Saturday, 13 Jun 2026 | 04:33 PM

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आमिर खान ने ‘4 इडियट्स’ को दी हरी झंडी:AI और आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर आधारित होगी कहानी, विकी कौशल की एंट्री लगभग तय

आमिर खान ने ‘4 इडियट्स’ को दी हरी झंडी:AI और आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर आधारित होगी कहानी, विकी कौशल की एंट्री लगभग तय

भारतीय सिनेमा की कल्ट फिल्म ‘3 इडियट्स’ के सीक्वल को लेकर चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया है। आमिर खान ने खुद इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है, जिससे यह साफ हो गया है कि ‘इडियट्स’ की दुनिया एक बार फिर परदे पर लौटने वाली है। सोशल मीडिया पर इसे फिलहाल ‘4 इडियट्स’ के नाम से चर्चा मिल रही है और इंडस्ट्री में इसे 2026-27 के सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है। निर्देशक राजकुमार हिरानी और लेखक अभिजात जोशी ने कहानी को अंतिम रूप देने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। सीक्वल की कहानी पहली फिल्म के अंत के करीब 10 से 15 साल बाद की होगी, जहां रैंचो, फरहान और राजू की जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी होगी। कहानी इस बात को दिखाएगी कि सफलता के बाद भी नई चुनौतियां कैसे उन्हें फिर एक साथ लाती हैं और बदलते समय में शिक्षा व्यवस्था से उनका टकराव कैसे होता है। आमिर ने खुद स्वीकार किया है कि उन्होंने कहानी का नरेशन सुन लिया है और यह बेहद अतरंगी है। फिल्म के लिए कई मीटिंग्स हो चुकीं रोचक ये भी है कि हिरानी के साथ ‘संजू’ और ‘डंकी’ जैसी फिल्मों में काम कर चुके विकी को स्क्रिप्ट काफी पसंद आई है। बताया जा रहा है कि उनका किरदार कहानी में एक नया इमोशनल और फ्रेश एंगल जोड़ेगा। विकी, आमिर और हिरानी के बीच इस प्रोजेक्ट को लेकर कई दौर की मीटिंग्स भी हो चुकी हैं। विकी ने मौखिक तौर पर भूमिका के लिए हामी भर दी है। शूटिंग 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में शुरू हो सकती है। इस बार फिल्म का नाम ‘4 इडियट्स’ रखने के पीछे की वजह भी काफी दिलचस्प बताई जा रही है। सूत्रों की मानें तो कहानी इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक दौर की ‘प्रेशर कुकर’ वाली शिक्षा प्रणाली पर टारगेट करेगी। सीक्वल इस बात पर केंद्रित हो सकता है कि कैसे डिजिटल दुनिया में मशीन बनने की दौड़ ने इंसानी जज्बातों को पीछे छोड़ दिया है। विकी कौशल भी बन सकते हैं फिल्म का हिस्सा फिल्म की कास्टिंग को लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता बनी हुई है। आमिर एक बार फिर रैंचो उर्फ फुंसुख वांगडू के किरदार में नजर आएंगे, यह लगभग तय हो चुका है। वहीं आर. माधवन और शरमन जोशी की वापसी को लेकर आधिकारिक घोषणा भले न हुई हो, लेकिन तीनों एक्टर्स ने एक साथ शूट करने के लिए दिलचस्पी दिखाई है। सीक्वल में सबसे बड़ा बदलाव ‘चौथे इडियट’ की एंट्री को लेकर बताया जा रहा है। चर्चा है कि राजकुमार हिरानी इस नई भूमिका के लिए विकी कौशल को कास्ट कर सकते हैं।

भारतीय पत्रकार आनंद और सुपर्णा को पुलित्जर प्राइज:इलस्ट्रेशन और दमदार कमेंट्री से बताई थी डिजिटल अरेस्ट-साइबर फ्रॉड की भयावहता

भारतीय पत्रकार आनंद और सुपर्णा को पुलित्जर प्राइज:इलस्ट्रेशन और दमदार कमेंट्री से बताई थी डिजिटल अरेस्ट-साइबर फ्रॉड की भयावहता

