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8th Pay Commission Approved: Basic Salary ₹45K at Fitment Factor 3

8th Pay Commission Approved: Basic Salary ₹45K at Fitment Factor 3
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नई दिल्ली13 मिनट पहले

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केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के नियम और शर्तों को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब करीब 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स की सैलरी, पेंशन और भत्तों में बड़े बदलाव की उम्मीद है। आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।

फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह क्यों जरूरी है?

फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक यानी मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की बेसिक सैलरी को रिवाइज करने के लिए किया जाता है। नया सैलरी स्ट्रक्चर तय करने में इसकी भूमिका सबसे जरूरी होती है।

7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जो 2016 से प्रभावी हुआ था। इसके तहत अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 थी, तो वह बढ़कर ₹38,550 हो गई थी।

कर्मचारी यूनियनों की मांग और एक्सपर्ट्स का अनुमान

8वें वेतन आयोग के लिए केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों ने मुख्य रूप से फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने और न्यूनतम बेसिक पे में बड़ी बढ़ोतरी की मांग की है। कुछ यूनियनों ने फिटमेंट फैक्टर को 3 से 5 या उससे अधिक करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, पेंशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी मांग वित्तीय वास्तविकताओं के अनुकूल नहीं हो सकती है।

पेंशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, आयोग न्यूनतम वेतन की गणना के तरीके में बदलाव कर सकता है। इसके लिए परिवार की उपभोग इकाइयों (कंजम्पशन यूनिट्स) को तीन से बढ़ाकर पांच किया जा सकता है और फिटमेंट फैक्टर को 2.64 करने पर विचार किया जा सकता है।

कितनी बढ़ सकती है कर्मचारियों की इनहैंड सैलरी?

सैलरी में होने वाली अंतिम बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोग क्या सिफारिश करता है और सरकार किसे मंजूरी देती है। इसे दो अलग-अलग उदाहरणों से समझा जा सकता है…

  • पहला उदाहरण (60% DA के आधार पर): मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक पे ₹100 है। 60% महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर उसकी कुल कमाई ₹160 हो जाती है। नए फिटमेंट फैक्टर के बाद अगर बेसिक पे दोगुनी होकर ₹200 हो जाती है, तो मौजूदा ₹160 के मुकाबले उसकी प्रभावी सैलरी में करीब 25% की बढ़ोतरी होगी।
  • दूसरा उदाहरण (फिटमेंट फैक्टर 3 होने पर): अगर सरकार मौजूदा फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.0 कर देती है, तो एंट्री-लेवल की बेसिक पे में 15 से 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। इस स्थिति में ₹15,000 की बेसिक सैलरी सीधे ₹45,000 हो जाएगी।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार कर्मचारी यूनियनों की मांग से कम फिटमेंट फैक्टर भी रखती है, तो भी सरकारी खर्च में बड़ी बढ़ोतरी होगी और कर्मचारियों को अपनी सैलरी में एक सम्मानजनक उछाल देखने को मिलेगा।

7वें वेतन आयोग में कितना हुआ था फायदा?

तुलना के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर ₹18,000 प्रति महीने किया था।

इसके साथ ही नई भर्ती वाले क्लास-I अधिकारियों की सैलरी को ₹56,100 तय किया गया था। इसके कारण 1 जनवरी 2016 से कुल सैलरी और पेंशन में 14.29% की कुल बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

राज्यों का दौरा कर रही है 8वें वेतन आयोग की टीम

वर्तमान में 8वां वेतन आयोग अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहा है। आयोग की टीम वहां कर्मचारी एसोसिएशनों और यूनियनों से मुलाकात कर रही है।

इस दौरान कर्मचारियों की मांगों और उनके प्रस्तावों के ज्ञापन (मेमोरेंडम) नोट किए जा रहे हैं। यूनियनों ने मुख्य रूप से सैलरी रिवीजन और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों में सुधार की मांग रखी है।

कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग और कब तक आएगी रिपोर्ट?

केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 में 8वें वेतन आयोग की शर्तों को मंजूरी दी थी और पैनल को रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया था। हालांकि 7वें वेतन आयोग की जगह 8वें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से लागू मान लिया गया है, लेकिन आयोग को अपना काम पूरा करने में करीब 18 महीने का समय लगने की उम्मीद है।

आयोग ने मेमोरेंडम जमा करने की आखिरी तारीख को बढ़ाकर 15 जून 2026 कर दिया है। इसके बाद सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) के सुझावों की जांच की जाएगी और अंतिम सिफारिशें तैयार होंगी।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर रिपोर्ट जून-जुलाई 2027 तक सौंपी जाती है, तो सरकार पर एरियर (बकाया) देने की देनदारी काफी बढ़ जाएगी। सिफारिशें स्वीकार और लागू होने के बाद, केंद्र सरकार बीच की अवधि का पूरा एरियर कर्मचारियों को देगी।

फिलहाल कर्मचारी संगठन ज्यादा मल्टीप्लायर और बेहतर रिटायरमेंट फायदों के लिए दबाव बना रहे हैं, जबकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतिम फैसला देश के वित्तीय हालातों को देखकर ही लिया जाएगा।

क्या होता है वेतन आयोग ?

