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फर्नीचर का राजा और दवा का खजाना है शीशम! पत्ते-बीज भी आते हैं कई रोगों में काम, जानें फायदे

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Sheesham ke Fayde: शीशम का पेड़ सिर्फ मजबूत लकड़ी के लिए ही नहीं बल्कि अपने औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार इसके पत्ते, बीज और लकड़ी से निकलने वाला तेल कई बीमारियों में उपयोगी माना जाता है. पेट की समस्याओं, त्वचा रोग और अनीमिया जैसी परेशानियों में इसके उपयोग से राहत मिल सकती है. इसके साथ ही शीशम की खेती किसानों के लिए भी कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है क्योंकि इसकी लकड़ी की बाजार में काफी मांग रहती है. जानिए शीशम के फायदे, औषधीय उपयोग और इसकी खेती से जुड़ी पूरी जानकारी.

Sheesham Tree Benefits: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में शीशम का पेड़ आसानी से देखने को मिल जाता है. आमतौर पर लोग इसे सिर्फ मजबूत लकड़ी के लिए जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह पेड़ औषधीय गुणों से भी भरपूर होता है. दरअसल शीशम का इस्तेमाल सिर्फ फर्नीचर या घर बनाने में ही नहीं, बल्कि आयुर्वेद में भी कई समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है. इसके पत्ते, बीज, जड़ और लकड़ी तक कई तरह से उपयोगी माने जाते हैं.

मजबूत लकड़ी की वजह से रहती है भारी मांग
आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह बताते हैं कि शीशम का पेड़ देश के लगभग हर हिस्से में पाया जाता है. इसकी लकड़ी काफी मजबूत और टिकाऊ होती है. इसी वजह से इसका इस्तेमाल दरवाजे, खिड़कियां, फर्नीचर और सजावटी लकड़ी के सामान बनाने में बड़े पैमाने पर किया जाता है. शीशम की लकड़ी की खास बात यह है कि इस पर पानी और दीमक का असर बहुत कम होता है, इसलिए बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है.

कई बीमारियों में फायदेमंद माना जाता है
डॉ. विपिन सिंह के मुताबिक शीशम में कई तरह के औषधीय गुण भी पाए जाते हैं. इसके बीज और लकड़ी से निकलने वाले तेल का उपयोग पेट से जुड़ी कई समस्याओं में किया जाता है. आयुर्वेद के अनुसार यह दस्त, हैजा और बवासीर जैसी परेशानियों में राहत देने में मदद कर सकता है. इसके अलावा बीजों का चूर्ण पेट में होने वाले अल्सर में भी लाभकारी माना जाता है.

पत्ते भी शरीर के लिए फायदेमंद
शीशम के पत्ते भी स्वास्थ्य के लिए काफी उपयोगी माने जाते हैं. डॉ. विपिन सिंह बताते हैं कि इसके पत्तों का सेवन करने से शरीर को पोषण मिलता है और अनीमिया जैसी समस्या में भी फायदा हो सकता है. इसके अलावा शीशम का तेल घाव भरने में मदद करता है. अगर त्वचा पर खुजली, जलन या ड्राइनेस की समस्या हो तो इसका तेल लगाने से आराम मिल सकता है.

इस्तेमाल करना भी है बेहद आसान
शीशम का इस्तेमाल करना ज्यादा मुश्किल नहीं है. इसके ताजे पत्तों को चबाकर निगलने से भी फायदा मिल सकता है. इसके अलावा बीजों का चूर्ण बनाकर सेवन किया जा सकता है. वहीं लकड़ी से निकाला गया तेल भी कई समस्याओं में उपयोग किया जाता है.

किसानों के लिए भी कमाई का अच्छा जरिया
औषधीय गुणों के साथ-साथ शीशम किसानों के लिए कमाई का अच्छा विकल्प भी बन सकता है. इसकी लकड़ी की मांग फर्नीचर इंडस्ट्री और निर्माण कार्यों में हमेशा बनी रहती है. एक बार शीशम का पौधा लगाने के बाद यह करीब 10 से 12 साल में पूरी तरह तैयार हो जाता है. किसान चाहें तो इसकी शाखाओं को काटकर हर 4 से 5 साल में भी लकड़ी बेच सकते हैं, जिससे समय-समय पर अच्छी आमदनी होती रहती है.