दो भारतीय पत्रकारों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की है। आनंद आरके और सुपर्णा शर्मा ने साइबर अपराध को उजागर करने वाली अहम खोजी रिपोर्टिंग के लिए प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार जीता है। उन्हें यह सम्मान नताली ओबिको पियर्सन के साथ इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग और कमेंट्री श्रेणी में दिया गया। ‘पत्रकारिता के नोबेल’ के तौर पर चर्चित यह पुरस्कार उन्हें ब्लूमबर्ग के लिए तैयार की गई विशेष रिपोर्ट ‘ट्रैप्ड’ के लिए मिला। जानिए इस इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट और दोनों की उपलब्धियों के बारे में… इस पत्रकार जोड़ी द्वारा बनाई गई रिपोर्ट ‘ट्रैप्ड’ लखनऊ की न्यूरोलॉजिस्ट रुचिरा टंडन के साथ हुई सच्ची घटना के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ के भयानक तंत्र को उजागर करती है। आनंद के प्रभावशाली चित्रण और सुपर्णा की गहन पत्रकारिता का यह अनूठा मेल दिखाता है कि कैसे साइबर अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कर किसी व्यक्ति को मानसिक रूप से बंधक बना लेते हैं। यह स्टोरी सिर्फ व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि निगरानी तंत्र के दुरुपयोग और वैश्विक स्तर पर बढ़ते संगठित डिजिटल घोटालों की एक गंभीर चेतावनी भी है। आइजनर पुरस्कार भी जीत चुके हैं आनंद मुंबई में रहने वाले आनंद इलस्ट्रेटर और विजुअल आर्टिस्ट हैं। उन्होंने 2021 में इमेज कॉमिक्स द्वारा प्रकाशित ग्राफिक उपन्यास ‘ब्लू इन ग्रीन’ के लिए कलरिस्ट जॉन पीयरसन के साथ ‘बेस्ट पेंटर/मल्टीमीडिया आर्टिस्ट’ का आइजनर पुरस्कार भी जीता था। सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से स्नातक आनंद ने डार्क हॉर्स कॉमिक्स की ‘ग्रैफिटीज वॉल’, वॉल्ट की ‘रेडियो एपोकैलिप्स’ और डीसी कॉमिक्स की ‘रेजरेक्शन मैन’ जैसी कृतियों का चित्रण किया है। उन्होंने बूम! स्टूडियोज, 2000 एडी, टाइनी अनियन व इमेज कॉमिक्स जैसे प्रकाशकों के लिए कवर आर्ट बनाया है। उन्होंने हुंडई, भारतीय नौसेना, इमेजिन-एफएक्स मैगजीन व हैवी मेटल मैगजीन जैसे क्लाइंट्स के साथ भी काम किया है। केयर सेंटर में लापरवाही का खुलासा कर चुकी हैं सुपर्णा सुपर्णा फ्रीलांस खोजी पत्रकार और संपादक हैं। इन्हें अपराध, संघर्ष, आपदाओं व भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग का तीन दशकों का अनुभव है। 2023 में अल जजीरा के लिए दिल्ली के एक केयर फैसिलिटी में लगी भीषण आग पर उनकी जांच ने बुजुर्गों की देखभाल के क्षेत्र में लापरवाही और सच्चाई को दबाने के कथित प्रयासों का पर्दाफाश किया था। भारतीय मूल के अनिरुद्ध भी विजेता हनोई में रहने वाले भारतवंशी पत्रकार अनिरुद्ध घोषाल ने इंटरनेशनल रिपोर्टिंग श्रेणी में पुलित्जर जीता। एसोसिएटेड प्रेस (एपी) से जुड़े अनिरुद्ध की रिपोर्ट अमेरिकी बॉर्डर पैट्रोल द्वारा सिलिकॉन वैली व चीन में विकसित निगरानी उपकरणों पर थी। वहीं, दक्षिण-पूर्व एशिया में साइबर क्राइम व मानव तस्करी नेक्सस का पर्दाफाश करने वाले बैंकॉक के भारतवंशी पत्रकार देवज्योत फाइनलिस्ट रहे।

भारतीय पत्रकार आनंद और सुपर्णा को पुलित्जर प्राइज:इलस्ट्रेशन और दमदार कमेंट्री से बताई थी डिजिटल अरेस्ट-साइबर फ्रॉड की भयावहता

भारतीय पत्रकार आनंद और सुपर्णा को पुलित्जर प्राइज:इलस्ट्रेशन और दमदार कमेंट्री से बताई थी डिजिटल अरेस्ट-साइबर फ्रॉड की भयावहता

