Tuesday, 21 Apr 2026 | 06:37 AM

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MP में 5,600 फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर:20 हजार कर्मचारी निकाले, 30 हजार की सैलरी आधी; 3 शिफ्ट का काम एक में चल रहा

MP में 5,600 फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर:20 हजार कर्मचारी निकाले, 30 हजार की सैलरी आधी; 3 शिफ्ट का काम एक में चल रहा

ईरान और इजराइल-अमेरिका के युद्ध का असर मध्य प्रदेश के ‘डेट्रॉयट’ कहे जाने वाले औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर पर बढ़ता जा रहा है। पहले एक्सपोर्ट ठप हुआ, तो अब कर्मचारियों-मजदूरों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। उद्योग संचालकों का कहना है कि हालात जल्द नहीं सुधरे तो मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष डॉ. गौतम कोठारी के मुताबिक, यहां से होने वाला एक्सपोर्ट लगभग पूरी तरह रुक गया है। कच्चे माल के महंगे होने और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग संकट के चलते उद्योगपति प्रोडक्शन घटा रहे हैं। इसका असर रोजगार पर भी पड़ा है। फैक्ट्रियों में शिफ्ट कम हो रही हैं। कई जगह शट-डाउन की स्थिति बन गई है। सबसे ज्यादा असर अस्थायी मजदूरों पर पड़ा है। अनुमान है कि करीब 20 हजार कॉन्ट्रैक्ट वर्कर काम से बाहर हो चुके हैं। कई कंपनियों ने स्थायी कर्मचारियों को भी ले-ऑफ (छंटनी) पर डालकर आधी सैलरी देना शुरू कर दिया है। इनकी संख्या करीब 30 हजार है। साढ़े पांच हजार से ज्यादा फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। कम पेमेंट में 300 की गैस कैसे भरवाएं लेबर कांट्रैक्टर सद्दाम पटेल ने बताया कि पीथमपुर में लेबर बाहर से आते हैं, उन्हें गैस की छोटी-छोटी बॉटल लेना पड़ती हैं। पिछले दिनों गैस की सप्लाई प्रभावित होने से उन्हें गैस महंगी मिल रही थी। लेबर को अब 300 रुपए की गैस भरवाने में दिक्कत होती है, क्योंकि उनकी इतनी पेमेंट नहीं है। पांच दिन से काम बंद, हमारी छुट्‌टी कर दी गई सेज सेक्टर की एक फार्मा कंपनी में काम करने वाले लेबर नीतेश बघेल ने बताया- मैं प्लास्टिक फैक्ट्री में काम करता हूं। कंपनी में प्लास्टिक दाना महंगा होने से 5 दिन से काम बंद है, इसलिए हमारी भी छुट्‌टी कर दी गई। हां, घर की महिलाएं कपड़ा फैक्ट्री में पैकिंग का काम करने जाती हैं, उन्हें जरूर 10 अप्रैल तक काम पर बुलाया जा रहा है, उनका काम बंद होने के बाद हम गांव चले जाएंगे। सरकार अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रही पीथमपुर औद्योगिक संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि ऐसी क्राइसिस में हम सरकार का मुंह देखते हैं। बाकी समय तो सरकार हमारा मुंह देखती है, क्योंकि हम उन्हें टैक्स देते हैं। उन्हें जीडीपी में योगदान देते हैं, अगर आपने गैस कम कर दी तो यह कोई क्राइसिस मैनेजमेंट नहीं है। मैनेजमेंट तो तब होता, जब इंडस्ट्री की आवश्यकता के अनुसार हर चीज का निर्धारण होता है। सरकार समस्या को नकारते हुए बाहरी रूप से अगर उसे मैनेज कर रही है तो यह क्राइसिस मैनेजमेंट नहीं, बल्कि अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारना है। SEZ से हर महीने करोड़ों डॉलर का एक्सपोर्ट पीथमपुर को मध्य प्रदेश का औद्योगिक इंजन कहा जाता है। यहां ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मा, प्लास्टिक, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग सेक्टर की 5,600 से ज्यादा इकाइयां हैं। SEZ से हर महीने करोड़ों डॉलर का एक्सपोर्ट होता था। अमेरिका, यूरोप और मिडिल ईस्ट के बाजारों में पीथमपुर के पुर्जे, दवाएं और पैकेजिंग सामग्री पहुंचती थी। हॉर्मुज स्ट्रेट और स्वेज कैनाल पर तनाव से फ्रेट चार्ज पांच गुना बढ़ गए। बीमा प्रीमियम आसमान छू रहा है। …………………………………. यह खबर भी पढ़ें… शुगर-बीपी, बुखार सहित इन्फेक्शन की दवाएं महंगी मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण चीन से आने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स की सप्लाई बाधित होने और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से मध्यप्रदेश की फार्मा इंडस्ट्री में शटडाउन का खतरा मंडरा रहा है। फार्मा इंडस्ट्री में लगने वाले रॉ मटेरियल के रेट में 30% से लेकर 50% तक की बढ़ोत्तरी हुई है। पूरी खबर पढ़ें

