17 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा
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गर्मियों में बाहर निकलते ही तेज धूप का सामना करना पड़ता है। असल में सूरज की किरणों में अल्ट्रावॉयलेट रेज (UV रेज) होती हैं। ज्यादा देर धूप में रहने से ये धीरे-धीरे स्किन को डैमेज करती हैं। ऐसे में SPF (सन प्रोटेक्शन फैक्टर) सनस्क्रीन स्किन को प्रोटेक्ट कर सकता है।
इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में बात करेंगे SPF की। साथ ही जानेंगे कि–
- गर्मियों में SPF सनस्क्रीन लगाना क्यों जरूरी है?
- यह स्किन को कैसे प्रोटेक्ट करता है?
- सनस्क्रीन न लगाने से स्किन को क्या नुकसान हो सकते हैं?
एक्सपर्ट: डॉ. विनोद विज, कॉस्मेटोलॉजिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल, नवी मुंबई
सवाल- SPF क्या होता है? इसकी उपयोगिता क्या है?
जवाब- SPF (सन प्रोटेक्शन फैक्टर) एक रेटिंग है।
- ये बताता है कि कोई सनस्क्रीन UVB (अल्ट्रावायलेट B) किरणों से कितनी सुरक्षा देता है।
- जितना ज्यादा SPF, उतनी ज्यादा देर तक स्किन यूवी रेज से सुरक्षित रहती है।
- यह स्किन को डैमेज, टैनिंग और समय से पहले एजिंग से बचाने में मदद करता है।
सवाल- SPF सनस्क्रीन क्या होती है?
जवाब- SPF सनस्क्रीन एक तरह का सनस्क्रीन (दिन में लगाया जाने वाला बॉडी लोशन) ही है, जो SPF रेटेड है। यानी इसमें सूर्य की UVB किरणों से बचाने की क्षमता है।
यह स्किन को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाती है। स्किन पर एक लेयर बनाकर UV किरणों के असर को कम करती है।
सवाल- सनस्क्रीन क्रीम पर SPF 15, 30, 50 लिखा होता है। इसका क्या अर्थ है और इन क्रीम में क्या फर्क है?
जवाब- सनस्क्रीन पर लिखा SPF यह बताता है कि वह स्किन को UVB किरणों से किस लेवल तक प्रोटेक्ट करता है और अलग-अलग SPF लेवल में यह सुरक्षा थोड़ा-थोड़ा बढ़ती जाती है। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या ज्यादा SPF हमेशा बेहतर होता है?
जवाब- नहीं, ज्यादा SPF हमेशा बेहतर नहीं होता, क्योंकि SPF 30 और SPF 50 के बीच सन प्रोटेक्शन का अंतर बहुत कम होता है। जैसे-
- SPF 30 लगभग 97% तो SPF 50 करीब 98% UVB रेज से बचाते हैं यानी फर्क बहुत कम होता है।
- अगर रोज थोड़े समय के लिए ही बाहर जाना होता है तो SPF 30 सनस्क्रीन लगाना भी काफी है।
सवाल- SPF हमारी स्किन को UV किरणों से कैसे बचाता है?
जवाब- SPF एक प्रोटेक्टिव शील्ड की तरह काम करता है, जो स्किन पर लेयर बनाकर हानिकारक UV किरणों के असर को कम करता है। ग्राफिक में देखिए ये कैसे बचाता है-

सवाल- UVA और UVB किरणों में क्या फर्क है?
जवाब- UVA और UVB दोनों सूरज की हानिकारक किरणें हैं, लेकिन इनका असर अलग होता है।
UVA
- UVA किरणें स्किन को लॉन्ग टर्म में डैमेज करती हैं।
- ये स्किन की गहराई तक पहुंचती हैं।
- झुर्रियां, पिग्मेंटेशन व समय से पहले एजिंग का कारण बनती हैं।
UVB
- UVB किरणें स्किन को शॉर्ट टर्म में डैमेज करती हैं।
- ये स्किन की ऊपरी लेयर प्रभावित करती हैं।
- सनबर्न, रेडनेस व टैनिंग का कारण बनती हैं।
- इसलिए ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन चुनना जरूरी है।
सवाल- ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन क्या होती है?
जवाब- पॉइंटर्स से समझते हैं-
- स्किन को दोनों तरह की किरणों (UVA और UVB) से बचाने वाली सनस्क्रीन को ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन कहते है।
- यह सिर्फ सनबर्न ही नहीं, बल्कि टैनिंग, पिग्मेंटेशन और समय से पहले एजिंग जैसे नुकसान से भी सुरक्षा देती है।
- ऐसी सनस्क्रीन रोज इस्तेमाल करने से स्किन को कंप्लीट प्रोटेक्शन मिलता है।
सवाल- क्या गर्मियों में SPF सनस्क्रीन लगाना ज्यादा जरूरी है?
जवाब- हां, गर्मियों में तेज धूप और हाई UV इंडेक्स के कारण स्किन डैमेज होने का रिस्क कई गुना बढ़ जाता है। नीचे ग्राफिक में देखिए कि गर्मियों में ये क्रीम लगाना ज्यादा जरूरी क्यों है।

