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हिंदू धर्म में चोटी का कितना महत्व:शास्त्रों में गाय के खुर के बराबर रखने की परंपरा; चाणक्य ने ली थी शपथ

हिंदू धर्म में चोटी का कितना महत्व:शास्त्रों में गाय के खुर के बराबर रखने की परंपरा; चाणक्य ने ली थी शपथ

हिंदू धर्म में चोटी (शिखा) का बहुत महत्व है। चोटी का धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक, तीनों महत्व माने गए हैं। यह सिर्फ बालों की एक शैली नहीं, बल्कि पहचान, परंपरा और आध्यात्मिकता से जुड़ी होती है। सनातन धर्म में लोग शिखा क्यों रखते हैं? इसका धार्मिक महत्व क्या है? क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण भी है? चोटी से जुड़ी सबसे रोचक कहानी क्या है? इस पर जानकार क्या कहते हैं? सारे सवालों के जवाब भास्कर एक्सप्लेनर में सवाल: सिर पर चोटी क्यों रखते हैं? जवाब: लखनऊ विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार शतपथी के अनुसार, सनातन धर्म में कई लोग सिर पर चोटी रखते हैं। इसे शिखा कहा जाता है। चोटी सिर के जिस हिस्से पर रखी जाती है, उसे सहस्रार चक्र माना जाता है। मान्यता है, इसी जगह के पास आत्मा का संबंध होता है। चोटी रखने से यह हिस्सा सक्रिय रहता है। लोग मानते हैं कि चोटी रखने से ध्यान लगाने में मदद मिलती है। इंसान बुद्धि, मन और शरीर पर बेहतर नियंत्रण रख पाता है। इसी वजह से सनातन धर्म में चोटी रखने की परंपरा चली आ रही है। चाणक्य की शिखा प्रतिज्ञा सवाल: क्या है चोटी रखने का महत्व? जवाब: हिंदू धर्म में व्यक्ति के जन्म से लेकर मरण तक 16 प्रकार के संस्कार बताए गए हैं। इनका अपना-अपना महत्व है। इन्हीं में से एक है मुंडन संस्कार। बच्चे के पहले, तीसरे या पांचवें साल में मुंडन किया जाता है। इस संस्कार के दौरान बच्चे के थोड़े से बाल छोड़ दिए जाते हैं। सिर पर शिखा रखने का संस्कार यज्ञोपवीत या उपनयन संस्कार में भी किया जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, पूजा, कर्मकांड और यज्ञ कराने के लिए चोटी रखना जरूरी है। प्रयागराज के महाराज हरिचैतन्य ब्रह्मचारी बताते हैं- जहां शिखा रखी जाती है, उसे परंपरा में ब्रह्मांड से जुड़ा प्रतीकात्मक स्थान माना जाता है। मान्यता है कि शिखा, नाभि और हृदय का आपसी संबंध होता है। इसलिए शिखा को महत्वपूर्ण माना गया है। कई धार्मिक क्रियाओं में स्मरण या संकल्प करते समय सबसे पहले शिखा को हाथ लगाकर प्रणाम किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर हिंदू को शिखा रखना चाहिए। जबकि वैदिक ब्राह्मणों के लिए इसे विशेष रूप से आवश्यक माना जाता है। वहीं, विरक्त ब्राह्मण (जो संसारिक जीवन से अलग होकर संन्यास मार्ग अपनाते हैं) कई बार चोटी नहीं रखते। सवाल: सनातन धर्म में चोटी रखने की परंपरा कब से चली आ रही? जवाब: बीएचयू के एस्ट्रोलॉजर प्रो. विनय पांडे बताते हैं- सनातन धर्म में चोटी/शिखा रखने की परंपरा हजारों साल पुरानी मानी जाती है। इतिहासकारों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। उस समय गुरुकुल शिक्षा, यज्ञ और उपनयन संस्कार का खास महत्व था। उस दौर में चोटी रखना संस्कार, अनुशासन और धार्मिक पहचान का प्रतीक माना जाता था। आज भी कई लोग इसे अपनी आस्था और परंपरा से जोड़कर अपनाते हैं। सवाल: चोटी रखना धर्म का नियम है या सिर्फ परंपरा? जवाब: सनातन धर्म में चोटी रखना धर्म का सख्त नियम नहीं है। इसे एक प्राचीन वैदिक परंपरा और संस्कार माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उपनयन संस्कार के बाद शिखा रखने की परंपरा रही है। खासकर पूजा-पाठ, यज्ञ और वैदिक कर्म करने वालों में। सवाल: शिखा कितनी बड़ी होनी चाहिए? जवाब: विनय पांडे बताते हैं- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सहस्रार चक्र का आकार गाय के खुर (पैर का सबसे निचला, कठोर, नाखून जैसा हिस्सा) जैसा माना गया है। इसी वजह से कई लोग चोटी भी गाय के खुर के बराबर रखते हैं। वहीं, ज्योतिष शास्त्र में कहा जाता है कि अगर किसी की कुंडली में राहु का बुरा असर चल रहा हो, तो सिर पर चोटी रखना लाभकारी माना जाता है। इससे राहु की दशा में राहत मिलती है और अच्छे परिणाम आने लगते हैं। सवाल: चोटी रखने का वैज्ञानिक कारण क्या है? जवाब: लखनऊ विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार शतपथी बताते हैं- चोटी रखने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। जिस स्थान पर चोटी रखी जाती है, वह मस्तिष्क का केंद्र होता है। इसी स्थान से शरीर के अंग, बुद्धि और मन नियंत्रित होते हैं। चोटी रखने से सहस्त्रार चक्र जागृत रहता है। इससे बुद्धि, मन और शरीर पर नियंत्रण रखने में सहायता मिलती है। हमारे शरीर में उपस्थित 7 चक्र जाग्रत होते है। इससे हमारे शरीर में संतुलन बना रहता है। जहां चोटी रखने की जगह होती है, वहां सुषुम्ना नाड़ी होती है, जो शरीर को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। पूरे शरीर का विकास सुषुम्ना नाड़ी से संबंधित माना जाता है। सवाल: चोटी रखने के क्या नियम है? जवाब: डॉ. अशोक कुमार शतपथी के अनुसार, चोटी रखने के भी नियम होते हैं। चोटी रखते समय सिर से सारे बाल काट देना चाहिए। केवल सिर के बीचोंबीच ही चोटी रखनी चाहिए। धार्मिक शास्त्रों में चोटी का आकार गाय के खुर के समान बताया गया है। साथ में दान धर्म, पूजा, भोजन करते समय चोटी को गांठ बांधकर रखनी चाहिए। इसके अलावा नित्य क्रिया करते समय चोटी को बंधन मुक्त रखना चाहिए। ————————— ये खबर भी पढ़ें… अविमुक्तेश्वरानंद को चेतावनी- माघ मेले से बैन कर देंगे, योगी बोले- कई कालनेमि सनातन को कमजोर करने की साजिश रच रहे प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। 48 घंटे के अंदर प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस भेजा है। इसमें मौनी अमावस्या के दिन बैरियर तोड़ने और जबरन भीड़ में बग्घी घुसाने को लेकर सवाल किए हैं। पूछा है कि क्यों न आपको हमेशा के लिए माघ मेले से बैन कर दिया जाए? अगर 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो संस्था को दी गई जमीन और सुविधाएं वापस ले लेंगे। पढ़िए पूरी खबर…

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