Bajaj Finance ₹6 Dividend; Rajiv Bajaj Exits Board

Hindi News Business Bajaj Finance ₹6 Dividend; Rajiv Bajaj Exits Board | 2026 Profit Up 22% नई दिल्ली4 मिनट पहले कॉपी लिंक बजाज फाइनेंस ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4) में ₹5,465 करोड़ का शुद्ध मुनाफा यानी नेट प्रॉफिट कमाया है। पिछले साल की इसी तिमाही के ₹4,480 करोड़ के मुकाबले इसमें 22% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कंपनी ने अच्छे नतीजों के साथ ही यह भी जानकारी दी है कि राजीव बजाज बोर्ड से इस्तीफा दे रहे हैं। कंपनी के मुनाफे में इस उछाल की बड़ी वजह बैड लोन (फंसे हुए कर्ज) के लिए किए जाने वाले प्रोविजन में कमी आना है। विश्लेषकों ने इस तिमाही में ₹5,490 करोड़ के मुनाफे का अनुमान लगाया था, कंपनी के नतीजे लगभग उसी के आसपास रहे हैं। कंपनी का रेवेन्यू भी 18% बढ़कर ₹21,606 करोड़ पर पहुंच गया है, जो पिछले साल ₹18,294 करोड़ था। राजीव बजाज 30 जुलाई को पद छोड़ेंगे कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि राजीव बजाज ने बोर्ड से हटने की इच्छा जताई है। वे कंपनी की अपकमिंग एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में दोबारा नियुक्ति के लिए खुद को पेश नहीं करेंगे। ऐसे में 30 जुलाई 2026 को होने वाली AGM के बाद वे नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद को छोड़ देंगे। बोर्ड ने कंपनी में उनके लंबे योगदान की सराहना की है। शेयरहोल्डर्स को ₹6 का डिविडेंड मिलेगा रिजल्ट के साथ ही कंपनी ने अपने निवेशकों के लिए ₹6 प्रति शेयर डिविडेंड की घोषणा भी की है। इसमें ₹0.60 का स्पेशल डिविडेंड भी शामिल है, जो बजाज हाउसिंग फाइनेंस के शेयरों की बिक्री से हुए फायदे के तौर पर दिया जा रहा है। इस डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 30 जून 2026 तय की गई है। कंपनियां अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा अपने शेयरधारकों के देती हैं, इसे डिविडेंड या लाभांश कहा जाता है। एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 21% की ग्रोथ बजाज फाइनेंस की लोन बुक यानी एसेट अंडर मैनेजमेंट में शानदार बढ़त देखी गई है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी का AUM 21% बढ़कर ₹3,72,986 करोड़ हो गया है, जो एक साल पहले ₹3,08,832 करोड़ था। कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 20% बढ़कर ₹10,716 करोड़ रही। एसेट क्वालिटी में सुधार और MSME सेगमेंट का हाल कंपनी की एसेट क्वालिटी पिछले साल के मुकाबले बेहतर हुई है। ग्रॉस NPA 0.29% से घटकर 0.27% पर आ गया है, जबकि नेट NPA 0.11% पर स्थिर है। हालांकि, कंपनी MSME सेगमेंट में बढ़ते बैड लोन की समस्या से जूझ रही थी, लेकिन इस बार कुल प्रोविजन ₹2,167 करोड़ से घटकर ₹2,008 करोड़ रह गया है। कंपनी ने भविष्य के आर्थिक जोखिमों के लिए ₹142 करोड़ का अतिरिक्त क्रेडिट लॉस प्रोविजन भी रखा है। क्या होता है AUM, प्रोविजनिंग और स्पेशल डिविडेंड एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM): किसी फाइनेंस कंपनी के पास मौजूद कुल लोन और निवेश की वैल्यू को AUM कहते हैं। स्पेशल डिविडेंड: जब कंपनी को किसी संपत्ति की बिक्री या अचानक बड़ा मुनाफा होता है, तो वह नियमित डिविडेंड के अलावा जो अतिरिक्त राशि देती है, उसे स्पेशल डिविडेंड कहते हैं। प्रोविजनिंग क्यों जरूरी: बैंकों और NBFC को भविष्य में होने वाले संभावित घाटे या न चुकाए जाने वाले लोन के लिए मुनाफे का एक हिस्सा अलग रखना पड़ता है, इसे ही प्रोविजनिंग कहते हैं। ये खबर भी पढ़ें… अडाणी पावर का चौथी तिमाही में मुनाफा 64% बढ़ा: यह ₹4,271 करोड़ रहा, रेवेन्यू भी 10% बढ़ा; नतीजों के बाद शेयर 2.5% गिरा अडाणी पावर ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं, जिसमें कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 64% बढ़कर ₹4,271 करोड़ पर पहुंच गया है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹2,599 करोड़ का मुनाफा हुआ था। हालांकि, मुनाफे में इस बड़ी बढ़त के बावजूद बुधवार को कंपनी का शेयर करीब 2.48% गिरकर ₹217.80 पर बंद हुआ। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
क्या बालों को डाई करने से काले बाल भी हो जाते हैं सफेद? मन में हैं कंफ्यूजन तो दूर कर लीजिए अपना भ्रम

Last Updated:April 29, 2026, 18:17 IST क्या बार-बार हेयर डाई करने से काले बाल भी सफेद होने लगते हैं? बहुत से लोगों के मन में यह सवाल रहता है और इसे लेकर कई तरह की बातें भी सुनने को मिलती हैं. अगर आप भी इस कंफ्यूजन में हैं, तो सच्चाई जान लेना जरूरी है. ख़बरें फटाफट हेयर डाई सीधे तौर पर काले बालों को सफेद नहीं बनाती. बालों में सफेदी दिखते ही बहुत से लोग हेयर डाई का सहारा लेते हैं. कोई फैशन के लिए बाल रंगता है तो कोई सफेद बाल छिपाने के लिए. लेकिन इसी बीच एक सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि क्या बार-बार डाई करने से काले बाल भी धीरे-धीरे सफेद होने लगते हैं? कई लोग मानते हैं कि हेयर कलर लगाने से बाल खराब हो जाते हैं और नए बाल सफेद निकलने लगते हैं. अगर आपके मन में भी ऐसा कंफ्यूजन है, तो इस भ्रम को समझना जरूरी है. असल बात