सवाल- किन लोगों को SPF सनस्क्रीन जरूर लगाना चाहिए?
जवाब- SPF सनस्क्रीन सबको लगाना चाहिए,लेकिन कुछ लोगों के लिए यह खासतौर पर जरूरी है। जैसे-
- जो रोज धूप में निकलते हैं।
- जो ज्यादा ट्रैवल करते हैं।
- जिनकी स्किन सेंसिटिव है।
- जिन्हें जल्दी टैनिंग हो जाती है।
- जिन्हें पिगमेंटेशन या एक्ने है।
- छोटे बच्चों को।
सवाल- गर्मियों में बिना सनस्क्रीन के धूप में जाने से स्किन को क्या नुकसान हो सकता है?
जवाब- सीधे UV किरणों के संपर्क से कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या हर स्किन टाइप की SPF की जरूरत अलग होती है?
जवाब- हां, हर स्किन टाइप के लिए SPF की जरूरत और उसका फॉर्मूला थोड़ा अलग हो सकता है। हालांकि SPF लेवल (जैसे SPF 30 या 50) आमतौर पर सभी के लिए जरूरी होता है। फर्क सिर्फ टेक्सचर और फॉर्मूले का होता है। पॉइंटर्स में देखते हैं-
ऑयली स्किन
SPF 30–50
- जेल बेस्ड/वाटर बेस्ड/ऑयल फ्री सनस्क्रीन
क्यों?
- हैवी क्रीम से पिंपल्स, ऑयल प्रोडक्शन बढ़ता है।
- हल्का सनस्क्रीन स्किन को मैट (बिना चमक, नॉन-ऑयली) रखता है।
ड्राई स्किन
SPF 30–50
- क्रीम बेस्ड/हाइड्रेटिंग सनस्क्रीन
क्यों?
- ताकि स्किन ड्राई न हो।
- हाइड्रेशन और प्रोटेक्शन दोनों बना रहे।
सेंसिटिव स्किन
SPF 30+
- मिनरल सनस्क्रीन (जिंक ऑक्साइड/टाइटेनियम डाइ ऑक्साइड)
- फ्रेगरेंस फ्री, हाइपोएलर्जेनिक
क्यों?
- केमिकल से स्किन इरिटेशन हो सकता है।
- स्किन पर रेडनेस हो सकती है।
- मिनरल सनस्क्रीन स्किन पर जेंटल होती है।
एक्ने-प्रोन स्किन
SPF 30–50
- जेल बेस्ड, फ्लुइड बेस्ड
- ऑयल फ्री, नॉन-कमेडोजेनिक (पोर्स को ब्लॉक न करने वाला)
क्यों?
- गलत सनस्क्रीन से पिंपल्स बढ़ सकते हैं।
- सही सनस्क्रीन से एक्ने मार्क्स डार्क नहीं होते।
नॉर्मल स्किन
SPF 30–50
- लोशन या क्रीम
- ब्रॉड स्पेक्ट्रम क्रीम
क्यों?
- स्किन बैलेंस्ड रहती है।
- इसलिए ज्यादा लिमिटेशन वाली क्रीम नहीं चाहिए।
- ब्रॉड स्पेक्ट्रम क्रीम बेस्ट होती है।
सवाल- क्या सही SPF सनस्क्रीन चुनने के लिए स्किन टाइप के अलावा कोई और पैरामीटर ध्यान में रखना भी जरूरी है?
जवाब- सनस्क्रीन चुनते समय सिर्फ स्किन टाइप ही नहीं, लाइफस्टाइल और धूप में बिताए जाने वाले समय का भी ध्यान रखना जरूरी है। कौन- सा SPF चुनें ये ग्राफिक में देखिए-

सवाल- सनस्क्रीन खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
जवाब- सनस्क्रीन खरीदते समय कुछ पैरामीटर चेक करना बेहद जरूरी है, ताकि सही और असरदार प्रोटेक्शन मिल सके। सनस्क्रीन खरीदते समय किन बातों का ख्याल रखें, ये ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या घर के अंदर रहने पर भी सनस्क्रीन लगाना जरूरी है?
जवाब- हां, घर के अंदर रहने पर भी सनस्क्रीन लगाना जरूरी है। UVA किरणें खिड़कियों के कांच से अंदर आ सकती हैं। ये स्किन को धीरे-धीरे डैमेज कर सकती हैं, जिससे पिगमेंटेशन और एजिंग बढ़ सकती है।

सवाल- सनस्क्रीन को दिन में कितनी बार लगाना चाहिए?
जवाब- सनस्क्रीन को दिन में हर 2–3 घंटे में लगाना चाहिए। अगर-
- धूप में हैं।
- पसीना आ रहा है।
- पानी के संपर्क में हैं।
- तो इसे और जल्दी री-अप्लाई करना जरूरी होता है, ताकि स्किन को लगातार प्रोटेक्शन मिलता रहे।
सवाल- क्या पसीना या पानी सनस्क्रीन के असर को कम कर देता है?
जवाब- हां, पसीना और पानी सनस्क्रीन के असर को कम कर सकते हैं, क्योंकि इससे सनस्क्रीन की लेयर स्किन से हटने लगती है।
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गर्मियों में कपड़े-खानपान के साथ स्किन की जरूरतें भी बदल जाती हैं। तेज धूप, पसीना और पॉल्यूशन स्किन पर सीधा असर डालते हैं। ऐसे में अगर आप सर्दियों वाला ही स्किन केयर रूटीन फॉलो करते हैं तो स्किन ऑयली, डल या एक्ने-प्रोन हो सकती है। पूरी खबर पढ़ें…















