एक हेक्टेयर में लग सकते हैं 500 पौधे
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार एक हेक्टेयर जमीन में लगभग 400 से 500 शीशम के पौधे लगाए जा सकते हैं. जब पेड़ पूरी तरह विकसित हो जाता है तो एक पेड़ से करीब 3 से 5 क्यूबिक फीट लकड़ी मिल सकती है. इसी वजह से शीशम की खेती किसानों के लिए लंबे समय में अच्छा मुनाफा देने वाला विकल्प बन सकती है.

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Shweta Singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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Sheesham ke Fayde: शीशम का पेड़ सिर्फ मजबूत लकड़ी के लिए ही नहीं बल्कि अपने औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार इसके पत्ते, बीज और लकड़ी से निकलने वाला तेल कई बीमारियों में उपयोगी माना जाता है. पेट की समस्याओं, त्वचा रोग और अनीमिया जैसी परेशानियों में इसके उपयोग से राहत मिल सकती है. इसके साथ ही शीशम की खेती किसानों के लिए भी कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है क्योंकि इसकी लकड़ी की बाजार में काफी मांग रहती है. जानिए शीशम के फायदे, औषधीय उपयोग और इसकी खेती से जुड़ी पूरी जानकारी.

Sheesham Tree Benefits: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में शीशम का पेड़ आसानी से देखने को मिल जाता है. आमतौर पर लोग इसे सिर्फ मजबूत लकड़ी के लिए जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह पेड़ औषधीय गुणों से भी भरपूर होता है. दरअसल शीशम का इस्तेमाल सिर्फ फर्नीचर या घर बनाने में ही नहीं, बल्कि आयुर्वेद में भी कई समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है. इसके पत्ते, बीज, जड़ और लकड़ी तक कई तरह से उपयोगी माने जाते हैं.

मजबूत लकड़ी की वजह से रहती है भारी मांग
आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह बताते हैं कि शीशम का पेड़ देश के लगभग हर हिस्से में पाया जाता है. इसकी लकड़ी काफी मजबूत और टिकाऊ होती है. इसी वजह से इसका इस्तेमाल दरवाजे, खिड़कियां, फर्नीचर और सजावटी लकड़ी के सामान बनाने में बड़े पैमाने पर किया जाता है. शीशम की लकड़ी की खास बात यह है कि इस पर पानी और दीमक का असर बहुत कम होता है, इसलिए बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है.

कई बीमारियों में फायदेमंद माना जाता है
डॉ. विपिन सिंह के मुताबिक शीशम में कई तरह के औषधीय गुण भी पाए जाते हैं. इसके बीज और लकड़ी से निकलने वाले तेल का उपयोग पेट से जुड़ी कई समस्याओं में किया जाता है. आयुर्वेद के अनुसार यह दस्त, हैजा और बवासीर जैसी परेशानियों में राहत देने में मदद कर सकता है. इसके अलावा बीजों का चूर्ण पेट में होने वाले अल्सर में भी लाभकारी माना जाता है.

पत्ते भी शरीर के लिए फायदेमंद
शीशम के पत्ते भी स्वास्थ्य के लिए काफी उपयोगी माने जाते हैं. डॉ. विपिन सिंह बताते हैं कि इसके पत्तों का सेवन करने से शरीर को पोषण मिलता है और अनीमिया जैसी समस्या में भी फायदा हो सकता है. इसके अलावा शीशम का तेल घाव भरने में मदद करता है. अगर त्वचा पर खुजली, जलन या ड्राइनेस की समस्या हो तो इसका तेल लगाने से आराम मिल सकता है.

इस्तेमाल करना भी है बेहद आसान
शीशम का इस्तेमाल करना ज्यादा मुश्किल नहीं है. इसके ताजे पत्तों को चबाकर निगलने से भी फायदा मिल सकता है. इसके अलावा बीजों का चूर्ण बनाकर सेवन किया जा सकता है. वहीं लकड़ी से निकाला गया तेल भी कई समस्याओं में उपयोग किया जाता है.

किसानों के लिए भी कमाई का अच्छा जरिया
औषधीय गुणों के साथ-साथ शीशम किसानों के लिए कमाई का अच्छा विकल्प भी बन सकता है. इसकी लकड़ी की मांग फर्नीचर इंडस्ट्री और निर्माण कार्यों में हमेशा बनी रहती है. एक बार शीशम का पौधा लगाने के बाद यह करीब 10 से 12 साल में पूरी तरह तैयार हो जाता है. किसान चाहें तो इसकी शाखाओं को काटकर हर 4 से 5 साल में भी लकड़ी बेच सकते हैं, जिससे समय-समय पर अच्छी आमदनी होती रहती है.

एक हेक्टेयर में लग सकते हैं 500 पौधे
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