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what is Sarcoma cancer | सरकोमा कैंसर क्या है

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Sarcoma Cancer: कैंसर का जब भी नाम सुनते होंगे तो ब्रेस्ट, लंग्स, लिवर या ब्लड कैंसर ही ज्यादा सुना जाता है लेकिन इन सबसे भी ज्यादा घातक कैंसर है जो हड्डियों और मांसपेशियों के भीतर खामोशी से पनपता है. इसे मेडिकल साइंस में सरकोमा Sarcoma कहा जाता है. सारकोमा की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसकी शुरुआत बेहद साधारण दर्द से होती है. कभी जिम में लगी मोच तो कभी पेट का मामूली दर्द, लोग इसे आम समस्या समझकर पेनकिलर खा लेते हैं, जबकि अंदर ही अंदर यह कैंसर गंभीर रूप ले रहा होता है. ऐसे में छोटी सी परेशानी कैसे सरकोमा में बदल जाती है इसे इग्नोर करने का क्या अंजाम होता है. आइए इसके बारे में जानते हैं.

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सरकोमा में कई प्रकार के कैंसर आते हैं.

Sarcoma Cancer Symptoms: सरकोमा कैंसरों के समूह को कहते हैं. इसका मतलब है कि ऐसा कैंसर जो शरीर के सॉफ्ट टिशू और हड्डियों से पनप कर कई अंगों को प्रभावित करता है, उसे व्यापक संदर्भ में सरकोमा कैंसर कहा जाता है. सॉफ्ट टिशू से शरीर की मांसपेशियां, चर्बी, ब्लड वैसल्स, टेंडन, नसें आदि जुड़ी होती है, इसलिए जब सरकोमा कैंसर होता है तो ये सारे अंग प्रभावित हो सकते हैं. सरकोमा शरीर के कई हिस्सों में हो सकता है. सरकोमा में कई प्रकार के कैंसर आते हैं.

सरकोमा कैंसर के प्रकार
मायो क्लिनिक के मुताबिक सरकोमा कैंसर सॉफ्ट टिशू और हड्डियों से शुरू होता है, इसलिए ये शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है और इसका उसी तरह से नाम भी होता है. एंजियोसारकोमा, कॉन्ड्रोसारकोमा, डर्माटोफाइब्रोसारकोमा प्रोट्यूबरन्स, डेस्मोप्लास्टिक स्मॉल राउंड सेल ट्यूमर, एपिथेलियोइड सारकोमा, इविंग सारकोमा, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर, कापोसी सारकोमा, लेयोमायोसारकोमा, लाइपोसारकोमा, मैलिग्नेंट पेरिफेरल नर्व शीथ ट्यूमर सरकोमा कैंसर के प्रकार हैं.

सरकोमा के लक्षण
सरकोमा के लक्षण इतने मामूली होते हैं कि लोगों के दिमाग में आता ही नहीं कि ये कैंसर भी हो सकता है. सरकोमा में शरीर के किसी हिस्से में स्किन के नीचे किसी प्वाइंट पर हल्का सा गांठ या हार्डनेस जैसा महसूस होता है. इसमें दर्द भी हो सकता है और दर्द नहीं भी हो सकता है. ये इतने मामूली होते हैं कि छूने पर कभी पता चलता है तो कभी नहीं भी चलता. इसलिए लोग नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन अगर ऐसा हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए. जरूरी नहीं कि ये कैंसर ही हो लेकिन इसमें डॉक्टरों के पास जरूरी है. इसके अलावा हड्डियों में दर्द भी सरकोमा का लक्षण हो सकता है. ऐसे में बिना किसी वजह कभी हड्डियां टूट भी सकती है. सरकोमा कभी-कभी पेट दर्द से भी शुरू हो सकता है. वहीं किसी भी प्रकार के कैंसर में बिना वजह वजन कम होना सबसे बड़ा लक्षण है.