यह है कि हेयर डाई सीधे तौर पर काले बालों को सफेद नहीं बनाती. बालों का रंग हमारे शरीर में बनने वाले मेलेनिन नाम के पिगमेंट पर निर्भर करता है. जब उम्र बढ़ने लगती है या जेनेटिक कारण होते हैं, तो मेलेनिन कम बनने लगता है और बाल सफेद दिखने लगते हैं. यानी बाल सफेद होने की मुख्य वजह डाई नहीं, बल्कि शरीर के अंदर होने वाले बदलाव, उम्र, खानपान, तनाव और आनुवंशिक कारण होते हैं. इसलिए यह कहना गलत होगा कि सिर्फ डाई लगाने से काले बाल सफेद हो जाते हैं. गलत प्रोडक्ट आपके बालों को बनाते हैं बेजानहालांकि, लगातार और गलत तरीके से हेयर डाई इस्तेमाल करने से बालों को नुकसान जरूर हो सकता है. कई हेयर कलर में केमिकल्स होते हैं, जो बालों को रूखा, बेजान और कमजोर बना सकते हैं. अगर डाई बार-बार की जाए, लंबे समय तक लगी रहे या सही देखभाल न की जाए, तो बाल टूटने लगते हैं और उनकी चमक कम हो सकती है. ऐसे में लोगों को लगता है कि बाल सफेद हो रहे हैं, जबकि कई बार बाल सिर्फ डैमेज और बेजान नजर आ रहे होते हैं. डाई आपके रूट्स को नहीं डैमेज करताकुछ लोग डाई करने के बाद नए उगे बालों में सफेदी देखकर घबरा जाते हैं. दरअसल, डाई केवल पहले से मौजूद बालों को रंगती है, सिर की जड़ों या नए उगने वाले बालों पर इसका असर नहीं होता. जब कुछ दिनों बाद जड़ों से नए बाल निकलते हैं और वे सफेद दिखाई देते हैं, तो लोगों को लगता है कि डाई की वजह से ऐसा हुआ है. जबकि सच्चाई यह है कि वे बाल पहले से ही सफेद आने वाले थे, बस डाई के कारण पहले नजर नहीं आ रहे थे. अच्छी क्वालिटी का प्रोडक्ट चुनेंअगर आप हेयर डाई करते हैं, तो कुछ सावधानियां रखना जरूरी है. हमेशा अच्छी क्वालिटी का प्रोडक्ट चुनें और बहुत ज्यादा सस्ते या नकली रंगों से बचें. डाई लगाने से पहले पैच टेस्ट करें, ताकि एलर्जी का खतरा कम हो. बार-बार बाल रंगने के बजाय जरूरत पड़ने पर ही इस्तेमाल करें. साथ ही डाई के बाद अच्छे शैम्पू, कंडीशनर और हेयर ऑयल से बालों की देखभाल करें, ताकि बाल स्वस्थ रहें. ऐसे बचाएं बालों को सफेद होने सेबालों को समय से पहले सफेद होने से बचाने के लिए लाइफस्टाइल भी बहुत मायने रखती है. तनाव कम लें, अच्छी नींद लें और संतुलित आहार खाएं. शरीर में विटामिन B12, आयरन, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की कमी भी बालों की सेहत पर असर डाल सकती है. इसलिए सिर्फ बाहर से रंग लगाने के बजाय अंदर से पोषण देना भी जरूरी है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 29, 2026, 18:17 IST
Exit Poll Result 2026 LIVE Update; West Bengal Tamil Nadu Kerala

Hindi News National Exit Poll Result 2026 LIVE Update; West Bengal Tamil Nadu Kerala | Assam Election BJP Congress TMC DMK Seats नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में वोटिंग खत्म। बारी एग्जिट पोल की। शाम 6:30 बजे के बाद। जानिए पिछले एग्जिट पोल कितने सही, कितने गलत 1. पश्चिम बंगालः 2021: 10 में से 5 एग्जिट पोल ने TMC की जीत दिखाई, 3 ने BJP की सरकार और 2 ने कड़ी टक्कर दिखाई। 2016: सभी 6 एग्जिट पोल ने ममता की वापसी की संभावना जताई। 2011: सर्वे एजेंसियां कम थीं। स्टार न्यूज-नीलसन, हेडलाइन टुडे और सीएनएन-आईबीएन-सीएसडीएस ने TMC की जीत दिखाई। 2. तमिलनाडुः 2021: सभी 4 एग्जिट पोल ने DMK की सरकार का अनुमान लगाया। 2016: पोल बंटे हुए थे, 8 में से 5 में DMK और 3 में AIDMK सरकार की संभावना जताई गई। 2011: 3 बड़े सर्वे में AIADMK की सरकार बनने की संभावना जताई थी, लेकिन पार्टी को ज्यादा सीटें मिलीं। 3. केरलमः 2021: सभी 4 एग्जिट पोल ने LDF की वापसी का अनुमान लगाया। 2016: 4 में से 3 पोल LDF के पक्ष में थे, 1 ने कड़ी टक्कर बताई। 2011: 3 सर्वे एजेंसियों के पोल में UDF की सरकार बनाई। 4. असमः 2021: सभी 5 एग्जिट पोल ने बीजेपी की सरकार का अनुमान लगाया। 2016: भी 5 में से 4 पोल बीजेपी के पक्ष में थे, 1 ने त्रिशंकु विधानसभा की संभावना जताई। 2011: 3 पोल में सभी ने कांग्रेस की सरकार का अनुमान लगाया। पांचों राज्यों में 3 से 12% मतदान बढ़ा: पांचों राज्यों में इस बार रिकॉर्ड वोटिंग हुई। सबसे बड़ा फैक्टर वोटर लिस्ट रिविजन (SIR) को बताया जा रहा है। इसमें बड़ी संख्या में डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए। इससे कुल वोटर्स की संख्या घट गई, लेकिन वोट डालने वाले लोगों की संख्या लगभग समान रही, जिससे प्रतिशत बढ़ गया। महिलाओं को कैश सहायता, मुफ्त यात्रा और आरक्षण जैसे वादों ने महिला वोटर्स को बड़ी संख्या में बाहर निकाला। इस बार महिलाओं का वोट प्रतिशत पुरुषों की तुलना में बंगाल-तमिलनाडु में 2%, असम में 1%, केरल में 5% और पुडुचेरी में 3% ज्यादा रहा। एग्जिट पोल से जुड़े 5 सवाल और उनके जवाब 1. एग्जिट पोल क्या होता है? जवाब: चुनाव के दौरान जनता का मूड जानने के लिए दो तरह के सर्वे किए जाते हैं। वोटिंग से पहले के सर्वे को ओपिनियन पोल कहते हैं, जबकि वोटिंग के दौरान होने वाले सर्वे को एग्जिट पोल कहा जाता है। आम तौर पर एग्जिट पोल के नतीजे आखिरी फेज की वोटिंग खत्म होने के एक घंटे बाद जारी किए जाते हैं। 2. एग्जिट पोल की शुरुआत कब और कैसे हुई? जवाब: चुनावी सर्वे की शुरुआत सबसे पहले अमेरिका में हुई। 