Sunday, 05 Apr 2026 | 11:17 PM

Trending :

मुंबई से जैश के 2 आतंकी पकड़े गए:दिल्ली में आतंकी हमले की साजिश कर रहे थे, भारत विरोधी मिशन खिलाफत से जुड़े तार जन्म से खराब कान, 1 इंजेक्शन से सुनायी देने लगी आवाजें, क्या है जीन थेरेपी? ये गर्मियों का सुपरफ्रूट! इसमें ठंडक भी, ताकत भी…आप भी नहीं जानते होंगे शहतूत के इतने फायदे रीवा में रविवार रात सैकड़ों वाहन जाम में फंसे:रतहरा से नए बस स्टैंड और सिरमौर चौराहे तक लगी कतारें, घंटों तक रेंगते रही गाड़ियां ग्वालियर में रेबीज से युवक की मौत, रोज 100+ मामले:5 दिन पहले एक शख्स ने अस्पताल में भर्ती कराया था; नाम दिया था 'गोलू' पहले प्रेमिका ने दी जान, फिर प्रेमी ने खाया जहर:दतिया में महिला ने लगाई फांसी, 48 घंटे बाद लड़के ने खा लिया सल्फास
EXCLUSIVE

केरल विधानसभा चुनाव: CM विजयन को बुजुगों से बड़ी आस:राज्य में इन पर सबसे ज्यादा खर्च; इस चुनाव में 'कैश' स्कीम्स की भूमिका भी अहम

केरल विधानसभा चुनाव: CM विजयन को बुजुगों से बड़ी आस:राज्य में इन पर सबसे ज्यादा खर्च; इस चुनाव में 'कैश' स्कीम्स की भूमिका भी अहम

