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Madhumalati plant health benefits: मधुमालती पौधा सेहत के लिए बेहद गुणकारी, जानें फायदे

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Madhumalati plant health benefits मधुमालती सुंदर दिखने वाला एक पौधा है, जो बेहद गुणकारी होता है. मधुमालती का जिक्र प्राचीन चिकित्सा ग्रंथ सुश्रुत संहिता में मिलता है, जिसमें इस पौधे के कई प्रभावी गुण बताए गए हैं. मधुमालती को विज्ञान की भाषा में ‘रंगून क्रीपर’ कहा जाता है. इसे उगाना बहुत आसान. सेहत के लिए मधुमालती के क्या फायदे होते हैं, जानें यहां.

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मधुमालती का पौधा.

Madhumalati plant health benefits: गुलाबी रंग की चार खूबसूरत पंखुड़ियों के साथ खुशबू देने वाला मधुमालती सभी को प्रिय है. मधुमालती का इस्तेमाल लोग अपने घरों की सजावट के लिए करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका इस्तेमाल आयुर्वेद में कई रोगों को ठीक करने में किया जाता है. इतना ही नहीं, बाजार में मधुमालती का तेल भी आसानी से मिल जाता है. आज हम जानेंगे कि मधुमालती के पत्ते और फूल किस प्रकार लाभकारी हो सकते हैं.

मधुमालती का जिक्र प्राचीन चिकित्सा ग्रंथ सुश्रुत संहिता में मिलता है, जिसमें इस पौधे के कई प्रभावी गुण बताए गए हैं. मधुमालती को विज्ञान की भाषा में ‘रंगून क्रीपर’ कहा जाता है, जिसे उगाना बहुत आसान है और जिसकी देखभाल भी कम करनी पड़ती है. इस पौधे के खूबसूरत दिखने वाले फूल और पत्तों का इस्तेमाल सर्दी, खांसी, बुखार, जोड़ों के दर्द (गठिया) और त्वचा रोगों में सदियों से किया जा रहा है.

अगर किसी की किडनी में सूजन है या किडनी की कार्यक्षमता कम हो गई है, तो मधुमालती की छाल का काढ़ा लाभकारी माना गया है. चिकित्सक की सलाह से अगर रोजाना मधुमालती का काढ़ा लिया जाए, तो अंदरूनी अंगों से सूजन कम होती है और अंग प्रभावी तरीके से काम करते हैं.

इसके अलावा, अगर मासिक धर्म में दर्द की परेशानी रहती है और पेल्विक फ्लो पर सूजन की परेशानी है, तब भी उसकी छाल का काढ़ा फायदेमंद होता है. मोटापा कम करने और हॉर्मोन संतुलित करने में भी सदियों से मधुमालती का प्रयोग होता आ रहा है.

महिलाओं में सफेद पानी की समस्या होने पर मधुमालती के ताजा फूलों का प्रयोग किया जाए तो कमर दर्द और हड्डियों के रोगों से आराम मिल सकता है. इतना ही नहीं, अगर स्किन से जुड़ी परेशानी जैसे खुजली, मुहांसे और त्वचा रोग परेशान करते हैं तब भी मधुमालती की पत्तियों का लेप आराम देता है.

आयुर्वेद में माना गया है कि अगर पुरानी से पुरानी खांसी ठीक नहीं हो रही है, तब भी तुलसी के साथ मधुमालती की पत्तियों को मिलाकर काढ़ा बनाएं. यह खांसी के साथ-साथ जुकाम और सर्दी से भी राहत देगा. स्वाद के लिए इसमें शहद का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

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अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें

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मधुमालती का पौधा.

Madhumalati plant health benefits: गुलाबी रंग की चार खूबसूरत पंखुड़ियों के साथ खुशबू देने वाला मधुमालती सभी को प्रिय है. मधुमालती का इस्तेमाल लोग अपने घरों की सजावट के लिए करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका इस्तेमाल आयुर्वेद में कई रोगों को ठीक करने में किया जाता है. इतना ही नहीं, बाजार में मधुमालती का तेल भी आसानी से मिल जाता है. आज हम जानेंगे कि मधुमालती के पत्ते और फूल किस प्रकार लाभकारी हो सकते हैं.

मधुमालती का जिक्र प्राचीन चिकित्सा ग्रंथ सुश्रुत संहिता में मिलता है, जिसमें इस पौधे के कई प्रभावी गुण बताए गए हैं. मधुमालती को विज्ञान की भाषा में ‘रंगून क्रीपर’ कहा जाता है, जिसे उगाना बहुत आसान है और जिसकी देखभाल भी कम करनी पड़ती है. इस पौधे के खूबसूरत दिखने वाले फूल और पत्तों का इस्तेमाल सर्दी, खांसी, बुखार, जोड़ों के दर्द (गठिया) और त्वचा रोगों में सदियों से किया जा रहा है.

अगर किसी की किडनी में सूजन है या किडनी की कार्यक्षमता कम हो गई है, तो मधुमालती की छाल का काढ़ा लाभकारी माना गया है. चिकित्सक की सलाह से अगर रोजाना मधुमालती का काढ़ा लिया जाए, तो अंदरूनी अंगों से सूजन कम होती है और अंग प्रभावी तरीके से काम करते हैं.

इसके अलावा, अगर मासिक धर्म में दर्द की परेशानी रहती है और पेल्विक फ्लो पर सूजन की परेशानी है, तब भी उसकी छाल का काढ़ा फायदेमंद होता है. मोटापा कम करने और हॉर्मोन संतुलित करने में भी सदियों से मधुमालती का प्रयोग होता आ रहा है.

महिलाओं में सफेद पानी की समस्या होने पर मधुमालती के ताजा फूलों का प्रयोग किया जाए तो कमर दर्द और हड्डियों के रोगों से आराम मिल सकता है. इतना ही नहीं, अगर स्किन से जुड़ी परेशानी जैसे खुजली, मुहांसे और त्वचा रोग परेशान करते हैं तब भी मधुमालती की पत्तियों का लेप आराम देता है.

आयुर्वेद में माना गया है कि अगर पुरानी से पुरानी खांसी ठीक नहीं हो रही है, तब भी तुलसी के साथ मधुमालती की पत्तियों को मिलाकर काढ़ा बनाएं. यह खांसी के साथ-साथ जुकाम और सर्दी से भी राहत देगा. स्वाद के लिए इसमें शहद का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

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