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नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ ने करीब 750 लोगों की जान ले ली, जबकि 2,500 लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई और कई परिवार बिछड़ गए।
इस दर्दनाक मंजर के बीच कुछ लोगों के बचने की कहानियां भी सामने आई हैं। किसी की जान चाय के लिए रुके रहने से बची, तो किसी ने सैकड़ों बच्चों को सुरक्षित निकाला। पढ़िए, नेपाल बाढ़ में मौत को मात देने वाली ऐसी ही 3 कहानियां…
‘चाय के लिए नहीं रुकते तो जान जा सकती थी’
तीर्थयात्री गडा एलावेनी ने ANI को बताया कि उनका ग्रुप तीन बसों में काठमांडू से सफर कर रहा था। रास्ते में सभी लोग चाय पीने के लिए कुछ देर के लिए रुक गए। यह रुकना बाद में उनकी जिंदगी का सबसे अहम फैसला साबित हुआ।
एलावेनी को बाद में पता चला कि उनसे करीब आधे घंटे पहले निकली दो बसें बाढ़ में बह गईं और उनका पता नहीं चला है। उन्होंने कहा,
हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारे साथ ऐसा होगा। हम दर्शन नहीं कर पाए, लेकिन भगवान हमें सुरक्षित घर ले आए।

एलावेनी ने बताया कि उन्होंने काठमांडू से करीब 80 किलोमीटर का सफर तय किया था और तीनों बसों में सवार सभी लोग सुरक्षित हैं।

तीर्थयात्री गडा एलावेनी ने ANI को दिए इंटरव्यू में आपबीती सुनाई।
आंखों के सामने पूरा स्कूल बह गया, लेकिन बच्चे बचा लिए गए
त्रिभुवन सेकेंडरी को-एजुकेशनल स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी एक कक्षा में पढ़ा रहे थे। तभी उनका साथी दौड़ता हुआ आया। उसने बताया कि नदी के ऊपरी क्षेत्र में रहने वाले किसी व्यक्ति ने फोन करके बाढ़ आने की जानकारी दी है।
दवाड़ी ने भास्कर को बताया, ‘मैंने तत्काल स्कूल की घंटी लगातार बजाने का निर्देश दिया, ताकि खतरे का अलार्म दिया जा सके। स्कूल में 1,600 स्टूडेंट पढ़ते हैं। बाढ़ वाले दिन कितने थे, पता नहीं। सभी बच्चों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया। हालांकि, मेरी आंखों के सामने स्कूल बाढ़ में बह गया।’
दवाड़ी ने कहा, ‘गनीमत रही कि बच्चे बच गए। बाद में मुझे हेलिकॉप्टर से बचाया गया। स्कूल में बाढ़ प्रभावित इलाकों के बच्चे पढ़ते थे। कई बच्चों ने पूरे परिवार खो दिए हैं।’

बाढ़ की जानकारी मिलते ही बच्चों को स्कूल से सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया।
6 साल की बच्ची 3 दिन मलबे में दबी रही, रेस्क्यू टीम ने बचाया
रसुवा के तिमुरे इलाके में रेस्क्यू टीम ने 6 साल की बच्ची को बाढ़ के तीन दिन बाद मलबे के नीचे से जिंदा निकाला। टीम जब लापता लोगों की तलाश कर रही थी, तब उन्हें मलबे के नीचे से बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। इसके बाद जवानों ने मिट्टी और मलबा हटाकर बच्ची को बाहर निकाला।
इसके बाद बच्ची को तिमुरे की पुलिस चौकी ले जाया गया। जहां से उसे इलाज के लिए काठमांडू भेजने की तैयारी की गई। खराब मौसम और अंधेरा होने के चलते उसे एयरलिफ्ट नहीं किया जा सका। अगले दिन हेलिकॉप्टर से उसे काठमांडू पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।

बच्ची के रेस्क्यू का वीडियो भी सामने आया है। इसमें रेस्क्यू टीम का मेंबर भारी मलबे के बीच बच्ची को सुरक्षित निकालते नजर आ रहे हैं।
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