दो भारतीय पत्रकारों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की है। आनंद आरके और सुपर्णा शर्मा ने साइबर अपराध को उजागर करने वाली अहम खोजी रिपोर्टिंग के लिए प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार जीता है। उन्हें यह सम्मान नताली ओबिको पियर्सन के साथ इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग और कमेंट्री श्रेणी में दिया गया। ‘पत्रकारिता के नोबेल’ के तौर पर चर्चित यह पुरस्कार उन्हें ब्लूमबर्ग के लिए तैयार की गई विशेष रिपोर्ट ‘ट्रैप्ड’ के लिए मिला। जानिए इस इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट और दोनों की उपलब्धियों के बारे में… इस पत्रकार जोड़ी द्वारा बनाई गई रिपोर्ट ‘ट्रैप्ड’ लखनऊ की न्यूरोलॉजिस्ट रुचिरा टंडन के साथ हुई सच्ची घटना के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ के भयानक तंत्र को उजागर करती है। आनंद के प्रभावशाली चित्रण और सुपर्णा की गहन पत्रकारिता का यह अनूठा मेल दिखाता है कि कैसे साइबर अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कर किसी व्यक्ति को मानसिक रूप से बंधक बना लेते हैं। यह स्टोरी सिर्फ व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि निगरानी तंत्र के दुरुपयोग और वैश्विक स्तर पर बढ़ते संगठित डिजिटल घोटालों की एक गंभीर चेतावनी भी है। आइजनर पुरस्कार भी जीत चुके हैं आनंद मुंबई में रहने वाले आनंद इलस्ट्रेटर और विजुअल आर्टिस्ट हैं। उन्होंने 2021 में इमेज कॉमिक्स द्वारा प्रकाशित ग्राफिक उपन्यास ‘ब्लू इन ग्रीन’ के लिए कलरिस्ट जॉन पीयरसन के साथ ‘बेस्ट पेंटर/मल्टीमीडिया आर्टिस्ट’ का आइजनर पुरस्कार भी जीता था। सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से स्नातक आनंद ने डार्क हॉर्स कॉमिक्स की ‘ग्रैफिटीज वॉल’, वॉल्ट की ‘रेडियो एपोकैलिप्स’ और डीसी कॉमिक्स की ‘रेजरेक्शन मैन’ जैसी कृतियों का चित्रण किया है। उन्होंने बूम! स्टूडियोज, 2000 एडी, टाइनी अनियन व इमेज कॉमिक्स जैसे प्रकाशकों के लिए कवर आर्ट बनाया है। उन्होंने हुंडई, भारतीय नौसेना, इमेजिन-एफएक्स मैगजीन व हैवी मेटल मैगजीन जैसे क्लाइंट्स के साथ भी काम किया है। केयर सेंटर में लापरवाही का खुलासा कर चुकी हैं सुपर्णा सुपर्णा फ्रीलांस खोजी पत्रकार और संपादक हैं। इन्हें अपराध, संघर्ष, आपदाओं व भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग का तीन दशकों का अनुभव है। 2023 में अल जजीरा के लिए दिल्ली के एक केयर फैसिलिटी में लगी भीषण आग पर उनकी जांच ने बुजुर्गों की देखभाल के क्षेत्र में लापरवाही और सच्चाई को दबाने के कथित प्रयासों का पर्दाफाश किया था। भारतीय मूल के अनिरुद्ध भी विजेता हनोई में रहने वाले भारतवंशी पत्रकार अनिरुद्ध घोषाल ने इंटरनेशनल रिपोर्टिंग श्रेणी में पुलित्जर जीता। एसोसिएटेड प्रेस (एपी) से जुड़े अनिरुद्ध की रिपोर्ट अमेरिकी बॉर्डर पैट्रोल द्वारा सिलिकॉन वैली व चीन में विकसित निगरानी उपकरणों पर थी। वहीं, दक्षिण-पूर्व एशिया में साइबर क्राइम व मानव तस्करी नेक्सस का पर्दाफाश करने वाले बैंकॉक के भारतवंशी पत्रकार देवज्योत फाइनलिस्ट रहे।

पाकिस्तान में जन्म, न्यूजीलैंड से रिकॉर्ड:पिता की कोचिंग और अकरम से प्रेरणा; अब्बास ने डेब्यू मैच में ही रचा इतिहास

पाकिस्तान में जन्म, न्यूजीलैंड से रिकॉर्ड:पिता की कोचिंग और अकरम से प्रेरणा; अब्बास ने डेब्यू मैच में ही रचा इतिहास

