राजनीति और टैक्स से परेशान अरबपति छोड़ रहे अपना देश:ब्रिटेन-अमेरिका से मोहभंग, इटली, पुर्तगाल और सिंगापुर नए ठिकाने बने; 2018 में 1.08 लाख, 2025 में 1.42 लाख अमीरों ने अपना देश छोड़ा

दुनिया के सबसे अमीर परिवारों के बीच इन दिनों अपना देश छोड़कर दूसरे देशों में बसने की लहर सी चल रही है। विशेषज्ञ इसे इतिहास का ‘सबसे बड़ा निजी संपत्ति प्रवास’ बता रहे हैं। कभी टैक्स लाभ की तलाश में होने वाला यह पलायन अब ‘रक्षात्मक’ हो गया है। अमीर अब अपनी संपत्ति बचाने, पीढ़ियों की सुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता से बचने के लिए ‘गोल्डन वीसा’ और विदेशी नागरिकता का सहारा ले रहे हैं। स्विस बैंक यूबीएस ने अपने 87 अरबपति ग्राहकों के सर्वेक्षण में पाया कि 2025 में 36% अरबपति कम से कम एक बार अपना निवास स्थान बदल चुके हैं, जबकि 9% अन्य इस पर विचार कर रहे हैं। विशेष रूप से 54 वर्ष से कम उम्र के 44% युवा अरबपति पिछले साल दूसरे देश शिफ्ट हुए हैं। निवेश प्रवास फर्म ‘हेनली एंड पार्टनर्स’ के पास साल-दर-साल आवेदनों में 28% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। हेनले एंड पार्टनर्स की ‘प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट’ के मुताबिक 2018 में जहां करीब 1.08 लाख अरबपतियों ने देश बदला था, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.34 लाख और 2025 में रिकॉर्ड 1.42 लाख पहुंच गया और इस साल यानी 2026 में और ज्यादा माइग्रेशन का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स एफिशिएंसी अमीरों के फैसले की बड़ी वजह है। इटली में नए रेजीडेंट्स के लिए €2 लाख सालाना फ्लेट टैक्स स्कीम 15 साल तक विदेशी आय पर टैक्स को कैप करती है, जो अमीरों के लिए आकर्षक है। पुर्तगाल ने पुराने ‘गोल्डन वीसा’ और नई स्कीम के तहत 20% टैक्स छूट और रिसर्च/इनोवेशन इंसेंटिव देकर धनी प्रवासियों को खींचा है। सिंगापुर ने भी इसी तरह की कई रियायतें घोषित की हैं। हेनले रिपोर्ट कहती है कि 2025 में इटली में 3,600, पुर्तगाल में 1,400 और ग्रीस में 1,200 नए अरबपति बसे हैं। दूसरी तरफ ब्रिटेन लगातार नेट आउटफ्लो झेल रहा है, जहां हाई टैक्स और ब्रेग्जिट के बाद की अनिश्चितता से पैसे वाले परिवार विकल्प तलाश रहे हैं। टेक्नोलॉजी ने अमीरों को ‘जहां चाहो, वहीं रहो’ की आजादी दी माइग्रेशन सलाहकार जेरमी सेवरी कहते हैं, ‘टेक्नोलॉजी ने अमीरों के लिए दुनिया को खुला मैदान बना दिया है। अब आप कंपनी सिंगापुर, परिवार इटली और संपत्ति दुबई में रख सकते हैं।’ हेनले की रिपोर्ट भी मानती है कि रिमोट वर्क, डिजिटल बिजनेस और फिनटेक टूल्स ने देश छोड़ना आसान बनाया है। हेनले के सीईओ डॉ. युर्ग स्टेफन कहते हैं, ‘पुरानी वेल्थ राजधानी जैसे ब्रिटेन और अमेरिका से पलायन और दक्षिण यूरोप, एशिया की ओर अरबपतियों के बसने का झुकाव नई हकीकत है।’
राजनीति और टैक्स से परेशान अरबपति छोड़ रहे अपना देश:ब्रिटेन-अमेरिका से मोहभंग; इटली, पुर्तगाल और सिंगापुर नए ठिकाने बने, 2018 में 1.08 लाख और 2025 में 1.42 लाख अमीरों ने देश छोड़ा

