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Marma Therapy : क्या होती है मर्म थेरेपी? तेजी से बना रही लोगों में पैठ, रावण संहिता में इसका जिक्र

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Marma Therapy Benefits : प्राकृतिक चिकित्सा में मर्म थेरेपी का अलग ही स्थान है. अगर सही तरीके से और विशेषज्ञ की देखरेख में मर्म थेरपी कराई जाए, तो यह शरीर के लिए वरदान से कम नहीं. मर्म थेरेपी शरीर के उन संवेदनशील बिंदुओं पर आधारित है, जहां प्राण ऊर्जा का संचार होता है. मर्म थेरेपी का जिक्र रावण संहिता तक में है. लोकल 18 से जौनपुर की आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. कुसुम पांडेय बताती हैं कि इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं.

जौनपुर. आयुर्वेद की प्राचीन पद्धतियों में मर्म थेरेपी का विशेष स्थान रहा है और अब जौनपुर में भी यह तेजी से लोकप्रिय हो रही है. जौनपुर की आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. कुसुम पांडेय बताती हैं कि मर्म थेरेपी न सिर्फ पुरानी चिकित्सा पद्धति है, बल्कि इसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों, विशेषकर रावण संहिता में भी मिलता है. यह थेरेपी शरीर के विशेष बिंदुओं (मर्म स्थानों) पर काम करके कई प्रकार की बीमारियों को दूर करने में सहायक है. डॉ. कुसुम पांडेय ने बताया कि मर्म थेरेपी शरीर के उन संवेदनशील बिंदुओं पर आधारित होती है, जहां प्राण ऊर्जा का संचार होता है. इन बिंदुओं पर हल्का दबाव, स्पर्श या विशेष तकनीक के माध्यम से उपचार किया जाता है, जिससे शरीर की ऊर्जा संतुलित होती है और रोगों से राहत मिलती है. यह थेरेपी बिना किसी दवा के भी प्रभावी है.

सुरक्षित विकल्प

डॉ. कुसुम पांडेय के मुताबिक, आजकल लोग तनाव, थकान, सिरदर्द, कमर दर्द और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. ऐसे में मर्म थेरपी एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प के रूप में सामने आई है. यह शरीर की प्राकृतिक हीलिंग क्षमता को बढ़ाती है और लंबे समय तक लाभ देती है. खास बात यह है कि इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते.

डॉ. पांडेय बताती हैं कि मर्म थेरेपी का उल्लेख रावण संहिता में मिलने से इसकी प्राचीनता और महत्त्व का अंदाजा लगाया जा सकता है. प्राचीन काल में भी इसका उपयोग योद्धाओं के उपचार और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए किया जाता था. यह पद्धति आज भी उतनी ही प्रभावी है जितनी पहले थी. जौनपुर में अब धीरे-धीरे लोग आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा की ओर आकर्षित हो रहे हैं. मर्म थेरेपी भी इसी दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है. डॉ. कुसुम पांडेय कहती हैं कि लोगों को छोटी-छोटी बीमारियों के लिए तुरंत दवाइयों का सहारा लेने के बजाय प्राकृतिक और आयुर्वेदिक तरीकों को अपनाना चाहिए.

डॉ. कुसुम पांडेय के अनुसार, यदि सही तरीके से और विशेषज्ञ की देखरेख में मर्म थेरेपी कराई जाए, तो यह शरीर को पूरी तरह से संतुलित और स्वस्थ बनाए रखने में मददगार साबित हो सकती है. यही कारण है कि आज के आधुनिक समय में भी यह प्राचीन चिकित्सा पद्धति फिर से लोगों के बीच अपनी जगह बना रही है.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

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जौनपुर. आयुर्वेद की प्राचीन पद्धतियों में मर्म थेरेपी का विशेष स्थान रहा है और अब जौनपुर में भी यह तेजी से लोकप्रिय हो रही है. जौनपुर की आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. कुसुम पांडेय बताती हैं कि मर्म थेरेपी न सिर्फ पुरानी चिकित्सा पद्धति है, बल्कि इसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों, विशेषकर रावण संहिता में भी मिलता है. यह थेरेपी शरीर के विशेष बिंदुओं (मर्म स्थानों) पर काम करके कई प्रकार की बीमारियों को दूर करने में सहायक है. डॉ. कुसुम पांडेय ने बताया कि मर्म थेरेपी शरीर के उन संवेदनशील बिंदुओं पर आधारित होती है, जहां प्राण ऊर्जा का संचार होता है. इन बिंदुओं पर हल्का दबाव, स्पर्श या विशेष तकनीक के माध्यम से उपचार किया जाता है, जिससे शरीर की ऊर्जा संतुलित होती है और रोगों से राहत मिलती है. यह थेरेपी बिना किसी दवा के भी प्रभावी है.

सुरक्षित विकल्प

डॉ. कुसुम पांडेय के मुताबिक, आजकल लोग तनाव, थकान, सिरदर्द, कमर दर्द और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. ऐसे में मर्म थेरपी एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प के रूप में सामने आई है. यह शरीर की प्राकृतिक हीलिंग क्षमता को बढ़ाती है और लंबे समय तक लाभ देती है. खास बात यह है कि इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते.

डॉ. पांडेय बताती हैं कि मर्म थेरेपी का उल्लेख रावण संहिता में मिलने से इसकी प्राचीनता और महत्त्व का अंदाजा लगाया जा सकता है. प्राचीन काल में भी इसका उपयोग योद्धाओं के उपचार और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए किया जाता था. यह पद्धति आज भी उतनी ही प्रभावी है जितनी पहले थी. जौनपुर में अब धीरे-धीरे लोग आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा की ओर आकर्षित हो रहे हैं. मर्म थेरेपी भी इसी दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है. डॉ. कुसुम पांडेय कहती हैं कि लोगों को छोटी-छोटी बीमारियों के लिए तुरंत दवाइयों का सहारा लेने के बजाय प्राकृतिक और आयुर्वेदिक तरीकों को अपनाना चाहिए.

डॉ. कुसुम पांडेय के अनुसार, यदि सही तरीके से और विशेषज्ञ की देखरेख में मर्म थेरेपी कराई जाए, तो यह शरीर को पूरी तरह से संतुलित और स्वस्थ बनाए रखने में मददगार साबित हो सकती है. यही कारण है कि आज के आधुनिक समय में भी यह प्राचीन चिकित्सा पद्धति फिर से लोगों के बीच अपनी जगह बना रही है.

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