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Stroke Warning Symptoms: स्ट्रोक के लक्षण और इलाज

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स्ट्रोक एक जानलेवा और गंभीर मेडिकल स्थिति है जो तब होती है जब इंसान के दिमाग के किसी हिस्से में खून का बहाव अचानक रुक जाता है या बहुत कम हो जाता है. ऐसा तब होता है जब ऑक्सीजन या पोषक तत्वों की कमी के कारण दिमाग के सेल्स कुछ ही मिनटों में मरने लगती हैं. स्ट्रोक में इंतजार नहीं किया जा सकता, जैसा कि दूसरी बीमारियों में किया जा सकता है, क्योंकि मरीज को जितनी देर तक मेडिकल मदद और इलाज नहीं मिलता, दिमाग को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचने, लंबे समय तक शारीरिक अक्षमता और मौत का खतरा उतना ही बढ़ जाता है.

मैक्स अस्पताल, शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल में न्यूरोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. मनोज खनाल बताते हैं कि रिसर्च से पता चलता है कि अगर स्ट्रोक का इलाज न किया जाए, तो हर मिनट दिमाग की 19 लाख तक सेल्स मर सकती हैं. इसलिए जरूरी है कि जल्दी से जल्द मरीज को इलाज दिया जाए.

इलाज में देरी से नुकसान
एक्सपर्ट बताते हैं कि स्ट्रोक के बाद हर सेकेंड किमती होता है. दिमाग का जितना ज्यादा हिस्सा मरता है, और मरीज को जरूरी मेडिकल मदद मिलने में जितनी ज्यादा देर लगती है, शरीर के कामों में कई तरह की कमजोरियां आने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है. इसमें हिलने-डुलने में दिक्कत, बोलने में दिक्कत, याददाश्त कमजोर होना, आंखों की रोशनी जाना, सोचने-समझने की क्षमता पर बुरा असर पड़ना शामिल है.

लक्षणों को पहचानना जरूरी
स्ट्रोक के लक्षण आमतौर पर अचानक उभरते हैं और उन्हें कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, भले ही वे कुछ ही मिनटों में ठीक होते हुए दिखाई दें.स्ट्रोक के लक्षणों को जल्दी पहचानना जान बचाने के लिए बहुत जरूरी है. स्ट्रोक की पहचान करने का सबसे आसान तरीका BEFAST या FAST सिस्टम का इस्तेमाल करना है.

B – बैलेंस में दिक्कत अचानक चक्कर आना/संतुलन खो देना; यह आमतौर पर घटना से ठीक पहले होता है.

E – आंखों की दिक्कतें : अचानक धुंधला दिखाई देना या दिखना बंद हो जाना.

F – चेहरा लटकना : व्यक्ति के चेहरे का एक हिस्सा नीचे की ओर लटका हुआ दिखाई देता है, या दूसरे हिस्से से अलग दिखता है.

A – हाथ में कमजोरी : एक हाथ नीचे की ओर लटका हुआ दिखाई दे सकता है.

S – बोलने में दिक्कत : व्यक्ति को बोलने में परेशानी हो सकती है; वह शब्दों को ठीक से बोल नहीं पाता या वाक्य नहीं बना पाता; या उसे शब्द ढूंढ़ने में दिक्कत होती है.

T – मदद के लिए बुलाने का समय : व्यक्ति को तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत होती है; इसके बाद, उसे जल्द से जल्द किसी ऐसे अस्पताल में पहुंचना चाहिए जहां स्ट्रोक के इलाज की पूरी तैयारी हो.

स्ट्रोक का इलाज
स्ट्रोक के इलाज में थ्रोम्बोलिटिक थेरेपी मुख्य रुप से शामिल होता है. इसमें खून का क्लॉट घोलने वाली दवाएं दी जाती है, जो खून के क्लॉट को घोलकर खून का बहाव फिर से शुरू कर देती है, ये दवाइया मरीज को स्ट्रोक के पहले लक्षण दिखने के 4.5 घंटे के अंदर दी जाती है. जिन मामलों में खून के क्लॉट , किसी बड़ी धमनी में होता है, वहां मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी का इस्तेमाल करके, खून की नसों के जरिए डाले गए खास औजारों की मदद से थक्के को सीधे निकाला जाता है. आमतौर पर, थक्का बनने के 6 घंटे के अंदर मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी करवाने वाले मरीजों को सबसे ज्यादा सफलता मिलती है, हालांकि, कुछ मामलों में, लक्षणों के शुरू होने के 6 घंटे बाद भी इलाज किया जा सकता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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स्ट्रोक एक जानलेवा और गंभीर मेडिकल स्थिति है जो तब होती है जब इंसान के दिमाग के किसी हिस्से में खून का बहाव अचानक रुक जाता है या बहुत कम हो जाता है. ऐसा तब होता है जब ऑक्सीजन या पोषक तत्वों की कमी के कारण दिमाग के सेल्स कुछ ही मिनटों में मरने लगती हैं. स्ट्रोक में इंतजार नहीं किया जा सकता, जैसा कि दूसरी बीमारियों में किया जा सकता है, क्योंकि मरीज को जितनी देर तक मेडिकल मदद और इलाज नहीं मिलता, दिमाग को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचने, लंबे समय तक शारीरिक अक्षमता और मौत का खतरा उतना ही बढ़ जाता है.