केंद्रीय वेतन आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों, पेंशन और अन्य फायदों की समीक्षा करने के लिए गठित एक पैनल होता है।

आमतौर पर देश में हर 10 साल में एक नए वेतन आयोग का गठन किया जाता है, जो बदलती अर्थव्यवस्था और महंगाई के हिसाब से सरकारी कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए सिफारिशें देता है।

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फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह क्यों जरूरी है?

फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक यानी मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की बेसिक सैलरी को रिवाइज करने के लिए किया जाता है। नया सैलरी स्ट्रक्चर तय करने में इसकी भूमिका सबसे जरूरी होती है।

7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जो 2016 से प्रभावी हुआ था। इसके तहत अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 थी, तो वह बढ़कर ₹38,550 हो गई थी।

कर्मचारी यूनियनों की मांग और एक्सपर्ट्स का अनुमान

8वें वेतन आयोग के लिए केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों ने मुख्य रूप से फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने और न्यूनतम बेसिक पे में बड़ी बढ़ोतरी की मांग की है। कुछ यूनियनों ने फिटमेंट फैक्टर को 3 से 5 या उससे अधिक करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, पेंशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी मांग वित्तीय वास्तविकताओं के अनुकूल नहीं हो सकती है।

पेंशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, आयोग न्यूनतम वेतन की गणना के तरीके में बदलाव कर सकता है। इसके लिए परिवार की उपभोग इकाइयों (कंजम्पशन यूनिट्स) को तीन से बढ़ाकर पांच किया जा सकता है और फिटमेंट फैक्टर को 2.64 करने पर विचार किया जा सकता है।

कितनी बढ़ सकती है कर्मचारियों की इनहैंड सैलरी?

सैलरी में होने वाली अंतिम बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोग क्या सिफारिश करता है और सरकार किसे मंजूरी देती है। इसे दो अलग-अलग उदाहरणों से समझा जा सकता है…

  • पहला उदाहरण (60% DA के आधार पर): मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक पे ₹100 है। 60% महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर उसकी कुल कमाई ₹160 हो जाती है। नए फिटमेंट फैक्टर के बाद अगर बेसिक पे दोगुनी होकर ₹200 हो जाती है, तो मौजूदा ₹160 के मुकाबले उसकी प्रभावी सैलरी में करीब 25% की बढ़ोतरी होगी।
  • दूसरा उदाहरण (फिटमेंट फैक्टर 3 होने पर): अगर सरकार मौजूदा फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.0 कर देती है, तो एंट्री-लेवल की बेसिक पे में 15 से 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। इस स्थिति में ₹15,000 की बेसिक सैलरी सीधे ₹45,000 हो जाएगी।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार कर्मचारी यूनियनों की मांग से कम फिटमेंट फैक्टर भी रखती है, तो भी सरकारी खर्च में बड़ी बढ़ोतरी होगी और कर्मचारियों को अपनी सैलरी में एक सम्मानजनक उछाल देखने को मिलेगा।

7वें वेतन आयोग में कितना हुआ था फायदा?

तुलना के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर ₹18,000 प्रति महीने किया था।

इसके साथ ही नई भर्ती वाले क्लास-I अधिकारियों की सैलरी को ₹56,100 तय किया गया था। इसके कारण 1 जनवरी 2016 से कुल सैलरी और पेंशन में 14.29% की कुल बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

राज्यों का दौरा कर रही है 8वें वेतन आयोग की टीम

वर्तमान में 8वां वेतन आयोग अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहा है। आयोग की टीम वहां कर्मचारी एसोसिएशनों और यूनियनों से मुलाकात कर रही है।

इस दौरान कर्मचारियों की मांगों और उनके प्रस्तावों के ज्ञापन (मेमोरेंडम) नोट किए जा रहे हैं। यूनियनों ने मुख्य रूप से सैलरी रिवीजन और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों में सुधार की मांग रखी है।

कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग और कब तक आएगी रिपोर्ट?

केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 में 8वें वेतन आयोग की शर्तों को मंजूरी दी थी और पैनल को रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया था। हालांकि 7वें वेतन आयोग की जगह 8वें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से लागू मान लिया गया है, लेकिन आयोग को अपना काम पूरा करने में करीब 18 महीने का समय लगने की उम्मीद है।

आयोग ने मेमोरेंडम जमा करने की आखिरी तारीख को बढ़ाकर 15 जून 2026 कर दिया है। इसके बाद सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) के सुझावों की जांच की जाएगी और अंतिम सिफारिशें तैयार होंगी।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर रिपोर्ट जून-जुलाई 2027 तक सौंपी जाती है, तो सरकार पर एरियर (बकाया) देने की देनदारी काफी बढ़ जाएगी। सिफारिशें स्वीकार और लागू होने के बाद, केंद्र सरकार बीच की अवधि का पूरा एरियर कर्मचारियों को देगी।

फिलहाल कर्मचारी संगठन ज्यादा मल्टीप्लायर और बेहतर रिटायरमेंट फायदों के लिए दबाव बना रहे हैं, जबकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतिम फैसला देश के वित्तीय हालातों को देखकर ही लिया जाएगा।

क्या होता है वेतन आयोग ?

केंद्रीय वेतन आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों, पेंशन और अन्य फायदों की समीक्षा करने के लिए गठित एक पैनल होता है।

आमतौर पर देश में हर 10 साल में एक नए वेतन आयोग का गठन किया जाता है, जो बदलती अर्थव्यवस्था और महंगाई के हिसाब से सरकारी कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए सिफारिशें देता है।

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