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जालंधर के गुरिंदर ने जीतकर मां को कहा-देखी मेरी रेस:पिता से बोला-डेडी दस्स फेर किदां, 12 साल से दौड़ना शुरू किया; नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया

जालंधर के गुरिंदर ने जीतकर मां को कहा-देखी मेरी रेस:पिता से बोला-डेडी दस्स फेर किदां, 12 साल से दौड़ना शुरू किया; नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया

जालंधर के गुरिंदर वीर सिंह ने रांची में भारतीय एथलेटिक्स का नया इतिहास लिख दिया है। 29वें नेशनल सीनियर फेडरेशन कप में पंजाब के इस धावक ने 100 मीटर दौड़ मात्र 10.09 सेकंड में पूरी की। गुरिंदर वीर की उलब्धि पर परिवार में खुशी का माहौल है। करीब 90 साल की दादी ने भी लड्डू खाकर पोते को आशीर्वाद दिया। गुरिंदर वीर के पिता कमलजीत सिंह ने कहा कि जैसे ही बेटे ने रेस जीती तो उसके मोबाइल पर बधाइयों के फोन आना शुरू हो गए। फोन बिजी होने से बेटे से पहली बात उसकी मां की हुई। जब उसने मुझे फोन किया तो एक ही बात कही कि डेडी दस्स फेर किदां (अब बताओ कैसा लगा) गुरिंदर की मां गुरविंदर कौर ने बताया कि रेस जीतने के बाद उसने पहला फोन मुझे किया और कहा कि मम्मी मेरी रेस देखी। मैंने कहा कि हां तूने कमाल कर दिया। रेस जीतने और रिकॉर्ड तोड़ने का पता लगने के बाद से गुरिंदर वीर के घर के बाहर लोगों की भीड़ लग गई। आस-पड़ोस के लोग घर के बाहर पहुंचे और परिवार को बधाई दी। पिता बोले-पहले ही रिकॉर्ड लिखा था, मुझे पता नहीं था
नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने वाले गुरिंदर वीर ने कॉमनवेल्थ गेम्ज में अपनी जगह पक्की कर ली। बिरसा मुंडा स्टेडियम में फाइनल दौड़ पूरी करते ही गुरिंदर ने अपनी छाती पर लगे नंबर (चेस्ट नंबर) की ओर इशारा किया। उन्होंने फाइनल से पहले ही उस नंबर के पीछे अपना लक्ष्य 10.10 लिख दिया था। इस बारे में पूछने पर उनके पिता ने कहा कि गुरिंदर ने पहले ही रिकॉर्ड का समय लिख रखा था, इसकी जानकारी उनको भी न्यूज के माध्यम से चली। इसके साथ ही उसने लिखा था- रुको, मैं अब भी खड़ा हूं। बता दें कि 100 मी. दौड़ का वर्ल्ड रिकॉर्ड (9.58 सेकंड) जमैका के महान धावक उसेन बोल्ट के नाम है। मां बोलीं- मुझे गोल्ड की पक्की उम्मीद है
मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। परमात्मा ने उस बच्चे को गुण बख्शा है। उसने पहले ही तय कर लिया था कि 10.10 सेंकेंड में रेस पूरी करनी है। उसने इस मुकाम के लिए बहुत मेहनत की है। वो रोज 8 घंटे प्रेक्टिस करता था। घर पर बात करने के लिए उसके पास वक्त नहीं मिलता था। उसने अपने शरीर को बहुत तोड़ा है। रेस जीतने के बाद पहले मुझसे बात कि और बोला कि मम्मा देखी है रेस। मैंने कहा कि हां देखी तूने आज खुश कर दिया है। परमात्मा इसी तरह मेहर रखेंगे तो कॉमनवेल्थ में भी गोल्ड आएगी। मुझे उस पर पूरा विश्वास है। वो एक बार जो ठान लेता है उसे पूरा करता है। 12 साल की उम्र में पिता के साथ रेस लगानी शुरू की
गुरिंदर वीर के पिता कमलजीत सिंह ने बताया कि वह खुद भी वॉलीबाल के प्लेयर रहे हैं। वो तो इतना ऊंचा मुकाम हासिल नहीं कर पाए लेकिन मन में एक सपना था कि बेटा स्पोर्ट्स में कुछ कर दिखाए। गुरिंदर वीर बचपन से उनके साथ दौड़ लगाने जाता था। 12 साल की उम्र में उसने ठीक से प्रेक्टिस शुरू की। छोटी उम्र में ही वो मुझे भी पीछे छोड़ देता था। दौड़ने में उसकी मेहनत और लगन देख उसे इसी स्पोर्ट्स में डाला।