लाहौर में जन्मे मुहम्मद अब्बास जब एक साल के थे, तब उनका परिवार हजारों किलोमीटर दूर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड चला गया ​था। अब पाकिस्तान की कोई याद उनके पास नहीं बची। लेकिन पहचान दो देशों से मिलकर बनी है- खून में पाकिस्तान और परवरिश में न्यूजीलैंड। अब्बास कहते हैं, ‘मैं बहुत छोटा था, इसलिए कुछ याद नहीं है। लेकिन मेरी पूरी परवरिश न्यूजीलैंड में हुई।’ यही दोहरी पहचान उनकी कहानी को खास बनाती है। अब्बास के पिता की वजह से उनका क्रिकेट से बचपन से ही लगाव था। अब्बास के शुरुआती हीरो पाकिस्तानी पेसर वसीम अकरम रहे। अब्बास कहते हैं, ‘मैंने उनके करियर का आखिरी हिस्सा ही देखा, लेकिन मेरे पापा हमेशा उनके बारे में बताते थे।’ बाद में न्यूजीलैंड के खिलाड़ियों ने उन्हें प्रेरित किया। केन विलियमसन और ट्रेंट बोल्ट उनके रोल मॉडल बने। कुछ साल पहले उनकी जिंदगी में एक बड़ा मोड़ आया। पिता को वेलिंगटन में कोच की नौकरी मिली। अब अब्बास के सामने दो रास्ते थे, ऑकलैंड में रहना या परिवार के साथ वेलिंगटन जाना। उन्होंने परिवार को चुना। यही बदलाव उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक ले आया। मार्च 2025 में उन्हें न्यूजीलैंड के लिए वनडे डेब्यू का मौका मिला। खास बात यह थी कि मुकाबला पाकिस्तान के खिलाफ नेपियर में था। अब्बास कहते हैं ‘यह थोड़ा अजीब अहसास था। मैं उम्मीद नहीं कर रहा था कि खेलूंगा, लेकिन अचानक प्लेइंग इलेवन में आ गया। यह मेरे लिए सपने जैसा था।’ उन्होंने डेब्यू को यादगार बना दिया। नंबर-6 पर बल्लेबाजी करते हुए 26 गेंदों में 52 रन ठोक दिए और डेब्यू मैच में सबसे तेज फिफ्टी का रिकॉर्ड बना दिया। वे मुस्कुराते हुए कहते हैं, ‘मुझे उस समय पता ही नहीं था कि यह रिकॉर्ड है। बाद में बताया गया। अभी भी विश्वास नहीं होता।’ टॉम लैथम जैसे खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना उन्हें अब भी खास लगता है। हालांकि, पाकिस्तान से उनका रिश्ता अब भी कायम है। वे कहते हैं ‘मेरे कई रिश्तेदार वहां हैं। मैं 2018 तक नियमित जाता था। अब क्रिकेट की वजह से नहीं जा पाता, लेकिन दोनों देशों से मेरा गहरा जुड़ाव है।’ क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं बल्कि​ पिता से जुड़ा खास रिश्ता अब्बास के क्रिकेटिंग करियर की शुरुआत उनके पिता से होती है। उनके पिता ही उनके कोच भी रहे हैं। क्रिकेट उनके लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि पिता से जुड़ा रिश्ता भी है। वे बताते हैं, ‘मेरे पिता ही मेरे सबसे बड़े कोच हैं। वे बॉलिंग कोच हैं और बचपन से मैंने उन्हीं के साथ ट्रेनिंग की है। उन्होंने ही मुझे क्रिकेट से जोड़ा।’ पिता के साथ बिताए गए समय, अभ्यास और अनुशासन ने उन्हें एक मजबूत खिलाड़ी बनाया।

पाकिस्तान में जन्म, न्यूजीलैंड से रिकॉर्ड:पिता की कोचिंग और अकरम से प्रेरणा; अब्बास ने डेब्यू मैच में ही रचा इतिहास

पाकिस्तान में जन्म, न्यूजीलैंड से रिकॉर्ड:पिता की कोचिंग और अकरम से प्रेरणा; अब्बास ने डेब्यू मैच में ही रचा इतिहास

लाहौर में जन्मे मुहम्मद अब्बास जब एक साल के थे, तब उनका परिवार हजारों किलोमीटर दूर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड चला गया ​था। अब पाकिस्तान की कोई याद उनके पास नहीं बची। लेकिन पहचान दो देशों से मिलकर बनी है- खून में पाकिस्तान और परवरिश में न्यूजीलैंड। अब्बास कहते हैं, ‘मैं बहुत छोटा था, इसलिए कुछ याद नहीं है। लेकिन मेरी पूरी परवरिश न्यूजीलैंड में हुई।’ यही दोहरी पहचान उनकी कहानी को खास बनाती है। अब्बास के पिता की वजह से उनका क्रिकेट से बचपन से ही लगाव था। अब्बास के शुरुआती हीरो पाकिस्तानी पेसर वसीम अकरम रहे। अब्बास कहते हैं, ‘मैंने उनके करियर का आखिरी हिस्सा ही देखा, लेकिन मेरे पापा हमेशा उनके बारे में बताते थे।’ बाद में न्यूजीलैंड के खिलाड़ियों ने उन्हें प्रेरित किया। केन विलियमसन और ट्रेंट बोल्ट उनके रोल मॉडल बने। कुछ साल पहले उनकी जिंदगी में एक बड़ा मोड़ आया। पिता को वेलिंगटन में कोच की नौकरी मिली। अब अब्बास के सामने दो रास्ते थे, ऑकलैंड में रहना या परिवार के साथ वेलिंगटन जाना। उन्होंने परिवार को चुना। यही बदलाव उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक ले आया। मार्च 2025 में उन्हें न्यूजीलैंड के लिए वनडे डेब्यू का मौका मिला। खास बात यह थी कि मुकाबला पाकिस्तान के खिलाफ नेपियर में था। अब्बास कहते हैं ‘यह थोड़ा अजीब अहसास था। मैं उम्मीद नहीं कर रहा था कि खेलूंगा, लेकिन अचानक प्लेइंग इलेवन में आ गया। यह मेरे लिए सपने जैसा था।’ उन्होंने डेब्यू को यादगार बना दिया। नंबर-6 पर बल्लेबाजी करते हुए 26 गेंदों में 52 रन ठोक दिए और डेब्यू मैच में सबसे तेज फिफ्टी का रिकॉर्ड बना दिया। वे मुस्कुराते हुए कहते हैं, ‘मुझे उस समय पता ही नहीं था कि यह रिकॉर्ड है। बाद में बताया गया। अभी भी विश्वास नहीं होता।’ टॉम लैथम जैसे खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना उन्हें अब भी खास लगता है। हालांकि, पाकिस्तान से उनका रिश्ता अब भी कायम है। वे कहते हैं ‘मेरे कई रिश्तेदार वहां हैं। मैं 2018 तक नियमित जाता था। अब क्रिकेट की वजह से नहीं जा पाता, लेकिन दोनों देशों से मेरा गहरा जुड़ाव है।’ क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं बल्कि​ पिता से जुड़ा खास रिश्ता अब्बास के क्रिकेटिंग करियर की शुरुआत उनके पिता से होती है। उनके पिता ही उनके कोच भी रहे हैं। क्रिकेट उनके लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि पिता से जुड़ा रिश्ता भी है। वे बताते हैं, ‘मेरे पिता ही मेरे सबसे बड़े कोच हैं। वे बॉलिंग कोच हैं और बचपन से मैंने उन्हीं के साथ ट्रेनिंग की है। उन्होंने ही मुझे क्रिकेट से जोड़ा।’ पिता के साथ बिताए गए समय, अभ्यास और अनुशासन ने उन्हें एक मजबूत खिलाड़ी बनाया।