सत्तन गुरु की बेटी कनुप्रिया का पीएम को खुला पत्र:घटना को ‘सोची-समझी साजिश’ बताया; निष्पक्ष जांच की मांग

सत्तन गुरु की बेटी कनुप्रिया का पीएम को खुला पत्र:घटना को ‘सोची-समझी साजिश’ बताया; निष्पक्ष जांच की मांग

29 मार्च को दशहरा मैदान पर आयोजित नगर निगम के भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक एवं राष्ट्रीय कवि सत्यनारायण सत्तन (सत्तन गुरु) के साथ हुई कथित अपमानजनक घटना अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गई है। सत्तन गुरु की बेटी कनुप्रिया सत्तन, जो हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुई हैं, ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखकर पूरे घटनाक्रम को सुनियोजित साजिश करार दिया है। उन्होंने निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। कनुप्रिया सत्तन ने अपने पत्र में लिखा है कि यह घटना न केवल उनके पिता के साथ अपमानजनक है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध भी है। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री के आधिकारिक कार्यक्रम में अनावश्यक विवाद पैदा करने की सोची-समझी चाल बताया है। कनुप्रिया ने पत्र में उल्लेख किया कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के लिए तैयार की गई मंच अतिथि सूची में सत्यनारायण सत्तन का नाम पूर्व निर्धारित रूप से शामिल था। कार्यक्रम स्थल पर उनकी नामांकित सीट से नाम की स्लिप हटाए जाने की घटना जानबूझकर की गई कार्रवाई प्रतीत होती है। उनका कहना है कि यह एक सुनियोजित प्रयास लगता है, जिसका उद्देश्य मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में अनावश्यक विवाद और व्यवधान उत्पन्न करना था। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम एक मुख्यमंत्री-विरोधी मंत्री के इशारे पर किया गया बताया जा रहा है, जिससे राजनीतिक असहजता पैदा हो सके। उन्होंने यह भी लिखा कि सत्तन गुरु ने वर्षों तक भारतीय जनता पार्टी और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहकर संगठन, विचारधारा और राष्ट्रहित के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पत्र में कनुप्रिया ने इस घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर उचित कार्रवाई की मांग की है। क्या हुआ था दशहरा मैदान पर? 29 मार्च को नर्मदा चौथे चरण से जुड़े बड़े सरकारी कार्यक्रम में मंच पर 69 अतिथियों की सूची तैयार की गई थी। सूची में सत्तन जी का नाम 26वें नंबर पर था और उनकी कुर्सी भी लगाई गई थी। लेकिन मंच पर पहुंचते ही एक कार्यकर्ता ने उन्हें रोक लिया और कहा कि सूची में नाम नहीं है। नाम की स्लिप गायब थी। इससे आहत होकर सत्तन गुरु कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही वापस लौट गए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, तुलसी सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव समेत कई बड़े नेता मौजूद थे। भाजपा का डैमेज कंट्रोल, कांग्रेस का हमला घटना के अगले दिन भाजपा इंदौर शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा सत्तन गुरु के घर पहुंचे। उन्होंने बंद कमरे में लंबी बातचीत की और कहा, “सत्तन गुरु हमारे मार्गदर्शक हैं। अगर जरूरत पड़ी तो हम 25 बार माफी मांग लेंगे।” महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी व्यक्तिगत रूप से फोन कर खेद जताया और गलती से पर्ची न लग पाने की बात कही। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस मौके को भुनाया। कांग्रेस के जिला सेवादल कार्यकारी अध्यक्ष विवेक खंडेलवाल, ब्लॉक अध्यक्ष गिरीश जोशी और अन्य नेताओं ने सत्तन गुरु के घर पहुंचकर उन्हें तुलसी का पौधा भेंट कर सम्मानित किया और भाजपा पर तीखा हमला बोला। कौन हैं सत्तन गुरु और कनुप्रिया? सत्यनारायण सत्तन इंदौर की राजनीति के दिग्गज नेताओं में गिने जाते हैं। वे भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक और मध्य प्रदेश खाद्य एवं ग्रामोद्योग निगम के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर के कवि के रूप में भी उनकी पहचान है। उनकी बेटी कनुप्रिया सत्तन दिल्ली में पत्रकारिता कर चुकी हैं। फरवरी 2026 में उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ली थी। कनुप्रिया के कांग्रेस में शामिल होने के समय भी काफी चर्चा हुई थी।

