Sunday, 11 Oct 2026 | 04:42 AM

Trending :

EXCLUSIVE

महाकवि कालिदास के चैत का मजा उठाइए,बस लोककवि घाघ का रखिए ध्यान, जान लें फिट रहने के लिए क्या न खाएं

authorimg

चैत्र या चैत को मधुमास भी कहते हैं. महानगरों को छोड़ दें तो हर और कुदरत मधु बरसाती सी दिखती है. नए पत्तों के परिधान पहने पेड़ शायद इसी आनंद का स्वागत करते हैं. जिन इलाकों में अभी भी महुए के पेड़ हैं वहां से गुजर भर जाइए, खुशबू भर से मस्ती चढ़ जाएगी. हां, मौसम के बदलवा के कारण इस दौर में खाने पीने में कुछ सावधानी रखनी पड़ती है. हालांकि लोक से जुड़े लोग जानते हैं कि इस मौमस में क्या खाना चाहिए क्या नहीं. इसके लिए उनके पास महाकवि घाघ की कहन या लोकोक्त्ति जुबान पर रहती है-

चैते गुड़ बैसाखे तेल, जेठे पन्थ असाढ़े बेल.
सावन साग न भादों दही, क्वार करेला न कातिक मही.
अगहन जीरा पूसे धना, माघे मिश्री फागुन चना.
ई बारह जो देय बचाय, वहि घर बैद कबौं न जाय.

घाघ भड्डरी को समझिए
मतलब ये है कि चैत के महीने में गुड़, बैसाख में तेल का सेवन नहीं करना चाहिए. तला भुना मत खाइए. जेठ में पंथ यानी यात्रा से बचना चाहिए. असाढ़ के महीने में बेल ( बेल पत्थर या श्रीफल), सावन में साग, भादों में दही, क्वार में करेले, कातिक में मट्ठा या छाछ नहीं पीनी चाहिए. अहगन के महीने में जीरा, पूस में धान, माघ में मिश्री, फागुन में चना नहीं खाना चाहिए. बारह ऋतुओं में इन बारह चीजों से जो बचेगा उसके घर बैद्य नहीं जाएगा. मतलब वो अस्वस्थ नहीं होगा. मौसम के मिजाज और खाने की चीजों की तासीर के मुताबिक घाघ भड्डरी ने ये दोहा रचा होगा. इसे कम से कम उत्तर प्रदेश और बिहार में लोग खूब कोट करते हैं और बहुत से लोग मानते भी हैं.

महाकवि कालिदास ने चैत्र के महीने पर बहुत रोचक श्लोक लिखें हैं. (AI फोटो)

चैत्र की खूबियों पर महाकवि कालिदास
खैर, वसंत के आनंद के लिए सेहतमंद रहना जरूरी है, इस लिहाज से इसका जिक्र मौजूं लगा. लेकिन चैत्र के रंगीन चरित्र को महाकवि कालिदास ने खूब समझा है. उन्होंने ऋतुसंहार में इसका जिक्र भी किया है. लिखते हैं ये मौसम आते ही –

अन्योन्यस्पर्शसुखस्पृहया परस्परं
प्राप्तौ युवानौ युवती च यूनि ।
अन्योन्यस्पर्शसुखस्पृहया परस्परं
प्राप्तौ युवानौ युवती च यूनि ॥

मतलब चैत के साथ वसंत में ऐसा मादक मौसम होता है कि युवक-युवतिया एक दूसरे को छूने के सुख की लालसा से परस्पर मिलते हैं. दोनो एक दूसरे के स्पर्श की तीव्र इच्छा से व्याकुल हैं.

सजी हुई मादक प्रकृति युवाओं में प्रेम की इच्छा को तेजी से हवा देती है. इसकी अनुभूति करनी हो तो किसी उस इलाके में चले जाइए जहां महुए के पेड़ हों. खास तौर से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में जहां हर साल 55 हजार टन महुआ पैदा होता है. महुए की उपज झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, गुजरात से लेकर महाराष्ट्र तक में अच्छा खासा होता है. हमने तो पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी कई इलाकों में महुए की पैदावार होते देखा है. इन इलाकों में भोर में आप निकल जाएं तो दिव्य मादक गंध हवा में फैली मिलेगी.