चुनावों में विचारधारा और कोर वोट बैंक बिना किसी तनाव के कैसे काम करते हैं, इसे गहराई से समझने के लिए केरल सबसे मुफीद राज्य है। यहां 140 सीटों पर विधानसभा चुनावों की घोषणा किसी भी वक्त हो सकती है, लेकिन इन दिनों कहीं भी चुनावी शोर नहीं है, क्योंकि यहां चुनाव विचारधारा ही लीड करती रही है। केरल के बुजुर्ग और महिलाएं इस विचारधारा को लीड करते हैं। बुजुर्ग एलडीएफ के कोर वोट बैंक की रीढ़ हैं। इसलिए विजयन सरकार अपनी कल्याणकारी योजनाओं का 48% पैसा इन्हीं पर खर्च कर रही है। देश का पहला ‘एल्डरली बजट’ इन्हीं के लिए लेकर आई। यही अहमियत महिलाओं की है। इसे ऐसे समझें… नेदुमकंदम गांव पहुंचा दैनिक भास्कर दैनिक भास्कर मध्य केरल के इडुक्की जिले के इलाइची उत्पादक गांव नेदुमकंदम पहुंचा। यह महिला प्रधान गांव है। यहां आय के दो सोर्स हैं। पहला इलाइची और दूसरा कल्याणकारी योजनाएं। जलवायु परिवर्तन के कारण इलाइची का आकार छोटा और रंग हल्का हो रहा है। इससे निर्यात पर असर पड़ा है और किसानों की आय पर भी। यहां के ग्रामीणों को 3 साल से वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) शासित पिनराई विजयन सरकार की योजनाओं से बहुत मदद मिली। लगभग हर परिवार कुदुम्बश्री जैसी देश की सबसे बड़ी स्व सहायता समूह और मुफ्त राशन किट योजनाओं से जुड़ा हुआ है।दैनिक भास्कर ने नेदुमकंदम की किसान रश्मिका वेल्लई (34) से बता की, उन्होंने बताया पहले हम सिर्फ इलाइची पर ही निर्भर थे। अब आत्मनिर्भर हैं। कुदुम्बश्री (करीब 45 लाख महिलाएं) ने घर बैठे कमाने का मौका दिया। देश-दुनिया से जोड़ा। मुफ्त राशन किट ने खर्च बचाया। और सरकार एक हजार रुपए महीना भी दे रही है। मां को पेंशन मिल रही है। अब हमें इलाइची की पैदावार घटने का डर नहीं है। इडुक्की में 43 फीसदी ईसाई आबादी, पहले कांग्रेस-UDF अब LDF का गढ़ इडुक्की में ईसाई आबादी (43.42%) है और 2016 से पहले यह कांग्रेस नीत यूडीएफ का गढ़ रहा है। लेकिन, 2021 में यहां की 5 में से 4 सीटें एलडीएफ ने जीती थीं। समाजशास्त्री, शोधकर्ता व कलाडी संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रोफेसर डॉ. सुनील पी. एलाडियम बताते हैं कि राज्य में इस बार 1.38 करोड़ महिला वोटर हैं। 2021 में 1.41 करोड़ थीं। यानी पिछली बार से कम हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए पिछले साल वाम सरकार ने नकद राशि वाली योजना लॉन्च की। इस स्कीम से 31 लाख, कुदुम्बश्री से 45 लाख तो सामाजिक सुरक्षा पेंशन स्कीम से 60 लाख महिलाएं सीधे तौर पर जुड़ी हैं। कुल महिला वोटर का करीब 73%। जनकल्याणकारी योजनाओं का 22% पैसा इन पर खर्च हो रहा है। इसी तरह, राज्य में 115 सीटें ऐसी हैं, जिन्हें मुख्य रूप से ग्रामीण या अर्ध शहरी माना जाता है। इनमें ग्राम पंचायतों का बड़ा हिस्सा होता है और जहां खेती, बागवानी और प्रवासी आय का प्रभाव ज्यादा रहता है। यही एलडीएफ का कोर वोट बैंक भी बन गया है। इसका कारण यह है कि यहां बुजुर्ग और महिलाओं की तादाद ज्यादा है। 98% महिलाओं के पास बैंक खाते हैं। यही वजह है कि कर्ज संकट के बावजूद सीएम पिनराई विजयन ने नकद स्कीम के ​लिए हर साल ₹3800 करोड़ का बोझ उठाया। शी-टैक्सी जैसी कुल 10 ऐसी योजनाएं हैं, जिनसे महिलाएं सीधे लाभान्वित हो रही हैं। युवाओं से ज्यादा हुए बुजुर्ग, 48% पैसा इन्हीं पर खर्च केरल में 2.69 करोड़ मतदाता हैं। इनमें 18-19 आयु वर्ग के नए युवा मतदाता 4-5 लाख के बीच हैं। जबकि 60 से 79 की उम्र वाले बुजुर्ग 53 लाख से ज्यादा हैं। इनमें भी ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में हैं, जहां एलडीएफ मजबूत है। इसीलिए चुनाव भी पेंशन, स्वास्थ्य सेवा और जीवन यापन की लागत जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमता है। इस बार भी एलडीएफ ने अपनी ज्यादातर कल्याणकारी योजनाओं के केंद्र में इन्हें ही रखा है। जनकल्याण का 48% पैसा बुजुर्गों पर ही खर्च हो रहा है। इनके लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन समेत करीब 46 हजार करोड़ की 4 योजनाएं चल रही हैं। भाजपा अर्ध शहरी तो कांग्रेस पुरानी सीटों पर दम लगा रही चुनाव पर बात नहीं, नेताओं से ज्यादा फिल्मों के पोस्टर भास्कर टीम ने एर्नाकुलम, इडुक्की, कोट्टायम, अलप्पुझा, पतनमतिट्टा जिलों के कुछ शहरी और ग्रामीण इलाकों में लोगों से केरल के नए नाम ‘केरलम’ पर बात की। एलेप्पी में हाउसबोट के मालिक त्रिवेंद्रम एस. ने सिर्फ इतना कहा- हमें फर्क नहीं पड़ता? एर्नाकुलम की जिस मरीन ड्राइव पर बीते दिनों एनडीए की रैली हुई, वहां घूम रहे 29 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर एस. सुरेश कहते हैं कि केरल की पहचान सामाजिक जागरुकता, साक्षरता है। केरलम का कहीं विरोध नहीं है। यह चुनावी मुद्दा है। यहां नेताओं से ज्यादा फिल्मों के पोस्टर मिलेंगे, क्योंकि लोग इसे समाज का आईना मानते हैं। फैशन को फॉलो नहीं करते। चुनाव यहां सामाजिक जिंदगी पर असर नहीं डालते। ………………… यह खबर भी पढ़ें… केरल चुनाव 2026, अबकी बार गठबंधन नहीं: चेहरों पर केंद्रित हो रहा चुनावी मुकाबला; पिनाराई सरकार अपने काम गिना रही केरल विधानसभा चुनाव महज दो-तीन महीने दूर है। लोगों ने चर्चा है कि क्या पिनराई विजयन के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा (LDF ) तीसरी बार सत्ता में लौटकर इतिहास रचेगा या कांग्रेस नीत यूडीएफ को नेतृत्व की स्पष्टता और जमीनी सक्रियता का फायदा मिलेगा? नगर निकाय चुनाव में कई शहरी वार्डों में वोट शेयर बढ़ाने वाली भाजपा क्या असर डालेगी? पूरी खबर पढ़ें…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
देवास में शीतला सप्तमी पर मंदिरों में भीड़:महिलाओं ने एक दिन पहले बनाकर रखा भोजन, बासी प्रसाद के रूप में करेंगे ग्रहण

March 10, 2026/
1:07 pm

देवास शीतला सप्तमी के अवसर पर मंगलवार को शहर के शीतला माता मंदिरों में महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाओं...

