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बांग्लादेश राष्ट्रपति चुनाव में बीएनपी महासचिव फखरुल की जीत तय:ढाका यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र पढ़ा, वहीं लेक्चरर बने; खालिदा सरकार में मंत्री रह चुके

बांग्लादेश राष्ट्रपति चुनाव में बीएनपी महासचिव फखरुल की जीत तय:ढाका यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र पढ़ा, वहीं लेक्चरर बने; खालिदा सरकार में मंत्री रह चुके

बांग्लादेश की रूलिंग पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम अलमगीर अब देश के अगले राष्ट्रपति बनने की राह पर हैं। BNP ने गुरुवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने 1960 के दशक में ढाका यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र की पढ़ाई की थी और 1972 में वे ढाका कॉलेज में लेक्चरर बने। 2001 में खालिदा जिया के नेतृत्व वाली BNP सरकार में वे पहले कृषि राज्य मंत्री रहे। बाद में उन्होंने नागरिक उड्डयन और पर्यटन राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। BNP के महासचिव पद से इस्तीफा दिया उम्मीदवारी मिलते ही 78 साल के फखरुल ने BNP के महासचिव पद और पार्टी की स्थायी समिति से इस्तीफा दे दिया। गुरुवार को ही उनका नामांकन पत्र चुनाव आयोग में जमा कर दिया गया। BNP के स्थायी समिति सदस्य अब्दुल मोईन खान के नेतृत्व में पार्टी का प्रतिनिधिमंडल ढाका के अगरगांव स्थित चुनाव आयोग पहुंचा और मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन को नामांकन पत्र सौंपा। 20 अगस्त को होगा राष्ट्रपति चुनाव बांग्लादेश में राष्ट्रपति को जनता सीधे नहीं चुनती। संसद के सदस्य राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। राष्ट्रपति चुनाव के लिए 20 अगस्त को मतदान होगा। फरवरी में हुए आम चुनाव में BNP को संसद में दो-तिहाई बहुमत मिला था। इसलिए फखरुल की जीत लगभग तय मानी जा रही है। पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल अभी करीब दो साल बाकी था। फिलहाल संसद के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। फखरुल चुनाव जीतते हैं तो वे बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति होंगे। छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर फखरुल का राजनीतिक सफर करीब छह दशक पुराना है। 1960 के दशक में ढाका यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उन्होंने छात्र राजनीति शुरू की। वे उस समय ईस्ट पाकिस्तान स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़े थे। 1969 में राष्ट्रपति अयूब खान के खिलाफ बड़े जन आंदोलन के दौरान वे छात्र संगठन की ढाका यूनिवर्सिटी इकाई के अध्यक्ष थे। राजनीतिक गतिविधियों के कारण उन्हें गिरफ्तार भी किया गया और जेल जाना पड़ा। हालांकि, छात्र राजनीति के बाद वे तुरंत सक्रिय राजनीति में नहीं आए। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने शिक्षक के तौर पर करियर शुरू किया। 1972 में वे ढाका कॉलेज में लेक्चरर बने। बाद में कई सरकारी कॉलेजों में भी पढ़ाया। सरकारी नौकरी भी की फखरुल ने सरकारी व्यवस्था में भी काम किया। वे इंस्पेक्शन एंड ऑडिट निदेशालय में डिप्टी डायरेक्टर रहे। इसके अलावा बांग्लादेश नेशनल कमीशन फॉर यूनेस्को से भी जुड़े रहे। 1980 के दशक की शुरुआत में उन्होंने तत्कालीन उपप्रधानमंत्री एसए बारी के निजी सचिव के तौर पर भी काम किया। लेकिन कुछ साल बाद उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर सक्रिय राजनीति में आने का फैसला किया। 1986 में राजनीति में आए फखरुल ने 1986 में सरकारी नौकरी छोड़ दी। दो साल बाद 1988 में वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर ठाकुरगांव नगरपालिका के चेयरमैन चुने गए। 1990 के दशक की शुरुआत में एरशाद विरोधी आंदोलन के दौरान वे BNP में शामिल हुए। 1992 में उन्हें BNP की ठाकुरगांव जिला इकाई का अध्यक्ष बनाया गया। यहीं से उनकी स्थानीय राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचने की शुरुआत हुई। 2001 में सांसद और मंत्री बने 2001 के आम चुनाव में फखरुल ठाकुरगांव-1 सीट से BNP के उम्मीदवार के तौर पर सांसद चुने गए। खालिदा जिया के नेतृत्व वाली BNP सरकार में उन्हें पहले कृषि राज्य मंत्री बनाया गया। बाद में उन्होंने नागरिक उड्डयन और पर्यटन राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। 2008 के चुनाव के बाद BNP विपक्ष में चली गई। इसके बाद पार्टी में फखरुल की भूमिका लगातार बढ़ती गई। करीब एक दशक तक BNP के महासचिव रहे 2009 में BNP की राष्ट्रीय परिषद ने फखरुल को वरिष्ठ संयुक्त महासचिव बनाया। 