दुनिया के सबसे अमीर परिवारों के बीच इन दिनों अपना देश छोड़कर दूसरे देशों में बसने की लहर सी चल रही है। विशेषज्ञ इसे इतिहास का ‘सबसे बड़ा निजी संपत्ति प्रवास’ बता रहे हैं। कभी टैक्स लाभ की तलाश में होने वाला यह पलायन अब ‘रक्षात्मक’ हो गया है। अमीर अब अपनी संपत्ति बचाने, पीढ़ियों की सुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता से बचने के लिए ‘गोल्डन वीसा’ और विदेशी नागरिकता का सहारा ले रहे हैं। स्विस बैंक यूबीएस ने अपने 87 अरबपति ग्राहकों के सर्वेक्षण में पाया कि 2025 में 36% अरबपति कम से कम एक बार अपना निवास स्थान बदल चुके हैं, जबकि 9% अन्य इस पर विचार कर रहे हैं। विशेष रूप से 54 वर्ष से कम उम्र के 44% युवा अरबपति पिछले साल दूसरे देश शिफ्ट हुए हैं। निवेश प्रवास फर्म ‘हेनली एंड पार्टनर्स’ के पास साल-दर-साल आवेदनों में 28% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। हेनले एंड पार्टनर्स की ‘प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट’ के मुताबिक 2018 में जहां करीब 1.08 लाख अरबपतियों ने देश बदला था, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.34 लाख और 2025 में रिकॉर्ड 1.42 लाख पहुंच गया और इस साल यानी 2026 में और ज्यादा माइग्रेशन का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स एफिशिएंसी अमीरों के फैसले की बड़ी वजह है। इटली में नए रेजीडेंट्स के लिए €2 लाख सालाना फ्लेट टैक्स स्कीम 15 साल तक विदेशी आय पर टैक्स को कैप करती है, जो अमीरों के लिए आकर्षक है। पुर्तगाल ने पुराने ‘गोल्डन वीसा’ और नई स्कीम के तहत 20% टैक्स छूट और रिसर्च/इनोवेशन इंसेंटिव देकर धनी प्रवासियों को खींचा है। सिंगापुर ने भी इसी तरह की कई रियायतें घोषित की हैं। हेनले रिपोर्ट कहती है कि 2025 में इटली में 3,600, पुर्तगाल में 1,400 और ग्रीस में 1,200 नए अरबपति बसे हैं। दूसरी तरफ ब्रिटेन लगातार नेट आउटफ्लो झेल रहा है, जहां हाई टैक्स और ब्रेग्जिट के बाद की अनिश्चितता से पैसे वाले परिवार विकल्प तलाश रहे हैं। टेक्नोलॉजी ने अमीरों को ‘जहां चाहो, वहीं रहो’ की आजादी दी माइग्रेशन सलाहकार जेरमी सेवरी कहते हैं, ‘टेक्नोलॉजी ने अमीरों के लिए दुनिया को खुला मैदान बना दिया है। अब आप कंपनी सिंगापुर, परिवार इटली और संपत्ति दुबई में रख सकते हैं।’ हेनले की रिपोर्ट भी मानती है कि रिमोट वर्क, डिजिटल बिजनेस और फिनटेक टूल्स ने देश छोड़ना आसान बनाया है। हेनले के सीईओ डॉ. युर्ग स्टेफन कहते हैं, ‘पुरानी वेल्थ राजधानी जैसे ब्रिटेन और अमेरिका से पलायन और दक्षिण यूरोप, एशिया की ओर अरबपतियों के बसने का झुकाव नई हकीकत है।’
New project with South director Vamshi Paidipally, Salman Khan

मुंबई3 घंटे पहले कॉपी लिंक ‘सिकंदर’ के बाद सलमान की यह एक और बड़ी साझेदारी मानी जा रही है, जो साउथ इंडियन फिल्म मेकिंग स्टाइल से प्रभावित होगी। – फाइल फोटो सलमान खान इन दिनों अपने करियर के अहम दौर से गुजर रहे हैं। एक तरफ उनकी अगली फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ चर्चा में है, वहीं दूसरी ओर उन्होंने अपने अगले बड़े प्रोजेक्ट पर भी मुहर लगा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सलमान ने साउथ सिनेमा के चर्चित निर्देशक वामसी पैदिपल्ली के साथ एक बड़े बजट की एक्शन थ्रिलर फिल्म साइन की है। ए. मुरुगादॉस की फिल्म ‘सिकंदर’ के बाद यह सलमान की यह एक और बड़ी साझेदारी मानी जा रही है, जो साउथ इंडियन फिल्म मेकिंग स्टाइल से प्रभावित होगी। पिछले कुछ वर्षों में पैन-इंडिया फिल्मों का चलन तेजी से बढ़ा है और इसी ट्रेंड के तहत यह नई फिल्म भी तैयार की जा रही है। माना जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट में सलमान एक दमदार और इमोशनल किरदार में नजर आएंगे। फिल्म की थीम सोशल जस्टिस और वन मैन आर्मी के कॉन्सेप्ट पर है। इस प्रोजेक्ट को साउथ के बड़े निर्माता दिल राजू प्रोड्यूस कर सकते हैं। एक्शन के साथ सामाजिक संदेश भी फिल्म का प्लॉट