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संकल्प में काम करना अभिनय की बड़ी पाठशाला:क्रांति बोले- प्रकाश झा के निर्देशन में सीखने का मौका, नाना पाटेकर संग स्क्रीन शेयर करना बड़ा सौभाग्य

संकल्प में काम करना अभिनय की बड़ी पाठशाला:क्रांति बोले- प्रकाश झा के निर्देशन में सीखने का मौका, नाना पाटेकर संग स्क्रीन शेयर करना बड़ा सौभाग्य

वेब सीरीज ‘संकल्प’ में अपने दमदार किरदार से चर्चा में आए अभिनेता क्रांति प्रकाश झा का मानना है कि दिग्गज निर्देशक प्रकाश झा के साथ काम करना किसी पाठशाला में सीखने जैसा अनुभव है। क्रांति कहते हैं कि इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनना उनके लिए डेस्टिनी जैसा रहा। शो में उन्हें महान अभिनेता नाना पाटेकर के साथ स्क्रीन शेयर करने का मौका मिला, जिसे वह अपने करियर का बड़ा सौभाग्य मानते हैं। अपने किरदार की तैयारी से लेकर शूटिंग के यादगार पलों और ओटीटी के बढ़ते महत्व तक, क्रांति प्रकाश झा ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अपने अनुभव, चुनौतियों और आने वाले प्रोजेक्ट्स को लेकर खुलकर बात की। पेश है बातचीत के कुछ खास अंश.. आप वेब सीरीज ‘संकल्प’ से कैसे जुड़े? सच कहूं तो मैं इसे अपनी डेस्टिनी मानता हूं। आप सालों तक मेहनत करते रहते हैं और अचानक एक दिन आपका कोई सपना सच हो जाता है। मुझे शो की प्रोड्यूसर दिशा जी का फोन आया था, जिसके बाद मैं प्रकाश झा सर से मिलने गया। उनसे मिलने के बाद चीजें तय हुईं और उन्होंने मुझे इस किरदार के लिए चुन लिया। मेरे लिए यह किस्मत की बात है कि मुझे इतने बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने का मौका मिला। प्रकाश झा के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? मैं उन्हें निर्देशक से ज्यादा एक अध्यापक मानता हूं। उनका कलाकारों के साथ वही रिश्ता होता है जो एक गुरु का अपने शिष्य के साथ होता है। वे हर बारीकी को बहुत अच्छे से समझाते हैं। लेकिन हाँ, उनके साथ काम करते वक्त आपको हमेशा सतर्क पर रहना पड़ता है, क्योंकि आपको उनके विजन को सही साबित करना होता है। उन्होंने आप पर भरोसा किया है, तो आपकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि आप उनके निर्णय को सही ठहराएं। सीरीज की शूटिंग के दौरान आपके सामने मुख्य चुनौतियां क्या थीं? सबसे बड़ी चुनौती झा सर के विजन पर खरा उतरना और उसे जस्टिफाई करना था। हर एक सीन, हर एक कॉमा, हर एक शब्द के पीछे के कारण को समझना और अपनी क्षमता का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना था। अगर यह बाहर निकलकर लोगों को पसंद आ रही है, तो इसमें झा सर का ही सबसे बड़ा हाथ होगा सेट पर अन्य कलाकारों (संजय कपूर, जीशान, कुबरा सैत) के साथ कैसा माहौल था? मेरे ज्यादातर सीन नाना सर के साथ ही थे, संजय कपूर जी के साथ मेरे सीन नहीं हैं लेकिन सेट का माहौल एक परिवार जैसा था। बाकी मेरे अपने व्यक्तिगत सीन्स थे। हम सब साथ में खाना खाते थे। प्रकाश झा सर के सेट की सबसे अच्छी बात यह है कि वहां सबको समानता दी जाती है। चाहे कोई बहुत बड़ा एक्टर हो या नया, सबके साथ एक जैसा व्यवहार होता है। यह अनुशासन और समानता वाकई सीखने लायक है। नाना पाटेकर के साथ काम करना आपके लिए कितना सौभाग्यपूर्ण रहा? यह एक अभिनेता के लिए सबसे बड़ा सौभाग्य है। इस सीरीज के फॉर्मेट की खूबसूरती ही यही है कि मुझे दो दिग्गजों के साथ काम करने का अवसर मिला। एक तरफ प्रकाश झा सर जैसे दिग्गज निर्देशक और दूसरी तरफ नाना पाटेकर सर जैसे महान कलाकार। नाना सर के साथ स्क्रीन शेयर करना मेरे लिए बहुत गर्व और सीखने वाली बात रही। प्रकाश झा सर अक्सर कलाकारों को रिपीट करते हैं, क्या आगे के लिए कोई बात हुई? उन्होंने बस इतना कहा था कि “तुम लंबी रेस के घोड़े हो।’ बाकी तो समय ही बताएगा। हर इंसान हर किरदार में फिट नहीं हो सकता, लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है कि भविष्य में अगर कोई ऐसा किरदार होगा जिसमें उन्हें मेरी जरूरत लगेगी, तो वे मुझे जरूर बुलाएंगे। क्या आप प्रकाश झा से पारिवारिक रूप से जुड़े हैं, जैसा कि कुछ लोगों को लगता है? बहुत से लोगों को यही लगता है क्योंकि हमारा सरनेम (झा) एक है, पर ऐसा है नहीं। हमारे बीच अध्यापक और विद्यार्थी जैसा रिश्ता है। मजेदार बात यह है कि जिस दिन मेरे माता-पिता ने मेरा नाम ‘क्रांति प्रकाश झा’ रखा, शायद उसी दिन मेरी किस्मत में लिख दिया गया था कि मैं कभी न कभी ‘प्रकाश झा’ सर के साथ काम करूंगा। आपके आने वाले प्रोजेक्ट्स और ‘रक्तांचल 3′ के बारे में क्या अपडेट है? ‘रक्तांचल’ के तीसरे सीजन की आधिकारिक घोषणा हो चुकी है। अब यह अमेज़न एमएक्स पर आएगा। अगले दो-तीन महीनों में यह रिलीज हो सकता है, आप इसका पोस्टर एमएक्स के पेज पर देख सकते हैं। इसके अलावा भी कुछ प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं। इस सीरीज के लिए आपकी विशेष तैयारी क्या थी? मेरे लिए कोई भी काम नॉर्मल नहीं होता। मैं हर सीन को अपना आखिरी सीन मानकर करता हूं। इस किरदार (कस्तूरी) में एक तरह की डार्कनेस है, जो मेरे निजी स्वभाव में नहीं है। इसलिए मैंने शूटिंग से 10 दिन पहले खुद को सबसे अलग कर लिया था ताकि उस इंटेंसिटी को पकड़ सकूं। फिर जब आपके साथ इतने दिग्गज कलाकार और महान निर्देशक हों, तो आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देना ही होता है। यह एक चुनौती होती है, और आलस्य की कोई गुंजाइश नहीं होती। शूटिंग का सबसे यादगार पल कौन सा रहा? मेरा पहला सीन ही सबसे यादगार था। वह सीरीज का सबसे भारी और इंटेंस सीन था जहां ‘माट साहब’ और ‘कस्तूरी’ के बीच टकराव होता है। मुझे सुबह ही बताया गया कि आज सबसे हेवी सीन शूट करना है। एक तरफ महान प्रकाश झा सर कैमरे के पीछे थे और सामने महान नाना पाटेकर सर। वह पल मैं कभी नहीं भूल सकता। आप अपने करियर में ओटीटी के महत्व को कैसे देखते हैं? ओटीटी बहुत ही बेहतरीन माध्यम है। इसने लेखकों, एडिटर्स, म्यूजिशियंस और एक्टर्स सभी के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। आज जनता के हाथ में पावर है और अब हमें सिर्फ सिनेमा हॉल के भरोसे नहीं रहना पड़ता। यह एक नया आयाम है जहां काम की कमी नहीं है। क्या भविष्य में आप अभिनय के अलावा निर्देशन या निर्माण में भी हाथ आजमाएंगे? बिल्कुल, मैं भविष्य में फिल्में बनाना और निर्देशित करना चाहूंगा। खासकर मैं अपनी भाषा (बिहारी भाषाओं) में फिल्में करना चाहता हूं। जैसा कि मैं पहले भी करता रहा हूं। इसके लिए सही समय, स्थान और धन की जरूरत होती है। जब ईश्वर मौका देंगे, मैं यह जरूर करूंगा।

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