वेब सीरीज पंचायत में सचिव जी के किरदार से चर्चा में आए विनोद सूर्यवंशी ने हाल ही में बताया कि उनके कर्नाटक स्थित गांव में आज भी उन्हें एक मंदिर में प्रवेश नहीं मिलता है। विनोद सूर्यवंशी ने सिद्धार्थ कनन के साथ बातचीत में कहा कि उनके गांव में आज भी जातिगत आधार पर भेदभाव होता है। उन्होंने बताया कि गांव दो हिस्सों में बंटा हुआ है, जहां एक तरफ उच्च जाति के लोग रहते हैं और दूसरी तरफ दलित जाति के लोग। विनोद ने बताया कि आज भी एक ऐसा मंदिर है जहां हमें जाने (दलित समुदाय) की अनुमति नहीं है। हम मंदिर के अंदर नहीं जा सकते। हमें बाहर ही तेल देना पड़ता है, नारियल चढ़ाना पड़ता है और फिर पुजारी अंदर जाकर चढ़ाते हैं। उन्होंने बताया कि मैं कुछ समय पहले मंदिर में अपने बच्चे का मुंडन कराने के लिए गया था। सोचा था कि अब कुछ चीजें बदल गई होंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आज भी वही चीजें अनुमति नहीं हैं। बचपन में होटल में खुद प्लेटें धोनी पड़ीं विनोद सूर्यवंशी ने अपने बचपन का अनुभव शेयर करते हुए बताया कि 7-8 साल की उम्र में जब वह अपने पिता के साथ गांव गए थे, तो होटल में खाना खाने के बाद उन्हें अपनी प्लेटें खुद धोनी पड़ीं, जबकि उन्होंने पूरा बिल चुकाया था। विनोद ने यह भी कहा कि आर्थिक तंगी के कारण उनके परिवार के लिए त्योहार खुशी नहीं, बल्कि दुख का कारण होते थे। उन्होंने बताया कि कई बार उन्होंने अपने माता-पिता को त्योहारों के दौरान रोते देखा। एक्टर ने यह भी दावा किया कि उन्हें इंडस्ट्री में भी भेदभाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि डार्क कॉम्प्लेक्शन की वजह से कई बार उन्हें रिजेक्ट किया गया और एक बार सिलेक्ट होने के बाद भी हटा दिया गया।













