अभी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है, लेकिन इंडस्ट्री में चर्चा है कि यह एक हाई-ऑक्टेन एक्शन थ्रिलर होगी। इसमें सलमान एक ऐसे किरदार में दिखाई दे सकते हैं जो इंटरनेशनल क्राइम सिंडिकेट के खिलाफ अकेले लड़ता है और उसका सफाया करता है। फिल्म की थीम सोशल जस्टिस और वन मैन आर्मी के कॉन्सेप्ट पर बेस्ड बताई जा रही है। खबर यह भी है कि इस प्रोजेक्ट को साउथ के बड़े निर्माता दिल राजू प्रोड्यूस कर सकते हैं। हीरोइन के लिए भी कई बड़े नाम चर्चा में हैं वामसी के इस नए प्रोजेक्ट में फीमेल लीड को लेकर भी चर्चा तेज है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रश्मिका मंदाना, पूजा हेगड़े और मृणाल ठाकुर के नाम पर विचार किया जा रहा है। शूटिंग के लिए यूरोप और दुबई जैसी अंतरराष्ट्रीय लोकेशंस के साथ हैदराबाद के रामोजी फिल्म सिटी को मुख्य बेस बनाया जा सकता है। ‘बैटल ऑफ गलवान’ की रिलीज में भी हुआ चेंज इसी बीच सलमान की फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ की रिलीज डेट में भी बड़ा बदलाव हुआ है। पहले इसे ईद के आस-पास रिलीज करने की प्लानिंग थी, लेकिन अब इसे 14 अगस्त 2026 के लिए शेड्यूल किया गया है ताकि स्वतंत्रता दिवस वीकेंड का फायदा मिल सके। ‘द बुल’ और ‘किक 2’ भी है खाते में सलमान आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आ सकते हैं। इनमें यशराज फिल्म्स की स्पाई यूनिवर्स की फिल्म ‘टाइगर वर्सेस पठान’, करण जौहर के साथ मिलकर प्रोजेक्ट ‘द बुल’ और ‘किक 2’ जैसी फिल्में शामिल हैं। ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि साउथ के निर्देशकों के साथ यह नई साझेदारी सलमान के के लिए एक नया मोड़ हो सकती है दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
खामेनेई की मौत पर अमेरिका में लगा था सट्टा:498 करोड़ का खेला था दांव; अब साइट ने भुगतान रोका, नियमों को लेकर विवाद

ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई को लेकर अमेरिकी प्रेडिक्शन मार्केट साइट काल्शी पर 498 करोड़ रु. का दांव लगाया गया। यह न्यूयॉर्क स्थित कंपनी है, जहां लोग चुनाव, युद्ध और वैश्विक घटनाओं के नतीजों पर पैसे लगाते हैं। खामेनेई की मौत के बाद कई यूजर्स ने खुद को विजेता मान लिया। एक कारोबारी ने 3.19 लाख रुपए लगाए थे और उसे 58 लाख रुपए मिलने की उम्मीद थी, लेकिन कुछ ही मिनट बाद साइट ने ट्रेड रोक दिया। कंपनी ने कहा कि उसके नियम किसी व्यक्ति की मौत से जुड़े दांव पर भुगतान की अनुमति नहीं देते। विवाद बढ़ने पर काल्शी ने दांव लगाने वालों को पैसा और फीस लौटाने का फैसला किया है। ट्रम्प पहले अमेरिकी राष्ट्रपति, जिन्होंने बिना जनसमर्थन युद्ध शुरू किया डोनाल्ड ट्रम्प ऐसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बन गए हैं जिन्होंने स्पष्ट जनसमर्थन के बिना युद्ध शुरू किया। आम तौर पर जब कोई अमेरिकी राष्ट्रपति युद्ध शुरू करता है तो शुरुआती दौर में जनता उसके पीछे खड़ी (रैली अराउंड द प्रेसिडेंट) हो जाती है। ताजा सर्वे के मुताबिक ईरान पर हमले को सीमित समर्थन मिला है। रॉयटर्स-इप्सोस सर्वे में केवल 27% अमेरिकियों ने कार्रवाई का समर्थन किया, जबकि 43% इसके विरोध में रहे। सीएनएन के सर्वे में समर्थन करीब 41% रहा। अमेरिका में लगभग 8 माह बाद मध्यावधि चुनाव होने हैं। जॉर्ज डब्ल्यू. बुश- अफगानिस्तान युद्ध (2001), समर्थन 90% , 9/11 हमला जॉर्ज HW बुश- खाड़ी युद्ध- कुवैत (1991), समर्थन : 83%, इराकी हमला रोनाल्ड रीगन- ग्रेनेडा हस्तक्षेप (1983), समर्थन : 53% , नागरिक सुरक्षा बिल क्लिंटन- कोसोवो संघर्ष (1999), समर्थन : 51% , बाल्कन संकट बराक ओबामा- लीबिया युद्ध (2011), समर्थन : 47% , नरसंहार रोकना डोनाल्ड ट्रम्प- ईरान युद्ध (2026) , समर्थन : 27% , कारण साफ नहीं
