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बिना चीरा, बिना दर्द! AI ने बदली आंखों की सर्जरी, जानिए क्या है 4D कैटरैक्ट सर्जरी और कितना आएगा खर्च

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4D cataract AI Surgery: देश के टॉप आंखों के विशेषज्ञ डॉ राहील चौधरी ने बताया कि 4D कैटरैक्ट AI सर्जरी में पहले AI की मदद से आंख की पूरी 4D मैपिंग हो जाती है. जिसमें ऑपरेशन करने से पहले ही AI तकनीक मैपिंग से बता देती है कि यह ऑपरेशन किस तरह से किया जाएगा. उनका कहना था कि इस वक्त भारत में यह मोतियाबिंद ऑपरेशन (Cataract Surgery) करने की सबसे टॉप तकनीक है.

दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आने के बाद से यह टेक्नोलॉजी अब हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से लेकर हेल्थकेयर सिस्टम तक में अपनी मजबूत पकड़ बना चुकी है. खास बात यह है कि अब भारत के हेल्थकेयर सेक्टर में भी AI एक अहम भूमिका निभा रहा है. कई बड़े और क्रिटिकल ऑपरेशंस अब देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किए जा रहे हैं. आंखों के इलाज में भी इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. खासतौर पर मोतियाबिंद के ऑपरेशन में अब खास तरह की AI टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है. इसी नई तकनीक के बारे में जानने के लिए जब हमने देश के टॉप आंखों के विशेषज्ञ डॉ. राहील चौधरी से बात की, तो उन्होंने विस्तार से बताया कि यह तकनीक कैसे काम करती है और पुराने तरीकों से किस तरह अलग और एडवांस है.

4D कैटरैक्ट AI सर्जरी क्या है

डॉ. राहील के मुताबिक 4D कैटरैक्ट AI सर्जरी, पुराने तरीकों की तुलना में काफी एडवांस, सटीक और सेफ मानी जाती है. पहले जो फेको सर्जरी होती थी, उसमें डॉक्टर को मोतियाबिंद निकालने के लिए आंख में एक चीरा लगाना पड़ता था, फिर अंदर जाकर ऑपरेशन किया जाता था. इस प्रक्रिया में मरीज को थोड़ी तकलीफ अधिक होती थी और रिकवरी में भी समय लगता था. इसके बाद रोबोटिक आई सर्जरी शुरू हुई, जिसमें कम समय में ऑपरेशन हो जाता था और मरीज की रिकवरी भी जल्दी हो जाती थी. हालांकि इसमें एक दिक्कत थी कि जब अल्ट्रासोनिक एनर्जी की मदद से मोतियाबिंद को तोड़ा और साफ किया जाता था, तो यह एनर्जी आंख के आसपास के टिश्यू को भी हल्का नुकसान पहुंचा सकती थी. यही कमी 4D कैटरैक्ट AI सर्जरी ने दूर की है.

 4D मैपिंग से और ज्यादा सटीक इलाज

डॉ. राहील बताते हैं कि 4D कैटरैक्ट AI सर्जरी में सबसे पहले आपकी आंख की 4D मैपिंग की जाती है. इस मैपिंग के आधार पर यह तकनीक पहले से ही बता देती है कि सर्जरी के दौरान कौन-कौन से स्टेप होंगे, किस एंगल से काम किया जाएगा और अल्ट्रासोनिक एनर्जी कहां और कितनी देनी है. यानी सर्जरी शुरू होने से पहले ही एक तरह का ब्लूप्रिंट तैयार हो जाता है, जिससे डॉक्टर को पूरे ऑपरेशन की सटीक प्लानिंग मिल जाती है. इसके बाद इसी AI गाइडेंस की मदद से नियंत्रित मात्रा में अल्ट्रासोनिक एनर्जी आंख में दी जाती है और मोतियाबिंद को साफ किया जाता है. इस प्रक्रिया में आसपास के टिश्यू को नुकसान पहुंचने की संभावना बहुत कम हो जाती है और सर्जरी ज्यादा सुरक्षित और प्रिसाइज मानी जाती है.

कितना महंगा है यह ऑपरेशन

जब डॉ. राहील से 4D कैटरैक्ट AI सर्जरी की लागत के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन सरकारी अस्पतालों में भी होता है और प्राइवेट में भी. सरकारी अस्पतालों में कई तकनीकों की मदद से मोतियाबिंद का ऑपरेशन मुफ्त या बहुत कम खर्च में हो जाता है. वहीं प्राइवेट सेक्टर में मोतियाबिंद की सर्जरी का खर्च आमतौर पर लगभग ₹1.5 लाख से लेकर ₹3 लाख तक जा सकता है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुल खर्च काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि ऑपरेशन के बाद आंख में कौन सा लेंस डलवाया जा रहा है. अगर आप केवल पास की नजर वाला लेंस चुनते हैं तो ऑपरेशन अपेक्षाकृत सस्ता रहता है. अगर आप ऐसा लेंस लगवाते हैं जो पास और थोड़ी दूर दोनों दूरी की नजर को ठीक करे, तो लागत थोड़ी बढ़ जाती है. वहीं अगर आप ऐसा एडवांस लेंस चुनते हैं जो पास, मध्यम और बहुत दूर की नजर तीनों को साफ रखे और आपको चश्मे पर निर्भर न रहना पड़े, तो ऐसे लेंस के साथ ऑपरेशन की कीमत और ज्यादा हो जाती है.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें

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दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आने के बाद से यह टेक्नोलॉजी अब हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से लेकर हेल्थकेयर सिस्टम तक में अपनी मजबूत पकड़ बना चुकी है. खास बात यह है कि अब भारत के हेल्थकेयर सेक्टर में भी AI एक अहम भूमिका निभा रहा है. कई बड़े और क्रिटिकल ऑपरेशंस अब देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किए जा रहे हैं. आंखों के इलाज में भी इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. खासतौर पर मोतियाबिंद के ऑपरेशन में अब खास तरह की AI टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है. इसी नई तकनीक के बारे में जानने के लिए जब हमने देश के टॉप आंखों के विशेषज्ञ डॉ. राहील चौधरी से बात की, तो उन्होंने विस्तार से बताया कि यह तकनीक कैसे काम करती है और पुराने तरीकों से किस तरह अलग और एडवांस है.

4D कैटरैक्ट AI सर्जरी क्या है

डॉ. राहील के मुताबिक 4D कैटरैक्ट AI सर्जरी, पुराने तरीकों की तुलना में काफी एडवांस, सटीक और सेफ मानी जाती है. पहले जो फेको सर्जरी होती थी, उसमें डॉक्टर को मोतियाबिंद निकालने के लिए आंख में एक चीरा लगाना पड़ता था, फिर अंदर जाकर ऑपरेशन किया जाता था. इस प्रक्रिया में मरीज को थोड़ी तकलीफ अधिक होती थी और रिकवरी में भी समय लगता था. इसके बाद रोबोटिक आई सर्जरी शुरू हुई, जिसमें कम समय में ऑपरेशन हो जाता था और मरीज की रिकवरी भी जल्दी हो जाती थी. हालांकि इसमें एक दिक्कत थी कि जब अल्ट्रासोनिक एनर्जी की मदद से मोतियाबिंद को तोड़ा और साफ किया जाता था, तो यह एनर्जी आंख के आसपास के टिश्यू को भी हल्का नुकसान पहुंचा सकती थी. यही कमी 4D कैटरैक्ट AI सर्जरी ने दूर की है.

 4D मैपिंग से और ज्यादा सटीक इलाज

डॉ. राहील बताते हैं कि 4D कैटरैक्ट AI सर्जरी में सबसे पहले आपकी आंख की 4D मैपिंग की जाती है. इस मैपिंग के आधार पर यह तकनीक पहले से ही बता देती है कि सर्जरी के दौरान कौन-कौन से स्टेप होंगे, किस एंगल से काम किया जाएगा और अल्ट्रासोनिक एनर्जी कहां और कितनी देनी है. यानी सर्जरी शुरू होने से पहले ही एक तरह का ब्लूप्रिंट तैयार हो जाता है, जिससे डॉक्टर को पूरे ऑपरेशन की सटीक प्लानिंग मिल जाती है. इसके बाद इसी AI गाइडेंस की मदद से नियंत्रित मात्रा में अल्ट्रासोनिक एनर्जी आंख में दी जाती है और मोतियाबिंद को साफ किया जाता है. इस प्रक्रिया में आसपास के टिश्यू को नुकसान पहुंचने की संभावना बहुत कम हो जाती है और सर्जरी ज्यादा सुरक्षित और प्रिसाइज मानी जाती है.

कितना महंगा है यह ऑपरेशन

जब डॉ. राहील से 4D कैटरैक्ट AI सर्जरी की लागत के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन सरकारी अस्पतालों में भी होता है और प्राइवेट में भी. सरकारी अस्पतालों में कई तकनीकों की मदद से मोतियाबिंद का ऑपरेशन मुफ्त या बहुत कम खर्च में हो जाता है. वहीं प्राइवेट सेक्टर में मोतियाबिंद की सर्जरी का खर्च आमतौर पर लगभग ₹1.5 लाख से लेकर ₹3 लाख तक जा सकता है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुल खर्च काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि ऑपरेशन के बाद आंख में कौन सा लेंस डलवाया जा रहा है. अगर आप केवल पास की नजर वाला लेंस चुनते हैं तो ऑपरेशन अपेक्षाकृत सस्ता रहता है. अगर आप ऐसा लेंस लगवाते हैं जो पास और थोड़ी दूर दोनों दूरी की नजर को ठीक करे, तो लागत थोड़ी बढ़ जाती है. वहीं अगर आप ऐसा एडवांस लेंस चुनते हैं जो पास, मध्यम और बहुत दूर की नजर तीनों को साफ रखे और आपको चश्मे पर निर्भर न रहना पड़े, तो ऐसे लेंस के साथ ऑपरेशन की कीमत और ज्यादा हो जाती है.

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