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Opinion: ब्रिटेन में 2008 के बाद जन्मे लोगों पर लाइफटाइम टोबैको बैन, पर क्या भारत दिखा पाएगा हिम्मत

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Last Updated:April 23, 2026, 16:01 IST Smoke-Free Generation: ब्रिटेन की संसद ने ऐतिहासिक बिल पास करते हुए 2008 के बाद पैदा लिए लोगों पर लाइफटाइम स्मोकिंग बैन कर दिया है. यानी वर्तमान में जो लोग 18 साल के हो चुके हैं और इस उम्र से कम के हैं वे अब कभी भी ब्रिटेन में तंबाकू या तंबाकू जनित चीजों का सेवन नहीं कर सकते हैं. एक तरह से ब्रिटेन स्मोक फ्री जेनरेशन बनना चाहता है. भारत की स्थिति इस मामले में बेहद खराब है. यहां हर साल 13.5 लाख मौतें तंबाकू के कारण हो जाती है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत में इतनी हिम्मत है. ब्रिटेन में 2008 के बाद पैदा लेने वाले लोगों के लिए लाइफटाइम तंबाकू बैन हो गया है. कैसी अजीब बिडंबना है पहले हम जहर बेचकर सौ रुपये कमाते हैं और फिर इसके इलाज पर 816 रुपये खर्च कर देते हैं. तंबाकू की जानलेवा आदत पर हमारे देश की यही स्थिति है. हम तंबाकू पर सिर्फ चेतावनी डाल देते हैं कि इससे कैंसर होता है. दूसरी तरफ इससे पैसा कमाने के लिए हम इस जहर को बेचना बदस्तूर जारी रखते हैं. लाखों जिंदगियां इस धुएं की राख में तबाह हो जाती है. पर इसका हमें कोई गम नहीं. दुनिया भर में यह खेल चल रहा है. युवा वर्ग सिगरेट के छल्ले को निकालने में अपनी शानो-शौकत समझते हैं. और इसमें उनकी जिंदगी तबाह हो रही है. इन सुलगते सवालों के बीच ब्रिटेन ने ऐसा फैसला लिया है जो इतिहास के स्वर्णाक्षरों में अंकित हो जाएगा. ब्रिटेन में 2008 के बाद पैदा लेने वाले सभी लोगों को पूरी जिंदगी तंबाकू या तंबाकू जनित प्रोडक्ट को हाथ भी नहीं लगाने दिया जाएगा. यह पूरी तरह से बैन होगा. यानी ब्रिटेन अगली पीढ़ी को स्मोक जेनरेशन की ओर ले जाने का पुख्ता बंदोवस्त कर लिया है. इससे पहले न्यूजीलैंड मालद्वीव जैसे देशों ने अपने यहां आने वाली पीढ़ियों के लिए स्मोकिंग बैन कर दिया है. पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि तंबाकू से सबसे ज्यादा चोट खाने वाले भारत में क्या ऐसा हो सकता है. क्या भारत में इतना दम है. हर साल 13 लाख लोगों की मौत डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट को मानें तो भारत में हर साल 13.5 लाख लोगों की मौत तंबाकू के कारण होती है. तंबाकू से भारत में कई प्रोडक्ट बनते हैं. सिगरेट, वेपिंग तो स्मोकिंग प्रोडक्ट है लेकिन भारत के कोने-कोने में गुटखा पाया जाता है. गुटखा में तंबाकू डालने पर बैन है लेकिन तंबाकू को बेचने पर कोई बैन नहीं है. इसलिए कंपनियां बिना तंबाकू वाले गुटखा को अलग बेचते हैं और तंबाकू को अलग से बेचते हैं. लोग दोनों पाउच एक साथ खरीदते हैं और दोनों को मिलाकर चबाने लगते हैं. यह किलर कॉम्बिनेशन है. इतना ही भारत में कॉरपोरेट कल्चर में सिगरेट पीने की लत सी लग गई है. लड़कियां भी इसमें बहुत आगे रहती हैं. सबको पता है कि सिगरेट कैंसर, सीओपीडी, अस्थमा, लिवर डिजीज, किडनी डिजीज का कारण है, इसके बावजूद तंबाकू जनित प्रोडक्ट की बाढ़ गई है. अब इसे कई रूपों में बेचा जाता है. चिंता की बात यह है कि भारत में तंबाकू सेवन करने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है. भारत में 15 साल से उपर 26.7 करोड़ लोगों को तंबाकू के सेवन की आदत है. इसका मतलब यह हुआ कि 30 फीसदी वयस्क जनसंख्या तंबाकू की चपेट में है. ऐसा खेल क्यों खेला जा रहा यह तंबाकू भारत की सेहत में घुन की तरह खा रहा है. जो लोग भी तंबाकू का सेवन करते हैं, 35 साल के बाद इनमें से अधिकांश को कुछ न कुछ बीमारी हो ही जाती है. तंबाकू के कारण होने वाली बीमारियों और इससे होने वाली मौतों के कारण हर साल भारत की अर्थव्यवस्था 2000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ता है. अनुमान के मुताबिक अगर सरकार को तंबाकू पर टैक्स से 100 रुपये की आमदनी होती है तो इससे अर्थव्यवस्था को 816 रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है. हर चीज की तरह इसमें भी गरीब आदमी को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है. इन लोगों को जब तंबाकू के कारण बीमारी होती है तो ये समझ नहीं पाते हैं कि इसकी वजह तंबाकू है. नतीजतन इन्हें सबसे ज्यादा मार झेलने होती है. ऐसे में सवाल उठता है कि ये कौन सी समझदारी है. सरकार को इस तंबाकू पर टैक्स से जितनी आमदनी होती है उससे कहीं ज्यादा वह इसके खिलाफ जागरुकता फैलाने के लिए प्रचार-प्रसार पर खर्च कर देती है. फिर ऐसा खेल क्यों खेला जाता है. यह एक तरह का कुचक्र है जिसमें सरकार रत्ती भर पैसे के लिए फंसती जा रही है. क्या सिगरेट से मिलने वाला टैक्स उन लाखों करोड़ों रुपयों की भरपाई कर सकता है जो भारत सरकार कैंसर के इलाज और मैनपावर लॉस पर खर्च करती है? हमें तत्काल कानून की जरूरत ब्रिटेन में पास हुआ कानून हमारे लिए सबसे बड़ी सबक है. हमारे देश में युवाओं की बहुत बड़ी आबादी ऐसी है जो सिर्फ स्टेट्स सिंबल के लिए सिगरेट की कश में अपनी जिंदगी को बर्बाद कर लेते हैं. टीनएज लड़कियां जिस तरह से स्मोकिंग की ओर आक्रामकता से बढ़ रही है वह और भी चिंताजनक है. कोई देश तभी आगे बढ़ सकता है जब उसके नागरिकों की सेहत दुरुस्त हो. लेकिन हमारे देश में 30 के बाद से ही लोगों को हार्ट डिजीज, मोटापा, डायबिटीज और लिवर की गंभीर बीमारी होने लगी है. ये सारे संकेत इस चिंता को और बढ़ा देती है कि हमें तत्काल ऐसी नीति की जरूरत है जिसमें तंबाकू पूरी तरह से प्रतिबंधित हो. दुनिया के विकसित देश अब स्मोक-फ्री जेनरेशन के मॉडल पर काम कर रहे हैं.भारत जैसे घनी आबादी वाले देश के लिए यह एक उदाहरण है. जिस तरह की मुसीबतें हम झेल रहे हैं, उसमें हमें ऐसे कानून की सख्त आवश्यकता है. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की

