Q. किन राज्यों में यूसीसी लागू या प्रक्रिया में है? उत्तराखंड: फरवरी 2024 में बिल पास, 27 जनवरी 2025 से लागू। गुजरात: मार्च 2026 में बिल पास, लागू करने की तैयारी। गोवा: 1867 के पुर्तगाली सिविल कोड के कारण यहां यूसीसी पहले से लागू। असम: नवंबर 2025 में बहुविवाह निषेध कानून पास, यूसीसी की दिशा में कदम उत्तर प्रदेश: यूसीसी लागू की तैयारी चल रही है।

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Q. उत्तराखंड मॉडल में क्या है? -स्वतंत्र भारत का पहला राज्य जहां यूसीसी लागू हुआ। शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। लिव-इन रिलेशनशिप का 30 दिन में रजिस्ट्रेशन भी अनिवार्य किया। ऐसा न करने पर 3 महीने तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

Q. गुजरात मॉडल की खास बातें क्या हैं? -उत्तराखंड जैसा ढांचा। धोखे, दबाव या पहचान छिपाकर शादी अपराध है। इस पर 7 साल तक की जेल हो सकती है। 60 दिन में लिव-इन रजिस्ट्रेशन कराना होगा। संपत्ति में बेटा-बेटी बराबर होंगे। एसटी को कानून से बाहर रखा गया है।

Q असम का मॉडल क्या है? – यहां यूसीसी पूरी तरह लागू नहीं। बहुविवाह अपराध घोषित किया है। छठी अनुसूची क्षेत्र और एसटी कानून से बाहर।

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