दो जांबाज ईरानी महिलाओं ने साझा किया दमन का दौर:न झुकीं, न डरीं; ईरान में अपने हक के लिए महिलाओं की जंग 47 साल से जारी है

ईरानी महिला अधिकार एक्टिविस्ट मसीह अलीनेजाद कहती हैं- ईरान में जारी युद्ध और संघर्ष पर हमें दर्द भी है और उम्मीद भी। मैं नहीं चाहती कि किसी निर्दोष नागरिक को नुकसान पहुंचे। ईरानी लोगों का संदेश है कि हमें इस घायल और खूंखार शासन के भरोसे अकेला न छोड़ें। इस काम को पूरा करें (शासन परिवर्तन), वरना ये लोग निहत्थे मासूमों से बदला लेंगे। यह ईरान के लिए ‘बर्लिन की दीवार’ गिरने जैसा पल है। ईरान की ‘मॉरैलिटी पुलिस’ के डीएनए में ही महिलाओं को पीटना शामिल है। अनिवार्य हिजाब सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि महिलाओं के दमन का प्रतीक है। अगर हम इस दीवार को गिरा देते हैं, तो यह कट्टरपंथी शासन खत्म हो जाएगा। मैं हिजाब के खिलाफ नहीं हूं, बल्कि ‘जबरदस्ती’ के खिलाफ हूं। महिलाओं को चुनने का हक होना चाहिए। निडर हैं ईरानी महिलाएं मुझे 1994 में 18 की उम्र में सरकार विरोधी पर्चे बांटने पर गिरफ्तार किया गया था। 2007 में देश छोड़ना पड़ा। 2014 में मैंने ‘माई स्टेल्थी फ्रीडम’ नाम से फेसबुक पेज शुरू किया, जहां ईरानी महिलाएं बिना हिजाब और अपने संघर्ष की तस्वीरें निडर होकर साझा करती हैं। 80% ईरानी बदलाव चाहते हैं। इस्लामी गणराज्य ने हमसे सब कुछ छीन लिया है, सिवाय उम्मीद के। संसद की 299 सीटों में से 9 पर ही महिलाएं हैं और वे भी शासन की समर्थक हैं, न कि महिलाओं की रक्षक। इस बार शासन के खिलाफ प्रदर्शनों में मध्यम वर्ग और छात्र शामिल हैं। वर्तमान बदलाव उम्मीद जगाता है। सिर्फ मैं ही नहीं, ज्यादातर ईरानी खुश हैं। इस शासन ने मेरे लोगों को मारा और फांसी पर लटकाया है। ईरान में लोग खुशी से नाच रहे थे और उन प्रियजनों की कब्रों पर गए, जिन्हें शासन ने मार दिया था। मेरी दो बहनें, जिन्हें शासन ने अंधा कर दिया था, वे भी सड़कों पर खुशी से झूम उठीं। मैं और मेरी जैसी लाखों महिलाएं न झुकीं और न ही डरीं। संघर्ष जारी है और रहेगा। पहले दिन से विरोध ईरानी एक्टिविस्ट और आर्टिस्ट फरीबा नजेमी कहती हैं- ईरान में इस्लामी क्रांति के पहले महिलाएं स्वतंत्र थीं। 1979 से ही अनिवार्य हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गया था। 2017 में एक महिला ने सफेद दुपट्टा लहराकर विरोध दर्ज किया तो 2022 में ‘वुमन लाइफ फ्रीडम’ में महिलाएं सड़कों उतरीं। हकों की यह लड़ाई जारी रहेगी। क्रांति से पहले ईरान की पहचान धर्म के आधार पर तय नहीं होती थी। अधिकतर लोग खुद को सबसे पहले मुसलमान के रूप में पेश नहीं करते थे। समाज खुला था और जीवन शैली में विविधता थी, लेकिन 47 साल पहले 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद समाज पर शरीयत कानून लागू कर दिया गया। उस समय मैं बहुत युवा थी और कट्टरपंथियों के उभार से खुश नहीं थी, हालांकि समाज के एक हिस्से ने नई व्यवस्था को स्वीकार भी कर लिया था। सबसे अधिक असर महिलाओं पर पड़ा है। एक समय ऐसा था जब विश्वविद्यालयों में लगभग 66% छात्राएं थीं, लेकिन धीरे-धीरे अवसर कम हो गए। रोजगार में भी रुकावटें आईं। अब तो अगर किसी महिला के सिर पर डाले गए दुपट्टे से बाल का एक हिस्सा भी दिख जाए तो उसे परेशान किया जाता है या हिरासत में ले लिया जाता है। महिलाओं को रोका जाता है, धक्का दिया जाता