सरकोमा के कारण
हालांकि सरकोमा के स्पष्ट कारण अब तक वैज्ञानिकों को पता नहीं है लेकिन यह कैंसर शरीर की हड्डियों और सॉफ्ट टिशू में कोशिकाओं की अनियंत्रित बढ़त के कारण शुरू होता है. सारकोमा तब होता है जब कोशिकाओं के निर्देश केंद्र यानी DNA में गड़बड़ियां होने लगती है. सामान्य तौर पर डीएनए कोशिकाओं को बताता है कि उन्हें कब बढ़ना है और कब मरना है. लेकिन कैंसर वाली कोशिकाओं में यह डीएनए गलत निर्देश देने लगता है. इन गलत निर्देशों के कारण कैंसर कोशिकाएं बहुत तेजी से बढ़ने और फैलने लगती हैं. जहां सामान्य कोशिकाएं मर जाती हैं, वहीं ये कैंसर कोशिकाएं जीवित रहती हैं, जिससे शरीर में जरूरत से ज्यादा कोशिकाएं जमा हो जाती हैं. जब ये कोशिकाएं एक जगह इकट्ठा होती हैं, तो वे एक गांठ या हार्डनेस बना लेती हैं जिसे ट्यूमर कहा जाता है. जब कैंसर इस तरह शरीर में फैलता है, तो इसे मेटास्टैटिक कैंसर कहते हैं.

किन लोगों को सरकोमा का रिस्क ज्यादा
कुछ लोगों में यह जेनेटिक होता है यानी अगर ये बीमारियां माता-पिता से बच्चों में पहुंचती हैं, तो आगे चलकर कैंसर का खतरा बढ़ा सकती हैं. इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति ने पहले कभी किसी दूसरे कैंसर के इलाज के लिए रेडिएशन थेरेपी ली है, तो भविष्य में उनमें सरकोमा होने का खतरा बढ़ सकता है. जब शरीर के लिम्फेटिक सिस्टम (रोग प्रतिरोधक प्रणाली का हिस्सा) में कोई रुकावट आती है या उसे नुकसान पहुंचता है, तो शरीर में सूजन आ जाती है. इसे लिम्फेडेमा कहते हैं. इसकी वजह से एंजियोसारकोमा नाम के सारकोमा का खतरा बढ़ जाता है. अगर ह्यूमन हर्पीज वायरस 8 का इंफेक्शन हो जाए तो इससे भी सरकोमा का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए इन हालातों में तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करना चाहिए.

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Lakshmi Narayan

18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने अपने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, स…और पढ़ें

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सरकोमा में कई प्रकार के कैंसर आते हैं.

Sarcoma Cancer Symptoms: सरकोमा कैंसरों के समूह को कहते हैं. इसका मतलब है कि ऐसा कैंसर जो शरीर के सॉफ्ट टिशू और हड्डियों से पनप कर कई अंगों को प्रभावित करता है, उसे व्यापक संदर्भ में सरकोमा कैंसर कहा जाता है. सॉफ्ट टिशू से शरीर की मांसपेशियां, चर्बी, ब्लड वैसल्स, टेंडन, नसें आदि जुड़ी होती है, इसलिए जब सरकोमा कैंसर होता है तो ये सारे अंग प्रभावित हो सकते हैं. सरकोमा शरीर के कई हिस्सों में हो सकता है. सरकोमा में कई प्रकार के कैंसर आते हैं.

सरकोमा कैंसर के प्रकार
मायो क्लिनिक के मुताबिक सरकोमा कैंसर सॉफ्ट टिशू और हड्डियों से शुरू होता है, इसलिए ये शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है और इसका उसी तरह से नाम भी होता है. एंजियोसारकोमा, कॉन्ड्रोसारकोमा, डर्माटोफाइब्रोसारकोमा प्रोट्यूबरन्स, डेस्मोप्लास्टिक स्मॉल राउंड सेल ट्यूमर, एपिथेलियोइड सारकोमा, इविंग सारकोमा, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर, कापोसी सारकोमा, लेयोमायोसारकोमा, लाइपोसारकोमा, मैलिग्नेंट पेरिफेरल नर्व शीथ ट्यूमर सरकोमा कैंसर के प्रकार हैं.