Jabalpur Colonizer Fined 4 Cr; Google Earth Image Evidence; Shobhapur Hill Flattened

Jabalpur Colonizer Fined 4 Cr; Google Earth Image Evidence; Shobhapur Hill Flattened

रांझी तहसील की शोभापुर पहाड़ी, जो कभी हरियाली से भरी थी, धीरे-धीरे खनन के कारण समतल कर दी गई और वहां बिल्डिंग निर्माण भी शुरू हो गया। शोभापुर निवासी आर.के. सैनी की शिकायत पर कलेक्टर के निर्देश पर जांच कराई गई। जांच में पाया गया कि पहाड़ी के स्वरूप को . शिकायत में बताया गया था कि शोभापुर पहाड़ी से बिना अनुमति मिट्टी, मुरम और बोल्डर का खनन कर उनका उपयोग आवासीय कॉलोनी निर्माण में किया जा रहा है। इसके बाद तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पटवारी और खनिज विभाग को जांच का जिम्मा सौंपा गया। मौके पर निरीक्षण में पाया गया कि सीओडी कॉलोनी निवासी अभिलाष तिवारी तथा भूमि स्वामी न्यू शोभापुर निवासी शोभना सिंह, मुकेश सिंह, महेश सिंह, नरेंद्र सिंह, रागिनी सिंह और रमेश सिंह द्वारा बड़ी मशीनों से पहाड़ी को काटकर समतल किया जा रहा है और कॉलोनी विकसित की जा रही है। ग्राम भड़पुरा में पटवारी हल्का नंबर 02 के खसरा नंबर 391/13 क सहित अन्य खसरों की कुल 4.24 हेक्टेयर भूमि में से 2.58 हेक्टेयर निजी भूमि पर अवैध उत्खनन और कॉलोनी निर्माण की शिकायत पर जांच की गई। बाद में यह प्रकरण कलेक्टर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया। राजस्व एवं खनिज विभाग की टीम ने जांच में भूमि स्वामी नरेंद्र सिंह ठाकुर के पुत्र निशांत सिंह तथा कॉलोनाइजर अभिलाष तिवारी द्वारा खनिज के अवैध भंडारण की पुष्टि की। एक हजार घनमीटर मुरम और एक हजार घनमीटर बोल्डर के लिए 50 लाख रुपए का अर्थदंड प्रस्तावित किया गया। इसके आधार पर नोटिस जारी कर सुनवाई के बाद कलेक्टर कोर्ट ने 50 लाख रुपए का अर्थदंड अधिरोपित किया। इस आदेश के विरुद्ध कमिश्नर न्यायालय में अपील की गई, लेकिन कमिश्नर ने कलेक्टर के आदेश को यथावत रखा। पहाड़ी के मूल स्वरूप में परिवर्तन कर कॉलोनी निर्माण की शिकायत पर बाद में कलेक्टर ने एसडीएम रांझी और जिला खनिज अधिकारी से भी जांच कराई। अनुविभागीय राजस्व अधिकारी और जिला खनिज अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि कॉलोनी विकास के लिए समतलीकरण किया गया, लेकिन कमर्शियल प्रोजेक्ट होने के कारण उपयोग किए गए खनिज की रॉयल्टी अग्रिम जमा करना जरूरी था। ऐसा न कर बिना रॉयल्टी भुगतान के खनिज का उपयोग किया गया, जो मध्यप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भंडारण का निवारण) नियम 2022 का उल्लंघन है। जांच में पाया गया कि बिना अनुमति 13 हजार 600 घनमीटर खनिज (मिट्टी, मुरम और बोल्डर) का उपयोग किया गया। इसकी 6 लाख 80 हजार रुपए रॉयल्टी की 15 गुना राशि 1 करोड़ 02 लाख रुपए अर्थदंड तथा 1 करोड़ 02 लाख रुपए पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में निर्धारित की गई। इस प्रकार कुल 2 करोड़ 04 लाख रुपए की राशि, एक हजार रुपए प्रशमन शुल्क सहित कॉलोनाइजर और भूमि स्वामियों से वसूलने की अनुशंसा की गई। कलेक्टर कोर्ट ने आदेश में तय समय सीमा में अर्थदंड जमा नहीं करने पर आरआरसी जारी करने तथा राशि जमा नहीं होने की स्थिति में तहसीलदार के माध्यम से कुर्की की कार्रवाई करने के निर्देश खनिज अधिकारी को दिए हैं। गूगल अर्थ डिजिटल इमेज ने की मदद भड़पुरा स्थित शोभापुर पहाड़ी के स्वरूप में बदलाव के इस प्रकरण में कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने आदेश में खनिज निरीक्षक की रिपोर्ट के साथ संलग्न गूगल अर्थ से प्राप्त डिजिटल इमेज का उल्लेख किया है। वर्ष 2019 से 2025 तक की डिजिटल इमेज से स्पष्ट हुआ कि 2019 में भूमि का स्वरूप पहाड़ी जैसा था, जिसे 2020, 2021 और 2022 के दौरान बदलकर समतल किया गया और निर्माण गतिविधियां शुरू हुईं। जिला खनिज अधिकारी ए.के. राय ने बताया कि 2022 में आर.के. सैनी ने शिकायत दर्ज कराई थी। जांच में पहाड़ी से पत्थर और मुरम का अवैध खनन पाया गया। पहाड़ी की ऊपरी सतह काटकर समतल करने के बाद कॉलोनाइजर द्वारा कॉलोनी विकसित की गई, जिसकी रिपोर्ट कलेक्टर कोर्ट में प्रस्तुत की गई।