दिल्ली में भी दिखेगी चैत की चमक
पहले दिल्ली के भी कुछ इलाकों में महुए के पेड़ थे. वहां से गुजरते ही मन खुश हो उठता था. चैत्र ही वो महीना होता है जिसमें ज्यादातर महुए के फूल नीचे गिर कर बिखर जाते हैं. इनकी खुशबू के अलावा इससे खाने के लिए बहुत सारे पुष्टिकर व्यंजन बनाए जाते रहे हैं. साथ ही इसके सबसे बड़े हिस्से को शराब बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. फिर शराब अपनी मादकता फैलती है.

कहने का मतलब ये है कि अगर घाघ भड्डरी जैसे रचनाकारों की लोकोक्तियां मान कर सेहदमंद रहा जाय तो चैत्र महीने और वसंत का आनंद उठाया जा सकता है. अगर आप भी चैत को समझना चाहते हैं तो चैत का शुक्ल पक्ष शुरु हो गया है. कहीं ऐसी जगह पहुंच जाएं जहां कंकरीट के ऊंचे जंगल न हों. पेड़ पौधे लगे हों. आसमान साफ दिख रहा हो. वहां खड़े भर हो जाइए और चैत की मस्ती आपको मिल जाएगी.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
सुप्रीम कोर्ट जज बोले-ज्यूडिशियरी हद से ज्यादा सख्त हो रही:इसलिए लोग जेलों में सड़ रहे; यह विकसित भारत का आदर्श नहीं हो सकता

March 23, 2026/
1:34 pm

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि ज्यूडिशियरी के कुछ हिस्से ‘मोर लॉयल देन द किंग सिंड्रोम’...

इमली का शरबत रेसिपी गर्मियों में ठंडा पेय खट्टी मीठी इमली पेय ऊर्जा बूस्टर

May 24, 2026/
9:19 pm

24 मई 2026 को 21:19 IST पर अद्यतन किया गया इमली ड्रिंक रेसिपी: गर्मी के मौसम में ठंडा और स्वादिष्ट...

मेरे बच्चों को हिंदू धर्म के खिलाफ भड़काया जा रहा:सेलिना जेटली बोलीं- उन्हें कहीं छिपा दिया गया; पति पर घरेलू हिंसा और धोखे का आरोप

May 10, 2026/
8:30 pm

बॉलीवुड एक्ट्रेस सेलिना जेटली ने मदर्स डे के मौके पर सेलिना ने एक बेहद इमोशनल नोट शेयर किया है। उन्होंने...

ताइवान की सड़कों पर भारत विरोधी पोस्टर लगे:चुनाव लड़ रहा उम्मीदवार बोला- भारतीय मजदूरों को भगाओ, विपक्षी सांसद बोले- वे अपराधी होते हैं

May 19, 2026/
6:19 pm

ताइवान में स्थानीय चुनाव के दौरान एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भारत विरोधी पोस्टर लगाया है। इसमें पगड़ी पहने एक सिख...

Axar Patel; DC vs GT IPL 2026 LIVE Score Update

April 8, 2026/
5:10 am

स्पोर्ट्स डेस्क21 मिनट पहले कॉपी लिंक IPL 2026 के 14वें मैच में आज दिल्ली कैपिटल्स का सामना गुजरात टाइटंस से...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

महाकवि कालिदास के चैत का मजा उठाइए,बस लोककवि घाघ का रखिए ध्यान, जान लें फिट रहने के लिए क्या न खाएं

authorimg

चैत्र या चैत को मधुमास भी कहते हैं. महानगरों को छोड़ दें तो हर और कुदरत मधु बरसाती सी दिखती है. नए पत्तों के परिधान पहने पेड़ शायद इसी आनंद का स्वागत करते हैं. जिन इलाकों में अभी भी महुए के पेड़ हैं वहां से गुजर भर जाइए, खुशबू भर से मस्ती चढ़ जाएगी. हां, मौसम के बदलवा के कारण इस दौर में खाने पीने में कुछ सावधानी रखनी पड़ती है. हालांकि लोक से जुड़े लोग जानते हैं कि इस मौमस में क्या खाना चाहिए क्या नहीं. इसके लिए उनके पास महाकवि घाघ की कहन या लोकोक्त्ति जुबान पर रहती है-

चैते गुड़ बैसाखे तेल, जेठे पन्थ असाढ़े बेल.
सावन साग न भादों दही, क्वार करेला न कातिक मही.
अगहन जीरा पूसे धना, माघे मिश्री फागुन चना.
ई बारह जो देय बचाय, वहि घर बैद कबौं न जाय.