है, पीटा जाता है या जबरन वैन में बैठाकर ले जाया जाता है। गश्त-ए-इरशाद जैसे संगठन सड़कों पर गश्त करते हैं और ड्रेस कोड के उल्लंघन पर महिलाओं को गिरफ्तार कर सकते हैं। हिरासत में लेते समय सुरक्षा गार्ड महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करते हैं, युवा लड़कियों को ही निशाना बनाया जाता है। कानून महिलाओं की निजी जिंदगी पर भी पाबंदियां लगाता है। कानून इस तरह बनाए गए हैं कि वे महिलाओं को तलाक लेने से हतोत्साहित करते हैं। विदेश यात्रा के लिए भी महिलाओं को पति की अनुमति चाहिए होती है। अब यह हालात बदलने चाहिए।
महिला दिवस विशेष:आज एएसआई के संग्रहालय रहेंगे फ्री, कल पिंक लाइसेंस कैंप

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में युवतियों और महिलाओं के लिए अच्छी खबर है। इस बार महिला दिवस (8 मार्च)के उपलक्ष्य में खासतौर पर शहर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अंतर्गत आने वाले प्रमुख ऐतिहासिक विरासत और संग्रहालय नि:शुल्क रहेंगे। यहां खासतौर पर महिलाओं के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। ग्वालियर में एएसआई के अधीन किले पर तेली का मंदिर, मानसिंह पैलेस, सहस्त्रबाहु मंदिर आदि आते हैं। इस संबंध में एएसआई ने स्पष्ट किया है कि पर्यटकों की संख्या को बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, विश्व धरोहर दिवस, अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, विश्व धरोहर सप्ताह समारोह और दिव्यांग व्यक्तियों के अंतरराष्ट्रीय दिवस पर यह छूट लागू होगी। बाल भवन में फ्री कैंप आधार कार्ड जरूरी नगर निगम ग्वालियर की ओर से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर बालिकाओं के लिए नि:शुल्क ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की पहल भी की गई है। यह शिविर बाल भवन में 9 मार्च को सुबह 11 बजे से लगाया जाएगा। इस कैंप में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग की बालिकाओं और महिलाओं के ड्राइविंग लाइसेंस बनेंगे। इसके लिए आधारकार्ड, समग्र आईडी इत्यादि दस्तावेज जरूरी होंगे।
Quitting chess, he won Rs 2.4 crore through poker, Jennifer Shahade, American women’s chess champion

Hindi News Sports Quitting Chess, He Won Rs 2.4 Crore Through Poker, Jennifer Shahade, American Women’s Chess Champion न्यूयॉर्क3 दिन पहले कॉपी लिंक चेस जगत में ‘मी-टू’ मूवमेंट की शुरुआत करने वाली अमेरिकी चैम्पियन जेनिफर शहाडे। अमेरिकी महिला चेस चैम्पियन रहीं जेनिफर शहाडे ने हाल ही में एक बड़े पोकर टूर्नामेंट में करीब 2.4 करोड़ रुपए जीते हैं। हालांकि अब वे चेस से पूरी तरह दूरी बना चुकी हैं। दो बार की अमेरिकी महिला चेस चैम्पियन जेनिफर शहाडे ने फरवरी 2023 में एक ऐसा खुलासा किया था, जिसने शतरंज की शांत और गंभीर मानी जाने वाली दुनिया में भूचाल ला दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘Time’s up’(अब समय समाप्त) लिखते हुए अमेरिकी चेस फेडरेशन के मशहूर ग्रैंडमास्टर और कोच एलेजांद्रो रामिरेज पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए। शहाडे ने बताया कि रामिरेज ने करीब एक दशक पहले उनका दो बार शारीरिक शोषण किया था। इस एक पोस्ट ने न सिर्फ शहाडे की जिंदगी बदल दी, बल्कि चेस की दुनिया में #MeToo मूवमेंट की नींव रख दी। शहाडे की इस हिम्मत को देखकर शतरंज जगत की कई अन्य लड़कियां भी सामने आईं। जल्द ही आठ अन्य महिलाओं ने भी रामिरेज पर इसी तरह के आरोप लगाए, जिनमें से तीन तो घटना के वक्त