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पाकिस्तान के 4 में से 2 सूबों में बागी तेवर:सरकार की पकड़ कमजोर; बलूचिस्तान-खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ी चुनौती

पाकिस्तान के 4 में से 2 सूबों में बागी तेवर:सरकार की पकड़ कमजोर; बलूचिस्तान-खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ी चुनौती

पाकिस्तान के चार सूबे हैं। इनमें से बलूचिस्तान सूबे में अलगाववादी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने विद्रोह का झंडा बुलंद किया हुआ है। खैबर पख्तूनख्वा सूबे में अफगा​न तालिबान का दबदबा है। आए दिन तालिबान के हमलों से यहां पाक फौज के पांव उखड़ रहे हैं। पढ़िए बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा से भास्कर संवाददाता सिकंदर सूरी की ग्राउंड रिपोर्ट… बलूचिस्तान- PAK के हाथ से 70% क्षेत्र गया बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा है। यह देश के करीब 45% हिस्से में फैला है और इसकी सीमा ईरान से लगती है। दूर-दूर तक रेगिस्तान और वीरान पहाड़ हैं। लेकिन इन दिनों इस वीराने में सबसे ज्यादा गूंज गोलियों की सुनाई देती है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के लड़ाके अलग देश की मांग को लेकर लड़ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि बलूच लड़ाकों और पश्तून (पठान) विद्रोहियों का सूबे के करीब 70% हिस्से पर कब्जा है। अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि पाकिस्तानी सेना कितने विद्रोहियों को मार रही है या पकड़ रही है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार यहां पुलिस थाने चला पा रही है? क्या हाईवे सुरक्षित हैं? क्या बाजार खुल रहे हैं? और क्या लोग बिना डर के एक शहर से दूसरे शहर जा सकते हैं? बलूचिस्तान के कई इलाकों में हथियारबंद लड़ाके बेखौफ होकर क्वेटा, खुजदार और मस्तुंग जैसे शहरों में घुसते हैं। पुलिस थानों और सरकारी दफ्तरों पर हमले करते हैं। कई जगह BLA के लड़ाके और पश्तून गुट सड़कों पर अपने नाके लगा लेते हैं। वहां से गुजरने वाले वाहनों की तलाशी लेते हैं और खुलेआम वसूली करते हैं। यही पैसा BLA के फंड में जाता है। गुस्सा… खनिज और पोर्ट पर चीन-अमेरिका का कब्जा है बलूचिस्तान को पाकिस्तान के खनिजों की खदान भी कहते हैं। बात शुरू की तो खुजदार शहर के युवक मोमिन का पाक सरकार पर गुस्सा फूट पड़ा। मोमिन कहते हैं यहां के ग्वादर पोर्ट पर चीन का कब्जा है। चीन ने सीपैक के नाम पर यहां लगभग 3 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है। ग्वादर पोर्ट पर चीन की फिशिंग बोट्स का कब्जा है। स्थानीय बलूच मछुआरों को चीनी बोट्स खदेड़ देती हैं। इनकी बोट्स बड़ी और ज्यादा पावर वाली होती हैं। ज्यादातर बलूच मछुआरों के पास अब भी पालदार नौकाएं हैं। बलूच बेरोजगार हो रहे हैं। 55 साल के असलम का कहना है कि यहां के रेयर अर्थ मिनरल पर अमेरिका का कब्जा है। पाक आर्मी चीफ मुनीर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के सामने मिनरल की नुमाइश करते हैं। इस खजाने पर केवल बलूचों का हक है। खैबर…यहां तालिबानी शरिया सरकार काबिज
खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान का फ्रंटियर यानी सरहदी इलाका है। डूरंड लाइन पाक और अफगानिस्तान को अलग करती है। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के पांच साल में खैबर के अधिकांश इलाके में इन्हीं का दबदबा है। खैबर में पाक सरकार के कानून नहीं तालिबान का शरिया चलता है। दरअसल, इस इलाके में विभाजन के समय से ही कबिलाई व्यवस्था लागू रही है। स्वात, सैदू, मिंगाेरा और मर्दन में ‘लोया जिरगा’ के जरिए ही कानून चलता है। ये जिरगा असल में शरिया कानून को लागू करती है। अफगान तालिबान इसका संरक्षक है। अफगान तालिबान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) संगठन को अपने ठिकानों में पनाह देता है। इमरान खान की सरकार ने 2021 में TTP के साथ सुलह की कोशिश की, लेकिन इमरान की गद्दी जाते ही TTP ने खैबर में अपने दबदबे को और बढ़ा लिया है। खैबर के वजीरिस्तान में पाकिस्तानी सेना कई सैन्य ऑपरेशन कर चुकी है, लेकिन यहां अब TTP काबिज है। आए दिन TTP के हमलों के कारण स्कूल और काॅलेज बंद रहते हैं। पंजाब और सिंध के मूल निवासी कर्मचारी खैबर में अपनी पोस्टिंग नहीं चाहते हैं। खौफ… हमलों से पाक की 50 फौजी चौकियां खाली खैबर पख्तूनख्वा में TTP के आए दिन होने वाले हमलों से पाक सेना में खौफ है। इस साल TTP फौज पर 145 से ज्यादा हमले कर चुकी है, इनमें 48 सैनिक मारे गए। खैबर में डूरंड लाइन पर अभी पाक सेना की 50 फौजी चौकियां खाली हैं। 22 पोस्ट पर ही पाक फौज तैनात है। स्वात में रहने वाले सगीर (22) का कहना है कि खैबर के लोग अपनी हुकूमत चाहते हैं। पाक सरकारों ने यहां पंजाबियों और सिंध के रिटायर्ड फौजियों को मुफ्त जमीन देकर बसाने की कोशिशें भी कीं। ये हमारी कबिलाई पहचान को मिटाने की साजिश थी। एक रणनीतिक विशेषज्ञ का कहना है कि TTP और इस्लामिक स्टेट खुरासान यानी आईएसकेपी जैसे संगठन हमलों में आपसी सहयोग कर रहे हैं। इन दोनों संगठनों की ताकत से अब खैबर में पाक सरकार के पांव उखड़ रहे हैं।