नरसिंहपुर में पोषण पखवाड़ा के तहत जागरूकता कार्यक्रम:रेलवे अस्पताल और स्टेशन परिसर में लगा स्वास्थ्य शिविर

नरसिंहपुर में पोषण पखवाड़ा के तहत जागरूकता कार्यक्रम:रेलवे अस्पताल और स्टेशन परिसर में लगा स्वास्थ्य शिविर

नरसिंहपुर जिले में गुरुवार को पोषण पखवाड़ा के अंतर्गत रेलवे अस्पताल और रेलवे स्टेशन परिसर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान रेलवे चिकित्सक डॉ. आरआर कुर्रे और उनकी टीम ने लोगों को संतुलित आहार, स्वास्थ्य देखभाल तथा पोषण के महत्व के प्रति जागरूक किया। कई स्थानों पर स्वास्थ्य शिविर लगाकर कुपोषित बच्चों की पहचान की गई। इन बच्चों को पोषण आहार और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई गईं। इसके अतिरिक्त, गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाकर उन्हें उचित आहार और देखभाल संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। डॉ. कुर्रे ने बताया कि शरीर के लिए कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज और जल जैसे पोषक तत्व अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्बोहाइड्रेट ऊर्जा प्रदान करता है, प्रोटीन शरीर के निर्माण में सहायक होता है, वसा ऊर्जा का स्रोत है, जबकि विटामिन और खनिज रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। पोषण पखवाड़ा का मुख्य विषय जीवन के पहले छह वर्षों में बच्चों के मस्तिष्क विकास को अधिकतम करना था। अभियान के तहत इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि शुरुआती 1000 दिन बच्चे के मस्तिष्क, शारीरिक विकास और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार, मानव मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास पहले छह वर्षों में ही पूरा हो जाता है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से भी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। डॉ. कुर्रे ने इस अवसर पर कहा कि ऐसे अभियान सभी के सहयोग से ही सफल हो सकते हैं। उन्होंने टीम वर्क के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि लोगों को जागरूक करने से जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रह सकेंगे, जिससे एक स्वस्थ समाज और देश का निर्माण संभव होगा।

jharkhand government launches employee health insurance scheme with coverage up to 10 lakh tata aig mou details