ADR रिपोर्ट- भाजपा को सबसे ज्यादा चंदा मिला:अन्य दलों को मिले चंदे का 10 गुना, पार्टियों को इस साल 161% अधिक पैसा मिला

March 26, 2026/
6:45 pm

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को मिले चंदे में...

‘स्टारड्यू वैली’ के 10 साल में 5 करोड़ ग्राहक:कॉर्पोरेट बर्नआउट का मरहम बना यह गेम, हॉलीवुड सेलिब्रिटी भी इसके दीवाने; पोकेमॉन-कॉल ऑफ ड्यूटी जैसे फ्रेंचाइजी गेम पीछे छूटे

February 27, 2026/
1:18 pm

कल्पना कीजिए आप अपनी थका देने वाली कॉर्पोरेट नौकरी और फाइलों के अंबार को हमेशा के लिए पीछे छोड़ देते...

मन को शांत रखने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स, बस कुछ मिनटों का ये फॉर्मूला बदल देगा आपकी जिंदगी

April 5, 2026/
11:10 am

तनाव राहत युक्तियाँ: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्ट्रेस और मेंटल पार्ट एक कॉमन चैलेंज बन गया है। ऑफिस...

शेयर बाजार में आ सकती है सबसे बड़ी गिरावट:रिच डैड पुअर डैड के लेखक ने चेताया; चांदी जरूर खरीदें, भले एक वक्त का खाना न खाएं

March 11, 2026/
4:46 pm

मशहूर किताब ‘रिच डैड पुअर डैड’ के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। कियोसाकी...

राजनीति

केरल विधानसभा चुनाव: CM विजयन को बुजुगों से बड़ी आस:राज्य में इन पर सबसे ज्यादा खर्च; इस चुनाव में 'कैश' स्कीम्स की भूमिका भी अहम

केरल विधानसभा चुनाव: CM विजयन को बुजुगों से बड़ी आस:राज्य में इन पर सबसे ज्यादा खर्च; इस चुनाव में 'कैश' स्कीम्स की भूमिका भी अहम