1930 में जॉर्ज गैलप और क्लॉड रोबिंसन ने अमेरिकी सरकार के कामकाज पर लोगों की राय जानने के लिए ये सर्वे किया था। एग्जिट पोल की शुरुआत काफी बाद में हुई। टाइम मैगजीन के मुताबिक 1967 में पहली बार दुनिया में बड़े स्तर पर कोई एग्जिट पोल किया गया था। अमेरिका के पॉलिटिकल रिसर्चर वॉरेन मिटोफस्की ने केंटुकी राज्य में होने वाले गवर्नर चुनाव के दौरान पहली बार एग्जिट पोल किया था। दुनिया में पहली बार किस मीडिया कंपनी ने ये तरीका अपनाया, इसकी सटीक जानकारी नहीं है। 3. भारत में एग्जिट पोल की शुरुआत कब हुई? जवाब: भारत में एग्जिट पोल की शुरुआत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक ओपिनियन (IIPU) के तत्कालीन प्रमुख एरिक डी कोस्टा ने की थी। 1980 के दशक में भारत में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर एग्जिट पोल को लेकर पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रणय रॉय और यूके के पॉलिटिकल एक्सपर्ट डेविड बटलर ने मिलकर काम किया। 1996 में सरकारी चैनल दूरदर्शन ने CSDS के साथ मिलकर पहली बार एग्जिट पोल जारी किए। 4. भारत में एग्जिट पोल को लेकर क्या कानून और नियम हैं? जवाब: एग्जिट पोल का मामला अलग-अलग वजहों से तीन बार सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा है। रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट- 1951 के सेक्शन 126A के मुताबिक मतदान खत्म होने के आधे घंटे बाद ही एग्जिट पोल जारी किया जा सकता है। अगर कोई कंपनी या व्यक्ति मतदान खत्म होने से पहले एग्जिट पोल जारी करता है तो उसे अपराध माना जाएगा। ऐसा करने वाले को दो साल तक की जेल और जुर्माना या दोनों हो सकता है। 5. कौन-से फैक्टर्स तय करते हैं कि एग्जिट पोल कितना सटीक होगा? जवाब: एग्जिट पोल कितना स्टीक है, ये 3 मुख्य फैक्टर पर निर्भर करता है… 1. सैंपल साइज: जिस एग्जिट पोल का सैंपल साइज जितना बड़ा होता है, उसे उतना ही ज्यादा एक्यूरेट माना जाता है। मतलब ये हुआ कि सर्वे में जितना ज्यादा से ज्यादा लोगों से संपर्क किया जाए, उतना ज्यादा अच्छा है। 2. सर्वे में पूछे जाने वाले सवाल: सैंपल सर्वे में पूछा गए सवाल जितना न्यूट्रल होगा, एग्जिट पोल का रिजल्ट भी उतना ही सटीक होगा। 3. सर्वे का रेंज: सर्वे का दायरा जितना बड़ा होगा, रिजल्ट एक्यूरेट होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी। मान लीजिए किसी विधानसभा में सिर्फ दो या तीन पोलिंग बूथ से सैंपल लिए जाते हैं, जहां किसी एक पार्टी के उम्मीदवार की पकड़ है। इससे एग्जिट पोल के रिजल्ट पर असर पड़ सकता है। कार्टूनिस्ट चंद्रशेखर हाडा और मंसूर नकवी की नजर से एग्जिट पोल दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
विदिशा में सिंचाई नहर पर कब्जा, 11 को नोटिस:उद्वहन योजना पर अतिक्रमण, बन गए मकान और कॉलोनियां; कांग्रेस ने उठाए सवाल

विदिशा जिले में दशकों पुरानी उद्वहन सिंचाई योजना की नहर पर अतिक्रमण का मामला सामने आया है। किसानों के लिए बनाई गई यह नहर अब जमीन से लगभग गायब हो चुकी है। जहां कभी पानी बहता था, वहां अब पक्के निर्माण और कॉलोनियां बन गई हैं। मामले में राजस्व विभाग ने 11 लोगों को नोटिस जारी किए हैं। जानकारी के अनुसार, दौलतपुरा और मदनखेड़ा क्षेत्र में वर्षों पहले बनाई गई इस नहर का उद्देश्य खेतों तक पानी पहुंचाना था। वर्तमान में नहर का अधिकांश हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में है और मौके पर केवल जर्जर संरचनाएं ही बची हैं। जहां पहले पानी बहता था, वहां अब कंक्रीट निर्माण हो चुके हैं। कई स्थानों पर कॉलोनियां विकसित हो गई हैं, जिससे योजना का अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया है। मशीनरी जर्जर, उपकरण भी गायब बेतवा घाट के पास लगी सिंचाई मशीनरी खराब हालत में है। कई उपकरण अनुपयोगी हो चुके हैं, जबकि कुछ के चोरी होने की आशंका भी जताई जा रही है। मामले को लेकर कांग्रेस ने भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता आनंद जाट ने आरोप लगाया कि किसानों के हितों की अनदेखी हो रही है और नहर की जमीन पर कब्जा होना गंभीर मामला है। उन्होंने प्रशासन से अतिक्रमण हटाने और किसानों को उनका हक दिलाने की मांग की है। अधिकारियों के अनुसार यह योजना 40-50 साल पुरानी है, जिसके रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। तहसीलदार निधि लोधी ने बताया कि अब तक 11 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। जांच के आधार पर आगे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