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Last Updated:April 23, 2026, 15:44 IST Jharkhand Employee Health Insurance Scheme: झारखंड सरकार और टाटा AIG के बीच राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर ऐतिहासिक MOU हुआ है. इस योजना के तहत अब राज्य के कर्मचारियों, पेंशनरों और अधिवक्ताओं को 5 से 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा. देश के 400 से अधिक बड़े अस्पतालों में यह सुविधा पहले दिन से ही लागू होगी. जानें इस योजना का लाभ कैसे और किनको मिलेगा. सांकेतिक फोटो(एआई) रांची: झारखंड सरकार ने अपने लाखों कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों को सुरक्षा कवच प्रदान करते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. गुरुवार को राजधानी रांची के नामकुम स्थित आरसीएच परिसर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी यानी JASAS और टाटा AIG जनरल इंश्योरेंस कंपनी के बीच एमओयू (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए. इस अवसर पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और अपर मुख्य सचिव (ACS) अजय कुमार सिंह सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. स्वास्थ्य मंत्री ने इस दिन को झारखंड के लिए ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि राज्य के कर्मचारी हमारे परिवार का हिस्सा हैं और उन्हें स्वस्थ रखना हमारी प्राथमिकता है. बीमा कवर, 5 लाख से 10 लाख तक का लाभइस योजना के तहत राज्यकर्मियों को स्वास्थ्य सुरक्षा के दो स्तर प्रदान किए गए हैं. सामान्य बीमारी के लिए 5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलेगा. गभीर बीमारी की स्थिति में यह कवर 10 लाख तक का होगा। अतिरिक्त सुरक्षा यदि इलाज का खर्च निर्धारित राशि से अधिक होता है, तो अतिरिक्त राशि का भुगतान झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कॉपर्स फंड से किया जाएगा। कौन-कौन होंगे लाभान्वित? सरकार ने इस योजना के दायरे को काफी व्यापक रखा है. जिसे तीन श्रेणियों में बांटा गया है. श्रेणी ‘क’: राज्य सरकार के सभी कार्यरत पदाधिकारी और कर्मचारी. श्रेणी ‘ख’: राज्य सरकार के पेंशनर, वर्तमान व पूर्व विधायक, विभिन्न बोर्ड, निगम व उपक्रमों के कर्मी/पूर्व कर्मी, साथ ही सरकारी विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारी. श्रेणी ‘ग’: झारखंड अधिवक्ता कल्याण न्यास समिति के तहत निबंधित सभी अधिवक्ता. देश के 400 से ज्यादा अस्पतालों में कैशलेस सुविधाइस योजना की सबसे बड़ी ताकत इसका नेटवर्क है. राज्य के भीतर ही नहीं बल्कि देश के 200 से ज्यादा शहरों के 400 से अधिक अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी. प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे CMC वेल्लोर, एआईजी हैदराबाद, टाटा समूह के अस्पताल, मेदांता गुरुग्राम, और अपोलो चेन्नई में वास्तविक दरों पर उपचार का प्रावधान है. योजना की खास बातें, पहले दिन से सुरक्षाकोई वेटिंग पीरियड नहीं होगी. सभी लाभ योजना के पहले दिन से ही लागू होंगे. पूर्व बीमारियां भी शामिल. पुरानी बीमारियों के लिए अलग से किसी जांच या अतिरिक्त प्रीमियम की जरूरत नहीं होगी. महिला कर्मचारियों के लिए प्रसव और नवजात शिशु की देखभाल की विशेष सुविधाएं मातृत्व लाभ के तहत शामिल हैं. कोई आयु सीमा नहीं रखी गई है. यानी कार्यरत और सेवानिवृत्त, दोनों के लिए उम्र की कोई बंदिश नहीं है. डिजिटल झारखंड, ऑनलाइन ट्रैकिंग की सुविधाकर्मचारियों की सुविधा के लिए विशेष पोर्टल sehis.jharkhand.gov.in लॉन्च किया गया है. यहां कर्मी अपने आवेदन को ट्रैक कर सकते हैं. योजना से जुड़ी तमाम जानकारियां हासिल कर सकते हैं. साथ ही, इसी कार्यक्रम में झारखंड स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी और रिम्स (RIMS) के बीच भी एड्स के बेहतर इलाज के लिए एक अलग एमओयू संपन्न हुआ. झारखंड बना देश का पहला राज्य: स्वास्थ्य मंत्री स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि झारखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है. जहां इस तरह की व्यापक स्वास्थ्य बीमा स्कीम लागू की गई है. हमें टाटा कंपनी पर पूरा भरोसा है कि एक साल के इस एमओयू के दौरान हमारे कर्मियों को किसी भी तरह की चिकित्सा समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand First Published : April 23, 2026, 15:44 IST