बरगवां आरओबी निर्माण में देरी, कंपनी पर कार्रवाई तय:सिंगरौली में डेढ़ साल पहले शुरू होना था काम, पीडब्ल्यूडी ने नोटिस दिया

बरगवां आरओबी निर्माण में देरी, कंपनी पर कार्रवाई तय:सिंगरौली में डेढ़ साल पहले शुरू होना था काम, पीडब्ल्यूडी ने नोटिस दिया

सिंगरौली जिले के बरगवां में प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के निर्माण कार्य में लगातार देरी हो रही है। परियोजना का काम जुलाई 2025 में शुरू होना था, लेकिन अब तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो पाया है। इससे स्थानीय निवासियों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, खासकर रेलवे क्रॉसिंग पर जाम की समस्या बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार, जिस कंपनी को आरओबी निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उसने अभी तक साइट पर सक्रिय रूप से काम शुरू नहीं किया है। प्रारंभिक तैयारियों में भी सुस्ती देखी गई है, जिसके कारण परियोजना की समयसीमा प्रभावित हो रही है। स्थानीय व्यापारियों और राहगीरों में इस देरी को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि परियोजना में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कार्य को निर्धारित समयसीमा में पूरा करना अनिवार्य है। पीडब्ल्यूडी रीवा संभाग में ब्रिज का काम देखने वाले एसडीओ पीके सिंह बघेल ने बताया, “आरओबी निर्माण कार्य में हो रही देरी को लेकर कंपनी को नोटिस जारी किया गया है। यदि जल्द काम शुरू नहीं किया गया, तो अनुबंध की शर्तों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

शराब दुकानों की 12वें चरण की नीलामी आज से:पांच हजार करोड़ का राजस्व जुटाएगा आबकारी विभाग, कल 2 बजे खुलेंगे टेंडर

शराब दुकानों की 12वें चरण की नीलामी आज से:पांच हजार करोड़ का राजस्व जुटाएगा आबकारी विभाग, कल 2 बजे खुलेंगे टेंडर