घाघ भड्डरी को समझिए
मतलब ये है कि चैत के महीने में गुड़, बैसाख में तेल का सेवन नहीं करना चाहिए. तला भुना मत खाइए. जेठ में पंथ यानी यात्रा से बचना चाहिए. असाढ़ के महीने में बेल ( बेल पत्थर या श्रीफल), सावन में साग, भादों में दही, क्वार में करेले, कातिक में मट्ठा या छाछ नहीं पीनी चाहिए. अहगन के महीने में जीरा, पूस में धान, माघ में मिश्री, फागुन में चना नहीं खाना चाहिए. बारह ऋतुओं में इन बारह चीजों से जो बचेगा उसके घर बैद्य नहीं जाएगा. मतलब वो अस्वस्थ नहीं होगा. मौसम के मिजाज और खाने की चीजों की तासीर के मुताबिक घाघ भड्डरी ने ये दोहा रचा होगा. इसे कम से कम उत्तर प्रदेश और बिहार में लोग खूब कोट करते हैं और बहुत से लोग मानते भी हैं.

महाकवि कालिदास ने चैत्र के महीने पर बहुत रोचक श्लोक लिखें हैं. (AI फोटो)

चैत्र की खूबियों पर महाकवि कालिदास
खैर, वसंत के आनंद के लिए सेहतमंद रहना जरूरी है, इस लिहाज से इसका जिक्र मौजूं लगा. लेकिन चैत्र के रंगीन चरित्र को महाकवि कालिदास ने खूब समझा है. उन्होंने ऋतुसंहार में इसका जिक्र भी किया है. लिखते हैं ये मौसम आते ही –

अन्योन्यस्पर्शसुखस्पृहया परस्परं
प्राप्तौ युवानौ युवती च यूनि ।
अन्योन्यस्पर्शसुखस्पृहया परस्परं
प्राप्तौ युवानौ युवती च यूनि ॥

मतलब चैत के साथ वसंत में ऐसा मादक मौसम होता है कि युवक-युवतिया एक दूसरे को छूने के सुख की लालसा से परस्पर मिलते हैं. दोनो एक दूसरे के स्पर्श की तीव्र इच्छा से व्याकुल हैं.

सजी हुई मादक प्रकृति युवाओं में प्रेम की इच्छा को तेजी से हवा देती है. इसकी अनुभूति करनी हो तो किसी उस इलाके में चले जाइए जहां महुए के पेड़ हों. खास तौर से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में जहां हर साल 55 हजार टन महुआ पैदा होता है. महुए की उपज झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, गुजरात से लेकर महाराष्ट्र तक में अच्छा खासा होता है. हमने तो पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी कई इलाकों में महुए की पैदावार होते देखा है. इन इलाकों में भोर में आप निकल जाएं तो दिव्य मादक गंध हवा में फैली मिलेगी.

दिल्ली में भी दिखेगी चैत की चमक
पहले दिल्ली के भी कुछ इलाकों में महुए के पेड़ थे. वहां से गुजरते ही मन खुश हो उठता था. चैत्र ही वो महीना होता है जिसमें ज्यादातर महुए के फूल नीचे गिर कर बिखर जाते हैं. इनकी खुशबू के अलावा इससे खाने के लिए बहुत सारे पुष्टिकर व्यंजन बनाए जाते रहे हैं. साथ ही इसके सबसे बड़े हिस्से को शराब बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. फिर शराब अपनी मादकता फैलती है.

कहने का मतलब ये है कि अगर घाघ भड्डरी जैसे रचनाकारों की लोकोक्तियां मान कर सेहदमंद रहा जाय तो चैत्र महीने और वसंत का आनंद उठाया जा सकता है. अगर आप भी चैत को समझना चाहते हैं तो चैत का शुक्ल पक्ष शुरु हो गया है. कहीं ऐसी जगह पहुंच जाएं जहां कंकरीट के ऊंचे जंगल न हों. पेड़ पौधे लगे हों. आसमान साफ दिख रहा हो. वहां खड़े भर हो जाइए और चैत की मस्ती आपको मिल जाएगी.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.