इटली बन रहा दुनिया के रईसों का नया पसंदीदा ठिकाना:दुबई जैसे टैक्स-फ्री ठिकानों को लेकर अनिश्चितता बढ़ी, लोग विकल्प तलाश रहे

इटली बन रहा दुनिया के रईसों का नया पसंदीदा ठिकाना:दुबई जैसे टैक्स-फ्री ठिकानों को लेकर अनिश्चितता बढ़ी, लोग विकल्प तलाश रहे

दुनियाभर के हाई नेटवर्थ वाले अमीर लोग फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों को छोड़कर इटली में बस रहे हैं। वजह है फ्लैट टैक्स और आसान नियम। विदेशी आय पर तय सालाना टैक्स लगता है, चाहे कमाई कितनी भी हो। इसकी अधिकतम सीमा 3 लाख यूरो (करीब 3 करोड़ रु.) है, जो पहले 1 लाख और फिर 2 लाख यूरो थी। इटली में प्रॉपर्टी और इनहेरिटेंस टैक्स में भी राहत के साथ अन्य कटौतियों का भी लाभ मिलता है। मिडिल ईस्ट के तनाव ने ट्रेंड तेज किया है। दुबई जैसे टैक्स-फ्री विकल्प पर अनिश्चितता बढ़ी है। बड़े पैमाने पर माइग्रेशन अभी नहीं हुआ है। लोग विकल्प तलाश रहे हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक टैक्स स्थिरता और यूरोप में लोकेशन इटली को बढ़त दे रही है। इटली भौगोलिक रूप से यूरोप के बीचों-बीच स्थित है। यहां रहने वाले अरबपतियों के लिए पेरिस, लंदन, बर्लिन या ज्यूरिख जैसे प्रमुख बिजनेस सेंटर्स तक पहुंचना बहुत आसान है। यह दुबई या अन्य टैक्स हेवन देशों की तुलना में यात्रा के समय और कनेक्टिविटी के लिहाज से ज्यादा सुविधाजनक है। इटली में पहली प्रॉपर्टी खरीदने पर स्टाम्प ड्यूटी या वसीयत चार्ज नहीं लगता है। इसके विपरीत फ्रांस में घर लेते समय सरकारी खजाने में भारी शुल्क जमा करना पड़ता है। वहां राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वेल्थ टैक्स को रियल एस्टेट टैक्स में बदलकर अमीरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इटली में पहले घर पर प्रॉपर्टी टैक्स से पूरी राहत दी गई है। हालांकि कचरा प्रबंधन के लिए मोटी फीस चुकानी होती है। निवेश के नजरिए से सबसे बड़ा आकर्षण इनहेरिटेंस टैक्स का अंतर है। इटली में 10 लाख यूरो तक की पैतृक संपत्ति हस्तांतरण पर शुल्क शून्य है। इस सीमा के पार भी मात्र 4% की मामूली दर लागू होती है। वहीं, फ्रांसीसी नियमों में टैक्स-फ्री छूट का दायरा महज 1 लाख यूरो तक सीमित है। इसके बाद टैक्स की दरें बढ़ते हुए 45% तक पहुंच जाती हैं। पेरिस के कर वकील जेरोम बर्रे के अनुसार हर हफ्ते कारोबारी फ्रांस छोड़ने की सलाह ले रहे हैं। लोग मौजूदा वित्तीय माहौल से नाखुश हैं। उन्हें भविष्य में नियम सख्त होने का डर है। 2027 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद हालात और कठिन हो सकते हैं। मिडिल ईस्ट तनाव का असर, यूएई से ध्यान इटली पर शिफ्ट हो रहा हेनली एंड पार्टनर्स के पीटर फेरिग्नो के अनुसार पिछले साल दुबई करोड़पतियों की पहली पसंद था, क्योंकि वहां टैक्स नहीं लगता। मध्य-पूर्व तनाव के कारण 2026 में यह संख्या घट सकती है। बिना टैक्स वाले देश से कर देने वाले देश में जाना आसान नहीं होता। जीरो-टैक्स जीवनशैली के आदी लोगों को प्रशासनिक औपचारिकताएं भारी लगती हैं।