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जालंधर के गुरिंदर ने जीतकर मां को कहा-देखी मेरी रेस:पिता से बोला-डेडी दस्स फेर किदां, 12 साल से दौड़ना शुरू किया; नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया

जालंधर के गुरिंदर वीर सिंह ने रांची में भारतीय एथलेटिक्स का नया इतिहास लिख दिया है। 29वें नेशनल सीनियर फेडरेशन कप में पंजाब के इस धावक ने 100 मीटर दौड़ मात्र 10.09 सेकंड में पूरी की। गुरिंदर वीर की उलब्धि पर परिवार में खुशी का माहौल है। करीब 90 साल की दादी ने भी लड्डू खाकर पोते को आशीर्वाद दिया। गुरिंदर वीर के पिता कमलजीत सिंह ने कहा कि जैसे ही बेटे ने रेस जीती तो उसके मोबाइल पर बधाइयों के फोन आना शुरू हो गए। फोन बिजी होने से बेटे से पहली बात उसकी मां की हुई। जब उसने मुझे फोन किया तो एक ही बात कही कि डेडी दस्स फेर किदां (अब बताओ कैसा लगा) गुरिंदर की मां गुरविंदर कौर ने बताया कि रेस जीतने के बाद उसने पहला फोन मुझे किया और कहा कि मम्मी मेरी रेस देखी। मैंने कहा कि हां तूने कमाल कर दिया। रेस जीतने और रिकॉर्ड तोड़ने का पता लगने के बाद से गुरिंदर वीर के घर के बाहर लोगों की भीड़ लग गई। आस-पड़ोस के लोग घर के बाहर पहुंचे और परिवार को बधाई दी। पिता बोले-पहले ही रिकॉर्ड लिखा था, मुझे पता नहीं था
नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने वाले गुरिंदर वीर ने कॉमनवेल्थ गेम्ज में अपनी जगह पक्की कर ली। बिरसा मुंडा स्टेडियम में फाइनल दौड़ पूरी करते ही गुरिंदर ने अपनी छाती पर लगे नंबर (चेस्ट नंबर) की ओर इशारा किया। उन्होंने फाइनल से पहले ही उस नंबर के पीछे अपना लक्ष्य 10.10 लिख दिया था। इस बारे में पूछने पर उनके पिता ने कहा कि गुरिंदर ने पहले ही रिकॉर्ड का समय लिख रखा था, इसकी जानकारी उनको भी न्यूज के माध्यम से चली। इसके साथ ही उसने लिखा था- रुको, मैं अब भी खड़ा हूं। बता दें कि 100 मी. दौड़ का वर्ल्ड रिकॉर्ड (9.58 सेकंड) जमैका के महान धावक उसेन बोल्ट के नाम है। मां बोलीं- मुझे गोल्ड की पक्की उम्मीद है
मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। परमात्मा ने उस बच्चे को गुण बख्शा है। उसने पहले ही तय कर लिया था कि 10.10 सेंकेंड में रेस पूरी करनी है। उसने इस मुकाम के लिए बहुत मेहनत की है। वो रोज 8 घंटे प्रेक्टिस करता था। घर पर बात करने के लिए उसके पास वक्त नहीं मिलता था। उसने अपने शरीर को बहुत तोड़ा है। रेस जीतने के बाद पहले मुझसे बात कि और बोला कि मम्मा देखी है रेस। मैंने कहा कि हां देखी तूने आज खुश कर दिया है। परमात्मा इसी तरह मेहर रखेंगे तो कॉमनवेल्थ में भी गोल्ड आएगी। मुझे उस पर पूरा विश्वास है। वो एक बार जो ठान लेता है उसे पूरा करता है। 12 साल की उम्र में पिता के साथ रेस लगानी शुरू की
गुरिंदर वीर के पिता कमलजीत सिंह ने बताया कि वह खुद भी वॉलीबाल के प्लेयर रहे हैं। वो तो इतना ऊंचा मुकाम हासिल नहीं कर पाए लेकिन मन में एक सपना था कि बेटा स्पोर्ट्स में कुछ कर दिखाए। गुरिंदर वीर बचपन से उनके साथ दौड़ लगाने जाता था। 12 साल की उम्र में उसने ठीक से प्रेक्टिस शुरू की। छोटी उम्र में ही वो मुझे भी पीछे छोड़ देता था। दौड़ने में उसकी मेहनत और लगन देख उसे इसी स्पोर्ट्स में डाला।

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