अनूठी परंपरा; मियाओ सिस्टर्स फेस्टिवल:रंग-बिरंगे चावलों से बयां होता है दिल का हाल, 'सिस्टर्स राइस' देकर युवतियों ने चुना हमसफर

अनूठी परंपरा; मियाओ सिस्टर्स फेस्टिवल:रंग-बिरंगे चावलों से बयां होता है दिल का हाल, 'सिस्टर्स राइस' देकर युवतियों ने चुना हमसफर

तस्वीर थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक की है, जहां मियाओ समुदाय का प्रसिद्ध ‘मियाओ सिस्टर्स फेस्टिवल’ मनाया गया। इस दौरान आयोजित परेड में युवतियों ने अपनी सांस्कृतिक वेशभूषा और जटिल नक्काशी वाले भारी चांदी के आभूषण पहनकर हिस्सा लिया। यह मुख्य रूप से चीन का त्योहार है, जहां मियाओ समुदाय की सबसे अधिक आबादी है। इसके अलावा थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में भी यह त्योहार मनाया जाता है। इस दिन युवा लड़के-लड़कियां पारंपरिक गीत गाकर, वाद्ययंत्र बजाकर और नृत्य के जरिए एक-दूसरे से मिलते हैं और अपना जीवनसाथी चुनते हैं। इस त्योहार की सबसे खास परंपरा ‘सिस्टर्स राइस’ है। इस अवसर पर पेड़ों की पत्तियों और फूलों का उपयोग करके रंग-बिरंगे चावल पकाते हैं। युवतियां इन खास चावलों को रूमालों या टोकरियों में रखकर युवकों को भेंट करती हैं। चावलों के साथ दिए गए अन्य छोटे प्रतीक युवाओं के बीच प्यार, इनकार या दोस्ती के संदेश को दर्शाते हैं। मियाओ बहनों के भोजन उत्सव का इतिहास और किंवदंती लोककथाओं के अनुसार, एक समय की बात है, एक बूढ़े व्यक्ति और उसकी पत्नी की तीन सुंदर बेटियाँ थीं। एक दिन, जब वे नदी किनारे खेल रही थीं, तो लड़कियों को अकेलापन और प्रेम की पीड़ा महसूस हुई। दाढ़ी वाले देवता, झांग गुओलाओ, ने लड़कियों की आत्मा में प्रवेश किया और उन्हें झींगा, मछली और अन्य विशेष सामग्रियों से भरे हुए पाँच रंगों के चिपचिपे चावल के रोल बनाने के लिए कहा। जब युवक पहाड़ से नीचे आए, तो सुंदर लड़कियों ने उन्हें चावल भेंट किए और वे उनसे प्रेम करने लगे। चीन का सिस्टर्स मील फेस्टिवल मियाओ संस्कृति में गहराई से जुड़ा हुआ है, जो सैकड़ों साल पुराना है। मूल रूप से यह एक प्रेम-प्रसंग की रस्म के रूप में शुरू हुआ था, जिसमें युवा मियाओ लड़कियां विशेष भोजन तैयार करती थीं और शादी के इच्छुक दूल्हों को भेंट करती थीं। रंगीन रेशम में लिपटे और प्रतीकात्मक सजावट से सजे ये भोजन, एक महिला की अपने प्रेमी के प्रति भावनाओं के बारे में गुप्त संदेश देते थे। चावल के पैकेट के अंदर अलग-अलग वस्तुएं अलग-अलग भावनाओं को दर्शाती थीं,दो चॉपस्टिक रुचि का संकेत देती थीं, जबकि एक मिर्च अस्वीकृति का प्रतीक थी।