Bengal Govt Accuses BJP Social Media Weapon

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नई दिल्ली/कोलकाता4 मिनट पहले कॉपी लिंक कोलकाता में 8 जनवरी को I-PAC डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर ED रेड के दौरान ममता पहुंच गई थीं। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ ED की याचिका पर सुनवाई जारी है। ED की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें पेश कीं। बंगाल सरकार की ओर से सीनियर एडवोक्ट मेनका गुरुस्वामी पेश हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक राजनीतिक पार्टी कोर्ट की कार्यवाही को सोशल मीडिया पर हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कोर्ट से इस पर रोक लगाने की मांग की। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने ED की रेड के बीच CM ममता बनर्जी के दखल को गलत बताया था। कोर्ट ने कहा- यह राज्य और केंद्र के बीच का विवाद नहीं है। किसी भी राज्य का सीएम ऐसा करता है तो यह लोकतंत्र को खतरे में डालना है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Bengal Govt Accuses BJP Social Media Weapon

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नई दिल्ली/कोलकाता14 मिनट पहले कॉपी लिंक कोलकाता में 8 जनवरी को I-PAC डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर ED रेड के दौरान ममता पहुंच गई थीं। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन I-PAC रेड मामले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ ED की याचिका पर सुनवाई जारी है। ED की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें पेश कीं। बंगाल सरकार की ओर से सीनियर एडवोक्ट मेनका गुरुस्वामी पेश हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक राजनीतिक पार्टी कोर्ट की कार्यवाही को सोशल मीडिया पर हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कोर्ट से इस पर रोक लगाने की मांग की। जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कल कहा था कि जब कोई मुख्यमंत्री किसी केंद्रीय एजेंसी की चल रही जांच में दखल देता है, तो इसे केंद्र और राज्य सरकार के बीच का विवाद नहीं कहा जा सकता। दरअसल 8 जनवरी को ED ने कोलकाता स्थित पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी I-PAC डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और दफ्तर पर छापा मारा था। इस दौरान ममता वहां पहुंचीं और कुछ फाइलें लेकर चली गईं। इसके बाद ED जांच में बाधा डालने के आरोप में ममता और बंगाल पुलिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची। ममता की 4 दलीलें ममता की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील रखी। उन्होंने कहा- ED को जांच करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। यह सिर्फ उनका काम है, अधिकार नहीं। ED का अधिकारी जब काम कर रहा है, तो वह सिर्फ ‘सरकारी कर्मचारी’ है। वह अपने विभाग से अलग किसी अधिकार का दावा नहीं कर सकता। ED ने कहा कि उनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ। ऐसा नहीं है, क्योंकि अधिकारी सिर्फ ड्यूटी निभा रहा है, मौलिक अधिकार का सवाल ही नहीं उठता। ईडी खुद एक ताकतवर एजेंसी है वह खुद को ‘जनता का रक्षक’ बताकर कोर्ट में नहीं आ सकती। सुप्रीम कोर्ट के 4 कमेंट यह असल में किसी एक व्यक्ति का काम है। इसे पूरे सिस्टम या लोकतंत्र का विवाद बताना सही नहीं। संविधान बनाते समय किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक मुख्यमंत्री किसी जांच एजेंसी के दफ्तर में पहुंच जाएगा। सिर्फ कानूनी सिद्धांत से काम नहीं चलेगा। हमें जमीन की हकीकत भी देखनी होगी। संविधान की व्याख्या समय के साथ बदलती रहती है। हर नए हालात में कोर्ट को नए सिरे से सोचना पड़ता है। ऐसे समझें… तृणमूल के लिए I-PAC इतनी जरूरी क्यों 2021 के चुनाव में: ममता के लिए I-PAC ने रणनीति बनाई। उन्होंने फर्म को संगठन का काम दिया। प्रत्याशी चयन, बूथ लेवल मैनेजमेंट, भाषण, सोशल पोस्ट, पोस्टर, नारे सब कुछ I-PAC ही कर रही थी। इस चुनाव में: टीएमसी डेटा पर फोकस कर रही है। 2021 विस और 2024 लोकसभा चुनाव के बूथ स्तरीय आंकड़ों का विश्लेषण I-PAC ने ही किया। हर सीट को 3 कैटेगरी में बांटा: मजबूत, कमजोर और लो वोट मार्जिन। 15 हजार तक मार्जिन की सीटें चुनीं। टीम एसआईआर को भी ट्रैक कर रही है: पार्टी का मानना है कि वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम हटने से गणित बिगड़ सकता है, इसलिए शैडो एजेंट्स लाए गए। ये एजेंट्स नाम कटने वाले वोटरों तक पहुंचे: उनसे फार्म भरवाए, री-एंट्री करवाई। बीएलओ को ट्रैक करना, वोटर लिस्ट की गड़बड़ी पकड़ना, फील्ड से रियल टाइम इनपुट देना, ये काम शैडो एजेंट्स ही कर रहे थे। हर सीट पर अलग वॉर रूम है: जहां 20 सदस्यीय टीम काम करती है। छोटी बैठकें अरेंज करती है। I-PAC रेड मामला : 2,742 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग केस I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी है। यह राजनीतिक दलों के लिए बड़े स्तर पर चुनावी अभियानों का काम करती है। कंपनी और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन पर करोड़ों रुपए के कोयला चोरी घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। CBI ने इस मामले में 27 नवंबर 2020 को FIR दर्ज की थी। पूरा मामला ₹2,742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। आरोप है कि ₹20 करोड़ हवाला के जरिए I-PAC तक ट्रांसफर हुए। ED ने 28 नवंबर 2020 को इसकी जांच शुरू की थी। 8 जनवरी 2026 को ED ने कोलकाता में I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापा मारा था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

