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10 राज्यों के 50 गांवों में पर्यटन के साथ लर्निंग:विदेशी बच्चों की पढ़ाई का हिस्सा बने भारतीय गांव, स्थानीय उत्पाद बिकने से सुधरी अर्थव्यवस्था

10 राज्यों के 50 गांवों में पर्यटन के साथ लर्निंग:विदेशी बच्चों की पढ़ाई का हिस्सा बने भारतीय गांव, स्थानीय उत्पाद बिकने से सुधरी अर्थव्यवस्था

टोटो, दुनिया की सबसे छोटी जनजाति है। पश्चिम बंगाल के टोटोपारा गांव में इस जनजाति के आखिरी बचे 1700 लोग रहते हैं। गांव अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा था, इकलौते स्कूल में एक अतिरिक्त कमरे की जरूरत थी। खानपान को बचाने के लिए महिलाएं कैफे खोलना चाहती थीं। टोटोपारा से 2500 किलोमीटर दूर बेंगलुरु की क्राइस्ट यूनिवर्सिटी के छात्रों का 14 सदस्यीय दल बीते साल इस गांव की विजिट पर आया। अपने 10 दिन के टूर में छात्रों ने महिलाओं के साथ मिलकर कैफे का प्राइसिंग मॉडल-मेन्यू बनाया। छात्रों की इस यात्रा से गांव को 6 लाख रु. की कमाई हुई। इससे स्कूल का कमरा तैयार हो गया, कैफे भी खुल गया। ‘लोकल नैरेटिव्स’ ने गांवों में पर्यटन को मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि लर्निंग से जोड़ दिया। जापान-ऑस्ट्रेलिया के 10 संस्थान जुड़े ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू कासल, क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी और जापान में टोक्यो व नागोया के 8 स्कूलों के बच्चे इसे सीखने के लिए भारत आ रहे हैं। भारत के 50 गांव मेजबानी के लिए तैयार वैष्णवी बताती हैं, लोकल नैरेटिव्स की शुरुआत 2021 में हुई। कम्युनिटी आधारित पर्यटन का उद्देश्य लोकल की तरह गांव में रहकर जनजीवन समझना-सीखना है। इसमें 50 गांवों को मेजबानी के लिए तैयार किया है। इससे गांवों को भी फायदा हो रहा है। उत्तराखंड के सुनकिया में छात्रों की यात्रा के बाद वहां देश की पहली कम्युनिटी टूरिज्म प्लेबुक तैयार हुई। इससे पर्यटन में मदद मिल रही है। एक अन्य यात्रा में गोवा के असनोरा में बुनकर महिलाओं को खरीदारों से जोड़ा, इससे उनकी कमाई बढ़ी। वैष्णवी सोमानी फाउंडर- लोकल नैरेटिव्स IIM बेंगलुरु ने इसे क्रेडिट प्रोग्राम के रूप में अप्रूव किया वैष्णवी कहती हैं, हमने पर्यटन को लर्निंग से जोड़ा। इसके लिए 5 दिन का करिकुलम बनाया। इसमें लोकल नैरेटिव्स को-फैकल्टी था। IIM बेंगलुरु ने इस कोर्स को अप्रूव किया। यानी गांवों में सामाजिक उद्यमिता सीखने के बाद छात्रों को 3 क्रेडिट मतलब मार्क्स भी मिल रहे हैं। – जैसा रोमेश साहू को बताया

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