मैक्स अस्पताल, शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल में न्यूरोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. मनोज खनाल बताते हैं कि रिसर्च से पता चलता है कि अगर स्ट्रोक का इलाज न किया जाए, तो हर मिनट दिमाग की 19 लाख तक सेल्स मर सकती हैं. इसलिए जरूरी है कि जल्दी से जल्द मरीज को इलाज दिया जाए.

इलाज में देरी से नुकसान
एक्सपर्ट बताते हैं कि स्ट्रोक के बाद हर सेकेंड किमती होता है. दिमाग का जितना ज्यादा हिस्सा मरता है, और मरीज को जरूरी मेडिकल मदद मिलने में जितनी ज्यादा देर लगती है, शरीर के कामों में कई तरह की कमजोरियां आने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है. इसमें हिलने-डुलने में दिक्कत, बोलने में दिक्कत, याददाश्त कमजोर होना, आंखों की रोशनी जाना, सोचने-समझने की क्षमता पर बुरा असर पड़ना शामिल है.

लक्षणों को पहचानना जरूरी
स्ट्रोक के लक्षण आमतौर पर अचानक उभरते हैं और उन्हें कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, भले ही वे कुछ ही मिनटों में ठीक होते हुए दिखाई दें.स्ट्रोक के लक्षणों को जल्दी पहचानना जान बचाने के लिए बहुत जरूरी है. स्ट्रोक की पहचान करने का सबसे आसान तरीका BEFAST या FAST सिस्टम का इस्तेमाल करना है.

B – बैलेंस में दिक्कत अचानक चक्कर आना/संतुलन खो देना; यह आमतौर पर घटना से ठीक पहले होता है.

E – आंखों की दिक्कतें : अचानक धुंधला दिखाई देना या दिखना बंद हो जाना.

F – चेहरा लटकना : व्यक्ति के चेहरे का एक हिस्सा नीचे की ओर लटका हुआ दिखाई देता है, या दूसरे हिस्से से अलग दिखता है.

A – हाथ में कमजोरी : एक हाथ नीचे की ओर लटका हुआ दिखाई दे सकता है.

S – बोलने में दिक्कत : व्यक्ति को बोलने में परेशानी हो सकती है; वह शब्दों को ठीक से बोल नहीं पाता या वाक्य नहीं बना पाता; या उसे शब्द ढूंढ़ने में दिक्कत होती है.

T – मदद के लिए बुलाने का समय : व्यक्ति को तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत होती है; इसके बाद, उसे जल्द से जल्द किसी ऐसे अस्पताल में पहुंचना चाहिए जहां स्ट्रोक के इलाज की पूरी तैयारी हो.

स्ट्रोक का इलाज
स्ट्रोक के इलाज में थ्रोम्बोलिटिक थेरेपी मुख्य रुप से शामिल होता है. इसमें खून का क्लॉट घोलने वाली दवाएं दी जाती है, जो खून के क्लॉट को घोलकर खून का बहाव फिर से शुरू कर देती है, ये दवाइया मरीज को स्ट्रोक के पहले लक्षण दिखने के 4.5 घंटे के अंदर दी जाती है. जिन मामलों में खून के क्लॉट , किसी बड़ी धमनी में होता है, वहां मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी का इस्तेमाल करके, खून की नसों के जरिए डाले गए खास औजारों की मदद से थक्के को सीधे निकाला जाता है. आमतौर पर, थक्का बनने के 6 घंटे के अंदर मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी करवाने वाले मरीजों को सबसे ज्यादा सफलता मिलती है, हालांकि, कुछ मामलों में, लक्षणों के शुरू होने के 6 घंटे बाद भी इलाज किया जा सकता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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