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इंश्योरेंस विज्ञापन में कम दाम, पेमेंट के वक्त वसूली ज्यादा:82% यूजर्स ने झेला धोखा; पॉलिसीबाजार जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स शामिल

इंश्योरेंस विज्ञापन में कम दाम, पेमेंट के वक्त वसूली ज्यादा:82% यूजर्स ने झेला धोखा; पॉलिसीबाजार जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स शामिल

डिजिटल दौर में इंश्योरेंस खरीदना आसान तो हुआ है, लेकिन डार्क पैटर्न्स का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। लोकलसर्किल के ताजा सर्वे के मुताबिक, 10 में से 8 यूजर्स ‘सब्सक्रिप्शन ट्रैप’ जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। यानी पॉलिसी लेना आसान है, लेकिन उसे कैंसिल करना बहुत मुश्किल। सर्वे के मुताबिक पिछले 24 महीनों में ऐसे मामले 61% से बढ़कर 80% हो गए हैं। पर्सनल डिटेल्स का मिसयूज: 85% यूजर्स अनचाही कॉल्स से परेशान सर्वे में शामिल 85% यूजर्स ने बताया कि इंश्योरेंस कोटेशन लेते समय उनसे गैर-जरूरी जानकारी मांगी जाती है। बाद में इन डिटेल्स का इस्तेमाल अनचाही मार्केटिंग कॉल्स और मैसेज भेजने के लिए होता है। पिछले 2 साल में ऐसे मामले 57% से बढ़कर 85% हो गए हैं। करीब 90% यूजर्स ने बताया कि अगर वे सिर्फ कोटेशन लेते हैं या पॉलिसी कैंसिल करने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें बार-बार कॉल और मैसेज करके परेशान किया जाता है। इसे ‘नैगिंग’ कहा जाता है। पिछले 24 महीनों में यह 86% से बढ़कर 90% पर पहुंच गया है। दिखाते कुछ हैं, बेचते कुछ हैं: 82% यूजर्स ने झेला ‘बेट एंड स्विच’ सर्वे में शामिल 82% यूजर्स ने ‘बेट एंड स्विच’ का अनुभव किया। यानी विज्ञापन में कम प्रीमियम दिखाया गया लेकिन पेमेंट के वक्त दाम बढ़ गए। इसके अलावा, 65% यूजर्स ने ‘ड्रिप प्राइसिंग’ या छिपे हुए चार्जेस की बात कही, जो पॉलिसी रिन्यूअल या क्लेम के वक्त सामने आते हैं। अब इस मामले से जुड़े 4 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल 1: सर्वे में कौन-कौन सी कंपनियों के डार्क पैटर्न्स का जिक्र है? जवाब: इसमें पॉलिसीबाजार, एको, ICICI लोम्बार्ड, टाटा AIG, बजाज आलियांज और HDFC एर्गो जैसे बड़े नामों के प्लेटफॉर्म्स पर 2 से 4 तरह के डार्क पैटर्न्स पाए हैं। डार्क पैटर्न्स डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की वे चालाकियां हैं जिनसे ग्राहकों को ऐसे फैसले लेने के लिए उकसाया जाता है जो वे शायद नहीं लेना चाहते। सवाल 2: ग्राहक खुद को इन धोखाधड़ी वाले तरीकों से कैसे बचा सकते हैं? जवाब: एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ग्राहकों को ‘फ्री-लुक पीरियड’ का फायदा उठाना चाहिए। ‘फ्री-लुक पीरियड’ पॉलिसी मिलने के बाद मिलने वाला वह 30 दिनों का समय है, जिसमें आप नियम और शर्तें पसंद न आने पर बिना किसी बड़े नुकसान के इंश्योरेंस कैंसिल कर सकते हैं। इसके अलावा कोई भी पेमेंट करने से पहले पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स को ध्यान से पढ़ें। अगर बैंक लोन के बदले जबरन इंश्योरेंस दे रहा है, तो इसकी शिकायत करें। सवाल 3: क्या किसी बड़ी कंपनी पर इस मामले में कार्रवाई हुई है? जवाब: हां, पिछले साल IRDAI ने फ्लिपकार्ट इंटरनेट पर ₹1.06 करोड़ का जुर्माना लगाया था। कंपनी बिना पर्याप्त ट्रेनिंग वाले स्टाफ के जरिए इंश्योरेंस पॉलिसी बेच रही थी। ग्राहकों को सीधे इंश्योरर की जगह मिडिलमैन की साइट पर भेज रही थी, जो नियमों का उल्लंघन है। सवाल 4: भारतीय रिजर्व बैंक इस पर क्या कदम उठा रहा है? जवाब: RBI ने ‘रिस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट’ के तहत ड्राफ्ट निर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके एप्स डार्क पैटर्न्स से मुक्त हों। अगर मिस-सेलिंग पाई गई, तो बैंकों को ग्राहक का पूरा पैसा वापस करना होगा। मिस-सेलिंग अब बीएनएस के तहत अपराध वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वित्तीय उत्पादों की ‘मिस-सेलिंग’ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अब एक अपराध की श्रेणी में आता है। वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों को बीमा बेचने के बजाय अपने कोर बैंकिंग कामकाज और डिपॉजिट बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। रीडर टिप ऑनलाइन इंश्योरेंस खरीदते समय ‘प्री टिक्ड’ (पहले से टिक किए हुए) बॉक्स को अनचेक करना न भूलें, क्योंकि ये अक्सर एक्स्ट्रा प्रीमियम वाले ‘ऐड ऑन्स’ होते हैं।

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