शांत मतपत्र, अनिश्चित फैसला: यहां 3 कारक हैं जो बंगाल के नतीजे तय करेंगे | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:29 अप्रैल, 2026, 18:03 IST 2026 का बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 की तुलना में कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी और करीबी मुकाबले वाला प्रतीत होता है बुधवार, 29 अप्रैल, 2026 को कोलकाता में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के दौरान वोट डालने के लिए लोग कतार में इंतजार कर रहे हैं। (छवि: पीटीआई) पश्चिम बंगाल में एक बार बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण और धांधली-मुक्त दो चरण के चुनाव हुए हैं, जो दशकों की हिंसा, झड़पों और बूथ कैप्चरिंग के आरोपों से एक दुर्लभ प्रस्थान है। यह बदलाव एक अभूतपूर्व सुरक्षा तैनाती से प्रेरित है, जिसमें केंद्रीय बलों की 2,400 से अधिक कंपनियां और राज्य के बाहर से पुलिस-पर्यवेक्षकों के रूप में बड़ी संख्या में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शामिल हैं। साथ ही, ममता बनर्जी सरकार के तहत कानून और व्यवस्था की गिरती स्थिति को लेकर राजनीतिक संदेश ने कहानी को नया आकार दिया है, जिससे भाजपा को उनकी पुलिस और प्रशासन के शासन रिकॉर्ड पर सवाल उठाने का मौका मिला है, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी सहित दोनों दलों के नेताओं की तीखी टिप्पणियां सार्वजनिक धारणा को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे उपायों और घटनाओं का परिणाम एक विधानसभा चुनाव है जो 2021 की तुलना में कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी और करीबी मुकाबले वाला प्रतीत होता है, जो न केवल परिणामों में, बल्कि प्रक्रिया और धारणा दोनों में बदलाव का संकेत देता है। हालाँकि, असली कहानी अब तीन प्रमुख कारकों या तीन प्रश्नों में निहित है: क्या प्रवासी मतदाताओं ने निरंतरता या परिवर्तन को चुना? क्या महिला मतदाता एकजुट रहीं या पुनर्गणना कीं? क्या समेकन पैटर्न कायम रहा या बदल गया? ये प्रश्न अब परिणाम को परिभाषित करते हैं। पहला, प्रवासी वोट- यह किस ओर झुका और क्यों? इन मतदाताओं ने न केवल भाग लेने के लिए बल्कि नामावली में अपना स्थान सुरक्षित करने के लिए, अक्सर अत्यधिक गर्मी की स्थिति में भी लंबी दूरी की यात्रा की। क्या यह मौजूदा तृणमूल कांग्रेस के समर्थन में तब्दील हो गया, जिसे स्थानीय स्तर पर अंतर्निहित माना जाता है? या क्या यह भाजपा और इसकी बड़ी राष्ट्रीय पिच के साथ जुड़ गया? यह सबसे अधिक तरल परिवर्तनशील रहता है। दूसरा, महिला वोट करती हैं। महिला मतदाता लगातार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक मजबूत आधार रही हैं। अहम सवाल यह है कि क्या मामूली बदलाव भी हुआ है। उच्च मतदान वाले चुनाव में, इस ब्लॉक के भीतर छोटे बदलाव निर्णायक रूप से परिणामों को बदल सकते हैं। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कारक हिंदू एकीकरण कारक है। क्या कोई समेकन हुआ है? क्योंकि, मुसलमानों के विपरीत, ऐतिहासिक रूप से हिंदुओं को एकीकृत या सामूहिक तरीके से मतदान करने वाला नहीं माना गया है। विभिन्न जिलों और सीटों पर हिंदू हमेशा से विषम, गैर-अनुरूपतावादी प्रकार के रहे हैं। क्या इस बार कोई समेकन हुआ है, और क्या यह दृढ़, गहरा या खंडित हुआ है? कड़ी प्रतिस्पर्धा वाली सीटों पर, एकजुटता बनाम विभाजन अक्सर अंतिम परिणाम निर्धारित करता है। इसके अलावा, यदि हिंदू एकीकरण चुनावी पैटर्न में होता है, तो यह लगभग पांच दशकों में पहली बार बंगाल की राजनीति को नया आकार देने की संभावना है, और यह उस पारंपरिक विचार को भी तोड़ देगा जहां वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस सहित राजनीतिक दलों ने सत्ता में बने रहने के लिए 30% मुस्लिम वोटों को सुनिश्चित करने की कोशिश की थी। इस चुनाव में भी मुसलमान दीदी की तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में एकजुट होते दिख रहे हैं. सुरक्षा ताकत बनाम राजनीतिक संदेश पश्चिम बंगाल में दूसरे और अंतिम चरण का मतदान हो रहा है, जिसमें 90% तक मतदान हुआ है, जो पहले चरण की तरह है। सतह पर, रुझान अपरिवर्तित दिखता है। लेकिन चुनाव केवल मतदान से तय नहीं होते; वे इस बात पर निर्भर हैं कि किसने किसे वोट दिया और किस चीज़ ने उन्हें प्रेरित किया। जो बात तुरंत सामने आती है वह बड़े पैमाने पर हिंसा की अनुपस्थिति है। छोटी-मोटी झड़पों को छोड़कर, मतदान काफी हद तक शांतिपूर्ण और अपेक्षाकृत धांधली से मुक्त रहा। पूरे दिन किसी मौत की रिपोर्ट नहीं आई और न ही व्यापक बम हिंसा या ऐतिहासिक रूप से बंगाल चुनाव से जुड़ा कोई दृश्य सामने आया। भारत के चुनाव आयोग के लिए, यह एक उल्लेखनीय प्रशासनिक सफलता का प्रतीक है। 2021 के साथ विरोधाभास महत्वपूर्ण है। जबकि उस समय मतदान के दिन अधिकतर नियंत्रण था, उसके बाद चुनाव के बाद तीव्र हिंसा हुई, जिसने जनादेश को प्रभावित किया। इस बार, कम से कम अब तक, प्रक्रिया कहीं अधिक निहित प्रतीत होती है। फिर भी, इस शांत सतह के नीचे एक पुनर्गणित मतदाता है। उच्च मतदान न केवल लामबंदी बल्कि इरादे और तात्कालिकता को भी दर्शाता है। घर लौटने वाले प्रवासी, पहले से निष्क्रिय मतदाता बाहर निकल रहे हैं, और पारंपरिक गुट वफादारी का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं – ये पैटर्न एक बदलाव का सुझाव देते हैं जिसे कच्चे प्रतिशत पूरी तरह से समझा नहीं सकते हैं। पूरे दक्षिण बंगाल में, जो इस चरण का केंद्र है और ममता बनर्जी का राजनीतिक आधार है, मुकाबला काफी कड़ा और करीबी रहा है। क्षेत्रीय पहचान और राष्ट्रीय संदेश दोनों में स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा के साथ, अभियान की कहानियों में तीव्र टकराव हुआ है। परिणाम एक ऐसा चुनाव है जो आसान व्याख्या का विरोध करता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 29 अप्रैल, 2026, 18:02 IST समाचार चुनाव शांत मतपत्र, अनिश्चित फैसला: यहां 3 कारक हैं जो बंगाल के नतीजे तय करेंगे अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)टीएमसी(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)बीजेपी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव
अमेरिका ट्रम्प के तस्वीर वाले पासपोर्ट जारी करेगा:आजादी की 250वीं वर्षगांठ पर लिमिटेड एडिशन मिलेगा, ट्रम्प का गोल्डन सिग्नेचर भी दिखेगा

अमेरिका अपनी आजादी की 250वीं वर्षगांठ के मौके पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर वाले खास पासपोर्ट जारी करेगा। अमेरिकी विदेश विभाग ने मंगलवार को बताया कि यह लिमिटेड एडिशन नए डिजाइन वाले अमेरिकी पासपोर्ट इस गर्मियों से जारी किए जाएंगे। साथ ही इसमें राष्ट्रपति ट्रम्प का गोल्डन सिग्नेचर भी होगा। अधिकारी के मुताबिक, वॉशिंगटन पासपोर्ट एजेंसी से इन पासपोर्ट्स की शुरुआत होगी। वहां व्यक्तिगत रूप से पासपोर्ट रिन्यू कराने वालों को यही डिफॉल्ट पासपोर्ट मिलेगा। हालांकि, ऑनलाइन आवेदन करने वालों और अन्य केंद्रों पर मौजूदा डिजाइन जारी रहेगा। स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि, अमेरिका ये पासपोर्ट कस्टमाइज्ड आर्टवर्क और बेहतर इमेजरी के साथ आएंगे, लेकिन इनकी सुरक्षा वही रहेगी, जो अमेरिकी पासपोर्ट को दुनिया के सबसे सुरक्षित दस्तावेजों में से एक बनाती है। यह पासपोर्ट सीमित संख्या में जारी किए जाएंगे, लेकिन कितने जारी होंगे, यह अभी साफ नहीं है। पासपोर्ट के पीछे ‘डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस’ पेंटिंग होगी पासपोर्ट के पीछे के कवर पर जॉन ट्रंबुल की पेंटिंग ‘डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस’ की तस्वीर होगी। यह मशहूर पेंटिंग 1776 के उस पल को देखाती है जब अमेरिकी नेताओं ने पहली बार स्वतंत्रता का दस्तावेज कांग्रेस (अमेरीकी संसद) में पेश किया था। यह पेंटिंग अमेरिकी इतिहास का प्रतीक मानी जाती है और वॉशिंगटन डीसी के कैपिटल बिल्डिंग में भी लगी है। अभी जो अमेरिकी पासपोर्ट जारी होते हैं, उनके अंदर के फ्रंट कवर पर पर्सी मोरन की पेंटिंग होती है, जिसमें फ्रांसिस स्कॉट की फोर्ट मैकहेनरी पर हमले के बाद की सुबह दिखाई गई है। इसी घटना से अमेरिकी राष्ट्रगान लिखे जाने की प्रेरणा मिली थी और उसकी कुछ पंक्तियां भी अंदर छपी होती हैं। कई अन्य स्मारक चीजों पर भी ट्रम्प की तस्वीर ट्रम्प की तस्वीर का इस्तेमाल अन्य स्मारक चीजों में भी किया जा रहा है। इससे पहले, इंटीरियर डिपार्टमेंट ने नेशनल पार्क पास के नए डिजाइन पेश किए थे, जिनमें एक पास पर ट्रम्प और जॉर्ज वॉशिंगटन की तस्वीर साथ में है। सेक्रेटरी डग बर्गम ने कहा था कि यह पास अमेरिका की 250वीं सालगिरह और देश की जमीन की रक्षा करने वाली पीढ़ियों को सम्मान देने के लिए है। वहीं, पिछले महीने ट्रम्प की अगुआई वाली कमीशन ऑफ फाइन आर्ट्स ने ट्रम्प की तस्वीर वाले एक स्मारक सिक्के को भी मंजूरी दी है। ईरान का तंज- सिर्फ 250 साल पुराने पासपोर्ट को धरोहर बता रहे अमेरिका में नए पासपोर्ट डिजाइन के ऐलान के बाद मुंबई स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर तंज कसा। दूतावास ने X पर एक पारंपरिक घड़े ‘आफताबेह’ की तस्वीर शेयर की और लिखा कि अमेरिका 250 साल पुराने पासपोर्ट को ऐसे पेश कर रहा है, जैसे वह कोई बेहद पुरानी धरोहर हो, जबकि ईरान से 2,600 साल पुराना आफताबेह दिखा रहा है। इसके अलावा दूतावास ने पश्चिमी देशों पर निशाना साधते हुए लिखा कि पासपोर्ट पश्चिमी आविष्कार है। उन्होंने कहा कि हम पहले आजाद थे, सम्मान के साथ मिलते थे, फिर वे आए, लूट भी लिया और लाइन में खड़ा भी कर दिया। क्या पासपोर्ट पर राष्ट्रपति की तस्वीर सामान्य है पासपोर्ट में किसी मौजूदा राष्ट्रपति की तस्वीर लगाना आम बात नहीं है। ज्यादातर देशों में पासपोर्ट को एक न्यूट्रल और स्थायी पहचान दस्तावेज माना जाता है, इसलिए उसमें राजनीति से दूरी रखी जाती है। आमतौर पर इसके पन्नों पर राष्ट्रीय प्रतीक, ऐतिहासिक जगहें या संस्कृति से जुड़ी तस्वीरें होती हैं। अमेरिका में भी अब तक यही परंपरा रही है। वहां पासपोर्ट के अंदर फोर्ट मैकहेनरी जैसे ऐतिहासिक स्थलों या आजादी से जुड़े विजुएलस दिखाए जाते हैं। किसी राष्ट्रपति की तस्वीर को डिजाइन में शामिल करना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। फ्लोरिडा एयरपोर्ट का नाभ भी ट्रम्प के नाम पर इससे पहले, अमेरिका के फ्लोरिडा में पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर भी राष्ट्रपति ट्रम्प के नाम पर रखने का प्रस्ताव पेश किया गया था। जिसके बाद फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डीसैंटिस ने बिल पर हस्ताक्षर कर पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर ‘प्रेसिडेंट डोनाल्ड जे. ट्रम्प इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ करने की मंजूरी भी दे दी है। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) की मंजूरी मिलने पर 1 जुलाई से यह नाम लागू हो सकता है। ऐसा होने पर ट्रम्प पहले ऐसे राष्ट्रपति होंगे, जिनके कार्यकाल के दौरान ही उनके नाम पर एयरपोर्ट रखा जाएगा। ट्रम्प के नाम पर बढ़ रहे संस्थान एयरपोर्ट के अलावा भी ट्रम्प के नाम पर कई सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों के नाम रखे जा रहे हैं। जैसे कि- ट्रम्प के सिग्नेचर वाली नोट भी आएगी इसके अलावा अमेरिकी करेंसी पर भी इस साल से ट्रम्प के सिग्नेचर आने की बात कही गई है। अमेरिकी इतिहास में यह पहली बार होगा, जब किसी मौजूदा राष्ट्रपति के हस्ताक्षर नोटों पर छापे जाएंगे। नए नोटों के छपने से 1861 से चली आ रही 165 साल पुरानी परंपरा भी टूटे जाएगी। अब तक नोटों पर सिर्फ वित्त मंत्री और अमेरिका के ट्रेजरर के साइन होते थे। इनमें से कोषाध्यक्ष के हस्ताक्षर को हटा दिया जाएगा। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, ट्रम्प और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के हस्ताक्षर वाले पहले 100 डॉलर के नोट जून में छापे जाएंगे और बाकी नोट आने वाले महीनों में छापे जाएंगे। —————————- ये खबर भी पढ़ें… ईरान को परमाणु अप्रसार संधि का उपाध्यक्ष बनाने पर विवाद:अमेरिकी अधिकारी बोले- यह संगठन का अपमान, ईरान बोला- अमेरिका हमें न सिखाए ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। इसी बीच एक दिलचस्प खबर सामने आई है। ईरान को परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का उपाध्यक्ष चुना गया है। यह फैसला न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में चल रहे NPT के 11वें रिव्यू कॉन्फ्रेंस में लिया गया। यह कॉन्फ्रेंस 5 साल में एक बार होती है। सम्मेलन के अध्यक्ष और वियतनाम के राजदूत दो हुंग वियेत ने बताया कि ईरान का नाम ‘गुटनिरपेक्ष देशों के ग्रुप’ की तरफ से आया था। इस ग्रुप में भारत समेत 100 से भी ज्यादा देश हैं। पूरी खबर पढ़ें…
Punjab Chandigarh top news; AAP meeting, CM Mann | Australia punjabi deport

. पंजाब में आज की सबसे बड़ी खबर AAP में टूट के बाद MLA-ऑब्जर्वरों की मीटिंग से जुड़ी रही। बैठक के प्रदेश प्रभारी मनीष सिसोदिया प्रेस कॉन्फ्रेंस कैंसिल कर निकल गए। जाने से पहले उन्होंने कहा- भाजपा गद्दारों से भरी पार्टी है। दिनभर की 10 चुनिंदा बड़ी खबरों को VIDEO में देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन 10 बड़ी खबरों को विस्तार से यहां पढ़ भी सकते हैं। तो आइए जानते हैं, पंजाब-चंडीगढ़ में दिनभर में क्या कुछ खास रहा… 1. पंजाब AAP में टूट के बाद MLA-ऑब्जर्वरों की मीटिंग, सिसोदिया प्रेस कॉन्फ्रेंस कैंसिल कर निकले पंजाब के 6 राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) में हलचल तेज है। विधायकों की टूट बचाने के लिए प्रदेश प्रभारी मनीष सिसोदिया ने आज जालंधर में मीटिंग बुलाई। यह मीटिंग करीब साढ़े 3 घंटे चली। इसके बाद वह प्रेस कॉन्फ्रेंस कैंसिल कर निकल गए। जाने से पहले सिसोदिया ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा गद्दारों से भरी पार्टी है। उसमें सभी लोग गंदे हैं। लोगों को उनकी बातों में नहीं आना चाहिए। यह मीटिंग 1000 ब्लॉक ऑब्जर्वरों के साथ बताई गई, लेकिन इसमें विधायक भी पहुंचे। मीटिंग के एजेंडे को लेकर सभी MLA कंफ्यूज दिखे। कोई रेगुलर मीटिंग, कोई स्पेशल सेशन को लेकर तो कोई इसे निगम चुनाव को लेकर मीटिंग बताता दिखा। पहले मीटिंग की जगह जालंधर में CM निवास रखी गई थी, लेकिन बाद में इसे बदलकर शाहपुर सिटी कैंपस कर दिया गया। मीटिंग से CM भगवंत मान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। मीटिंग से पहले विधायकों-ऑब्जर्वर्स को गेम्स खिलाए गए। विधायक रस्साकसी करते नजर आए। गेम के जरिए पार्टी ने मेलजोल बढ़ाने और इसी के बहाने शक्ति प्रदर्शन किया।(पढ़ें पूरी खबर) 2. ऑस्ट्रेलिया से 15 भारतीय डिपोर्ट, इनमें 11 पंजाबी ऑस्ट्रेलिया से 15 भारतीयों को डिपोर्ट किया जा रहा है। सीएम भगवंत मान ने कहा कि इनमें 11 पंजाबी हैं, जिसमें एक महिला भी शामिल है। वह रात में दिल्ली पहुंचेंगे। उन्होंने बताया कि वह उन्हें दिल्ली से रिसीव करने जा रहे हैं। सीएम ने कहा कि अब तक जो सूची मिली है, उसमें केवल होम स्टेट पंजाब लिखा हुआ है। कुल 15 लोगों की सूची है, जिनमें 2 तेलंगाना, 1 हरियाणा और 1 उत्तराखंड के रहने वाले हैं। सीएम ने कहा जब से ट्रंप जहाज भेजा अमेरिका से डिपोर्टेशन शुरू हुआ था। उस समय से हम अपनी तरफ से उनके पुनर्वास में लगे हुए हैं। सीएम ने कहा जो लोग आ रहे हैं, इन्होंने डिपोर्टेशन का दुख सहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में हम इनसे सारी जानकारी हासिल करेंगे। कैसे उनके पेपर लगे, किन लोगों ने इन्हे विदेश भेजा है। इन सब चीजों की जांच की जाएगी। विदेश मंत्रालय से संपर्क करना पड़ा तो करेंगे। लेकिन इस मामले की तह तक जाएंगे। (पढ़ें पूरी खबर ) 3. विस्फोटक लगाते वक्त आई कोयले से भरी ट्रेन, ब्लास्ट की चपेट में आती तो 20KM इलाके का दम घुटता पंजाब में पटियाला के अंबाला-अमृतसर रेल फ्रेट कॉरिडोर के पास डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) को उड़ाने की कोशिश की गई। ब्लास्ट के 32 मिनट पहले एक ट्रेन गुजरी, इसके कुछ देर बाद कोयले से भरी हुई दूसरी ट्रेन आए आई। केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू ने कहा कि इसी वक्त आरोपी वहां पर विस्फोटक लगा रहा था। लेकिन ट्रेन की लाइट पड़ते ही वह पीछे हटा और ट्रेन की चपेट में आया गया। जिससे उसकी मौत हो गई। हालांकि शव