नाबालिग थीं। इसके बाद ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने एक विस्तृत रिपोर्ट छापी, जिसके दबाव में आकर रामिरेज को अपना कोचिंग का पद और यूएस चेस फेडरेशन से इस्तीफा देना पड़ा। फ्रांस में 100 महिला खिलाड़ियों ने लगाए आरोप शहाडे की इस पहल का असर दुनिया भर में दिखा। फ्रांस में 100 से ज्यादा महिला खिलाड़ियों ने शोषण और लिंगभेद के खिलाफ ओपन लेटर लिखा। मैग्नस कार्लसन की बहन एलेन कार्लसन ने भी कहा कि शहाडे की पोस्ट के बाद वे अपने साथ हुए कथित उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करा सकीं। यूएस फेडरेशन ने नोटिस भेजा, धमकाया हालांकि शहाडे के लिए यह सच सामने लाना आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि 2020 से 2022 के बीच उन्होंने यूएस फेडरेशन को रामिरेज के खिलाफ कई बार आगाह किया था, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर जलील किया गया। बाद में उन्हें फेडरेशन की तरफ से कानूनी नोटिस भी भेजा गया कि वे युवा खिलाड़ियों से संपर्क न करें। फेडरेशन के रवैये, धमकियों और अपनी साख पर उठते सवालों के कारण उन्होंने अंततः यूएस चेस छोड़ दिया। चेस में महिलाओं की भागीदारी बेहद कम शतरंज में महिलाओं की भागीदारी हमेशा से कम रही है। अब भी क्लासिकल चेस खेलने वालों में सिर्फ 11% और ग्रैंडमास्टर्स में केवल 2% महिलाएं हैं। शहाडे मानती हैं कि महिलाओं को स्कूलों, समाज और यहां तक कि इंटरनेट के एल्गोरिदम द्वारा भी हतोत्साहित किया जाता है। जब वे सोशल मीडिया पर चेस के वीडियो डालती हैं, तो एल्गोरिदम उसे 95 से 99 प्रतिशत पुरुषों को ही दिखाता है, लड़कियों को नहीं। अब पोकर और लेखन पर ही ध्यान अब 45 वर्षीय शहाडे प्रतिस्पर्धी चेस से दूर हैं। वे पेशेवर पोकर और लेखन पर पूरा ध्यान दे रही हैं। उनकी नई किताब ‘थिंकिंग साइडवेज’ रिलीज हुई है, जिसमें चेस और पोकर से मिली सीख का जिक्र है। इसी सीख का इस्तेमाल कर उन्होंने लास वेगास के एक बड़े पोकर टूर्नामेंट में हाल ही में करीब 2.4 करोड़ रुपए जीते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
चीन आबादी बढ़ाने के लिए ले रहा आईवीएफ का सहारा:इनफर्टिलिटी 18 प्रतिशत, इससे IVF कराने वालों की संख्या बढ़कर 11 लाख हुई

चीनी जोड़े पुरानी पीढ़ियों के मुकाबले अधिक उम्र में शादी कर रहे हैं। यह इनफर्टिलिटी की समस्या अधिक बढ़ने का एक कारण है। संतान पैदा कर सकने वाले जोड़ों में इनफर्टिलिटी 2020 में 18% पाई गई जबकि 2007 में यह 12% थी। इससे आईवीएफ की मांग बढ़ी है। चीन में लैब की मदद से संतान को जन्म देने का इलाज कराने वालों की संख्या 2013 के 2.36 लाख के मुकाबले 2019 में 11 लाख हो गई थी। आज चीन में 600 लाइसेंसी क्लिनिक हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार आईवीएफ से 2022 में करीब तीन लाख बच्चों के जन्म हुए थे। अधिक बच्चों के लिए बेचैन देश में इस छोटी संख्या ने भी सरकार का ध्यान खींचा है। चीनी सरकार ने जन्मदर बढ़ाने के लिए अच्छा पैकेज देना शुरू किया है। 2025 में तीन साल से कम आयु के प्रति बच्चे के लिए हर साल 47689 रुपए भत्ता देने की योजना शुरू की है। जनवरी में कंडोम पर वैट की दर 13% कर दी गई। 2022 में केंद्र सरकार ने फर्टिलिटी ट्रीटमेंट को सार्वजनिक बीमा योजनाओं में शामिल किया है। 2024 में दस लाख से अधिक लोगों को आईवीएफ ट्रीटमेंट कराने के खर्च की भरपाई की गई। 