छतरपुर में ब्रेक लगते ही गिरे बाराती, ड्राइवर की पिटाई:वीडियो में मारपीट कैद, हादसे को लापरवाही मानकर भीड़ ने चालक को पीटा

छतरपुर में ब्रेक लगते ही गिरे बाराती, ड्राइवर की पिटाई:वीडियो में मारपीट कैद, हादसे को लापरवाही मानकर भीड़ ने चालक को पीटा

छतरपुर जिले के किशनगढ़ थाना क्षेत्र में गुरुवार को पिकअप वाहन ड्राइवर के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। घटना का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ लोग ड्राइवर के साथ मारपीट करते दिख रहे हैं। यह घटना देवरा और किशनगढ़ के बीच रायपुरा जंगल की घाटी में हुई। जानकारी के अनुसार, पिकअप वाहन एक बारात से लौट रहा था। वाहन के अंदर कुछ बाराती बैठे थे, जबकि कई लोग छत पर सवार थे। रास्ते में अचानक मिट्टी का ढेर आ जाने के कारण ड्राइवर ने वाहन को नियंत्रित करने के लिए अचानक ब्रेक लगाए। ब्रेक लगते ही छत पर बैठे दो बाराती संतुलन खोकर नीचे गिर गए। दोनों बारातियों के गिरने के बाद, वहां मौजूद अन्य लोगों ने इसे ड्राइवर की लापरवाही माना। इसके बाद गुस्साए बारातियों ने ड्राइवर को गाड़ी से नीचे उतारा और उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। इसी दौरान किसी ने घटना का वीडियो बना लिया, जो अब सामने आया है। ड्राइवर को भर्ती कराया मारपीट में ड्राइवर को गंभीर चोटें आई हैं। बताया जा रहा है कि उसके पैर में गहरी चोट लगी है। घायल चालक को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका उपचार जारी है। किशनगढ़ थाना प्रभारी कमलजीत मवई ने बताया कि यह मामला संज्ञान में आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अचानक ब्रेक लगाने से दो लोग गिर गए थे, जिसके बाद ड्राइवर के साथ मारपीट की गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

‘हताशा में कार्रवाई’: कुमारगंज में मतदान के बीच भाजपा के सुभेंदु सरकार का पीछा किया गया, पिटाई की गई | वीडियो | राजनीति समाचार

