आगामी विधानसभा चुनाव से पहले असम की राजनीति में एक अहम बदलाव देखने को मिल रहा है। झारखंड की प्रमुख राजनीतिक पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने असम की क्षेत्रीय पार्टी जय भारत पार्टी (जेबीपी) को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य असम के आदिवासियों और चाय जनजाति समुदायों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान करना है।
करीब दो साल पहले असम के विभिन्न आदिवासियों, समुदायों और समुदायों के सहयोग से जय भारत पार्टी को अब झामुमो का मजबूत साथ मिला है। दोनों दल मिलकर एक साझा मंच पर चुनावी लड़ाई लड़ रहे हैं और राजनीतिक शक्ति हासिल कर समूह के सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों को हल करने की रणनीति बना रहे हैं। इस विधानसभा चुनाव में यह गठबंधन 18 नामांकन पर संयुक्त प्रस्ताव पेश किया गया है, जो असम की राजनीति में एक नई दिशा की ओर संकेत करता है।
पूर्व उग्रवादियों का समर्थन
इस राजनीतिक पहल को उन पूर्व-जगेंद उग्रवादियों के सदस्यों का भी खुला समर्थन मिला है, जो अब मुख्यधारा में लौट आए हैं। विशेष रूप से साहिल मुंडा, जो पहले एक उग्रवादी संगठन के शीर्ष नेता रह चुके हैं, सरूपथार विधानसभा क्षेत्र से चुनावी लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके नेतृत्व में इस बार जय भारत पार्टी और झामुमो के कई पूर्व सदस्य सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
बड़ा राजनीतिक प्रभाव
पार्टी के नेताओं के अनुसार, उनके चुनाव में उतरने का मुख्य उद्देश्य अपने समुदाय की पुरानी समस्याओं का समाधान करना है। साहिल मुंडा ने कहा कि यह अभी शुरुआत है और असम की लगभग 40 विधानसभाओं में जूनियर और चाइ ट्राइब कम्युनिटी की भूमिका शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में यह गठबंधन सभी चुनावी लड़ाइयों और आम चुनावों में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगा। उनका मानना है कि आने वाले समय में जय भारत पार्टी और जेएमएम असम की राजनीति में एक अहम शक्ति उभर कर सामने आएगी.
जन जातीय अधिकार पर जोर
अलायंस ने स्पष्ट किया है कि उनका मुख्य लक्ष्य जनजातीय समुदाय को वर्षों से शोषण और अज्ञात लोगों से मुक्त कराना है। विशेष रूप से जन प्रौद्योगिकी प्रौद्योगिकी (एसटी स्टेटस) के समाधान पर जोर दिया जा रहा है।
साहिल मुंडा ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों में कई जनवादी उग्रवादियों को सरकार की ओर से कोई भी सहायता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि इनमें से कई लोग आज देहाती होकर जीवनयापन करने को मजबूर हैं।
असम की राजनीति में नया गुणांक
जय भारत पार्टी और झामुमो का यह गठबंधन असम की राजनीति में एक नया समीकरण बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जदयू और चाय जनजाति समुदाय, जो लंबे समय से सरकार गठन में अहम भूमिका निभा रहे हैं, अब एक समसामयिक राजनीतिक ताकत के रूप में उभर सकते हैं।
राजनीतिक सिद्धांतों का मानना है कि इस गठबंधन की सक्रियता से आने वाले समय में असम की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिसमें एक जनवादी मुख्यमंत्री के रूप में जनवादी नेतृत्व की भूमिका और मजबूत हो सकती है।
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