करीब 200 मीटर दूर मिलने से शक है कि इसमें और लोग भी शामिल हैं। बिट्टू ने कहा क पंजाब का माहौल बिगाड़ने के लिए 200 से अधिक ग्रुप लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि करिंदों को तो पकड़ लिया जाता है, लेकिन इनके सरगना विदेशों में बैठे हैं। जानकरी के अनुसार, अगर ट्रेन के आने के वक्त ब्लास्ट होता तो अंबाला से लेकर राजपुरा तक के लोग मुसीबत में आ सकते थे। क्योंकि ट्रेन कोयले से भरी हुई थी। अगर यह चपेट में आती तो 20 किमी इलाके में दम घुटने के जैसे हालात बन सकते थे। पुलिस ने जांच में पाया कि घटना के पीछे पड़ोसी देश पाकिस्तान का हाथ है। हादसे में जगरूप सिंह नाम के युवक की जान गई, पुलिस उसके पास से मिले फोन के जरिए उसके घर पहुंची। (पढ़ें पूरी खबर) 4. कारोबारी रोते हुआ बोला- सिर में गोली मारो, गैंगस्टर की थ्रेट कॉल से परेशान लुधियाना में कारोबारी ने रोते हुए वीडियो जारी किया है। वह गैंगस्टर के थ्रेट कॉल का जिक्र करते हुए परेशान दिखता है। वो वीडियो में कहता है- मेरे सिर में गोली मार दो पर मेरे परिवार को कुछ मत कहना। कारोबारी कवर किंग ने कहा कि उनको और उनकी बहन को लगातार धमकी भरी कॉल आ रही है। कॉल कर कहा जा रहा है कि अगर एक लाख रुपए हर महीने नहीं दिए तो भाई और तेरे सिर में गोली मारेंगे। यही नहीं व्यापारी को वॉट्सएप व सोशल मीडिया पर उसकी पत्नी व परिवार के लोगों के फोटो लगाकर बैकग्राउंड में अश्लील गाने चलाए जा रहे हैं। उसका कहना है कि उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। सुनील धीर ने आगे कहा कि वो बहुत परेशान है। मानसिक पीड़ा से गुजर रहे हैं। अगर उसे कुछ होता है तो इसका जिम्मेदार प्रशासन व पुलिस नहीं है, बल्कि वो है जो मुझे व मेरे परिवार को धमकियां दे रहा है। मैंने कोई गुनाह नहीं किया है, मैंने बस अपना बिजनेस शुरू किया है। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस एक्शन में आ गई। एसीपी सिविल लाइन सरबजीत सिंह चीमा ने कहा कि मामले की शिकायत मिली है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। (पढ़ें पूरी खबर) 5. कारोबारी से मांगी ₹2 करोड़ रंगदारी, गैंगस्टर रोहित गोदारा के नाम से धमकाया चंडीगढ़ में एक कारोबारी से गैंगस्टर रोहित गोदारा के नाम पर फोन कर 2 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी गई। इस मामले में 28 अप्रैल पुलिस स्टेशन 39 में केस दर्ज किया गया। कारोबारी ने बताया कि वह प्रिज्म सर्विसेज का मालिक है और वह खरड़ के न्यू सनी एन्क्लेव में रहता है। 22 अप्रैल की शाम वह सेक्टर-40 चंडीगढ़ में मौजूद था, तभी उसे अज्ञात नंबर
गर्मियों में टमाटर भंडारण युक्तियाँ: गर्मी में गल जाते हैं टमाटर? बिना फ़िरोज़ के असली तक ताज़ा रखने के ये 5 देसी जुगाड़ काम

29 अप्रैल 2026 को 17:51 IST पर अद्यतन किया गया बिना फ्रिज के टमाटर को ताज़ा कैसे रखें: गर्मी के मौसम में टमाटर जल्दी खराब हो जाते हैं। फर्म में रहने से कभी-कभी उनका स्वाद भी बदल जाता है। ऐसे में अगर आप बिना फरी के टमाटरों को कई दिनों तक ताजा रखना चाहते हैं, तो ये आसान देसी तरीके आपके बहुत काम आएंगे। अनुसरण करना : टमाटरों को प्रमाणित करके जानें: टमाटर को हमेशा सुपरमार्केट वाली साइड नीचे करके रखें। इससे हवा अंदर नहीं जाती और टमाटर जल्दी खराब नहीं होते। छवि: फ्रीपिक धूप और गर्मी से दूर: टमाटरों को भी कभी-कभी धूप में नहीं रखा जाता। उन्हें किसी भी कोना या अलमारी की तरह, अनावश्यक रसोई और जगह-जगह पर रखा जाता है। इससे वे ज्यादातर समय तक ताज़ा रहते हैं। छवि: फ्रीपिक अखबार या पेपर में लपेटकर रखा हुआ: टमाटरों को अखबार या किसी कागज़ में लपेटकर रखें। इस तरह के संस्थागत नियंत्रण रहते हैं और टमाटर जल्दी गलते नहीं हैं। छवि: फ्रीपिक मिट्टी के बर्तनों का उपयोग किया जाता है: मिट्टी का बर्तन गर्मी में ठंडा रहता है। टमाटरों को मटके में हाथ से ऊपर से ढक दें। यह देसी नुस्खा टमाटर कई दिनों तक ताज़ा बना रहता है। छवि: एआई कच्चे और छोटे टमाटर अलग-अलग स्थान: कभी-कभी कच्चे और टूटे हुए टमाटरों को भी साथ में न रखें। टमाटर टमाटर जल्दी खराब हो जाते हैं, जिससे बाकी टमाटर भी जल्दी खराब हो जाते हैं। छवि: फ्रीपिक अगर टमाटर प्राकृतिक हो गए हैं, तो उन्हें तुरंत इस्तेमाल कर लें। जैसे चटनी, चटनी या सब्जी में। इससे बुरा होने से पहले ही उनका सही उपयोग हो जाएगा। छवि: फ्रीपिक इन आसान देसी सिद्धांतों को अपनाकर आप बिना पिज्जा के भी टमाटरों को लंबे समय तक ताजा रख सकते हैं और रोज-रोज खराब होने की चिंता से बच सकते हैं। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित : समृद्धि ब्रेजा प्रकाशित 29 अप्रैल 2026 17:51 IST पर
Damoh MP Women Break Pots at SDM Office Amid Water Crisis