2011 में वे पार्टी के कार्यवाहक महासचिव बने। करीब पांच साल बाद 30 मार्च 2016 को उन्हें आधिकारिक तौर पर BNP का महासचिव नियुक्त किया गया। इसके बाद करीब एक दशक तक वे पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरों में रहे। खालिदा जिया की गिरफ्तारी से लेकर सरकार विरोधी प्रदर्शनों और चुनावों को लेकर हुए राजनीतिक टकराव तक, फखरुल लगभग हर बड़े मुद्दे पर BNP की तरफ से सामने रहे। वे मीडिया के सामने पार्टी का पक्ष रखने वाले प्रमुख नेताओं में भी शामिल रहे। इस दौरान उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया और कुछ समय जेल में भी बिताना पड़ा। दूसरे कई BNP नेताओं की तुलना में उनकी राजनीतिक भाषा ज्यादा संयमित रही है। लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण वे पार्टी के अनुभवी नेताओं और प्रमुख रणनीतिकारों में गिने जाते हैं। राष्ट्रपति पद के लिए पार्टी से अलग हुए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने राष्ट्रपति पद के लिए फखरुल के नाम का प्रस्ताव रखा। स्थायी समिति से मंजूरी मिलने के बाद फखरुल ने महासचिव और समिति के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया। बांग्लादेश के संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति का पद सक्रिय पार्टी राजनीति से ऊपर होता है। इसलिए उनके पार्टी पदों से इस्तीफे को राष्ट्रपति पद की संभावित नई भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्ष ने भी उतारा उम्मीदवार राष्ट्रपति चुनाव में बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने भी अपना उम्मीदवार उतारा है। जमात के नेतृत्व वाले गठबंधन के नेता और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद ने अपना नामांकन पत्र जमा कर दिया है। हालांकि, संसद में BNP के दो-तिहाई बहुमत के कारण फखरुल की जीत की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है। छात्र नेता से राष्ट्रपति पद तक का सफर मिर्जा फखरुल इस्लाम अलमगीर का राजनीतिक सफर कई अलग-अलग भूमिकाओं से होकर गुजरा है। छात्र नेता से शुरुआत करने के बाद वे शिक्षक बने, सरकारी अधिकारी के तौर पर काम किया और नगरपालिका अध्यक्ष रहे। इसके बाद सांसद और राज्य मंत्री बने। फिर करीब एक दशक तक BNP के महासचिव के तौर पर पार्टी की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे। अब वे बांग्लादेश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की ओर बढ़ रहे हैं। अगर 20 अगस्त को संसद में उन्हें जीत मिलती है, तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी की राजनीति से ऊपर उठकर पूरे देश के संवैधानिक प्रमुख की भूमिका निभाने की होगी।

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बांग्लादेश की रूलिंग पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम अलमगीर अब देश के अगले राष्ट्रपति बनने की राह पर हैं। BNP ने गुरुवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने 1960 के दशक में ढाका यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र की पढ़ाई की थी और 1972 में वे ढाका कॉलेज में लेक्चरर बने। 2001 में खालिदा जिया के नेतृत्व वाली BNP सरकार में वे पहले कृषि राज्य मंत्री रहे। बाद में उन्होंने नागरिक उड्डयन और पर्यटन राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। BNP के महासचिव पद से इस्तीफा दिया उम्मीदवारी मिलते ही 78 साल के फखरुल ने BNP के महासचिव पद और पार्टी की स्थायी समिति से इस्तीफा दे दिया। गुरुवार को ही उनका नामांकन पत्र चुनाव आयोग में जमा कर दिया गया। BNP के स्थायी समिति सदस्य अब्दुल मोईन खान के नेतृत्व में पार्टी का प्रतिनिधिमंडल ढाका के अगरगांव स्थित चुनाव आयोग पहुंचा और मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन को नामांकन पत्र सौंपा। 20 अगस्त को होगा राष्ट्रपति चुनाव बांग्लादेश में राष्ट्रपति को जनता सीधे नहीं चुनती। संसद के सदस्य राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। राष्ट्रपति चुनाव के लिए 20 अगस्त को मतदान होगा। फरवरी में हुए आम चुनाव में BNP को संसद में दो-तिहाई बहुमत मिला था। इसलिए फखरुल की जीत लगभग तय मानी जा रही है। पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल अभी करीब दो साल बाकी था। फिलहाल संसद के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। फखरुल चुनाव जीतते हैं तो वे बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति होंगे। छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर फखरुल का राजनीतिक सफर करीब छह दशक पुराना है। 1960 के दशक में ढाका यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उन्होंने छात्र राजनीति शुरू की। वे उस समय ईस्ट पाकिस्तान स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़े थे। 