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1 अप्रैल से 20% एथेनॉल मिक्स पेट्रोल अनिवार्य:तेल कंपनियों को E20 पेट्रोल बेचना होगा, पुरानी गाड़ियों के माइलेज पर असर संभव

1 अप्रैल से 20% एथेनॉल मिक्स पेट्रोल अनिवार्य:तेल कंपनियों को E20 पेट्रोल बेचना होगा, पुरानी गाड़ियों के माइलेज पर असर संभव

केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल से देशभर में E20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य कर दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके अनुसार, अब सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तेल कंपनियों को 20% एथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल ही सप्लाई करना होगा। हालांकि, देश के कई हिस्सों में E20 (20% इथेनॉल मिक्स) पेट्रोल की शुरुआत 2023 से ही हो चुकी है, लेकिन ये ऑप्शनल था। सरकार ने हाल ही में एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य 2030 से घटाकर 2025-26 कर दिया था, जिसे अब पूर्ण रूप से लागू किया जा रहा है। 95 रिसर्च ऑक्टेन नंबर का ही E20 पेट्रोल बेच सकेंगे इस फ्यूल के लिए रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) कम से कम 95 तय किया गया है, ताकि इंजनों को सुरक्षित रखा जा सके। RON यानी फ्यूल की ‘नॉकिंग’ (इंजन के अंदर समय से पहले आग लगना) को रोकने की क्षमता को दिखाता है। RON यह बताता है कि पेट्रोल कितना ‘मजबूत’ या ‘सहनशील’ है। जिस पेट्रोल का RON नंबर जितना ज्यादा होगा, वह उतनी ही आसानी से इंजन के दबाव को झेलेगा और बिना किसी आवाज या झटके के सही समय पर जलेगा। इससे इंजन की लाइफ बढ़ती है और वह सुचारू रूप से चलता है। अभी तक भारत में बिकने वाला साधारण पेट्रोल का 91 RON होता है और सिर्फ ‘प्रीमियम’ पेट्रोल (जैसे XP95) ही 95 RON का मिलता है। पुरानी गाड़ियों का माइलेज 3-7% तक गिर सकता है इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि 2023 से 2025 के बीच बने ज्यादातर वाहन E-20 ईंधन के हिसाब से ही डिजाइन किए गए हैं, इसलिए उनमें कोई दिक्कत नहीं आएगी। हालांकि, बहुत पुराने वाहनों में कुछ समस्याएं दिख सकती हैं… माइलेज: पुराने वाहनों की फ्यूल एफिशिएंसी में 3% से 7% तक की गिरावट आ सकती है। पुर्जों पर असर: लंबे समय तक इस्तेमाल से पुराने इंजनों के रबर और प्लास्टिक के हिस्सों में खराबी आने की आशंका है। इन इलाकों में मिल सकती है थोड़ी छूट पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि असाधारण परिस्थितियों में कुछ खास इलाकों के लिए सीमित समय के लिए इस नियम से छूट दी जा सकती है। हालांकि, मुख्य रूप से यह नियम पूरे देश के फ्यूल स्टेशनों पर लागू होगा। एथेनॉल से ₹1.40 लाख करोड़ से ज्यादा विदेशी मुद्रा बचाई सरकार के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना है। तेल मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, 2014-15 से अब तक पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की वजह से भारत ने ₹1.40 लाख करोड़ से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई है। इसके अलावा, एथेनॉल का उत्पादन गन्ना, मक्का और अनाज से होता है, जिससे किसानों की आय में भी बढ़ेगी। क्या होता है एथेनॉल? एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जो स्टार्च और शुगर के फर्मेंटेशन से बनाया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में इको-फ्रैंडली फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है। एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस से होता है, लेकिन स्टार्च कॉन्टेनिंग मटेरियल्स जैसे मक्का, सड़े आलू, कसावा और सड़ी सब्जियों से भी एथेनॉल तैयार किया जा सकता है। 1G एथेनॉल : फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल गन्ने के रस, मीठे चुकंदर, सड़े आलू, मीठा ज्वार और मक्का से बनाया जाता है। 2G एथेनॉल : सेकंड जनरेशन एथेनॉल सेल्युलोज और लिग्नोसेल्यूलोसिक मटेरियल जैसे – चावल की भूसी, गेहूं की भूसी, कॉर्नकॉब (भुट्टा), बांस और वुडी बायोमास से बनाया जाता है। 3G बायोफ्यूल : थर्ड जनरेशन बायोफ्यूल को एलगी से बनाया जाएगा। अभी इस पर काम चल रहा है। अप्रैल-2023 से देश में बिक रहा E-20 पेट्रोल-डीजल गाड़ियों से होने वाले एयर पॉल्यूशन को रोकने और फ्यूल के दाम कम करने के लिए दुनियाभर की सरकारें एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल पर काम कर रही हैं। भारत में भी एथेनॉल को पेट्रोल-डीजल के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इससे गाड़ियों का माइलेज भी बढ़ेगा। देश में 5% एथेनॉल से प्रयोग शुरू हुआ था जो अब 20% तक पहुंच चुका है। सरकार अप्रैल के महीने में नेशनल बायो फ्यूल पॉलिसी लागू कर E-20 (20% एथेनॉल + 80% पेट्रोल) से E-80 (80% एथेनॉल + 20% पेट्रोल) पर जाने के लिए प्रोसेस शुरू कर चुकी है। इसके अलावा देश में अप्रैल से सिर्फ फ्लेक्स फ्यूल कंप्लाइंट गाड़ियां ही बेची जा रही हैं। साथ ही पुरानी गाड़ियां एथेनॉल कंप्लाएंट व्हीकल में चेंज की जा सकेंगी। ​​​​​​एथेनॉल मिलाने से क्या फायदा है? पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से पेट्रोल के उपयोग से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। इसके इस्तेमाल से गाड़ियां 35% कम कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन करती है। सल्फर डाइऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन का उत्सर्जन भी एथेनॉल कम करता है। एथेनॉल में मौजूद 35% ऑक्सीजन के चलते ये फ्यूल नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन को भी कम करता है। ——————- ये खबर भी पढ़ें… पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से रोकने की याचिका खारिज: सुप्रीम कोर्ट में सरकार बोली- याचिकाकर्ता इंग्लैंड का, बाहरी नहीं बताएगा कौन सा पेट्रोल इस्तेमाल करें सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के प्लान को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। इस प्लान के तहत देश में बिकने वाले पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाया जा रहा है। 2023 में एथेनॉल मिलाने की शुरुआत की गई थी। सरकार ने 2025-26 तक देश के सभी पेट्रोल पंप्स पर E20 पेट्रोल उपलब्ध कराने का टारगेट रखा है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने ये फैसला सुनाया। ये याचिका वकील अक्षय मल्होत्रा ने दायर की थी। पूरी खबर पढ़ें…

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1 अप्रैल से 20% एथेनॉल मिक्स पेट्रोल अनिवार्य:तेल कंपनियों को E20 पेट्रोल बेचना होगा, पुरानी गाड़ियों के माइलेज पर असर संभव

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