दमोह जिले के पथरिया नगर परिषद के वार्ड 15 की दर्जनों महिलाओं ने बुधवार दोपहर जलसंकट से परेशान होकर एसडीएम कार्यालय में खाली मटके फोड़े। उन्होंने तत्काल समस्या के समाधान की मांग की। . महिलाओं ने बताया कि पिछले 20 दिनों से उनके वार्ड में पानी नहीं आ रहा है। वे पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रही हैं। इससे पहले जो पानी आता था, वह इतना गंदा होता था कि उससे नहाना भी मुश्किल था। परेशान हो रहे वार्डवासी वार्ड 15 की निवासी नीलम ने बताया कि 20 दिनों से पानी नहीं मिला है। नगर परिषद में शिकायत करने पर उन्हें बताया गया कि मशीन खराब है। नीलम के अनुसार, पहले 8 दिन में एक बार पानी आता था, जो पीने लायक तो दूर, नहाने लायक भी नहीं था। अफसरों ने नहीं दिया ध्यान महिलाओं ने अधिकारियों को कई बार अवगत कराया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। अन्य महिलाओं ने भी बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ जलसंकट की समस्या और गंभीर होती जा रही है। नगर परिषद द्वारा समाधान न किए जाने पर वे एसडीएम कार्यालय पहुंचीं और अपनी समस्या को लेकर एक ज्ञापन भी सौंपा। महिलाओं के प्रदर्शन की सूचना मिलने पर तहसीलदार मौके पर पहुंचे। उन्होंने महिलाओं की बात सुनी और जल्द ही समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया। तहसीलदार ने दिया आश्वासन महिलाओं की समस्या सुनने के लिए तहसीलदार बिंद्रेश पांडे पहुंचे। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही उनकी समस्या का निराकरण कर दिया जाएगा। तहसीलदार ने बताया कि वार्ड 15 में पानी की सप्लाई बंद है। उन्होंने संबंध में नगर परिषद सीएमओ पीयूष अग्रवाल से जानकारी ली उन्हें बताया कि मोटर खराब है। उन्होंने जल्द ही मशीन में सुधार के निर्देश दिए हैं। साथ ही जो दूषित पानी सप्लाई हो रहा है उसे भी जल्द ही दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
Health tips : बिना जिम जाए रहना चाहते हैं फिट? घर ले आएं ये हरी चीज, मोहल्ले वाले पूछेंगे सीक्रेट

Last Updated:April 29, 2026, 17:38 IST Bottle gourd juice benefits : लौकी का जूस सस्ता भी है और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद भी. लोकल 18 से रामपुर के आयुष चिकित्सक डॉ. मोहम्मद इकबाल कहते हैं कि इसका सबसे बड़ा काम पेट को साफ रखने में मदद करना है. जिनको कब्ज, गैस या पेट भारी रहने की समस्या रहती है, उनके लिए यह जूस रामबाण है. वजन कम करने वालों के लिए भी लौकी का जूस वरदान है. इसमें कैलोरी बहुत कम होती है. डॉ. इकबाल के मुताबिक, गर्मी के मौसम में तो इसका फायदा और भी बढ़ जाता है. रामपुर. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग फिट रहने के लिए तरह-तरह के महंगे प्रोडक्ट्स और डाइट प्लान अपना रहे हैं, लेकिन हमारे घर की रसोई में ही एक ऐसा आसान नुस्खा मौजूद है जिसे दादी-नानी सालों से अपनाती आई हैं. हम बात कर रहे हैं लौकी के जूस की, जो सस्ता भी है और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद भी. रामपुर के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद इकबाल लोकल 18 से कहते हैं कि अगर लौकी का जूस सही तरीके से और सही मात्रा में पिया जाए तो यह शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाता है. सबसे बड़ा फायदा पेट को साफ रखने में मदद करना है. जिन लोगों को कब्ज, गैस या पेट भारी रहने की समस्या रहती है, उनके लिए यह जूस किसी घरेलू इलाज से कम नहीं है. बार-बार नहीं लगती भूख डॉ. इकबाल कहते हैं कि सुबह खाली पेट लौकी का जूस पीने से पाचन तंत्र बेहतर काम करता है. इससे खाना जल्दी और अच्छे से पचता है, जिससे शरीर हल्का महसूस होता है. यही वजह है कि कई लोग इसे अपनी रोज की दिनचर्या में शामिल कर रहे हैं. वजन कम करने वालों के लिए भी लौकी का जूस काफी काम का साबित हो रहा है. इसमें कैलोरी बहुत कम होती है और यह पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है. इससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग से बचाव होता है. धीरे-धीरे वजन कंट्रोल में आने लगता है. डॉ. इकबाल के मुताबिक, गर्मी के मौसम में तो इसका फायदा और भी बढ़ जाता है. लौकी में पानी की मात्रा ज्यादा होती है जिससे शरीर हाइड्रेट रहता है और लू या डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं से बचाव होता है. यह शरीर को अंदर से ठंडक देता है, जिससे थकान भी कम महसूस होती है. सिर्फ पेट और वजन ही नहीं, लौकी का जूस दिल की सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है. इसमें फैट बहुत कम होता है और यह ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद कर सकता है. नियमित सेवन से शरीर धीरे-धीरे स्वस्थ महसूस करता है. चमक उठेगी त्वचा त्वचा के लिए भी यह जूस किसी नेचुरल टॉनिक जैसा काम करता है. यह शरीर से गंदगी और टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे स्किन साफ और चमकदार नजर आती है. कई लोग इसे नेचुरल ग्लो पाने के लिए भी पीते हैं. हालांकि इसे पीते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. सबसे पहले लौकी का जूस हमेशा ताजा बनाकर ही पिएं. पुराना या रखा हुआ जूस नुकसान कर सकता है. दूसरी सबसे अहम बात है कि अगर लौकी कड़वी लगे तो उसका जूस बिल्कुल न पिएं क्योंकि यह शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है. अगर आप आसान और घरेलू तरीके से फिट रहना चाहते हैं तो लौकी का जूस अपनी डेली लाइफ का हिस्सा बनाएं. यह ऐसा नुस्खा है जो जेब पर भी भारी नहीं पड़ता. About the Author Priyanshu Gupta प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Rampur,Uttar Pradesh First Published : April 29, 2026, 17:38 IST