अनूठी परंपरा; मियाओ सिस्टर्स फेस्टिवल:रंग-बिरंगे चावलों से बयां होता है दिल का हाल, 'सिस्टर्स राइस' देकर युवतियों ने चुना हमसफर

अनूठी परंपरा; मियाओ सिस्टर्स फेस्टिवल:रंग-बिरंगे चावलों से बयां होता है दिल का हाल, 'सिस्टर्स राइस' देकर युवतियों ने चुना हमसफर

तस्वीर थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक की है, जहां मियाओ समुदाय का प्रसिद्ध ‘मियाओ सिस्टर्स फेस्टिवल’ मनाया गया। इस दौरान आयोजित परेड में युवतियों ने अपनी सांस्कृतिक वेशभूषा और जटिल नक्काशी वाले भारी चांदी के आभूषण पहनकर हिस्सा लिया। यह मुख्य रूप से चीन का त्योहार है, जहां मियाओ समुदाय की सबसे अधिक आबादी है। इसके अलावा थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में भी यह त्योहार मनाया जाता है। इस दिन युवा लड़के-लड़कियां पारंपरिक गीत गाकर, वाद्ययंत्र बजाकर और नृत्य के जरिए एक-दूसरे से मिलते हैं और अपना जीवनसाथी चुनते हैं। इस त्योहार की सबसे खास परंपरा ‘सिस्टर्स राइस’ है। इस अवसर पर पेड़ों की पत्तियों और फूलों का उपयोग करके रंग-बिरंगे चावल पकाते हैं। युवतियां इन खास चावलों को रूमालों या टोकरियों में रखकर युवकों को भेंट करती हैं। चावलों के साथ दिए गए अन्य छोटे प्रतीक युवाओं के बीच प्यार, इनकार या दोस्ती के संदेश को दर्शाते हैं। मियाओ बहनों के भोजन उत्सव का इतिहास और किंवदंती लोककथाओं के अनुसार, एक समय की बात है, एक बूढ़े व्यक्ति और उसकी पत्नी की तीन सुंदर बेटियाँ थीं। एक दिन, जब वे नदी किनारे खेल रही थीं, तो लड़कियों को अकेलापन और प्रेम की पीड़ा महसूस हुई। दाढ़ी वाले देवता, झांग गुओलाओ, ने लड़कियों की आत्मा में प्रवेश किया और उन्हें झींगा, मछली और अन्य विशेष सामग्रियों से भरे हुए पाँच रंगों के चिपचिपे चावल के रोल बनाने के लिए कहा। जब युवक पहाड़ से नीचे आए, तो सुंदर लड़कियों ने उन्हें चावल भेंट किए और वे उनसे प्रेम करने लगे। चीन का सिस्टर्स मील फेस्टिवल मियाओ संस्कृति में गहराई से जुड़ा हुआ है, जो सैकड़ों साल पुराना है। मूल रूप से यह एक प्रेम-प्रसंग की रस्म के रूप में शुरू हुआ था, जिसमें युवा मियाओ लड़कियां विशेष भोजन तैयार करती थीं और शादी के इच्छुक दूल्हों को भेंट करती थीं। रंगीन रेशम में लिपटे और प्रतीकात्मक सजावट से सजे ये भोजन, एक महिला की अपने प्रेमी के प्रति भावनाओं के बारे में गुप्त संदेश देते थे। चावल के पैकेट के अंदर अलग-अलग वस्तुएं अलग-अलग भावनाओं को दर्शाती थीं,दो चॉपस्टिक रुचि का संकेत देती थीं, जबकि एक मिर्च अस्वीकृति का प्रतीक थी।

बास्केटबॉल दिग्गज कोबे ब्रायंट की सफलता का सीक्रेट:आंख खुलते ही फोन देखने की बजाय 15 मिनट शांत बैठें; मेमोरी बढ़ेगी, तनाव दूर होगा

बास्केटबॉल दिग्गज कोबे ब्रायंट की सफलता का सीक्रेट:आंख खुलते ही फोन देखने की बजाय 15 मिनट शांत बैठें; मेमोरी बढ़ेगी, तनाव दूर होगा

भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर खुद के लिए समय नहीं निकाल पाते। ऐसे में दिवंगत बास्केटबॉल खिलाड़ी कोबे ब्रायंट की दिनचर्या की एक आसान आदत हमारे लिए बेहद काम की हो सकती है। अपनी आक्रामक खेल शैली और जीतने की जिद के लिए मशहूर कोबे का अभ्यास सुबह 4 बजे ही शुरू हो जाता था। लेकिन इस कड़े रूटीन के बीच उनका एक खास नियम था, जिसने उन्हें मानसिक रूप से अभेद्य बनाया था। अमेरिका के कोबे हर सुबह उठने के बाद कम से कम 15 मिनट एक जगह बिल्कुल शांत बैठकर ध्यान लगाते थे। उनके लिए यह मौन शारीरिक कसरत जितना ही महत्वपूर्ण था। कोबे मानते थे कि सुबह की 15 मिनट की यह शांति उनके पूरे दिन की नींव तय करती है। यह उन्हें दिनभर मानसिक रूप से स्थिर रखती। इसके बिना उन्हें लगता था कि वे बस काम और तनाव के पीछे भाग रहे हैं। इस मौन के अभ्यास से वे अपने दिन को खुद नियंत्रित कर पाते थे। रात को बड़े मैचों से पहले भी वे इसी तरह शांत बैठकर चुनौतियों की कल्पना करते और मानसिक रूप से खुद को तैयार करते थे। मनोविज्ञान में इस अभ्यास को ‘टाइप 2 फन’ कहा जाता है। शुरुआत में 15-20 मिनट बिना मोबाइल या किसी बाहरी रुकावट के चुपचाप बैठना उबाऊ और बेचैन करने वाला लग सकता है। लेकिन आदत बनने पर यह गहरी संतुष्टि देता है। जब इंसान बिल्कुल शांत बैठता है, तो दिमाग में वो बातें और भावनाएं आने लगती हैं, जिन्हें वह दिनभर की भागदौड़ में नजरअंदाज कर देता है- जैसे शरीर का कोई पुराना दर्द, या अटका हुआ काम। खाली बैठकर हम विचारों से भागने के बजाय उनका सामना करना सीखते हैं। कोबे भी मानते थे कि डर या घबराहट को दबाने से वे बढ़ती हैं, जबकि शांत बैठकर उन्हें स्वीकार करने से नकारात्मक प्रभाव खत्म हो जाता है। ड्यूक यूनिवर्सिटी के अध्ययन के अनुसार, दिन में कुछ देर की गहरी शांति दिमाग के ‘हिप्पोकैम्पस’ हिस्से में नई कोशिकाओं को जन्म देने में मदद करती है, जो याददाश्त और सीखने की क्षमता से जुड़ा है। इयरफोन लगाकर टहलने और एक जगह स्थिर बैठकर शांति का अनुभव करने में बड़ा अंतर है। स्थिरता में हमारा दिमाग खुद को रिपेयर करके री-स्टोर मोड में चला जाता है, जबकि चलते या कुछ सुनते समय वह प्रतिक्रियाओं में उलझा रहता है। नोवाक जोकोविच जैसे टेनिस दिग्गज भी मुश्किल पलों में तुरंत फैसले लेने और तनाव के बीच शांत रहने के लिए ध्यान का सहारा लेते हैं। बिना शोर के बैठने पर आप खुद के भीतर गहराई से झांक पाते हैं। इसलिए, आंख खुलते ही फोन चेक करने या काम पर भागने के बजाय 15 मिनट की शांति के साथ दिन की शुरुआत करें। यह छोटा-सा बदलाव जीवन को नई ऊर्जा, बेहतर फोकस और गजब का नियंत्रण दे सकता है।

नई स्पोर्ट्स ड्रामा:चार जून को रिलीज होगी राम चरण स्टारर ‘पेड्डी’, दो फिल्मों की मुश्किलें बढ़ीं

नई स्पोर्ट्स ड्रामा:चार जून को रिलीज होगी राम चरण स्टारर ‘पेड्डी’, दो फिल्मों की मुश्किलें बढ़ीं

राम चरण इन दिनों अपनी फिल्म ‘पेड्डी’ को लेकर चर्चा में हैं। अब मेकर्स ने इसकी रिलीज डेट अनाउंस कर दी। इसके साथ मेकर्स ने फिल्म का नया पोस्टर भी रिलीज किया है। बता दें कि बूची बाबू निर्देशित यह फिल्म पहले 30 अप्रैल को रिलीज होने वाली थी, लेकिन मेकर्स ने आईपीएल के चलते इसकी रिलीज आगे खिसका दी। अब आईपीएल के खत्म होते ही मेकर्स इसे रिलीज करने की तैयारी में हैं। यह फिल्म 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। बड़ी बात यह है कि ‘पेद्दी’ की इस नई रिलीज डेट ने दो फिल्मों की मुसीबत बढ़ा दी है। एक तरफ 5 जून को बॉबी देओल की फिल्म ‘बंदर’ सिनेमाघरों में रिलीज होनी थी। वहीं दूसरी तरफ इसी दिन वरुण धवन की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ भी रिलीज होने जा रही है। इस फिल्म में वरुण धवन के साथ मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े भी नजर आएंगी। फिल्म में जाह्नवी कपूर भी लीड रोल में हैं स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म ‘पेड्डी’ की शूटिंग पूरी हो चुकी है। इस फिल्म में राम के साथ जाह्नवी कपूर भी मुख्य भूमिका में नजर आएंगी। वहीं इसमें शिव राजकुमार, दिव्येंदु शर्मा, जगपति बाबू और बोमन ईरानी भी अहम किरदारों में दिखाई देंगे। इसका म्यूजिक ए आर रहमान ने कंपोज किया है। श्रुति हासन भी इस फिल्म का हिस्सा हो सकती हैं।