2025 के मध्य में सभी 31 प्रांतीय सरकारों ने इसे अपनी योजनाओं में शामिल कर लिया है। आईवीएफ के एक चक्र पर 20 से 50 हजार युआन तक खर्च आता है। कई शहर दस हजार युआन तक दे रहे हैं। फिर भी, जनसंख्या विशेषज्ञों को संदेह है कि आईवीएफ सब्सिडी सेजन्मदर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।जापान और दक्षिण कोरिया दशकों सेआईवीएफ सहित जन्म दर बढ़ाने सेजुड़ी नीतियों पर भारी खर्च कर रहे हैं। दोनों की आबादी कोई खास नहीं बढ़ी है। चीन में संतान पैदा करने की दर बहुत अधिक बढ़ाने के लिए सहायक कार्यक्रमों को कई गुना बढ़ाना पड़ेगा। यह इतना आसान नहीं है। अस्पतालों में ऐसे अधिक मरीज आ रहे हैं जिनकी आयु 35-40 के बीच है। इस आयु में सफलता की दर कम होती है। हॉन्गकॉन्ग साइंस टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी के स्टुअर्टगीतेल बास्टेन कहते हैं, आईवीएफ इनफर्टिलिटी में मदद करता है, संतान के बारे में दुविधा या अस्पष्टता में नहीं। इस तरह बहुत कम लोगों को फायदा होता है। चीन में यह सीमित पूल पहुंच की समस्या और सरकार की नीतियों से और सिकुड़ गया है। क्लीनिक्स की संख्या संपन्न शहरों में ज्यादा है। 2023 से 2025 तक दो करोड़ 22 लाख आबादी के बीजिंग में 53 हजार लोगों ने सरकारी इंश्योरेंस से फर्टिलिटी ट्रीटमेंट कराया था। इसकी तुलना में इतनी ही आबादी के उत्तर पूर्वी प्रांत जिलिन में छह हजार से कम महिलाओं को ही 2024 में योजना शुरू होने के पहले वर्ष में फायदा हुआ था। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के करेन एगलस्टोन कहते हैं, ये असमानताएं चीन के हेल्थ सिस्टम के ढांचे की झलक दिखाती हैं। प्रांतों को अपने इंश्योरेंस खर्च का बड़ा हिस्सा उठाना पड़ता है। इसलिए संपन्न इलाके ज्यादा खर्च करते हैं। गरीब इलाकों में लोगों की इलाज कराने की क्षमता नहीं है। मिसाल के तौर पर निंगशिया की प्रति व्यक्ति सालाना आय ट्रीटमेंट के एक साइकल से कम है। इसके अलावा आईवीएफ के लिए कड़े राष्ट्रीय और प्रांतीय नियम हैं। केवल विवाहित जोड़ों का इलाज हो सकता है। कई स्थानों में मां की आयु का ध्यान रखा जाता है। एग फ्रीज करने के नियम बहुत सख्त हैं। फर्टिलिटी दर बहुत कम चीन उन देशों में है जिनमें फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) की दर दुनिया में सबसे कम है। औसत चीनी महिला का अपने जीवनकाल में केवल एक बच्चा होता है। यह 2017 के 1.8 और आबादी को स्थिर रखने के लिए जरूरी 2.1 से बहुत कम है।
एनिमेशन का स्वर्णिम साल, फिल्मों की कमाई 1800 करोड़ तक:सिल्वर स्क्रीन पर गढ़े गए किरदारों का राज, इनकी कहानियां हर उम्र को जोड़ रहीं, भाषा-सरहदें भी छोटी पड़ीं

एनिमेशन फिल्मों के लिए 2026 बेहद खास माना जा रहा है। इस साल कई बड़ी फिल्में रिलीज हो रही हैं जिनमें जानवरों, खिलौनों और वीडियो गेम के किरदारों की कहानियां होंगी। इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि यह साल एनिमेशन के इतिहास का सबसे सफल साल साबित हो सकता है। इसकी शुरुआत 6 मार्च को आई एनिमेटेड फिल्म हॉपर्स ने कर दी है। कहानी अमेरिकी शहर बीवर्टन में रहने वाले बीवरों (ऊदबिलाव प्रजाति के जानवर) पर आधारित है। शहर का मेयर जंगल हटाकर फ्रीवे बनाना चाहता है। इससे नाराज किशोरी पर्यावरण कार्यकर्ता मेबल प्रयोग के जरिए अपनी चेतना को रोबोटिक बीवर में डाल देती है। वह बीवरों से दोस्ती कर उन्हें अपने जंगल को बचाने के लिए प्रेरित करती है। असल कहानी एनिमेशन फिल्मों के बूम की है। इस गर्मी में ‘डेस्पिकेबल मी’ और ‘पॉ पेट्रोल’ जैसी मशहूर फ्रेंचाइजी की नई फिल्में आ रही हैं। वहीं ‘द सुपर मारियो गैलेक्सी’ और ‘टॉय स्टोरी 5’ अरबों डॉलर कमा सकती हैं। फरवरी में रिलीज हुई ‘गोट’ फिल्म, जिसमें खुर वाले जानवर खेलों में उतरते हैं, अब तक लगभग 1200 करोड़ कमा चुकी है। यह साल की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई वाली एनिमेशन फिल्म बन गई है। दिलचस्प बात यह है कि एनिमेशन फिल्में अब सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि हर उम्र के दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं। 