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आखरी अपडेट:23 अप्रैल, 2026, 15:25 IST सरकार के अलावा, टीएमसी के मौजूदा विधायक तोराफ हुसैन मंडल, सीपीआई (एम) के मोफज्जल हुसैन और कांग्रेस के गुलाम मार्तुजा मंडल भी कुमारगंज से मैदान में हैं। कुमारगंज से भाजपा उम्मीदवार सुभेंदु सरकार ने आरोप लगाया कि उन पर टीएमसी कार्यकर्ताओं ने हमला किया (छवि क्रेडिट: एक्स/@अमित_ठाकुर_बीजेपी) पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान के बीच, भाजपा नेता सुभेंदु सरकार ने दावा किया कि बूथ जाम करने का विरोध करने पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला किया। कुमारगंज से भाजपा उम्मीदवार सरकार ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में हुई घटना के दौरान वह घायल हो गए और उनकी कार में तोड़फोड़ की गई। पत्रकारों से बात करते हुए, भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कई मतदान केंद्रों पर तैनात एजेंटों को “जबरन हटा दिया गया”। #घड़ी | कुमारगंज, पश्चिम बंगाल: कुमारगंज से भाजपा उम्मीदवार सुभेंदु सरकार कहते हैं, “कुमारगंज विधानसभा क्षेत्र में, 8-10 मतदान केंद्रों पर हमारे मतदान एजेंटों को जबरन हटा दिया गया। मैंने व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया और सुनिश्चित किया कि उन्हें वापस अंदर जाने दिया जाए। जब ​​मैंने दौरा किया… pic.twitter.com/6CfusME1Kg– एएनआई (@ANI) 23 अप्रैल 2026 “मैंने व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया और सुनिश्चित किया कि उन्हें वापस अंदर जाने दिया जाए। जब ​​मैं जमीनी स्थिति का निरीक्षण करने के लिए बूथ नंबर 24 पर गया, तो उन्होंने मेरी पूरी टीम और मुझ पर हमला कर दिया; वे स्पष्ट रूप से डराने-धमकाने और डर का माहौल बनाने पर आमादा थे…”, उन्होंने कहा, जैसा कि समाचार एजेंसी ने उद्धृत किया है एएनआई. ऑनलाइन प्रसारित एक वीडियो में दिखाया गया कि सरकार का पीछा किया जा रहा है और उस पर हमला किया जा रहा है क्योंकि सुरक्षाकर्मी नेता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए घटनास्थल पर पहुंचे थे। दक्षिण दिनाजपुर के कुमारगंज से बीजेपी उम्मीदवार शुभेंदु सरकार पर स्थानीय लोगों ने हमला कर दिया. जब भाजपा नेता अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए घटनास्थल से भाग रहे थे तो एक सुरक्षाकर्मी को उनकी सुरक्षा करते देखा जा सकता है। pic.twitter.com/sKMuxemzjN– पीयूष राय (@Benarasiyaa) 23 अप्रैल 2026 विधानसभा चुनाव 2026 वोटिंग लाइव ‘डर, हताशा से काम कर रहे’ सुभेंदु सरकार ने दावा किया कि टीएमसी ने उन पर और उनकी टीम पर “बेहद हताशा और डर” के कारण हमला किया। उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी चुनाव हार गई हैं और तृणमूल कांग्रेस इस क्षेत्र की सभी चार सीटें हार रही है। बेहद हताशा और डर के कारण उन्होंने हम पर हमला किया।” एएनआई. सरकार के अलावा, टीएमसी के मौजूदा विधायक तोराफ हुसैन मंडल, सीपीआई (एम) के मोफज्जल हुसैन और कांग्रेस के गुलाम मरतुजा मंडल भी कुमारगंज विधानसभा क्षेत्र से मैदान में हैं। 2021 के विधानसभा चुनावों में, टीएमसी के मंडल ने 89,763 वोट हासिल किए और बीजेपी के मानस सरकार को 29,367 वोटों के अंतर से हराया। पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान जारी है, राज्य में दोपहर एक बजे तक 62.18 प्रतिशत मतदान हुआ। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 23 अप्रैल, 2026, 15:12 IST समाचार राजनीति ‘हताशा में कार्रवाई’: कुमारगंज में मतदान के बीच भाजपा के सुभेंदु सरकार का पीछा किया गया, पिटाई की गई | वीडियो अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल में मतदान हिंसा(टी)शुभेंदु सरकार पर हमला(टी)कुमारगंज विधानसभा क्षेत्र(टी)टीएमसी बनाम बीजेपी झड़प(टी)बूथ जाम करने के आरोप(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)मतदान एजेंटों को हटाया गया(टी)ममता बनर्जी की आलोचना

जातिवाद पर छलका 'पंचायत' एक्टर का दर्द:विनोद सूर्यवंशी ने कहा- आज भी मंदिर में नहीं मिलती एंट्री; होटल में धोनी पड़ी थीं अपनी प्लेटें

जातिवाद पर छलका 'पंचायत' एक्टर का दर्द:विनोद सूर्यवंशी ने कहा- आज भी मंदिर में नहीं मिलती एंट्री; होटल में धोनी पड़ी थीं अपनी प्लेटें

वेब सीरीज पंचायत में सचिव जी के किरदार से चर्चा में आए विनोद सूर्यवंशी ने हाल ही में बताया कि उनके कर्नाटक स्थित गांव में आज भी उन्हें एक मंदिर में प्रवेश नहीं मिलता है। विनोद सूर्यवंशी ने सिद्धार्थ कनन के साथ बातचीत में कहा कि उनके गांव में आज भी जातिगत आधार पर भेदभाव होता है। उन्होंने बताया कि गांव दो हिस्सों में बंटा हुआ है, जहां एक तरफ उच्च जाति के लोग रहते हैं और दूसरी तरफ दलित जाति के लोग। विनोद ने बताया कि आज भी एक ऐसा मंदिर है जहां हमें जाने (दलित समुदाय) की अनुमति नहीं है। हम मंदिर के अंदर नहीं जा सकते। हमें बाहर ही तेल देना पड़ता है, नारियल चढ़ाना पड़ता है और फिर पुजारी अंदर जाकर चढ़ाते हैं। उन्होंने बताया कि मैं कुछ समय पहले मंदिर में अपने बच्चे का मुंडन कराने के लिए गया था। सोचा था कि अब कुछ चीजें बदल गई होंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आज भी वही चीजें अनुमति नहीं हैं। बचपन में होटल में खुद प्लेटें धोनी पड़ीं विनोद सूर्यवंशी ने अपने बचपन का अनुभव शेयर करते हुए बताया कि 7-8 साल की उम्र में जब वह अपने पिता के साथ गांव गए थे, तो होटल में खाना खाने के बाद उन्हें अपनी प्लेटें खुद धोनी पड़ीं, जबकि उन्होंने पूरा बिल चुकाया था। विनोद ने यह भी कहा कि आर्थिक तंगी के कारण उनके परिवार के लिए त्योहार खुशी नहीं, बल्कि दुख का कारण होते थे। उन्होंने बताया कि कई बार उन्होंने अपने माता-पिता को त्योहारों के दौरान रोते देखा। एक्टर ने यह भी दावा किया कि उन्हें इंडस्ट्री में भी भेदभाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि डार्क कॉम्प्लेक्शन की वजह से कई बार उन्हें रिजेक्ट किया गया और एक बार सिलेक्ट होने के बाद भी हटा दिया गया।