1969 में राष्ट्रपति अयूब खान के खिलाफ बड़े जन आंदोलन के दौरान वे छात्र संगठन की ढाका यूनिवर्सिटी इकाई के अध्यक्ष थे। राजनीतिक गतिविधियों के कारण उन्हें गिरफ्तार भी किया गया और जेल जाना पड़ा। हालांकि, छात्र राजनीति के बाद वे तुरंत सक्रिय राजनीति में नहीं आए। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने शिक्षक के तौर पर करियर शुरू किया। 1972 में वे ढाका कॉलेज में लेक्चरर बने। बाद में कई सरकारी कॉलेजों में भी पढ़ाया। सरकारी नौकरी भी की फखरुल ने सरकारी व्यवस्था में भी काम किया। वे इंस्पेक्शन एंड ऑडिट निदेशालय में डिप्टी डायरेक्टर रहे। इसके अलावा बांग्लादेश नेशनल कमीशन फॉर यूनेस्को से भी जुड़े रहे। 1980 के दशक की शुरुआत में उन्होंने तत्कालीन उपप्रधानमंत्री एसए बारी के निजी सचिव के तौर पर भी काम किया। लेकिन कुछ साल बाद उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर सक्रिय राजनीति में आने का फैसला किया। 1986 में राजनीति में आए फखरुल ने 1986 में सरकारी नौकरी छोड़ दी। दो साल बाद 1988 में वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर ठाकुरगांव नगरपालिका के चेयरमैन चुने गए। 1990 के दशक की शुरुआत में एरशाद विरोधी आंदोलन के दौरान वे BNP में शामिल हुए। 1992 में उन्हें BNP की ठाकुरगांव जिला इकाई का अध्यक्ष बनाया गया। यहीं से उनकी स्थानीय राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचने की शुरुआत हुई। 2001 में सांसद और मंत्री बने 2001 के आम चुनाव में फखरुल ठाकुरगांव-1 सीट से BNP के उम्मीदवार के तौर पर सांसद चुने गए। खालिदा जिया के नेतृत्व वाली BNP सरकार में उन्हें पहले कृषि राज्य मंत्री बनाया गया। बाद में उन्होंने नागरिक उड्डयन और पर्यटन राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। 2008 के चुनाव के बाद BNP विपक्ष में चली गई। इसके बाद पार्टी में फखरुल की भूमिका लगातार बढ़ती गई। करीब एक दशक तक BNP के महासचिव रहे 2009 में BNP की राष्ट्रीय परिषद ने फखरुल को वरिष्ठ संयुक्त महासचिव बनाया। 2011 में वे पार्टी के कार्यवाहक महासचिव बने। करीब पांच साल बाद 30 मार्च 2016 को उन्हें आधिकारिक तौर पर BNP का महासचिव नियुक्त किया गया। इसके बाद करीब एक दशक तक वे पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरों में रहे। खालिदा जिया की गिरफ्तारी से लेकर सरकार विरोधी प्रदर्शनों और चुनावों को लेकर हुए राजनीतिक टकराव तक, फखरुल लगभग हर बड़े मुद्दे पर BNP की तरफ से सामने रहे। वे मीडिया के सामने पार्टी का पक्ष रखने वाले प्रमुख नेताओं में भी शामिल रहे। इस दौरान उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया और कुछ समय जेल में भी बिताना पड़ा। दूसरे कई BNP नेताओं की तुलना में उनकी राजनीतिक भाषा ज्यादा संयमित रही है। लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण वे पार्टी के अनुभवी नेताओं और प्रमुख रणनीतिकारों में गिने जाते हैं। राष्ट्रपति पद के लिए पार्टी से अलग हुए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने राष्ट्रपति पद के लिए फखरुल के नाम का प्रस्ताव रखा। स्थायी समिति से मंजूरी मिलने के बाद फखरुल ने महासचिव और समिति के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया। बांग्लादेश के संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति का पद सक्रिय पार्टी राजनीति से ऊपर होता है। इसलिए उनके पार्टी पदों से इस्तीफे को राष्ट्रपति पद की संभावित नई भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्ष ने भी उतारा उम्मीदवार राष्ट्रपति चुनाव में बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने भी अपना उम्मीदवार उतारा है। जमात के नेतृत्व वाले गठबंधन के नेता और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद ने अपना नामांकन पत्र जमा कर दिया है। हालांकि, संसद में BNP के दो-तिहाई बहुमत के कारण फखरुल की जीत की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है। छात्र नेता से राष्ट्रपति पद तक का सफर मिर्जा फखरुल इस्लाम अलमगीर का राजनीतिक सफर कई अलग-अलग भूमिकाओं से होकर गुजरा है। छात्र नेता से शुरुआत करने के बाद वे शिक्षक बने, सरकारी अधिकारी के तौर पर काम किया और नगरपालिका अध्यक्ष रहे। इसके बाद सांसद और राज्य मंत्री बने। फिर करीब एक दशक तक BNP के महासचिव के तौर पर पार्टी की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे। अब वे बांग्लादेश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की ओर बढ़ रहे हैं। अगर 20 अगस्त को संसद में उन्हें जीत मिलती है, तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी की राजनीति से ऊपर उठकर पूरे देश के संवैधानिक प्रमुख की भूमिका निभाने की होगी।

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