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पाकिस्तान के चार सूबे हैं। इनमें से बलूचिस्तान सूबे में अलगाववादी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने विद्रोह का झंडा बुलंद किया हुआ है। खैबर पख्तूनख्वा सूबे में अफगा​न तालिबान का दबदबा है। आए दिन तालिबान के हमलों से यहां पाक फौज के पांव उखड़ रहे हैं। पढ़िए बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा से भास्कर संवाददाता सिकंदर सूरी की ग्राउंड रिपोर्ट… बलूचिस्तान- PAK के हाथ से 70% क्षेत्र गया बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा है। यह देश के करीब 45% हिस्से में फैला है और इसकी सीमा ईरान से लगती है। दूर-दूर तक रेगिस्तान और वीरान पहाड़ हैं। लेकिन इन दिनों इस वीराने में सबसे ज्यादा गूंज गोलियों की सुनाई देती है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के लड़ाके अलग देश की मांग को लेकर लड़ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि बलूच लड़ाकों और पश्तून (पठान) विद्रोहियों का सूबे के करीब 70% हिस्से पर कब्जा है। अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि पाकिस्तानी सेना कितने विद्रोहियों को मार रही है या पकड़ रही है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार यहां पुलिस थाने चला पा रही है? क्या हाईवे सुरक्षित हैं? क्या बाजार खुल रहे हैं? और क्या लोग बिना डर के एक शहर से दूसरे शहर जा सकते हैं? बलूचिस्तान के कई इलाकों में हथियारबंद लड़ाके बेखौफ होकर क्वेटा, खुजदार और मस्तुंग जैसे शहरों में घुसते हैं। पुलिस थानों और सरकारी दफ्तरों पर हमले करते हैं। कई जगह BLA के लड़ाके और पश्तून गुट सड़कों पर अपने नाके लगा लेते हैं। वहां से गुजरने वाले वाहनों की तलाशी लेते हैं और खुलेआम वसूली करते हैं। यही पैसा BLA के फंड में जाता है। गुस्सा… खनिज और पोर्ट पर चीन-अमेरिका का कब्जा है बलूचिस्तान को पाकिस्तान के खनिजों की खदान भी कहते हैं। बात शुरू की तो खुजदार शहर के युवक मोमिन का पाक सरकार पर गुस्सा फूट पड़ा। मोमिन कहते हैं यहां के ग्वादर पोर्ट पर चीन का कब्जा है। चीन ने सीपैक के नाम पर यहां लगभग 3 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है। ग्वादर पोर्ट पर चीन की फिशिंग बोट्स का कब्जा है। स्थानीय बलूच मछुआरों को चीनी बोट्स खदेड़ देती हैं। इनकी बोट्स बड़ी और ज्यादा पावर वाली होती हैं। ज्यादातर बलूच मछुआरों के पास अब भी पालदार नौकाएं हैं। बलूच बेरोजगार हो रहे हैं। 55 साल के असलम का कहना है कि यहां के रेयर अर्थ मिनरल पर अमेरिका का कब्जा है। पाक आर्मी चीफ मुनीर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के सामने मिनरल की नुमाइश करते हैं। इस खजाने पर केवल बलूचों का हक है। खैबर…यहां तालिबानी शरिया सरकार काबिज
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