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पहली बार ऑस्कर में भी कास्टिंग के लिए अवॉर्ड:महीनों की रिसर्च और हजारों ऑडिशन; ऐसे चुने जाते हैं फिल्मों के यादगार किरदार

पहली बार ऑस्कर में भी कास्टिंग के लिए अवॉर्ड:महीनों की रिसर्च और हजारों ऑडिशन; ऐसे चुने जाते हैं फिल्मों के यादगार किरदार

किसी फिल्म या वेब सीरीज की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि किस किरदार के लिए किस कलाकार को चुना गया। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सिनेमा में कास्टिंग की सोच पूरी तरह बदल गई है। एक दौर ऐसा भी था, जब कलाकार एक ही तरह के किरदारों में सिमट जाते थे। कभी जगदीश राज खुराना ने 144 फिल्मों में पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका निभाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। लेकिन अब हर किरदार के लिए सबसे उपयुक्त चेहरा तलाशा जाता है। हाल ही में ओटीटी पर स्ट्रीम हुई ‘मेड इन इंडिया ए टाइटन स्टोरी’ में नसीरुद्दीन शाह का जेआरडी टाटा बनना हो, ‘छावा’ में अक्षय खन्ना का औरंगजेब, ‘स्कैम 1992’ में प्रतीक गांधी का हर्षद मेहता या ‘सैम बहादुर’ में विक्की कौशल… इन किरदारों ने साबित किया कि सटीक कास्टिंग कहानी को नई ऊंचाई दे सकती है। आइए, इन्हीं फिल्मों के कास्टिंग डायरेक्टर्स से जानते हैं कि सही कलाकार चुनने की यह प्रक्रिया कैसे पूरी होती है…। देश के तीन चर्चित कास्टिंग डायरेक्टर्स बता रहे कैसे बदली कास्टिंग की प्रक्रिया टेस जोसेफ, प्रोजेक्ट्स – सितारे जमीन पर, द नेमसेक, द वाइट टाइगर, द मंकी मैन कास्टिंग महीनों चलती है। जैसे ‘सितारे जमीन पर’ की कास्टिंग करीब नौ महीने चली थी। टीम ने न्यूरोडाइवर्जेंट समुदाय को समझने के लिए पहले ऑस्ट्रेलिया की संस्था ‘बस स्टॉप फिल्म्स’ के साथ वर्कशॉप की। इसके बाद 800-1000 ऑडिशन टेप देखे गए। कई बार ‘टू एक्टर्स, टू मिनट्स, वन सीन’ सेशन कराया जाता है, जिसमें दो कलाकारों को एक सीन देकर देखा जाता है कि वे एक-दूसरे को कितना सुनते हैं, कैसे रिएक्ट करते हैं और साथ मिलकर अभिनय कितना सहज बना पाते हैं। यश नागरकोटी प्रोजेक्ट्स – मेड इन इंडिया- ए टाइटन स्टोरी, डब्बा कार्टल किसी बायोग्राफी में कास्टिंग फोटो देखकर नहीं होती। पहले किताबें और उपलब्ध स्रोतों से शख्स को समझते हैं, फिर ऐसा कलाकार चुना जाता है, जो किरदार में सबसे स्वाभाविक लगे। ‘मेड इन इंडिया: ए टाइटन स्टोरी’ में नसीरुद्दीन शाह का व्यक्तित्व पहले से ही जेआरडी टाटा के काफी करीब था, इसलिए भारी मेकअप की जरूरत नहीं पड़ी। वहीं जिम सरभ ने जेरक्सेस देसाई का किरदार निभाने के लिए विग पहनने के बजाय पूरे शूट के दौरान रोज अपने बाल शेव किए, ताकि स्क्रीन पर वास्तविक लगे। वैभव विशांत, प्रोजेक्ट्स: छावा, मामला लीगल है, इक्कीस, राख, मैदान, काला-पानी करीब 15 साल पहले तक फिल्मों में कास्टिंग का अलग विभाग नहीं होता था। कलाकार चुनने की जिम्मेदारी निर्देशक और उनकी टीम ही संभालती थी। लेकिन फिल्मों का दायरा बढ़ा, नए चेहरों की जरूरत बढ़ी और कास्टिंग एक अलग प्रोफेशन बन गया। अब कास्टिंग टीमें छोटे शहरों और स्थानीय कलाकारों तक पहुंचती हैं। मामला लीगल है जैसी सीरीज में भी अलग-अलग राज्यों के थिएटर कलाकारों को मौका मिला। आज सही कलाकार ढूंढ़ने के लिए उस दुनिया तक जाना पड़ता है, जहां वह किरदार वास्तव में मौजूद है। अब ऑस्कर में भी सही कास्टिंग के लिए अवॉर्ड ऑस्कर अवॉर्ड्स में भी अब कास्टिंग के लिए अलग श्रेणी शुरू की गई है। इसका पहला सम्मान 2026 के ऑस्कर समारोह में दिया गया। हॉलीवुड फिल्म ‘वन बैटल आफ्टर एनोदर’ के लिए कास्टिंग करने पर कैसेंड्रा कुलुकुंडिस को कास्टिंग की श्रेणी में पहला ऑस्कर अवॉर्ड मिला।

एंटरटेनमेंट ‘टाइटन’ में जेआरडी बने नसीर… ‘छावा’ और ‘सैम बहादुर’ जैसी फिल्मों की बड़ी ताकत रहे किरदार

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