मध्य प्रदेश में शराब दुकानों से बकाया करीब 5 हजार करोड़ रुपए के राजस्व को जुटाने के लिए आबकारी विभाग आज 12वें चरण की ई-टेंडर नीलामी कराएगा। इस प्रक्रिया में पारंपरिक ऑक्शन नहीं होगा, बल्कि ऑनलाइन टेंडर के जरिए ही आवंटन किया जाएगा। आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि ई-टेंडर में ऑफसेट प्राइस आरक्षित मूल्य से अधिकतम 30% कम तक ही मान्य होगा। यानी 70% से कम का कोई भी ऑफर स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे न्यूनतम बोली की सीमा तय की गई है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 10वें और 11वें चरण में प्राप्त ऐसे प्रस्ताव, जो आरक्षित मूल्य के 80% या उससे अधिक हैं, उन्हें स्वीकृति प्रक्रिया में शामिल किया जाए। वहीं 80% से कम के उच्चतम ऑफर्स को फिलहाल होल्ड पर रखा जाएगा। ऐसे आवेदकों को दोबारा ईएमडी जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। समूह और इकाई स्तर पर होगी नीलामी इस चरण में शराब दुकानों की नीलामी समूह के साथ-साथ समूह में शामिल प्रत्येक दुकान के लिए अलग-अलग भी की जाएगी। राजस्व संतुलन बनाए रखने के लिए जिला समितियां सीमित संख्या में समूहों का पुनर्गठन करेंगी, जिसे आबकारी आयुक्त की मंजूरी जरूरी होगी। जिन जिलों का आरक्षित मूल्य 200 करोड़ रुपए से अधिक है, वहां किसी भी समूह का मूल्य जिले के कुल आरक्षित मूल्य के 20% से ज्यादा नहीं रखा जाएगा। ई-टेंडर का शेड्यूल ऑनलाइन टेंडर फॉर्म डाउनलोड और ऑफर जमा करने की प्रक्रिया आज सुबह 11 बजे से शुरू हुई है, जो 3 अप्रैल को दोपहर 2 बजे तक चलेगी। टेंडर खोलने की प्रक्रिया 3 अप्रैल को दोपहर 2:05 बजे से शुरू होगी। अब तक 1200 समूहों की नीलामी 29 मार्च तक 1200 समूहों की नीलामी पूरी हो चुकी है, जिससे लगभग 15,409.94 करोड़ रुपए का राजस्व तय हुआ है। यह आरक्षित मूल्य से 3.61% अधिक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में इसमें 24.34% की वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य स्तर पर 19,952.89 करोड़ रुपए के लक्ष्य में से अब तक 77.23% नीलामी हो चुकी है, जबकि करीब 5,080.35 करोड़ रुपए का कार्य अभी शेष है। विभाग को उम्मीद है कि लगातार ई-टेंडर प्रक्रिया के जरिए राजस्व में स्थिर बढ़ोतरी बनी रहेगी।

Bhojshala Case Hearing Today | Indore High Court to Review Survey Report, Objections

Bhojshala Case Hearing Today | Indore High Court to Review Survey Report, Objections