19 साल के जोडर की रैंकिंग में टॉप-50 में एंट्री:राफेल जोडर कमाचो टेनिस की नई सनसनी; स्पेनिश दिग्गज नडाल जैसा नाम होने से तुलना

19 साल के जोडर की रैंकिंग में टॉप-50 में एंट्री:राफेल जोडर कमाचो टेनिस की नई सनसनी; स्पेनिश दिग्गज नडाल जैसा नाम होने से तुलना

स्पेनिश टेनिस की दुनिया में वर्तमान में कार्लोस अल्कारेज का दबदबा है, लेकिन अब 19 वर्षीय राफेल जोडर कमाचो एक नई सनसनी बनकर उभरे हैं। स्पेनिश होने और ‘राफेल’ नाम होने के कारण उनकी तुलना दिग्गज राफेल नडाल से होना स्वाभाविक है, लेकिन जोडर ने बड़ी सादगी से इस समानता को स्पष्ट किया है। जोडर ने बताया, ‘नडाल मेरे आदर्श हैं, लेकिन मेरा नाम उनके नाम पर नहीं रखा गया है। मेरे पिता, दादा और परदादा, तीनों का नाम राफेल था।’ यह नाम उनकी पारिवारिक परंपरा का हिस्सा है, लेकिन कोर्ट पर उनके प्रदर्शन ने नडाल जैसे सुनहरे भविष्य की उम्मीदें जगा दी हैं। राफेल जोडर की यात्रा किसी चमत्कार से कम नहीं है। एक साल पहले जोडर रैंकिंग में शीर्ष 600 से भी बाहर थे। मार्च 2024 में उन्होंने पहली बार शीर्ष-100 में प्रवेश किया। अब वे सीधे 42वें नंबर पर पहुंच गए हैं। मैड्रिड ओपन में डेब्यू से ठीक पहले शीर्ष-50 में जगह बनाना उनकी कड़ी मेहनत का प्रमाण है। इस महीने मोरक्को में अपना पहला टूर-लेवल खिताब जीतने के बाद, उन्होंने बार्सिलोना ओपन के सेमीफाइनल तक का सफर तय किया, जहां उन्होंने अनुभवी खिलाड़ियों को धूल चटाई। जोडर सितंबर 2006 में जन्मे, तब तक नडाल दो ग्रैंड स्लैम जीते चुके थे। जोडर के लिए सबसे यादगार पल पिछले साल दिसंबर में आया, जब जेद्दा में उनकी मुलाकात राफेल नडाल से हुई। जोडर ने बताया, ‘नडाल ने मुझे यूएस ओपन जूनियर जीतने पर बधाई दी। यह जानकर बहुत अच्छा लगा कि वे स्पेनिश युवाओं की प्रगति पर नजर रखते हैं। वे न केवल टेनिस, बल्कि स्पेनिश खेलों के इतिहास के सबसे महान एथलीट हैं।’ जोडर कहते हैं, ‘मेरा लक्ष्य कोई खास रैंकिंग नहीं, बल्कि हर टूर्नामेंट में बेहतर प्रदर्शन करना है। यह मेरा पहला साल है और मैं अभी बहुत कुछ सीख रहा हूं।’ स्पेनिश टेनिस को अब एक ऐसा ‘राफा’ मिल गया है, जो अपनी खुद की पहचान बनाने के लिए तैयार है। फुटबॉल का मैदान छोड़, टेनिस कोर्ट को चुना मैड्रिड के एक शिक्षक परिवार में जन्मे जोडर ने महज चार साल की उम्र में रैकेट थाम लिया था। शुरुआत में वे फुटबॉल के भी शौकीन थे, लेकिन 12 साल की उम्र में उन्होंने एक कठिन फैसला लिया और फुटबॉल छोड़कर पूरी तरह टेनिस को अपना लिया। बचपन में वह मैड्रिड मास्टर्स के मैचों को दर्शक दीर्घा में बैठकर देखा करते थे। उन्हें आज भी 2013 में जोकोविच और दिमित्रोव के बीच हुआ वह ऐतिहासिक मुकाबला याद है, जिसने उन्हें पेशेवर खिलाड़ी बनने के लिए प्रेरित किया।