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मूवी रिव्यू – 'नागबंधम':सनातन के रहस्य, ट्रेजर हंट और बाहुबली-कांतारा 2 वाला एहसास… लेकिन क्या कमजोर स्क्रीनप्ले पड़ेगा भारी? जानिए कैसी है मूवी

मूवी रिव्यू – 'नागबंधम':सनातन के रहस्य, ट्रेजर हंट और बाहुबली-कांतारा 2 वाला एहसास... लेकिन क्या कमजोर स्क्रीनप्ले पड़ेगा भारी? जानिए कैसी है मूवी

पिछले कुछ सालों में भारतीय पौराणिक कथाओं और सनातन पर आधारित फिल्मों को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। फिल्म नागबंधम भी इसी कड़ी में एक ऐसा ट्रेजर हंट एडवेंचर है, जो सनातन की विरासत, इतिहास और इंसानी लालच को एक साथ जोड़ने की कोशिश करता है। फिल्म का विचार और विजुअल स्केल इम्प्रेस करते हैं, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले और ज्यादा लंबी अवधि इसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाते हैं। फिल्म की कहानी कहानी साल 1962 में हिमालय से शुरू होती है, जहां आर्कियोलॉजिस्ट जुल्फिकार अली (ऋषभ साहनी) और टेस्ला (जेसन शाह) रहस्यमयी नागबंधम की तलाश में एक गुफा तक पहुंचते हैं। वहां पेड़ में कैद एक बैरागी जुल्फिकार को उसकी सबसे बड़ी सच्चाई बताता है कि वह अपने पिछले जन्म में अहमद शाह अब्दाली था। बैरागी उसे पुष्पकमल और नागबंधम हासिल कर पूरी दुनिया पर राज करने का लालच देता है। दूसरी तरफ जुल्फिकार, रुद्र (विराट कर्ण) और उसके परिवार पर हमला कर देता है, क्योंकि उसे विश्वास है कि पुष्पकमल का रहस्य उसी के पास है। इस हमले में रुद्र अपना पूरा परिवार खो देता है। वहीं पार्वती (नभा नटेश), जिस पर रुद्र सबसे ज्यादा भरोसा करता है, उससे जुड़ा एक बड़ा रहस्य कहानी को नया मोड़ देता है। रुद्र बदले और सच की तलाश में निकलता है। इसी दौरान कहानी 1756 में पहुंचती है, जहां दिखाया जाता है कि कैसे अहमद शाह अब्दाली ने हिंदू मंदिरों पर हमला कर दिव्य पुष्पकमल को हासिल करने की कोशिश की थी। अब क्या रुद्र नागबंधम और पुष्पकमल की रक्षा कर पाएगा और क्या वह जुल्फिकार से बदला ले सकेगा, इसी पर फिल्म का क्लाइमैक्स टिका है। फिल्म में एक्टिंग रुद्र के किरदार में विराट कर्ण ने पूरी मेहनत की है। एक्शन सीन्स में वह प्रभाव छोड़ते हैं, लेकिन इमोशनल और सीरियस सीन्स में कई जगह उनकी परफॉर्मेंस जरूरत से ज्यादा लाउड और ओवरड्रामेटिक महसूस होती है। बतौर लीड एक्टर उनमें संभावनाएं हैं, लेकिन अभी उन्हें एक्टिंग पर और काम करने की जरूरत है। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत नभा नटेश हैं। डबल रोल में उन्होंने अच्छी एक्टिंग की है और उनका किरदार कहानी में सबसे बड़ा सरप्राइज लेकर आता है। जुल्फिकार और अहमद शाह अब्दाली के रोल में ऋषभ साहनी का लुक प्रभावशाली है और वह डर पैदा करने की कोशिश करते हैं, लेकिन कई जगह उनकी परफॉर्मेंस भी जरूरत से ज्यादा लाउड नजर आती है। वहीं जगपति बाबू, मुरली शर्मा, महेश मांजरेकर और ऐश्वर्या मेनन अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय करते हैं। फिल्म में डायरेक्शन और टेक्निकल पक्ष कहानी, स्क्रीनप्ले और डायरेक्शन की जिम्मेदारी अभिषेक नामा ने संभाली है। फिल्म का बेस काफी मजबूत है। शुरुआत शानदार है और सेट डिजाइन, सिनेमैटोग्राफी तथा वीएफएक्स बड़े पर्दे का एहसास कराते हैं। शुरुआती आधे घंटे तक फिल्म बांधे रखती है। लेकिन इसके बाद ढीले स्क्रीनप्ले की वजह से कहानी बार-बार भटकती है और गति खो देती है। इंटरवल पर एक बड़ा सरप्राइज आता है, जो बाहुबली और कांतारा जैसी फिल्मों की याद दिलाता है। इसके बाद कुछ समय तक फिल्म फिर से पटरी पर लौटती है, लेकिन दूसरे हाफ में कहानी एक बार फिर बिखर जाती है। फिल्म की जरूरत से ज्यादा लंबी अवधि, लगातार लाउड बैकग्राउंड म्यूजिक, कई जगह ओवर द टॉप एक्टिंग और कमजोर एडिटिंग दर्शकों के धैर्य की परीक्षा लेते हैं। अगर एडिटिंग थोड़ी और कसी हुई होती और स्क्रीनप्ले पर ज्यादा काम किया जाता, तो यही कहानी कहीं ज्यादा असरदार बन सकती थी। फिल्म में म्यूजिक फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर जरूरत से ज्यादा तेज महसूस होता है। कई सीन्स में यह भावनाओं को उभारने के बजाय उन पर हावी हो जाता है। गाने भी ऐसे नहीं हैं, जो फिल्म खत्म होने के बाद याद रह जाएं।
फिल्म को फाइनल वर्डिक्ट नागबंधम का आइडिया नया नहीं है, लेकिन इसे भारतीय इतिहास, सनातन की विरासत और पौराणिक रहस्यों के साथ जोड़ने की कोशिश दिलचस्प है। शानदार विजुअल्स, भव्य सेट और कुछ अच्छे सरप्राइज इस फिल्म को देखने लायक बनाते हैं। हालांकि कमजोर स्क्रीनप्ले, लंबी अवधि और लाउड ट्रीटमेंट इसकी रफ्तार को बार-बार रोकते हैं। अगर आपको पौराणिक रहस्य, ट्रेजर हंट और बड़े विजुअल स्केल वाली फिल्में पसंद हैं, तो नागबंधम एक बार देखी जा सकती है।

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फिल्म को फाइनल वर्डिक्ट नागबंधम का आइडिया नया नहीं है, लेकिन इसे भारतीय इतिहास, सनातन की विरासत और पौराणिक रहस्यों के साथ जोड़ने की कोशिश दिलचस्प है। शानदार विजुअल्स, भव्य सेट और कुछ अच्छे सरप्राइज इस फिल्म को देखने लायक बनाते हैं। हालांकि कमजोर स्क्रीनप्ले, लंबी अवधि और लाउड ट्रीटमेंट इसकी रफ्तार को बार-बार रोकते हैं। अगर आपको पौराणिक रहस्य, ट्रेजर हंट और बड़े विजुअल स्केल वाली फिल्में पसंद हैं, तो नागबंधम एक बार देखी जा सकती है।

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