इंदौर/धार7 घंटे पहले कॉपी लिंक भोजशाला को लेकर ASI की सर्वे रिपोर्ट पर अदालत में आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। धार के भोजशाला विवाद मामले में 6 अप्रैल से रोज सुनवाई होगी। हाईकोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच सोमवार दोपहर ढाई बजे से सभी याचिकाओं को एक साथ सुनेगी। गुरुवार को हुई सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट किया है कि पहले याचिकाकर्ताओं के तर्क सुने जाएंगे, फिर आपत्ति लगाने वालों को दलील रखने का अवसर दिया जाएगा। सुनवाई के दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन, विनय जोशी मौजूद रहे जबकि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से एडवोकेट सलमान खुर्शीद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- हाईकोर्ट ही करेगा अंतिम फैसला इससे पहले बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला विवाद में अहम आदेश देते हुए स्पष्ट किया था कि मामले का अंतिम निर्णय अब हाईकोर्ट ही करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट, वीडियोग्राफी और पक्षकारों की आपत्तियों पर हाईकोर्ट अंतिम सुनवाई में विचार करेगा। सभी मुद्दे हाईकोर्ट के समक्ष खुले रहेंगे और वहीं तय किए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- ASI द्वारा तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट सभी पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है। कई पक्षों ने इस पर अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराई हैं। ASI द्वारा की गई साइट की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी से जुड़े बिंदुओं को भी हाईकोर्ट गंभीरता से देखेगा। यदि वीडियोग्राफी के आधार पर कोई नई आपत्तियां उठती हैं, तो उन पर भी सुनवाई के दौरान विचार किया जाएगा। इसके अलावा शीर्ष कोर्ट ने पहले दिए गए निर्देश को बरकरार रखते हुए कहा था कि भोजशाला परिसर के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। साथ ही, 7 अप्रैल 2003 को ASI द्वारा जारी आदेश का पालन जारी रहेगा। हाईकोर्ट में पेश की जा चुकी ASI की सर्वेक्षण रिपोर्ट मध्य प्रदेश में धार स्थित भोजशाला को लेकर पुरातात्विक सर्वेक्षण रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की जा चुकी है। रिपोर्ट में परिसर के ऐतिहासिक स्वरूप, स्थापत्य और शिलालेखों से जुड़े कई बड़े खुलासे सामने आए हैं। विशेष रूप से 10वीं से 13वीं शताब्दी के दौरान राजा भोज और राजा अर्जुन वर्मन द्वारा कराए गए निर्माण और सांस्कृतिक कार्यों के सबूत मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पूरे परिसर में कुल 106 स्तंभ मिले हैं, जिन पर अलग-अलग प्रकार की नक्काशी और डिजाइन हैं। इसके अलावा 32 शिलालेख भी हैं। इन शिलालेखों में राजा भोज के समय लिखित और अर्जुन वर्मन के राजगुरु मदन द्वारा रचित ‘पारिजलमंजरी नाटिका’ और ‘विजयश्री’ नाटक के पहले दो अंकों का उल्लेख है। अलग-अलग पत्थरों पर ऐसी कई रचनाएं और नाट्यांश लिखे हैं। परिसर से मिले कुछ शिलालेखों में 14वीं शताब्दी के दौरान मालवा में मुसलमानों के आने और मुस्लिम शासन की स्थापना का जिक्र भी है। बता दें कि 1389 ईस्वी में दिलावर खान, जिसका मूल नाम हुसैन था, को दिल्ली से मालवा प्रांत का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। बाद में दिलावर खान ने धार में स्वतंत्रता की घोषणा की। इसे अपनी राजधानी बनाया और 1401 ईस्वी में शाही उपाधि धारण कर स्वतंत्र रूप से राज्य चलाया। रिपोर्ट में दर्ज इन तथ्यों को लेकर ऐतिहासिक और कानूनी परिप्रेक्ष्य में आगे बहस की संभावना जताई जा रही है। तस्वीरों में समझिए, भोजशाला परिसर में क्या-क्या मिला पूरे परिसर में ऐसे कुल 106 पिलर खड़े हैं। सभी अलग-अलग स्थानों पर हैं और अलग-अलग दिशाओं में हैं। पुरातत्व विभाग ने इन 106 पिलर्स की वास्तविक डिजाइन की ड्रॉइंग भी कोर्ट में पेश की है। परिसर में 56 अरबी और फारसी शिलालेख भी मिले नागपुर के शिलालेख विज्ञान विभाग के एक पुरातत्वविद् ने भोजशाला परिसर की कमाल मौला मस्जिद और कमाल मौला मकबरे में मिले 56 अरबी और फारसी शिलालेखों का अध्ययन किया। इनमें 43 स्याही से लिखे शिलालेख हैं, जिनमें यहां आने वाले लोगों का विवरण है। कुछ शिलालेखों में इस्लामी मत, प्रार्थना और ईश्वर के गुणों जैसे धार्मिक ग्रंथों के अंश भी हैं जबकि कुछ में फारसी कविता के दोहे और व्यक्तियों के नाम हैं। अरबी और फारसी शिलालेख मालवा के मुस्लिम इतिहास को समझने में सहायक हैं, जो यहां मुसलमानों के आने और धार को राजधानी बनाकर मालवा में शासन की स्थापना के बारे में बताते हैं। शिलालेखों पर लिखीं कुरान की आयतें एएसआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कमाल मौला मकबरे के परिसर के अंदर शिलालेख मिले हैं। इन पर कुरान की आयतें लिखी हैं, जो ईश्वर के गुणों और एकेश्वरवाद पर आधारित हैं। ये शिलालेख दो प्रकार के हैं। अलाउद्दीन महमूद शाह ने बनवाई थी कुछ संरचना ASI की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां मिला एपी-48 शिलालेख मालवा के सुल्तान महमूद शाह प्रथम का है, जिसे इतिहास में अलाउद्दीन महमूद शाह के नाम से भी जाना जाता है। जिसने हिजरी 861 (1456-57 ईस्वी) में मकबरे के परिसर में गैलरी, आंगन, द्वार का गुंबद, पत्थर की जाली, कोठरियां, कुआं, आंतरिक भाग में एक ऊंचा चबूतरा, मठ, प्रवेश कक्ष, कंगूरे आदि जैसी संरचनाएं बनवाई थीं। इस शिलालेख को हिजरी 866 (1461-62 ईस्वी) में हबी अल-हाफिज अश-शिराजी अल-मुर्शिदी द्वारा बनवाया गया था। शिलालेख AP-01 कमाल मौला मस्जिद के केंद्रीय मेहराब के आसपास से मिला है। शिलालेख AP-02 उपदेश मंच के ऊपर स्थित है, जबकि शिलालेख AP-03 दक्षिणी दीवार पर मिला है। ये तीनों कुरान के शिलालेख हैं, जो इस संरचना को इस्लामी पहचान देते हैं। शिलालेख AP-02 कुरान के अध्याय 51 की आयत 55 का आंशिक भाग है। इसे पता चलता है कि यह संरचना इस्लाम धर्म के प्रचार, सांस्कृतिक मूल्यों और शिष्टाचार के संवर्धन और व्यापारिक केंद्र के रूप में काम करती रही है। ये खबर भी पढ़ें… भोजशाला पर अलाउद्दीन खिलजी के हमले के 700 साल भोजशाला का इतिहास करीब 990 साल पुराना है। 1034 ई. में राजा भोज ने इसका निर्माण कराया था और यहां मां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित की थी। 200 सालों से ज्यादा समय तक भोजशाला का वैभव कायम रहा, लेकिन 1305 ई में मोहम्मद खिलजी ने भोजशाला पर आक्रमण कर इसे नेस्तनाबूत करने की कोशिश की। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