सरकोमा के लक्षण
सरकोमा के लक्षण इतने मामूली होते हैं कि लोगों के दिमाग में आता ही नहीं कि ये कैंसर भी हो सकता है. सरकोमा में शरीर के किसी हिस्से में स्किन के नीचे किसी प्वाइंट पर हल्का सा गांठ या हार्डनेस जैसा महसूस होता है. इसमें दर्द भी हो सकता है और दर्द नहीं भी हो सकता है. ये इतने मामूली होते हैं कि छूने पर कभी पता चलता है तो कभी नहीं भी चलता. इसलिए लोग नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन अगर ऐसा हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए. जरूरी नहीं कि ये कैंसर ही हो लेकिन इसमें डॉक्टरों के पास जरूरी है. इसके अलावा हड्डियों में दर्द भी सरकोमा का लक्षण हो सकता है. ऐसे में बिना किसी वजह कभी हड्डियां टूट भी सकती है. सरकोमा कभी-कभी पेट दर्द से भी शुरू हो सकता है. वहीं किसी भी प्रकार के कैंसर में बिना वजह वजन कम होना सबसे बड़ा लक्षण है.

सरकोमा के कारण
हालांकि सरकोमा के स्पष्ट कारण अब तक वैज्ञानिकों को पता नहीं है लेकिन यह कैंसर शरीर की हड्डियों और सॉफ्ट टिशू में कोशिकाओं की अनियंत्रित बढ़त के कारण शुरू होता है. सारकोमा तब होता है जब कोशिकाओं के निर्देश केंद्र यानी DNA में गड़बड़ियां होने लगती है. सामान्य तौर पर डीएनए कोशिकाओं को बताता है कि उन्हें कब बढ़ना है और कब मरना है. लेकिन कैंसर वाली कोशिकाओं में यह डीएनए गलत निर्देश देने लगता है. इन गलत निर्देशों के कारण कैंसर कोशिकाएं बहुत तेजी से बढ़ने और फैलने लगती हैं. जहां सामान्य कोशिकाएं मर जाती हैं, वहीं ये कैंसर कोशिकाएं जीवित रहती हैं, जिससे शरीर में जरूरत से ज्यादा कोशिकाएं जमा हो जाती हैं. जब ये कोशिकाएं एक जगह इकट्ठा होती हैं, तो वे एक गांठ या हार्डनेस बना लेती हैं जिसे ट्यूमर कहा जाता है. जब कैंसर इस तरह शरीर में फैलता है, तो इसे मेटास्टैटिक कैंसर कहते हैं.

किन लोगों को सरकोमा का रिस्क ज्यादा
कुछ लोगों में यह जेनेटिक होता है यानी अगर ये बीमारियां माता-पिता से बच्चों में पहुंचती हैं, तो आगे चलकर कैंसर का खतरा बढ़ा सकती हैं. इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति ने पहले कभी किसी दूसरे कैंसर के इलाज के लिए रेडिएशन थेरेपी ली है, तो भविष्य में उनमें सरकोमा होने का खतरा बढ़ सकता है. जब शरीर के लिम्फेटिक सिस्टम (रोग प्रतिरोधक प्रणाली का हिस्सा) में कोई रुकावट आती है या उसे नुकसान पहुंचता है, तो शरीर में सूजन आ जाती है. इसे लिम्फेडेमा कहते हैं. इसकी वजह से एंजियोसारकोमा नाम के सारकोमा का खतरा बढ़ जाता है. अगर ह्यूमन हर्पीज वायरस 8 का इंफेक्शन हो जाए तो इससे भी सरकोमा का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए इन हालातों में तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करना चाहिए.

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