चुनावों में विचारधारा और कोर वोट बैंक बिना किसी तनाव के कैसे काम करते हैं, इसे गहराई से समझने के लिए केरल सबसे मुफीद राज्य है। यहां 140 सीटों पर विधानसभा चुनावों की घोषणा किसी भी वक्त हो सकती है, लेकिन इन दिनों कहीं भी चुनावी शोर नहीं है, क्योंकि यहां चुनाव विचारधारा ही लीड करती रही है। केरल के बुजुर्ग और महिलाएं इस विचारधारा को लीड करते हैं। बुजुर्ग एलडीएफ के कोर वोट बैंक की रीढ़ हैं। इसलिए विजयन सरकार अपनी कल्याणकारी योजनाओं का 48% पैसा इन्हीं पर खर्च कर रही है। देश का पहला ‘एल्डरली बजट’ इन्हीं के लिए लेकर आई। यही अहमियत महिलाओं की है। इसे ऐसे समझें… नेदुमकंदम गांव पहुंचा दैनिक भास्कर दैनिक भास्कर मध्य केरल के इडुक्की जिले के इलाइची उत्पादक गांव नेदुमकंदम पहुंचा। यह महिला प्रधान गांव है। यहां आय के दो सोर्स हैं। पहला इलाइची और दूसरा कल्याणकारी योजनाएं। जलवायु परिवर्तन के कारण इलाइची का आकार छोटा और रंग हल्का हो रहा है। इससे निर्यात पर असर पड़ा है और किसानों की आय पर भी। यहां के ग्रामीणों को 3 साल से वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) शासित पिनराई विजयन सरकार की योजनाओं से बहुत मदद मिली। लगभग हर परिवार कुदुम्बश्री जैसी देश की सबसे बड़ी स्व सहायता समूह और मुफ्त राशन किट योजनाओं से जुड़ा हुआ है।दैनिक भास्कर ने नेदुमकंदम की किसान रश्मिका वेल्लई (34) से बता की, उन्होंने बताया पहले हम सिर्फ इलाइची पर ही निर्भर थे। अब आत्मनिर्भर हैं। कुदुम्बश्री (करीब 45 लाख महिलाएं) ने घर बैठे कमाने का मौका दिया। देश-दुनिया से जोड़ा। मुफ्त राशन किट ने खर्च बचाया। और सरकार एक हजार रुपए महीना भी दे रही है। मां को पेंशन मिल रही है। अब हमें इलाइची की पैदावार घटने का डर नहीं है। इडुक्की में 43 फीसदी ईसाई आबादी, पहले कांग्रेस-UDF अब LDF का गढ़ इडुक्की में ईसाई आबादी (43.42%) है और 2016 से पहले यह कांग्रेस नीत यूडीएफ का गढ़ रहा है। लेकिन, 2021 में यहां की 5 में से 4 सीटें एलडीएफ ने जीती थीं। समाजशास्त्री, शोधकर्ता व कलाडी संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रोफेसर डॉ. सुनील पी. एलाडियम बताते हैं कि राज्य में इस बार 1.38 करोड़ महिला वोटर हैं। 2021 में 1.41 करोड़ थीं। यानी पिछली बार से कम हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए पिछले साल वाम सरकार ने नकद राशि वाली योजना लॉन्च की। इस स्कीम से 31 लाख, कुदुम्बश्री से 45 लाख तो सामाजिक सुरक्षा पेंशन स्कीम से 60 लाख महिलाएं सीधे तौर पर जुड़ी हैं। कुल महिला वोटर का करीब 73%। जनकल्याणकारी योजनाओं का 22% पैसा इन पर खर्च हो रहा है। इसी तरह, राज्य में 115 सीटें ऐसी हैं, जिन्हें मुख्य रूप से ग्रामीण या अर्ध शहरी माना जाता है। इनमें ग्राम पंचायतों का बड़ा हिस्सा होता है और जहां खेती, बागवानी और प्रवासी आय का प्रभाव ज्यादा रहता है। यही एलडीएफ का कोर वोट बैंक भी बन गया है। इसका कारण यह है कि यहां बुजुर्ग और महिलाओं की तादाद ज्यादा है। 98% महिलाओं के पास बैंक खाते हैं। यही वजह है कि कर्ज संकट के बावजूद सीएम पिनराई विजयन ने नकद स्कीम के ​लिए हर साल ₹3800 करोड़ का बोझ उठाया। शी-टैक्सी जैसी कुल 10 ऐसी योजनाएं हैं, जिनसे महिलाएं सीधे लाभान्वित हो रही हैं। युवाओं से ज्यादा हुए बुजुर्ग, 48% पैसा इन्हीं पर खर्च केरल में 2.69 करोड़ मतदाता हैं। इनमें 18-19 आयु वर्ग के नए युवा मतदाता 4-5 लाख के बीच हैं। जबकि 60 से 79 की उम्र वाले बुजुर्ग 53 लाख से ज्यादा हैं। इनमें भी ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में हैं, जहां एलडीएफ मजबूत है। इसीलिए चुनाव भी पेंशन, स्वास्थ्य सेवा और जीवन यापन की लागत जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमता है। इस बार भी एलडीएफ ने अपनी ज्यादातर कल्याणकारी योजनाओं के केंद्र में इन्हें ही रखा है। जनकल्याण का 48% पैसा बुजुर्गों पर ही खर्च हो रहा है। इनके लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन समेत करीब 46 हजार करोड़ की 4 योजनाएं चल रही हैं। भाजपा अर्ध शहरी तो कांग्रेस पुरानी सीटों पर दम लगा रही चुनाव पर बात नहीं, नेताओं से ज्यादा फिल्मों के पोस्टर भास्कर टीम ने एर्नाकुलम, इडुक्की, कोट्टायम, अलप्पुझा, पतनमतिट्टा जिलों के कुछ शहरी और ग्रामीण इलाकों में लोगों से केरल के नए नाम ‘केरलम’ पर बात की। एलेप्पी में हाउसबोट के मालिक त्रिवेंद्रम एस. ने सिर्फ इतना कहा- हमें फर्क नहीं पड़ता? एर्नाकुलम की जिस मरीन ड्राइव पर बीते दिनों एनडीए की रैली हुई, वहां घूम रहे 29 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर एस. सुरेश कहते हैं कि केरल की पहचान सामाजिक जागरुकता, साक्षरता है। केरलम का कहीं विरोध नहीं है। यह चुनावी मुद्दा है। यहां नेताओं से ज्यादा फिल्मों के पोस्टर मिलेंगे, क्योंकि लोग इसे समाज का आईना मानते हैं। फैशन को फॉलो नहीं करते। चुनाव यहां सामाजिक जिंदगी पर असर नहीं डालते। ………………… यह खबर भी पढ़ें… केरल चुनाव 2026, अबकी बार गठबंधन नहीं: चेहरों पर केंद्रित हो रहा चुनावी मुकाबला; पिनाराई सरकार अपने काम गिना रही केरल विधानसभा चुनाव महज दो-तीन महीने दूर है। लोगों ने चर्चा है कि क्या पिनराई विजयन के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा (LDF ) तीसरी बार सत्ता में लौटकर इतिहास रचेगा या कांग्रेस नीत यूडीएफ को नेतृत्व की स्पष्टता और जमीनी सक्रियता का फायदा मिलेगा? नगर निकाय चुनाव में कई शहरी वार्डों में वोट शेयर बढ़ाने वाली भाजपा क्या असर डालेगी? पूरी खबर पढ़ें…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.