तेजाजी नगर इलाके में बाइक में आग:पूरी जलकर हुई खाक,बदमाशो ने दो बाइको को किया आग के हवाले

तेजाजी नगर इलाके में बाइक में आग:पूरी जलकर हुई खाक,बदमाशो ने दो बाइको को किया आग के हवाले

इंदौर के तेजाजी नगर में लिबोंदी गेट के सामने एक बाइक में देर रात आग लग गई। आग की सूचना के बाद पुलिस की गाडी वहां पहुंची। आसपास के लोगो ने आग पर काबू करने का प्रयास किया। लेकिन आग पूरी तरह से जलकर खाक हो गई। तेजाजी नगर पुलिस के मुताबिक लिंबोदी गेट पर रात डेढ बजे के लगभग एक बाइक में आग लगने की सूचना मिली थी। जानकारी के बाद यहां पुलिस की गाडी पहुंची थी। लेकिन फायर ब्रिगेड को मामले की सूचना नही दी गई। बिल्डीग के रहवासियो ने यहां आग को बुझाने का प्रयास किया। लेकिन आग से पूरी बाइक जलकर खाक हो गई। बदमाशो ने लगाई आग बाणगंगा में भी रविन्द्र पाल निवासी वृंदावन कॉलोनी किला मैदान में भी अज्ञात बदमाशो ने उनके यहां खडी दो बाइक में आग लगा दी। रविद्र पाल ने बताया कि बाइक भागवत राव और प्रेमसिंह कीर की थी। रात में उन्हें आग लगने की जानकारी लगी तो वह उठे। इस दौरान आसपास के लोगो की मदद से आग पर काबू किया गया। पुलिस के मुताबिक आसपास के सीसीटीवी कैमरो से आग लगाने वाले बदमाशो की जानकारी निकाली जा रही है।

अवैध कॉलोनी बसाने वाले 79 कॉलोनाइजरों पर FIR के आदेश:ग्वालियर में 16 साल बाद बड़ा एक्शन, खाली प्लॉट सरकार लेगी कब्जे में

अवैध कॉलोनी बसाने वाले 79 कॉलोनाइजरों पर FIR के आदेश:ग्वालियर में 16 साल बाद बड़ा एक्शन, खाली प्लॉट सरकार लेगी कब्जे में

जिले में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा एक्शन लिया है। करीब 16 साल बाद कलेक्टर रुचिका चौहान के न्यायालय ने 51 अवैध कॉलोनियां बसाने वाले 79 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। सभी संबंधित एसडीएम को इन मामलों में आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि इन कॉलोनियों में जो खाली प्लॉट बचे हैं, उन्हें कॉलोनाइजर से छीनकर सरकारी कब्जे में लिया जाएगा। वहीं, जिन लोगों ने पहले ही प्लॉट खरीद लिए हैं, उन्हें फिलहाल किसी भी तरह की राहत मिलने की संभावना नहीं है। पहले ही दी जा चुकी थी चेतावनी अधिकारियों के मुताबिक अवैध कॉलोनियों में प्लॉट न खरीदने की चेतावनी पहले ही सार्वजनिक रूप से दी जा चुकी थी। साथ ही संबंधित जमीन की खसरा-खतौनी के कॉलम नंबर-12 में अवैध कॉलोनी की एंट्री भी दर्ज की जा चुकी है। सुनवाई के बाद लिया गया फैसला कलेक्टर न्यायालय ने सभी आरोपियों को विधिवत सुनवाई का मौका दिया, लेकिन कॉलोनी विकसित करने से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके बाद अलग-अलग एसडीएम द्वारा प्रस्तुत प्रकरणों पर सुनवाई कर सख्त कार्रवाई के आदेश जारी किए गए। प्रशासन की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। कलेक्टर न्यायालय में ऐसे ही 152 और प्रकरण लंबित हैं, जिन पर सुनवाई चल रही है। आने वाले दिनों में इन पर भी बड़े फैसले हो सकते हैं। इन क्षेत्रों में चला अभियान मुरार: उदयपुर, धनेली, करिगवां, बेरजा, सुनारपुरा ग्वालियर सिटी: ओड़पुरा, सुसैरा, कुलैथ, जिगसौली, इकहरा घाटीगांव, मोहना