1995 में अमेरिका और कनाडा के फिल्म बाजार में इनका हिस्सा केवल 2.8% था, जो 2024 तक 23.9% हो गया। उसी साल ‘इनसाइड आउट 2’ ने 15,616 करोड़ रुपए कमाकर रिकॉर्ड बनाया। पर 2025 की शुरुआत में चीनी फैंटेसी फिल्म ‘ने झा 2’ ने इसे पीछे छोड़ते हुए 18,372 करोड़ से ज्यादा कमा लिए। नवंबर में आई ‘जूटोपिया 2’ भी 17,450 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। जीवन के सामान्य अनुभव मन को स्पर्श कर जाते हैं: एक्सपर्ट मीडिया विश्लेषण कंपनी एम्पेयर की ओलिविया डीन कहती हैं, ‘कहानियों की सार्वभौमिकता एनिमेशन फिल्मों की सफलता का सबसे बड़ा कारण है। इनमें जीवन के सामान्य अनुभव दिखाया जाता है। यह भाषा व संस्कृति की सीमाओं से परे समझा जा सकता है। किरदारों के भाव व सरल कथानक दर्शकों को कहानी से जोड़ लेते हैं। इसके अलावा, बड़े स्टूडियो प्रमुख फिल्मों को छुट्टियों या त्योहारों पर लाते हैं। माता-पिता के लिए भी सिनेमा बच्चों को व्यस्त रखने का सबसे आसान तरीका है।’ भारत में भी बढ़ रही रुचि भारतीय एनिमेशन उद्योग सिर्फ आउटसोर्सिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मौलिक कहानियों का पावरहाउस बन चुका है। 2025 के अंत में रिलीज हुई फिल्म ‘महावतार नरसिम्हा’ ने देश में ₹100 करोड़ का आंकड़ा पार कर नया इतिहास रच दिया। भगवान विष्णु के नरसिम्हा अवतार और भक्त प्रहलाद की यह कहानी दिखाती है कि पौराणिक कथाओं व आधुनिक 3 डी एनिमेशन का संगम दर्शकों को लुभा सकता है। इधर होम्बले फिल्म्स ने महावतार सिनेमैटिक यूनिवर्स के तहत छह और फिल्मों की घोषणा की है। छोटा भीम का बड़े पर्दे पर विस्तार व रामायण के नए एनिमेटेड रुपांतरण ने भी उत्साह पैदा कर दिया है।
‘जब खुली किताब’ का ट्रेलर आउट:पंकज कपूर और डिंपल कपाड़िया लीड रोल में आएंगे नजर, 6 मार्च को जी5 पर स्ट्रीम होगी फिल्म

एप्लॉज एंटरटेनमेंट की फिल्म ‘जब खुली किताब’ का ट्रेलर रिलीज हो गया है। फिल्म में दिग्गज एक्टर पंकज कपूर और डिंपल कपाड़िया मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। ट्रेलर से साफ है कि कहानी परिपक्व उम्र के रिश्तों, अधूरी भावनाओं और जीवन के नए अध्याय की खोज पर केंद्रित है। दोनों कलाकारों की गहरी और सधी हुई अदाकारी फिल्म को खास बना रही है। यह फिल्म मशहूर एक्टर-लेखक सौरभ शुक्ला के चर्चित नाटक पर आधारित है। उन्होंने न केवल मूल नाटक लिखा था, बल्कि इसके फिल्म रूपांतरण का निर्देशन भी खुद किया है। नाटक की लोकप्रियता को देखते हुए फिल्म से भी दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं। ये है कहानी कहानी दो ऐसे लोगों की है जो जीवन के उत्तरार्ध में एक-दूसरे से मिलते हैं और अपने अतीत की परतें खोलते हुए रिश्तों को नए नजरिए से समझने की कोशिश करते हैं। फिल्म में अपारशक्ति खुराना भी अहम भूमिका निभा रहे हैं, जो कहानी में नई पीढ़ी का दृष्टिकोण जोड़ते हैं। ट्रेलर में हल्की-फुल्की नोकझोंक, भावनात्मक संवाद और जीवन के अनुभवों से उपजी संवेदनशीलता की झलक मिलती है। एप्लॉज एंटरटेनमेंट द्वारा प्रस्तुत और शूस्ट्रैप फिल्म्स के बैनर तले बनी यह फिल्म 6 मार्च 2026 से जी5 पर स्ट्रीम होगी।