बड़े प्रोजेक्ट्स:‘तुम्बाड 2’ में हुई आलिया की सरप्राइज एंट्री, आखिरी फेज में है स्पाई ड्रामा ‘अल्फा’

बड़े प्रोजेक्ट्स:‘तुम्बाड 2’ में हुई आलिया की सरप्राइज एंट्री, आखिरी फेज में है स्पाई ड्रामा ‘अल्फा’

आलिया भट्ट इस समय अपने करियर के बेहद व्यस्त और दिलचस्प दौर से गुजर रही हैं। एक के बाद एक बड़े प्रोजेक्ट्स के बीच अब उनके नाम एक और सरप्राइज जुड़ गया है। खबर है कि वह कल्ट क्लासिक फिल्म ‘तुम्बाड’ के सीक्वल ‘तुम्बाड 2’ में खास भूमिका निभाने जा रही हैं। हालांकि यह रोल कैमियो बताया जा रहा है, लेकिन इसकी अहमियत कहानी में काफी बड़ी मानी जा रही है, क्योंकि उनका किरदार फिल्म के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर नजर आएगा। आलिया ने मुंबई के मड आइलैंड में दो दिनों की शूटिंग पूरी कर ली है। फिल्म से जुड़े लोगों का कहना है कि मेकर्स को एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी, जो कम स्क्रीन टाइम में भी कहानी में गहराई और रहस्य जोड़ सके। आलिया इस भूमिका के लिए एकदम फिट मानी गईं, क्योंकि उनकी स्क्रीन प्रेजेंस मजबूत है और वह छोटे रोल में भी बड़ा प्रभाव छोड़ने की क्षमता रखती हैं। यही वजह है कि उनका यह कैमियो ‘तुम्बाड 2’ के नैरेटिव में खास महत्व रखेगा। ‘लव एंड वॉर’ में आलिया भी सैनिक के रोल में हैं ‘लव एंड वॉर’ में आलिया के साथ रणबीर कपूर और विकी कौशल हैं। सूत्रों के अनुसार, आलिया इस फिल्म में एक जांबाज सैनिक के रूप में नजर आएंगी। उनके करियर में यह पहली बार होगा जब वह युद्ध की पृष्ठभूमि वाली फिल्म में इस तरह का सशक्त किरदार निभाएंगी। फिल्म की शूटिंग फिलहाल मुंबई में चल रही है, जहां भारतीय सेना के विभिन्न विभागों, मेस और कल्चरल एक्टिविटीज को बड़े पैमाने पर फिल्माया गया है। भंसाली इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद संजीदा हैं। उन्होंने एक्टर्स से लंबी डेट्स ली हैं। महू स्थिति आर्मी बेस कैंप में भी होगी ‘लव एंड…’ के कई हिस्सों की शूटिंग बताया जा रहा है कि ‘लव एंड वॉर’ की लंबाई भी लगभग सवा तीन घंटे होने की संभावना है। पहले इस फिल्म के लिए इटली में 45 दिनों का एक भव्य शूटिंग शेड्यूल तय किया गया था, लेकिन बाद में लॉजिस्टिक चुनौतियों के चलते इसे रद्द करना पड़ा। भंसाली ने इसका तोड़ निकालते हुए मुंबई के गोरेगांव स्थित रॉयल पाम्स के पास ही एक विशाल सेट तैयार करवाया है। फिल्म के ‘वॉर’ वाले बैकड्रॉप के लिए मध्य प्रदेश के महू स्थित ब्रिटिश काल के आर्मी बेस कैंप का भी चयन किया गया है। ‘अल्फा’ में है स्पाई अवतार, एक्शन में दिखेगा एक नया अंदाज इसके अलावा आलिया की ‘अल्फा’ भी चर्चा में है, जिसमें वह एक स्पाई के रोल में दिखेंगी। इसके लिए उन्होंने खास ट्रेनिंग ली है और कई एक्शन सीक्वेंस भी शूट किए हैं। फिल्म की शूटिंग अब अंतिम दौर में है और आलिया अपना मुख्य हिस्सा शूट कर चुकी हैं। ‘अल्फा’ के अनुभव ने आलिया को ‘लव एंड वॉर’ में काफी मदद की है।