Bhopal TI Line Attach | Ganja Smugglers 1.70 Lakh Deal

Bhopal TI Line Attach | Ganja Smugglers 1.70 Lakh Deal

नजीराबाद थाना प्रभारी अरुण शर्मा। भोपाल देहात के नजीराबाद थाने के प्रभारी अरुण शर्मा को एसपी ने तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच किया है। उन पर गांजा तस्करों से 1.70 लाख रुपए की वसूली कर बिना कार्रवाई किए छोड़ने के आरोप हैं। एसपी ने एसडीओपी वैशाली करहालिया के प्रतिवेदन पर कार्रवाई की है। थ . जानकारी के मुताबिक नजीराबाद इलाके से आरोपी सीताराम यादव उर्फ राधे यादव और जितेंद्र यादव को 30 मार्च को 430 ग्राम गांजा सहित आरक्षक मनोज धाकड़ ने हिरासत में लिया और थाने लेकर आया। थाना प्रभारी अरुण शर्मा को दोनों आरोपियों द्वारा गांजा बेचने की फिराक में ग्राहक की तलाश में घूमते हुए हिरासत में लिए जाने की बात बताई। बाद में आरक्षक ने ही बिचौलिया का काम किया। कार्रवाई न करने के ऐवज में दोनों आरोपियों से लाखों रुपए की मांग की गई। आरोपियों और पुलिस के बीच 1.70 रुपए में कार्रवाई न करने को लेकर सौदा ते हुआ। रकम मिलने के बाद आरोपियों पर बिना किसी कार्रवाई किए उन्हें थाने से छोड़ दिया गया। जिसकी जानकारी एसडीओपी वैशाली करहारिया को मिली। उन्होंने टीआई की करतूत के खिलाफ प्रतिवेदन तैयार किया और एसपी को अवगत कराया। जिसके आधार पर एसपी ने आरक्षक और थाना प्रभारी पर कार्रवाई तय की है।

दमोह में 14 साल का बच्चा गड्ढे में डूबा, मौत:महुआ बिनने के लिए घर से निकला था, पिता ने खोजबीन के बाद निकाला शव

दमोह में 14 साल का बच्चा गड्ढे में डूबा, मौत:महुआ बिनने के लिए घर से निकला था, पिता ने खोजबीन के बाद निकाला शव

दमोह जिले के तेंदूखेड़ा थाना क्षेत्र के सैलवाड़ा गांव में एक 14 साल के बच्चे की कुएं में डूबने से मौत हो गई। वह महुआ बिनने गया था और काफी देर तक घर नहीं लौटा था। खोजबीन के दौरान पिता को कुएं में डूबने की आशंका हुई। पिता ने कुएं में कूदकर बेटे को पानी से बाहर निकाला। उसे तत्काल तेंदूखेड़ा स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। घटना गबुधवार दोपहर की है। महुआ बीनने के लिए घर से निकला था नाबालिग मृतक की पहचान सैलवाड़ा निवासी सुमित रैकवार (14) पुत्र राजकुमार रैकवार के रूप में हुई है। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई पूरी कर शव का पोस्टमार्टम कराया और परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मृतक के पिता राजकुमार रैकवार ने बताया कि बुधवार सुबह परिवार के सभी सदस्य महुआ बीनने गए थे और वापस आ गए थे। सुमित दोपहर करीब 12 बजे फिर से महुआ बीनने की बात कहकर साइकिल लेकर घर से निकला था। पानी से भरे गढ्ढे में डूबा नाबालिग राजकुमार ने बताया कि उन्होंने सुमित को मना किया था कि थोड़े ही महुआ गिरे हैं, लेकिन वह नहीं माना और आधे घंटे में लौटने की बात कहकर चला गया। जब दोपहर 2 बजे तक वह वापस नहीं आया, तो राजकुमार खेतों में देखने गए। वहां सुमित नहीं दिखा, केवल महुआ के पेड़ के पास उसकी साइकिल खड़ी मिली। बेटे के कहीं नजर न आने पर पिता ने पास में बन रहे कुएं के गड्ढे में देखा, जहां सुमित पानी के नीचे था। उसे बाहर निकालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।